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भी!षण गर्मी में भी फ्रांस की राजधानी पेरिस में AC लगाने पर क्यों है बैन?

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बाहर तापमान 45° के करीब पहुंच चुका है। सड़कें पिघल रही हैं। अस्पताल हीट स्ट्रोक के मरीजों से भर रहे हैं। सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अब एयर कंडीशनर सिर्फ एक सुविधानहीं बल्कि कई लोगों के जीवन बचाने का साधन बन चुका है। लेकिन इस बीच यूरोप के कई हिस्सों में लोगों को अपने ही घर में एसी लगाने से रोका जा रहा है।

जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। भले ही आपने लाखों रुपए देकर अपना फ्लैट खरीदा हो, रजिस्ट्री आपके नाम हो, ईएमआई आप भर रहे हो, लेकिन अगर आपको अपने ही घर में एसी लगाना हो, तो उसके लिए पहले पड़ोसियों से इजाजत लेनी होगी, और अगर उन्होंने मना कर दिया तो आप चाहकर भी एसी नहीं लगा सकते। यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट इसी से शुरू होती है। रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस की राजधानी पेरिस में रहने वाले 32 वर्षीय लूका फुनारो एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं। वह व्हीलचेयर पर रहते हैं और सांस लेने के लिए का इस्तेमाल करते हैं।

हाल की भीषण हीट वेव में डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी कि उनके घर में एयर कंडीशनर होना बेहद जरूरी है। लेकिन समस्या यह है कि उनके पड़ोसियों ने एसी लगाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। कारण उनका कहना है कि एसी का आउटडोर यूनिट शोर करेगा।

यहीं से सवाल उठता है। आखिरकिसी के अपने घर में एसी लगाने का फैसला पड़ोसी कैसे कर सकते हैं? दरअसल फ्रांस के कई अपार्टमेंट सिर्फ निजी संपत्ति नहीं माने जाते। फ्लैट आपका हो सकता है लेकिन उसकी बाहरी दीवारें, बालकनी, छत और बिल्डिंग का बाहरी हिस्सा पूरी सोसाइटी की साझा संपत्ति यानी कॉमन प्रॉपर्टी माना जाता है।

इसका मतलब यह है कि अगर आप एसी लगाने के लिए बाहरी दीवार पर कंप्रेसर लगाना चाहते हैं। पाइप बाहर निकालना चाहते हैं या बिल्डिंग के बाहरी हिस्से में कोई बदलाव करना चाहते हैं तो कई मामलों में पहले पूरी बिल्डिंग की कोऑनर्स एसोसिएशन या बिल्डिंग मैनेजमेंट की मंजूरी लेनी पड़ सकती है। अगर मंजूरी नहीं मिली तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है। लूका फुनारो के साथ भी यही हुआ।

उनका परिवार पिछले 2 साल से अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। लेकिन सिर्फ पड़ोसियों की मंजूरी ही काफी नहीं होती। अगर आपकी इमारत सड़क से दिखाई देती है और वह किसी ऐतिहासिक इलाके में है तो स्थानीय प्रशासन भी दखल दे सकता है। पेरिस की पहचान उसकी 19वीं सदी की होसमान शैली की इमारतें हैं। सरकार चाहती है कि इन इमारतों का मूल स्वरूप बना रहे। अगर हर फ्लैट के बाहर एसी के कंप्रेसर लटक जाए तो पूरी सड़क का ऐतिहासिक रूप बदल सकता है। इसलिए कई मामलों में स्थानीय प्रशासन भी अनुमति देने से इंकार कर सकता है। यानी पड़ोसी मान जाए तब भी सरकार रोक सकती है। अब बात करते हैं शोर की।

फ्रांस में नॉइज़ पोल्यूशन को लेकर नियम काफी सख्त हैं। अगर एसी तय सीमा से ज्यादा आवाज करता है और उससे पड़ोसियों को परेशानी होती है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे मामलों में विशेषज्ञ वकीलों तक की मांग बढ़ गई है और केवल एसी को लेकर दर्जनों नहीं बल्कि 100 से ज्यादा कानूनी विवाद चल रहे हैं। यूरोप के दूसरे देशों में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। ब्रिटेन के कुछ इलाकों में अगर कोई नया एसी लगाना चाहता है तो पहले यह साबित करना पड़ सकता है कि सीलिंग फैन, नेचुरल वेंटिलेशन या बेहतर इंसुलेशन जैसे दूसरे विकल्प पर्याप्त नहीं है। यानी एसीपहला नहीं बल्कि आखिरी विकल्प माना जाता है। स्विट्जरलैंड के जेनेवा में भी एसी लगाने पर ऊर्जा खपत से जुड़े नियम लागू होते हैं। वहां भी यह देखा जाता है कि मशीन कितनी बिजली खर्च करेगी और क्या इससे ज्यादा ऊर्जा कुशल विकल्प उपलब्ध हैं।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर यूरोप में इतने सख्त नियम बने ही क्यों? क्योंकि दशकों तक वहां की सोच यह रही कि एयर कंडीशनर ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। कार्बन उत्सर्जन बढ़ाते हैं।

शहरों में गर्म हवा छोड़ते हैं और शोर पैदा करते हैं और ऐतिहासिक इमारतों की सुंदरता भी खराब करते हैं। यानी कानून उस समय बने थे जब यूरोप में गर्मियां अपेक्षाकृत हल्की होती थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। हीट वेव लगातार लंबी और खतरनाक होती जा रही है। अस्पतालों, स्कूलों और घरों में लोगों को भीषण गर्मी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। क्या एयर कंडीशनर अब सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है और अगर किसी व्यक्ति की जान पर बनाए तो क्या पड़ोसियों के शोर का अधिकार ज्यादा बड़ा है या उसके जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार।

लूका फिनारो का मामला अब सिर्फ एक एसी लगाने का विवाद नहीं रह गया है। यह उस बहस का प्रतीक बन गया है जिसमें एक तरफ पर्यावरण, विरासत संरक्षण और सामुदायिक नियम है तो दूसरी तरफ बढ़ती हीट वेव्स के बीच इंसानों का स्वास्थ्य और जीवन। यानी सवाल अब सिर्फ इतना नहीं है कि एसी लगेगा या नहीं। सवाल यह है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में क्या यूरोप के दशकों पुराने कानून भी बदलने पड़ेंगे? इस बारे में आप क्या सोचते हैं? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं। देश दुनिया की तमाम खबरों को देखने के लिए जुड़े रह लोकमत हिंदी के साथ। धन्यवाद।

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