[संगीत] तुम्हें प्यार करके 90 के दशक का वो दौर जब प्यार सिर्फ महसूस नहीं होता था बल्कि हर गाने में जिया जाता था हर गली हर दिल बस एक ही नाम गूंजता था नदीम सैफी और श्रावण रथ तू मेरी हर हर खुशी है। [संगीत] [संगीत] लेकिन क्या आप जानते हैं इस जोड़ी का अंत एक मर्डर केस से जुड़ा था? इस वीडियो में हम जानेंगे उनकी पूरी [संगीत] कहानी संघर्ष से सफलता तक और वो सच जिसने सब कुछ बदल दिया 1900 54 दो अलग-अलग जिंदगियां एक ही सपने के साथ नदीम सैफी और श्रावण रथौड़ [संगीत] 1970 के दशक में जब यह दोनों मिले तो उन्हें नहीं पता था कि यह जोड़ी इतिहास लिखने वाली है। एक फंक्शन में श्रवण की मुलाकात नदीम से हुई थी। इसके बाद ही दोनों ने हाथ मिलाया और फिर नदीम श्रवण बैनर लॉन्च कर दिया। हालांकि इसके बाद 17 साल लगे एक सुपरहिट तक पहुंचने में
। साल 1977 में नदीम श्रवण की जोड़ी तब बनी थी जब दोनों मात्र 18 से 19 साल के थे और पहली फिल्म मिली थी दंगल जो भोजपुरी फिल्म थी। जिसका गाना आज भी लोग गाते नजर आते हैं। काशी हिले पटना हिले कोलकाता हिलेला तोहरी [नाक से की जाने वाली आवाज़] लचके जब कमरिया सारी दुनिया हिलेला काशी हिले पटना हिलेकला बॉलीवुड में 80 के दशक में तहलका मचाने वाली नदीम और श्रवण की जोड़ी कॉलेज में ही बन चुकी थी। इस फिल्म का गाना चला लेकिन नाम नहीं बना। फिर दोनों की मेहनत जारी रही। समय के साथ-साथ खुद को संभाला और 1980 का दशक दोनों के लिए संघर्ष का समय। कई फिल्में आई और गई। लेकिन सफलता अभी भी दूर रही। हर असफलता के बाद एक सवाल उठता था। क्या यह सपना पूरा होगा? क्या यह जोड़ी [संगीत] कामयाब हो पाएगी?
यह सवाल इन दोनों के दिमाग में तो था ही। फिल्म इंडस्ट्री भी यही सोच रही थी, लेकिन सफलता की सीढ़ी अभी भी दूर थी और संघर्ष जारी था। फिर आया। वो साल जिसने दोनों की जिंदगी बदल दी। साल था 1990 एक फिल्म जिसने सब कुछ बदल दिया और वो दिल थी आशिकी। [संगीत] उस जमाने में इस फिल्म की 20 मिलियन कॉपीज बिकी जिसने अनोखा एक रिकॉर्ड बनाया और इसके पीछे थे गुलशन कुमार। इसके बाद मानो भगवान मेहरबान हो गया। छप्पर फाड़ कर कामयाबी की बरसात करने लगा। धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना। हर फिल्म हर गाना सुपरहिट [संगीत] जिसमें साजन दीवाना, राजा हिंदुस्तानी धक्कन जैसी फिल्में शामिल थी। इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर तो झंडे गाड़े ही और साथ-साथ इनके गानों ने भी कई रिकॉर्ड तोड़े। सीसी जाना नहीं ये कहा है दिल से [गाना गाने की आवाज़] इनकी धुनों की खासियत थी सरलता गहराई और सच्चाई जिसे लोगों ने खूब पसंद किया हर कोई इन दोनों का फैन बन चुका था हर डायरेक्ट चाहता था इनके गाने फिल्म में हो तुम्हें अपना बनाने की कसम खाई है
जाने जिगर जानेमन मुझको है तेरी कसम कितनी बेचैन होके नदीम श्रवण [संगीत] की जोड़ी मतलब कामयाबी फिल्म के साथ-साथ गानों की 90 के दशक में उनका दबदबा इतना था कि उनका नाम सफलता की गारंटी बन चुका था। 1997 [संगीत] एक घटना ने सब कुछ बदल दिया। गुलशन कुमार की हत्या और आरोप लगा नादिम सैफी पर। 12 अगस्त 1997 को साउथ अंधेरी इलाके में स्थित जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर टी सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की मुंबई में हत्या कर दी गई थी। हत्या का संगीतकार नदीम सैफी पर भी लगा था। इस हत्याकांड के बाद नदीम लंदन भाग गए और फिर कभी लौट कर वापस नहीं आए। टिप्स कंपनी के मालिक रमेश तोरानी पर भी हत्या का आरोप लगा था। एक इंटरव्यू में नदीम ने गुलशन कुमार हत्याकांड पर कहा था, मैं गुलशन कुमार को पापाजी कहा करता था। वह मेरे भाई जैसे थे। मैं उन्हें आज भी दिल से प्यार करता हूं। जब मर्डर हुआ तो मैं लंदन में था। मुझे इस बात का डर था कि मुंबई में मुझे फंसा दिया जाएगा। इसलिए भारतीय कोर्ट का सामना नहीं किया। लंदन में नहीं था। मैं कभी वहां से जो अनफॉर्चूनेट जो हादसा हुआ मैं उस वक्त तो मैं लंदन में ही था। हिंदुस्तान मेरा मुल्क है। मैंने उससे मोहब्बत की है। मरते दम तक मेरी मोहब्बत जारी रहेगी। 2005 इस जोड़ी का अंत आंख है भरीभरी और [संगीत] तुम 2005 का वो वक्त था जब नदीम और श्रवण दोनों की राहें अलग हो गई।
फिल्म दोस्ती के बाद श्रवण और नदीम ने साथ काम करना बंद कर दिया था। नदीम और श्रवण ने मिलकर इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए। सारी रात तेरी याद मुझे आती रही दिल [संगीत] आशिकाना ये दिल आपके प्यार में ही हम सवरने लगे। ऐसे में श्रवण राठौड़ के निधन की खबर से पूरा बॉलीवुड मायूस हो गया था। कोरोना के संक्रमण की वजह से म्यूजिक कंपोजर की डेथ हो गई थी। लेकिन उनकी धुनें आज भी जिंदा है। 2019 में नदीम सैफी ने अपने दिल्ली ख्वाहिश का इज़हार किया कि वे बॉलीवुड के दबंग खान सलमान खान के साथ काम करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे सलमान खान के किसी पुराने गाने को रिमिक्स करना चाहते हैं। जिस एक बार फिर सलमान खान की परफॉर्म करें। हाल ही में नदीम श्रवण की जोड़ी के हिट गाने दिलबर को जॉन अब्राहम की फिल्म सत्यमेव जयते में इस गाने पर नोरा फतेही ने अपनी अदाओं के जलवे बिखेरे थे। इस गाने को पब्लिक ने खूब पसंद किया और पॉपुलर पार्टी सॉन्ग बन गया। [संगीत] कुमार शानू, अलका याग्निक और उदित नारायण की आवाज और नदीम श्रवण के संगीत ने 90 के दशक में लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। जिसे लोग आज भी सम्मान देते हैं और आज भी गाने गुनगुनाते हैं। अंत में यही कह सकते हैं। धुनों में बसाया था इन्होंने मोहब्बत का जहां हर दिल में आज भी गूंजता है उनका कारवा। लेकिन क्या आप जानते हैं नदीम श्रवान के बारे में कुछ ऐसे फैक्ट्स जो बहुत कम लोग जानते हैं। इनकी धुनें अक्सर पहले बनती थी
और लिरिक्स बाद में लिखे जाते थे। यह जोड़ी सिंपलीसिटी पर विश्वास करती थी। फूल मांगू ना बहार मांगू इसीलिए इनके गाने सीधे दिल में उतरते थे। था जिसके [संगीत][गाना गाने की आवाज़] लिए जिसके लिए 90 के दशक में इनके बिना कोई लव स्टोरी कंप्लीट नहीं मानी जाती थी। कितनी हसरत है हमें तुमसे दिल लगाने की। आखिर क्या था नदीम श्रावन के संगीत में जो आज भी लोगों को छूता है? पहला कारण मेलोडी दूसरा सिंपलीसिटी तीसरा इमोशन इनके गानों में ना ज्यादा बीट्स ना हैवी म्यूजिक। बस एक सीधी धुन जो दिल तक पहुंच जाती थी। आज का म्यूजिक और 90 के दशक का म्यूजिक। फर्क क्या है? आज बीट्स ज्यादा है लेकिन फील कम और 90 के दशक में कम इंस्ट्रूमेंट्स। लेकिन इमोशन ज्यादा नहीं होना था लेकिन हो गया हो गया है कुछ आज भी जब ये गाने बजते हैं लोग सिर्फ सुनते नहीं महसूस करते हैं तुमसे [संगीत] मिलने को दिल करता है वक्त बदला लोग बदले पर यह सच है ऐ दोस्त नदीम श्रावण का जादू कभी कम ना हुआ वहां अगर अगर आपको 90 के दशक का म्यूजिक पसंद है तो इस वीडियो को लाइक करें। कमेंट में बताएं आपका फेवरेट गाना कौन सा है और सब्सक्राइब करें फेसलेस साहू।