संजय दत्त अपनी मां नरगिस के बेहद करीब थे। 1981 में जब नरगिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, तब संजय दत्त अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे थे।विभिन्न इंटरव्यू और संस्मरणों में संजय दत्त ने बताया है कि मां की बीमारी के दौरान वे खुद को बेहद असहाय महसूस करते थे। उन्होंने कहा था कि अपनी मां को दर्द में देखकर भी वे कुछ नहीं कर पा रहे थे। इसी बेबसी को व्यक्त करने के लिए उन्होंने अपने बारे में कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और खुद को “नपुंसक” जैसा महसूस करने की बात कही थी।
उनका आशय शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक असहायता से था।नरगिस अपने बेटे की पहली बड़ी फिल्म रोकी की रिलीज देखना चाहती थीं, लेकिन दुर्भाग्यवश फिल्म के रिलीज होने से कुछ दिन पहले ही उनका निधन हो गया।
यह घटना संजय दत्त के लिए बहुत बड़ा सदमा साबित हुई।बाद में संजय दत्त ने कई बार स्वीकार किया कि मां के जाने के बाद उनके जीवन में एक बड़ा खालीपन आ गया था।
नरगिस सिर्फ उनकी मां ही नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी मार्गदर्शक और प्रेरणा भी थीं। यही वजह है कि उनकी बीमारी और निधन की याद आज भी संजय दत्त को भावक कर देती है।