पुणे में 26 साल के कारोबारी केतन अग्रवाल की की घटना ने इंदौर की एक बदकिस्मत मां के जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया। यह मां है उमा रघुवंशी जिनके बेटे राजा रघुवंशी की भी कुछ इसी तरह साजिश के साथ कर दी गई थी। अब केतन की पर राजा की मां का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा है। उन्होंने न्याय व्यवस्था और समाज पर तीखे सवाल उठाए।
पिछले दिनों जब पुणे केतन अग्रवाल की मौत मामले में जब उनके मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी की गिरफ्तारी हुई तो हर कोई सैन्य रह गया। पुलिस के मुताबिक केतन को रास्ते से हटाने के लिए बकायदा साजिश रची गई थी। इस घटना ने ठीक वैसा ही पैदा किया जैसे कुछ महीनों पहले इंदौर के राजा रघुवंशी ने किया था। केतन अग्रवाल की की खबर सुनते ही इंदौर में रहने वाली राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी का दर्द फूट पड़ा।
उन्हें अपना वो बेटा याद आ गया जिसे सोनम नाम की लड़की ने उनसे हमेशा के लिए छीन लिया था। उमा रघुवंशी ने आज समाज की लड़कियों और ढीली कानून प्रक्रिया पर बेहद कड़े और चुभते हुए सवाल खड़े किए। मैं इससे यही कहना चाहती हूं कि सोनम को जल्द से जल्द सजा मिल जाती। सोनम कोर्ट के बाहर नहीं होती तो मतलब है ना हो सकता है यह केस मतलब है ना नहीं बढ़ता ये लड़की उनको सहमत इसीलिए मिल रही है कि जैसे सोनम छूट गई है हम भी छूट जाएंगे मतलब है ना मेरे को कुछ समझ में नहीं आ रही क्या लगता है ।
हां ये छोटी सोनम है क्योंकि इसकी चाल डाल आपने देखी होगी जब पुलिस ने इसको पकड़ा है तो ये छोटी सोनम जैसी चल रही है इसको मतलब कोई फर्क नहीं पड़ा है कि मैंने इतना बड़ा गुनाह करा है किसी के बेटे को मारा है मगर इसको को कोई पछतावा नहीं दिख रहा मेरे को इस सिया में। राजा की मां का यह दर्द सिर्फ उनके अकेले का नहीं है। आज केतन के पिता विशाल अग्रवाल भी इसी दर्द से गुजर रहे हैं। उनका भी यही कहना है कि अगर सिया को यह शादी नहीं करनीथी तो साफ मना कर देती। दोनों परिवार शादी की तैयारियों में डूबे थे। ऐसे में हत्या जैसा उठाना समझ से बड़े।
सोशल मीडिया पर लोग केतन और राजा रघुवंशी की हत्या का तुलना कर रहे हैं। यह दोनों मामले समाज के सामने रिश्तों की मर्यादा और भरोसे पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। वाकई चाहे इंदौर का राजा रघुवंशी मामला हो, पुणे का केतन अग्रवाल हत्याकांड।इन वारदातों ने मां-बाप के दिलों में एक अनजाना खौफ पैदा कर दिया।
उमा रघुवंशी का यह सवाल बेहद वाजिब है कि आखिर गुनाहगारों को सख्त सजा मिलने में देर क्यों होती है? कानून की ढील कहीं ऐसे अपराधियों के हौसले तो नहीं बढ़ा रही। जरूरत है केतन और राजा जैसे बेटों को इंसाफ मिले ताकि भविष्य में कोई और बेटी किसी मां का राम जैसा बेटा ना छीन सके।