मैं बस मेरे भाई के जस्टिस के लिए बोलना चाहूंगा कि वो तो पकड़ा गया है या फिर उसको दो या फिर करो। मेरे भाई के को या तो दो या फिर पुलिस में मार दो। जो मेरे भाई के साथ हुआ वो किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। यह शब्द है 22 साल के महयंक लोहार के बड़े भाई मेहुल लोहार के।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक भावुक वीडियो में मेहुल अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा, आज मैं घर पहुंचा हूं। घर की हालत बहुत खराब है। पूरा परिवार टूट चुका है। मुझे सिर्फ अपने भाई के लिए इंसाफ चाहिए। अब जब पकड़ा जा चुका है तो उसे या तो फांसी दी जाए या पुलिस में मार दिया जाए। मेरे भाई के साथ जो हुआ वो किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। अपने भाई को इस हालत में देखना बहुत मुश्किल रहा है। सिर्फ भाई ही नहीं मयंक के पिता ने भी आरोपी के लिए की मांग की।
उनका कहना है अगर ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा नहीं मिली तो भविष्य में ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। मयंक की बहन मेघा लोहार ने रेलवे प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा आज यह मेरे भाई के साथ हुआ है। कल किसी और के बेटे के साथ हो सकता है। आखिर कोई आम आदमी लोकल ट्रेन में चाकू लेकर कैसे घूम सकता है? अगर उस वक्त कुछ यात्रियों ने हिम्मत दिखाई होती तो शायद मेरा भाई आज जिंदा होता।
अब सवाल है कि आखिर उस रात लोकल ट्रेन में ऐसा क्या हुआ था जिसने कुछ ही मिनटों में एक युवक की जान ले ली और आखिर कौन है वो शख्स जिसने मामूली बहस को में तब्दील कर दिया?
उसके परिवार वालों का क्या कुछ कहना है? पुलिस के मुताबिक आरोपी का नाम है रोशन रमेश सुवर्णा। उसकी उम्र 30 साल है। वह मुंबई के मीरा रोड ईस्ट का रहने वाला है। उसके खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया
वहां रोशन बस पकड़ने से पहले बैठा मिला और पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर बाद में के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद रोशन बार-बार यह पूछता रहा जिस युवक पर उसने हमला किया था, उसकी हालत कैसी है? शुरुआत में अधिकारियों ने उससे कहा कि पीड़ित अस्पताल में इलाज करा रहा है। लेकिन कुछ देर बाद रोशन ने अपने मोबाइल फोन पर इंटरनेट पर खबर देखी और उसे पता चला कि जिस पर उसने हमला किया था उस मयंक की हो चुकी है। इधर आरोपी के परिवार कुछ और ही बयान और दावे कर रहे हैं। रोशन के भाई प्रशांत सुवर्णा का कहना है कि घटना के समय उसका भाई के में था। उनके मुताबिक रोशन जब रात को घर पहुंचा तो वह लगातार रो रहा था। परिवार ने उससे ज्यादा सवाल नहीं किए क्योंकि वह में था। अगली सुबह उसने परिवार को पूरी घटना के बारे में बताया और कहा कि वह कुछ दिनों के लिए अपने गांव मंगलुरू जा रहा है।
परिवार का दावा है जब पुलिस उनके घर पहुंची और पूछताछ शुरू हुई तो उन्होंने रोशन को फोन कर उसकी जानकारी भी दी। उनके मुताबिक रोशन ने कहा था कि वह वापस आकर पुलिस के सामने सरेंडर करेगा। लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने पनवेल में उसे अरेस्ट कर लिया। वहीं रोशन के एक करीबी दोस्त का दावा है कि ट्रेन में दरवाजा बंद करने को लेकर हुए विवाद के दौरान कुछ यात्रियों ने रोशन के साथ हाथापाई भी की थी और उसकी आंख के पास चोट लगी थी।
हालांकि इन सभी दावों की पुष्टि पुलिस ने नहीं की है और जांच अभी जारी है। जो वीडियो सामने आए हैं उसमें भी ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया बल्कि उस वीडियो में साफ तौर पर रोशन मयंक पर ताबड़तोड़ हमला करता हुआ नजर आया है। रोशन के परिवार और उसके दोस्त का कहना है कि वह इस अपराध का बिल्कुल समर्थन नहीं करते। लेकिन उनका यह भी कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रायल की वजह से उनका परिवार उनकी नौकरियों पर भी असर पड़ रहा है।
पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के दौरान वास्तव में क्या-क्या हुआ था। फिलहाल रोशन सुवर्णा अन्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है। लेकिन इस घटना ने पूरे देश के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मुंबई जैसी व्यस्त लोकल ट्रेन में कोई आसानी से चाकू लेकर सफर कर सकता है? क्या यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? और क्या एक मामूली बहस इतनी बड़ी हो सकती है कि किसी की जान ही ले ली जाए? इन सवालों के जवाब जांच और अदालत से मिलेंगे।
लेकिन मयंक लोहार का परिवार आज भी सिर्फ एक ही बात कह रहा है कि हमें इंसाफ चाहिए ताकि किसी और परिवार को कभी यह दर्द ना सहना पड़े। 22 साल का मयंक यह वादा करके गया था कि वो रात को घर लौटेगा। परिवार उसका इंतजार कर रहा था।