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कश्मीरी मुसलमान कैसे बना बाबा अमरनाथ का ‘पुजारी’?

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[संगीत] साथियों जरा सोचिए आप पहाड़ों में अपनी भेड़े चरा रहे हैं। ठंड से बचने के लिए एक साधु बाबा आपको एक थैला भरकर कोयला दे देते हैं। आप खुश होकर घर आते हैं कि चलो आज रात आग जलाने के काम आएगा। लेकिन जैसे ही आप घर आकर उस थैले को जमीन पर पटकते हैं तो वह काले कोयले के टुकड़े चमचमाते हुए सोने के सिक्कों में तब्दील हो जाते हैं।

सुनने में किसी परिकथा जैसा लगता है ना? लेकिन आज से करीब पौने 200 साल पहले कश्मीर के पहाड़ों में एक सीधे साधे चरवाहे के साथ यह हकीकत में हुआ था। और इसी जादुई घटना के सिलसिले में खोज हुई दुनिया के सबसे पवित्र और रहस्यमई धामों में से एक अमरनाथ धाम की। आज के इस वीडियो में हम अमरनाथ की खोज से जुड़े इसी दिलचस्प इतिहास और पौराणिक कहानियों के सफर पर चलने वाले हैं। कहानी काफी दिलचस्प होने वाली है। वीडियो को आखिर तक जरूर देखिएगा। नमस्कार मैं हूं आदित्य india.com में आपका स्वागत है।

बात है साल 1850 के आसपास की। कश्मीर के पहलगाम के ऊंचे और बर्फीले पहाड़ों में बूटा मलिक नाम का एक मुस्लिम चरवाहा अपनी धुन में भेड़ों को चरा रहा था। तभी उसकी मुलाकात एक रहस्यमई साधु से हुई। जिन्होंने उसे वह कोयले का थैला दिया था जब कोयला सोना बन गया तो बूटा मलिक लालची नहीं हुआ बल्कि वह घबरा गया वो उस साधु बाबा को ढूंढने और उनका शुक्रिया अदा करने के लिए वापस उसी पहाड़ी पर भागा लेकिन जब वो वहां पहुंचा तो साधु बाबा तो गायब हो चुके थे हां उनकी जगह पहाड़ों के बीच एक बहुत ही विशाल और रहस्यमई गुफा खुल चुकी थी। बूटाम मलिक कौतूहल में जैसे ही उस गुफा के अंदर गया उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। सामने बर्फ से बना एक बेहद खूबसूरत और चमत्कारी शिवलिंग था जो साक्षात बाबा बरफानी का रूप था। इस तरह आधुनिक इतिहास में अमरनाथ गुफा की दोबारा खोज हुई। साथियों, अब आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि क्या 1850 से पहले कोई अमरनाथ गुफा को नहीं जानता था? क्या यह गुफा हमेशा से छिपी हुई थी? जवाब है नहीं। दरअसल अमरनाथ गुफा का इतिहास सदियों पुराना है। लेकिन बीच में एक ऐसा लंबा वक्त आया जब कश्मीर के बदलते हालातों, भयंकर मौसम और रास्तों के बंद हो जाने की वजह से लोग इस पवित्र जगह को भूल गए थे। यह गुफा इतिहास के पन्नों और बर्फीले पहाड़ों में कहीं खो गई थी। जिसे बूटा मलिक ने अनजाने में दुनिया के सामने दोबारा ला खड़ा किया। अगर हम अपने पुराणों और धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो अमरनाथ गुफा की खोज सबसे पहले इंसानों ने नहीं बल्कि ऋषियों ने की थी। शास्त्रों के अनुसार इस गुफा के सबसे पहले खोजकर्ता महर्षि भृगु थे।

कथाओं के अनुसार एक समय ऐसा था जब पूरी कश्मीर घाटी पानी में डूब गई थी। तब महर्षि कश्यप ने अपनी तपस्या और सूझबूझ से नदियों के जरिए उस पानी को घाटी से बाहर निकाला। जब पानी सूखा और जमीन साफ हुई तो पहाड़ों पर घूमते हुए सबसे पहले महर्षि भृगु की नजर उस अलौकिक गुफा पर पड़ी। उन्होंने ही सबसे पहले यहां बाबा बरफानी के दर्शन किए और दुनिया को इस पवित्र स्थान के महत्व के बारे में बताया। यानी धार्मिक तौर पर शुरुआत महर्षि भृगु से हुई थी। साथियों अमरनाथ की खोज की यह कहानी सिर्फ एक धार्मिक स्थल की खोज नहीं है बल्कि यह हमारे देश के ताने-बाने और कश्मीरियत यानी आपसी भाईचारे की एक खूबसूरत मिसाल है।

जब बूटा मलिक ने इस गुफा को खोजा तो उन्होंने तुरंत गांव वालों और पंडितों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अमरनाथ की पवित्र यात्रा फिर से शुरू हुई। साथियों आपको जानकर हैरानी होगी कि इस खोज के बाद सालों साल तक अमरनाथ मंदिर में आने वाले चढ़ावे का 1/3 हिस्सा बूटा मलिक के परिवार को सम्मान के तौर पर दिया जाता रहा। आज भी जब लाखों लोग अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं तो स्थानीय मुस्लिम भाई ही उनकी पालकी उठाते हैं। घोड़ों का इंतजाम करते हैं और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखते हैं। महर्षि भेगु की प्राचीन खोज से लेकर बूटा मलिक के उस चमत्कारी सोने के थैले तक अमरनाथ गुफा की खोज की कहानी वाकई अद्भुत है। प्रकृति का यह चमत्कार आज भी हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर खींचता है। तो साथियों आपको कैसी लगी बाबा बरफानी की यह रोचक कहानी कमेंट करके हमें जरूर बताएं। बने रहिए india.com के साथ। शुक्रिया।

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