बॉलीवुड की चकाचौंध के पीछे का काला सच बहुत कम ही लोग जान पाते हैं। आज हम बॉलीवुड की एक बेहतरीन कोरियोग्राफर सरोज खान की जिंदगी के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां देने वाले हैं जिसे सुनकर आप चौंक उठेंगे। क्यों 14 साल की इस डांसर को उसके ही गुरु ने प्रेग्नेंट करके मां बनाकर छोड़ दिया। बॉलीवुड की एक लेजेंड कोरियोग्राफर और फिल्म राइटर जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। वो कोरियोग्राफर जिन्हें बॉलीवुड की सबसे सक्सेसफुल डांस कोरियोग्राफर का खिताब मिला। जिन्हें हिंदी सिनेमा की पहली महिला कोरियोग्राफर होने का गौरव हासिल हुआ और जिन्होंने अपने 40 साल के फिल्मी करियर में करीब 3000 से भी ज्यादा गानों को कोरियोग्राफ किया। लेकिन क्या आप जानते हैं इन्होंने भयंकर गरीबी से जूझते हुए खुद को इस काबिल बनाया था। उन्होंने अपने परिवार का पेट पालने के लिए 3 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था। हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की जानीमानी कोरियोग्राफर सरोज खान की। जी हां, आप जानते हैं कि सरोज खान ने 12 साल की उम्र से ही बॉलीवुड कोरियोग्राफर बनने का एक सपना पूरा कर लिया था। सरोज खान वही कलाकार हैं जिन्हें पहली बार बेस्ट कोरियोग्राफर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था और जिनकी वजह से ही फिल्म फेयर ने इस कैटेगरी को शुरू किया था। इन्हें अपने भाई-बहन का पेट पालने के लिए कभी नर्स तो कभी रिसेप्शनिस्ट की नौकरी भी करनी पड़ी थी।
लेकिन उसके बावजूद भी कई बार भूखे पेट ही सोना पड़ता था। सरोज खान का जन्म 22 नवंबर 1948 को मुंबई के एक हिंदू परिवार में हुआ था। इनके माता-पिता ने इनका नाम निर्मला रखा। इनसे छोटी चार बहनें और एक भाई भी था। उनकी माता ने एक बार उन्हें परछाई के साथ हाथ हिलाते हुए देखा तो उन्हें डॉक्टर के पास लेकर चली गई। उन्होंने सोचा कि शायद इनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। लेकिन डॉक्टर ने जब चेकअप किया तो वह बिल्कुल ठीक निकली। डॉक्टर ने कहा कि इन्हें डांस का शौक है और इन्हें डांस सिखाइए। कहा जाता है कि इसके बाद उस डॉक्टर ने ही अपनी जान पहचान के जरिए निर्मला को फिल्मों में कुछ काम दिलवा दिया। पहली बार निर्मला को अभिनेत्री श्यामा की फिल्म में उनके बचपन का किरदार निभाने का मौका मिला और निर्मला ने कुछ फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया। बड़े होने के साथ-साथ उन्हें बाल कलाकार का काम मिलना बंद हो गया और परिवार को गुजारे की चिंता होने लगी क्योंकि उनकी कमाई उनके पैसे से ही घर चला करता था। ऐसे में उन्होंने 6 महीने नर्स का काम किया लेकिन वहां पैसे बहुत कम मिला करते थे। इसलिए उन्होंने टाइप राइटर का काम शुरू कर दिया। इसके बाद टेलीफोन रिसेप्शनिस्ट का भी काम किया। उन्होंने कई सारी नौकरियां बदली और समय-समय पर वह अलग-अलग काम करती रही। एक समय बाद उन्होंने मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर भी काम करना शुरू किया। लेकिन निर्मला को डांस का बहुत शौक था और ऐसे में वह लगातार डांस सीखती रहती थी। इसके बाद उन्होंने एक डांस ग्रुप ज्वाइन कर लिया। इस डांस ग्रुप के जरिए उन्हें कई सारे काम भी मिलने लगे थे। जब निर्मला केवल 10 साल की थी। तब 1958 में आई फिल्म हावड़ा ब्रिज में पहली बार एक ग्रुप डांसर के तौर पर उन्हें काम मिला था। इसी दौरान निर्मला के पिता की मौत हो गई और घर पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। स्थिति यह हो गई थी कि एक वक्त का खाना जुटाना भी भारी पड़ने लगा था। वह बहुत मेहनत करती थी। उनकी मां बच्चों को यह कहकर बहला दिया करती थी कि चूल्हे पर खाना चढ़ा दिया गया है।
जैसे बन जाएगा बुला लूंगी। तुम लोग अभी सो जाओ। निर्मला के घर के पास एक मलयाली भजिए वाला अपना ठेला लगाया करता था। कहते हैं कि जब उनसे इस बच्चे की भूख देखी नहीं जाती तो वह शाम को बची हुई भजिया उन्हें दे दिया करता था। साथ ही निर्मला शूटिंग के दौरान बहुत से लोगों से पैसे उधार मांगकर लाया करती थी। जिससे उनके परिवार के खाने का इंतजाम हो जाया करता था। इस दौर में साउथ इंडिया के मशहूर डांसर सोहन लाल और हीरालाल एक फिल्म के डांस मास्टर के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने निर्मला को देखा तो उनके डांस लर्निंग कैपेसिटी को देखकर दंग रह गए और तुरंत 11 साल की छोटी बच्ची को अपना असिस्टेंट बना लिया। असिस्टेंट बनने के दौरान निर्मला को पहली बार वैजंती माला के साथ डांस सिखाने का मौका मिला। वैजयंती माला को यकीन ही नहीं हुआ कि उन्हें एक 12 साल की बच्ची से डांस सीखना है। यहीं से निर्मला मशहूर हो गई और इसके बाद कई फिल्मों में असिस्टेंट के तौर पर उन्होंने काम किया। मास्टर सोहन लाल के साथ काम करते हुए निर्मला ने अपना नाम सरोज खान रख लिया। सरोज खान सोहन लाल के व्यक्तित्व से काफी ज्यादा प्रभावित हुई थी और सरोज खान उनसे प्यार कर बैठी। हालांकि सोहन लाल पहले से ही शादीशुदा थे। सोहन लाल को भी इस बात से कोई ऐतराज नहीं था और उन्होंने अचानक साल 1976 में शादी भी कर ली। उस समय सरोज सिर्फ 13 साल की थी और सोहन लाल 43 साल के थे। शादी के बाद 13 साल की बच्ची को पता चला कि सोहन लाल पहले से ही शादीशुदा हैं और उनके चार बच्चे भी हैं। लेकिन अब पछताने के अलावा उनके पास कोई चारा ही नहीं था क्योंकि उनकी कमाई का जरिया भी सोहन लाल ही थे। शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए। एक बेटा राजू, एक बेटी जिनकी मौत हो गई और एक और बेटी हुई कुकू। इस तरह 17 साल की उम्र तक सरोज खान तीन बच्चों की मां बन चुकी थी। लेकिन इसके 4 साल बाद ही सोहन लाल और सरोज का रिश्ता टूट गया। बताते हैं कि सोहन लाल ने सरोज के बच्चों को अपना सरनेम देने से मना कर दिया था। ऐसे में सरोज अपने बच्चों को लेकर पति से अलग हो गई। लेकिन प्रोफेशनली यह दोनों एक दूसरे के साथ काम करते रहे। क्योंकि यह सरोज की मजबूरी थी। इसी बीच बतौर इंडिपेंडेंट कोरियोग्राफर सरोज को गीता मेरा नाम फिल्म मिली और जब साधना ने डायरेक्शन में पहला कदम रखा तो उसमें कोरियोग्राफी करने के लिए सबसे पहले सरोज खान को ही बुलाया गया। लेकिन सरोज ने कहा कि उनके पास कोरियोग्राफर एसोसिएशन का कार्ड नहीं है।
ऐसे में साधना ने उनके लिए अपने पैसों से कार्ड बनवाया और अपनी फिल्म में कोरियोग्राफर के तौर पर काम दिया। यह फिल्म हिट रही और कोरियोग्राफी को भी काफी ज्यादा पसंद किया गया। पहले पति से अलग होने के बाद लगभग 10 साल के बाद सरोज की मुलाकात सरदार रोशन खान नाम के एक बिजनेसमैन से हुई। यह भी पहले से शादीशुदा थे। लेकिन उनकी पत्नी की मौत हो चुकी थी और उनकी दो बेटियां थी। उनके प्रपोज करने पर सरोज खान इस शर्त पर रोशन खान से शादी करने के लिए तैयार हुई कि सरोज खान के बच्चों को रोशन अपना नाम देंगे। रोशन खान मान गए और इस तरह से सरोज बन गई सरोज खान। रोशन से भी सरोज को एक बेटी हुई। लेकिन कुछ समय बाद रोशन खान की मौत हो गई। इसके बाद सरोज ने इंडिपेंडेंट तौर पर कई फिल्मों में कोरियोग्राफी की। इसके बाद सुभाष गही ने उन्हें हीरो फिल्म में कोरियोग्राफी करने का मौका दिया और यहां से उनका नाम और पहचान बनने की शुरुआत हो गई। इस फिल्म के बाद सरोज खान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा क्योंकि इसके बाद सरोज खान एक हिट कोरियोग्राफर बन चुकी थी। सरोज खान ने तेजाब फिल्म का एक दो तीन गाना कोरियोग्राफ किया जो कि माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था। तब तो सरोज खान का डंका बॉलीवुड में बजने लगा। उसके बाद तो जैसे हर कोई अपनी फिल्म में सरोज खान से ही गाने कोरियोग्राफ करवाना चाहता था। अगर फिल्म फेयर अवार्ड की बात की जाए तो 1989 में तेजाब के गाने 1 2 3 के लिए उन्हें अवार्ड मिला था। 1990 में चालबाज के लिए उन्हें अवार्ड मिला। और भी कई सारे बेस्ट कोरियोग्राफर के लिए उन्हें अवार्ड मिले थे। खलनायक फिल्म का गाना चोली के पीछे क्या है? हम दिल दे चुके सनम का निमुड़ा निमुड़ा देवदास के गाने डोलारे डोलारे यह तमाम गाने इन्होंने ही कोरियोग्राफ किए थे। आपको बता दें कि सरोज खान को आठ बार फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया था। फिल्म तेजाब के गाने 1 2 3 से ही कोरियोग्राफी कैटेगरी को अवार्ड में जोड़ा गया था। इससे पहले फिल्मफेयर के अवार्ड में कोरियोग्राफी का नाम नहीं आता था।
कोरियोग्राफी देखने के बाद इस कैटेगरी को शामिल किया गया और सरोज को ही पहला फिल्म फेयर कोरियोग्राफी का अवार्ड दिया गया। इसके अलावा भी उन्होंने बहुत सारे अवार्ड अपने नाम किए। तमिल फिल्म के गाने के लिए उन्हें नेशनल अवार्ड भी दिया गया। इसके पहले देवदास के डोला रे डोला गाने के लिए भी उन्हें नेशनल अवार्ड दिया जा चुका था और साल 2008 में जब वी मेट के गाने इश्क है के लिए भी उन्हें नेशनल अवार्ड दिया गया। सरोज खान ने छोटे पर्दे पर भी कई डांस शोज़ जज किए थे। इसके अलावा देश भर में सरोज खान की डांस एकेडमी भी चलती है। जहां पर बच्चों को डांस सिखाया जाता है। सरोज खान सिर्फ डांस मास्टर नहीं थी बल्कि लेखिका भी थी और उन्होंने कई फिल्मों की कहानी भी लिखी है। जिनमें से कुछ बड़ी हिट फिल्म रही। उनकी पहली लिखी हुई फिल्म थी वीरू दादा। दूसरी फिल्म थी खिलाड़ी जिसमें अक्षय कुमार और दीपक तिजोरी ने काम किया था जो सुपरहिट रही थी। इसके अलावा हम हैं बेमिसाल छोटे सरकार।
यह तमाम फिल्में इन्होंने लिखी थी। अपने 40 साल लंबे फिल्मी करियर में सरोज खान ने हर वह मुकाम हासिल किया जो एक कलाकार का सपना होता है। सरोज खान से डांस सीखने वाले अपने आप को बेहद ही खुशकिस्मत समझते थे। जिसमें से माधुरी दीक्षित और गोविंदा उनके बहुत बड़े फैन हैं। उनकी कोरियोग्राफी और डांस स्टेप को देखकर हर कोई थिरकने लगता था और यही वजह थी कि सरोज खान डांस मास्टर कहलाती हैं। बॉलीवुड में उनकी जगह कोई नहीं ले पाया। 3 जून साल 2020 को 71 साल की उम्र में सरोज खान ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दोस्तों, आपको सरोज खान का कौन सा गाना सबसे ज्यादा पसंद है, हमें कमेंट्स में जरूर बताइएगा। साथ ही साथ अगर यह जानकारी पसंद आई हो, तो इस वीडियो को लाइक कीजिएगा और अगर आप हमारे चैनल वारधी मंथन पर नए हैं, तो इसे सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना बिल्कुल मत भूलिएगा। वीडियो में अब तक बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।