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बुजुर्ग दादी की आखरी इच्छा सुन हिला कलेक्टर, US हैरान।

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भारत राज्य 94 साल की इस बुजुर्ग महिला ने अपनी आखिरी इच्छा बताकर पूरे भारत को चौका दिया है। इस बुजुर्ग महिला ने कांपते हुए शब्दों से कलेक्टर के सामने ऐसी गुहार लगाई है जिसे सुनकर आप अंदर तक हिल जाएंगे। इनका बयान रोंगटे खड़े करने वाला है।

खुद कलेक्टर भी इस बुजुर्ग महिला की आखिरी इच्छा सुनकर हैरान हो गए। इस बुजुर्ग महिला ने कलेक्टर से क्या मांग की है वह हम आपको आगे सुनवाएंगे।

लेकिन उससे पहले हम आपसे एक सवाल पूछना चाहते हैं। अगर आपको अमेरिका की नागरिकता मिल जाए तो आप उसे छोड़ेंगे। आप में से ज्यादातर लोगों का जवाब ना होगा। भारत में आज भी ऐसे कई लोग हैं जिन्हें अपने देश में सिर्फ और सिर्फ बुराइयां दिखती हैं।

यह लोग भारत में बैठकर विदेशों की तारीफ करते नहीं थकते लेकिन 94 साल की इस बुजुर्ग महिला ने ऐसे भारतीय लोगों को आईना दिखा दिया है। इन्होंने कलेक्टर के सामने जाकर कहा है कि मैं भारतीय बनकर मरना चाहती हूं अमेरिकी नहीं। दरअसल आंध्र प्रदेश के बापटला में 94 साल की दादी महालक्ष्म्मा ने कलेक्टर के सामने अपनी आखिरी ख्वाहिश बताई है।

इन्होंने कहा है कि मैं अपने जीवन के अंतिम दिन अपनी मातृभूमि में भारतीय नागरिक के रूप में बिताना चाहती हूं। जब मेरी सांसे रुके तो मेरा अंतिम संस्कार मेरे पैतृक गांव की मिट्टी में होना चाहिए। मैंने अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी है। मुझे जल्दी भारतीय नागरिकता दिला दीजिए। इस बुजुर्ग महिला की आंखों में आंसू देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गई।

कलेक्टर भी महालक्ष्मा की बातें सुनकर भावुक हो गए। आपको बता दें कि दशकों पहले पति के निधन के बाद अकेलेपन से जूझ रही महालक्ष्म्मा अपने बेटे के साथ अमेरिका चली गई थी। जुलाई 2000 में उन्हें अमेरिका की नागरिकता भी मिल गई थी। सबको लगा कि महालक्ष्म्मा ने अमेरिका को ही अपना घर मान लिया है। लेकिन उनका दिल हमेशा भारत में ही धड़कता रहा। अमेरिका की आलीशान जिंदगी, चौड़ी सड़कें, सुख सुविधाएं भी उन्हें अपनापन नहीं दे सकी।

उन्होंने फैसला किया कि वह अपने गांव में ही जाकर रहेंगी। इसके बाद महालक्ष्मी ने बड़ा फैसला लिया, परिवार संग वो अमेरिका छोड़कर हमेशा के लिए अपने गांव लौट आई हैं। महालक्ष्मी को सुनने की समस्या है और वह अंग्रेजी नहीं समझती। इसीलिए भारतीय नागरिकता लेने के लिए जो शपथ लेनी होती है, वह उन्हें तेलुगु में पढ़कर सुनाई गई।

तेलुगु में यह शपथ महालक्षम्मा के बेटे ने सुनाई। महालक्षम्मा ने कहा कि मैं सिर्फ भारतीय बनकर मरना चाहती हूं। पढ़ने निबंध परचे भारत राजंगान की भारत राज्य की निजमना विश्वासम विश्वासम मर मर विश्व निबधता विश्वस्त अंगीकारानी कलगी भारत चलनु चल चलनु निबंगा पांचम मर मर भारत पौगा भारत ना बालनु पूर्ति चटम पूर्तिम वादानु वादा वादानो वादा वादाना वादाना वादा दें इन फ्रंट ऑफ

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