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ज्योतिषी की बात क्यों बन गई चर्चा ? सिया-केतन की कुंडली का सच, जानकर चौंक जाएंगे।

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क्या 36 में से 27 गुणों का मिलना एक खुशहाल शादी की गारंटी देता है या फिर किस्मत के सारे हिसाब किताब भी इंसानी साजिश के आगे बेबस हो जाते हैं। क्या एक ऐसा रिश्ता जिसे ज्योतिष ने शुभ बताया उसकी मंजिल एक खौफनाक भी हो सकती है।

आज की कहानी है सिया और केतन की। एक ऐसा रिश्ता जिसकी शुरुआत परिवार की रजामंदी और कुंडली मिलान से हुई। सब कुछ बिल्कुल परफेक्ट लग [संगीत] रहा था। जनवरी की बात है जब पुणे के गोयल और अग्रवाल परिवार के बीच रिश्ते की बात चली। पारंपरिक तरीके से कुंडली मिलाई गई और परिवार के ज्योतिषी ने घोषणा की कि 36 में से 27 गुण मिल रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक केतन देवगढ़ का था और सिया मनुष्यगढ़ के।

ज्योतिषी ने इसे एक परफेक्ट मैच और सफल विवाह करार दिया। लेकिन जिसे सितारों ने आदर्श जोड़ बताया था वो कुछ ही महीनों में देश का सबसे चर्चित मर्डर केस बन गया। लोगगढ़ किले की ऊंचाइयों से गिरा केतन आज हमारे बीच नहीं है। और सवाल यह है कि क्या कुंडली के वो 27 गुण उस नफरत को नहीं देख पाए जो अंदर ही अंदर पनप रही थी। तभी तो फरवरी में पुणे के एक बड़े होटल में धूमधाम से सगाई हुई और नवंबर में शादी की तारीख तय की गई। शुरुआत में सब कुछ ठीक लग रहा था।

लेकिन पर्दे के पीछे कहानी कुछ और ही थी। पुलिस की जांच कहती है कि सगाई के बाद सिया की जिंदगी में उसका पुराना दोस्त चेतन चौधरी दोबारा वापस आया। धीरे-धीरे केतन को सिया के व्यवहार में बदलाव महसूस होने लगा। केतन ने अपने पिता विशाल अग्रवाल से कई बार अपनी चिंता भी जाहिर की थी।

वो अक्सर कहता था कि जब भी वह सिया को कॉल करता है उसका फोन बिजी मिलता है और बातोंबातों में सिया अक्सर चेतन चौधरी का नाम भी लेती है। केतन के मन में गहरा संदेह पैदा हो चुका था और उसने तो अपने पिता से यहां तक पूछा था कि क्या सिया के बैकग्राउंड की पूरी जानकारी ली गई है। लेकिन परिवार ने इसे शादी से पहले का सामान्य स्ट्रेस मानकर केतन को समझा दिया। वो नहीं जानते थे कि यह किसी बड़े तूफान के आने की आहट है।

लेकिन साजिश की पहली झलक शायद 14 जून को ही मिल गई थी। केतन और सिया लोढ़ किला घूमने गए थे और पुलिस के मुताबिक उस दिन भी एक संदिग्ध घटना हुई थी। [संगीत] जिसमें केतन खाई में गिरते-गिरते बचा था। क्या वो कत्ल का कोई ट्रायल था? इसके ठीक 4 दिन के बाद यानी 18 जून को वही हुआ जिसका डर था। केतन अग्रवाल की लोहगढ़ किले से गिरकर मौत हो गई। पुलिस का आरोप है कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि एक सुनियोजित थी जिसे सिया गोयल और चेतन चौधरी ने मिलकर अंजाम दिया।सिया के भाई साहिल ने पुलिस को बताया कि सिया कहती थी कि वह चेतन के संपर्क में नहीं है लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

अब दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस केस में सबसे बड़ी चुनौती यह है किघटना स्थल पर कोई आई विटनेस नहीं है। लोहगढ़ किले की उस ऊंचाई पर कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगा था। ऐसे में पुणे पुलिस की पूरी जांच अबपरिस्थितिजन्य साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट्स पर टिकी हुई है। सिया और चेतन की मोबाइल फोन की जांच भी हो रही है। डिलीट किए गए मैसेजेस को रिकवर करने की कोशिश जारी है और सीडीआर यानी कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स की हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। अब पुलिस या गोयल का लाइव डिटक्टर यानी पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की भी तैयारी में है।

ताकि उस सच को बाहर लाया जा सके जो सितारों की गणना में भी नहीं दिखा। क्या 27 गुण मिलने के बाद भी यह रिश्ता सिर्फ एक दिखावा था? केतन अग्रवाल केस आज हर उस परिवार के लिए गंभीर चेतावनी है जो सिर्फ कुंडली के कागजों पर आंख मूंदकर भरोसा करके जिंदगी के सबसे बड़े फैसले ले लेते है।

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