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केतन के बाद अब मोनू की मौ!त !प्रेमी संग मिल पति का मुंह दबाया और फिर…

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मुंबई के चर्चित केतन ने पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि जब रिश्तों में भरोसा टूटता है तो अपराध कितनी शक्ल ले सकता है। उस मामले में भी पत्नी प्रेम संबंध और एक सुनियोजित साजिश की कहानी सामने आई थी। अब उसी तरह एक और दिल दहला देने वाले मामला हरियाणा के रेवाड़ी से सामने आया है।

यहां भी एक नवविवाहित युवक की को पहले हादसा समझा गया। लेकिन मोबाइल फोन में छिपे डिजिटल सबूतों ने ऐसा राज खोला जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। जिस पत्नी ने पति की चिता के सामने खूब आंसू बहाए। अंतिम संस्कार से लेकर रस्म क्रिया और हर रीति रिवाज निभाए।

उसी पर अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की की साजिश रचने का आरोप लगाया। यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है बल्कि भरोसे, धोखे और तकनीक [संगीत] की मदद से उजागर हुई एक ऐसी साजिश की है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

साथ साहिल सुयाद और इस कि आखिर केतन अग्रवाल जैसा एक बार फिर से हुआ है और इस बार हरियाणा में यह घटना केवल एक की कहानीनहीं है बल्कि रिश्तों में विश्वास धोखे और एक सुनियोजित साजिश की ऐसी दास्तान है जिसने हरियाणा के रेवाड़ी जिले को झकझोर कर रख दिया है। मुंबई के चर्चित केतन की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि रेवाड़ी से सामने आए इस मामले ने लोगों को हैरान कर दिया है।

यहां एक 21 वर्षीय युवक की को पहले हादसा मान लिया गया। लेकिन मोबाइल फोन में जो डिजिटल सबूत थे उससे ऐसी सच्चाई सामने आ गई जिसने पूरे परिवार, पुलिस और स्थानीय लोगों को भी स्तब्ध कर दिया है।

रेवाड़ी के गांव जड़थल में रहने वाले 21 वर्षीय मोनू की मौत शुरू में हुए एक सामान्य दुर्घटना जैसी नजर आई। उसका गांव असल वास की नहर से बरामद हुआ था और पहली नजर में ऐसा लगा कि शायद वह नहर से गिर गया होगा या किसी हादसे का शिकार हुआ होगा।

उसके शरीर पर किसी प्रकार के गंभीर चोट के निशान भी नहीं थे। इसलिए शुरुआती जांच में पुलिस ने भी इसे दुर्घटना मानकर जांच आगे बढ़ाई। लेकिन मोनू के परिवार को शुरू से ही इस मौत पर संदेह था। उन्हें लगता था कि उनका बेटा किसी हादसे का नहीं बल्कि किसी बड़ी साजिश का शिकार हुआ है और ऐसा ही हुआ था। सबसे हैरान करने वाली बात यहां यह है कि जिस महिला पर बाद में की साजिश रचनेके आरोप लगे हैं, वही उस समय अपने पति की पर सबसे ज्यादा दुखी होने का अभिनय यानी नाटक कर रही थी। मोनू की पत्नी तन्नू जो घटना के समय अपने मायके कसौली में थी। पति का मिलने की खबर सुनते ही माता-पिता, भाई और अन्य रिश्तेदारों के साथ वो ससुराल पहुंची।

उसने अंतिम संस्कार से लेकर रस्म क्रिया तक हर सामाजिक और धार्मिक परंपरा पूरी निष्ठा के साथ निभाई। वो परिजनों के साथ बैठकर रोती रही, दुख प्रकट करती रही और ऐसा व्यवहार करती रहीकि किसी को उस पर जरा सा भी शक नहीं हुआ। परिवार के लोग भी उस समय यह समझ रहे थे कि वह भी इस हादसे से उतना ही टूट चुकी है जितने बाकी सदस्य।

लेकिन कहानी अगर यहीं खत्म हो जाती तो ट्विस्ट नहीं आता। अंतिम संस्कार और सभी रस्में पूरे होने के बाद परिवार के हाथ एक ऐसा सुराग लगा जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। 11 जून को पुलिस ने जांच के दौरान बरामद किया गया मोनू का मोबाइल फोन उसके परिजनों को सौंप दिया।

जब परिवार ने फोन देखा तो उन्हें सबसे पहले यह बात कट की कि मोबाइल का पूरा डाटा डिलीट किया जा चुका था। सामान्य परिस्थितियों में किसी मृत व्यक्ति के फोन का पूरा डाटा साफ होना स्वाभाविक नहीं माना जाता। यही बात परिवार के संदेह का सबसे बड़ा कारण भी बन गई। इसके बाद परिवार ने मोबाइल फोन को साइबर विशेषज्ञों के पास पहुंचाया।

आधुनिक डिजिटल तकनीक की मदद से डिलीट किया गया डाटा रिकवर किया गया और जैसे-जैसे मोबाइल के चैट हिस्ट्रीऔर कॉल रिकॉर्ड सामने आते गए वैसे-वैसे यह मामला एक साधारण हादसे से निकलकर हत्या की सुनियोजित साजिश में बदलता चला गया। रिकवर किए गए डाटा से पता चला कि जिस दिन मोनू लापता हुआ था, उसने अपनी पत्नी तनु को एकद नहीं बल्कि पूरे 49 बार फोन कॉल्स किए थे। हैरानी की बात यह थी कि इतने सारे कॉल केबावजूद दोनों के बीच केवल एक बार करीब 3 मिनट तक की बातचीत हुई।

इसके अलावा मोबाइल से डिलीट की गई चैट भी रिकवर हुई। जिसने परिवार के संदेह को और मजबूत कर दिया। परिवार ने बेहद संयम से काम लिया। उन्होंने तत्काल किसी पर आरोप लगाने के बजाय पहले बेटे की रस्म क्रिया पूरी होने का इंतजार किया।

उन्होंने किसी को भी यह आभास नहीं होने दिया कि उन्हें मोबाइल से कुछ ऐसा मिला है जिसने हत्या का शक पैदा कर दिया है। सभी धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम पूरे होने के बाद परिजनों ने मोबाइल से प्राप्त सभी डिजिटल साक्ष्य पुलिस को सौंप दिए और का मुकदमा दर्ज कर दोबारा जांच की मांग की।

अब परिवार का आरोप था कि यदि पुलिस शुरुआत से ही तकनीकी पहलुओं पर गंभीरता से जांच करती तो सच्चाई पहले ही सामनेआ जाती। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच का पूरा रुख बदल दिया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, चैटहिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच शुरू की गई। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस की नजर सबसे पहले मृतक की पत्नी तनु पर थी।

पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के मिलन के बाद जो कहानी सामने आई, उसने सभी को चौका दिया। जांच में पता चला तनु का गांव के ही एक युवक सोनू के साथ प्रेम संबंध था। दोनों काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और कथित तौर पर उन्होंने मोनू को अपने रास्ते से हटानेकी योजना बना ली थी।

इस साजिश में सोनू ने अपने दो दोस्तों हरि ओम और अमन को भी शामिल कर लिया। पुलिस के अनुसार पूरी योजना पहले से तैयार थी। तय योजना के तहत तनु ने अपने पति मोनू को फोन करके गांव कसौली बुलाया। मोनू को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिस व्यक्ति पर वो सबसे ज्यादा भरोसा करता है, वही उसे मौत के मुंह में भेज रही है। जैसे ही मोनू वहां पहुंचा, पहले से मौजूद हरि ओम और अमन ने उसे पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक दोनों ने उसका मुंह और नाक दबाकर उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने पूरे मामले को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। सबूत मिटाने के उद्देश्य से बेहोश या मृत अवस्था में मोनू को आसलवास नहर में फेंक दिया गया ताकि ऐसा लगे कि उसकी मौत पानीमें डूबने से हुई है।

उधर परिवार लगातार उसे तलाशता रहा। मोनू के पिता रतन लाल ने 8 जून को थाना कसौला में अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका बेटा रात करीब 10:00 बजे इलेक्ट्रिक स्कूटी लेकर दवाई लेने के लिए घर से निकला था। लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा।

पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर उसकी तलाश करनी शुरू कर दी। दो दिन बाद यानी 10 जून को गांव असलवास की नहर से एक युवक की मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने lको बाहर निकलवाया और उसकी पहचान मोनू के रूप में हुई। उसकी इलेक्ट्रिक स्कूटी भी नहर के पास ही बरामद हुई जिससे पहली नजर में यह पूरा मामला एक दुर्घटना जैसा ही लगा जैसा कि कोशिश भी की गई।

हालांकि परिवार लगातार की आशंका जताता रहा। उनके दबाव और बाद में मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने की धाराओं को जोड़ते हुए जांच को नए सिरे से शुरू किया। तकनीकी जांच के दौरान मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस तन्नु और सोनू के करीब हरि ओम तक पहुंच गई।

पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के बाद पुलिस ने तनु और हरि ओम को गिरफ्तार कर लिया। डीएसपी वावल सुरेंद्र शिवराण ने प्रेस वार्ता में बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि हत्या की पूरी योजना पहले से बनाई गई थी और इसमें कई लोग शामिल थे। पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जहां से उन्हें 2 दिन की पुलिस रिमांडपर भेज दिया गया।

रिमांड के दौरान पुलिस मुख्य आरोपी सोनू और उसके साथी अमन की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा क्या हत्या की योजना लंबे समय से बनाई जा रही थी। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

मोबाइल डाटा, लोकेशन हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड्स, डिजिटल कम्युनिकेशंस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। ताकि अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश [संगीत] की जा सके। हालांकि इस मामले में अभी तक एक महत्वपूर्ण सवाल का जवाब नहीं मिला है। पुलिस ने बताया कि मोनू की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट करने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोररी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स आने के बाद स्पष्ट होगा कि मोनू की दम घुटने से हुई थी या फिर नहर में फेंके जाने के बाद पानी में डूबने से उसकी जान गई। डीएसपी सुरेंद्र का कहना है कि रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कारवाई की जाएगी।

साथ ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम का विस्तृत खुलासा भी किया जाएगा। अब यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि आधुनिक दौर में अपराधियों के लिए डिजिटल सबूतों से बच निकलना आसान नहीं रह गया है। जिस मोबाइल फोन का पूरा डाटा मिटा दिया गया उसी मोबाइल ने कथित साजिश की परतें खोल दी।

डिलीट की गई चैट, कॉल डिटेल्स, लोकेशन हिस्ट्री और तकनीकी विश्लेषण ने उस कहानी को उजागर किया जिसे दुर्घटना बनाकर हमेशा के लिए छिपाने की कोशिश की गई थी। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। मुख्य आरोपी सोनू और अमन की तलाश तेज कर दी गई है। जबकि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ चल रही है। इस मामले में अंतिम सच अब एफएसएल रिपोर्ट्स, तकनीकी साक्ष्य और आगे की जांच के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा। तब तक रेवाड़ी का यह हत्याकांड उन मामलों में शामिल हो गया है। जहां रिश्तों के विश्वास के पीछे छिपी कथित साजिश ने पूरे समाज को एक बार

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