ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज शकियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक न्योता भेजा है। यह न्योता ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामिनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का है। खामिनेई को सुपुर्दे खाक करने से जुड़े रीति रिवाज 4 जुलाई से शुरू होंगे। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें ईरान के मशहद शहर में दफन किया जाएगा। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक किसी शख्स की मौत के बाद उसे जल्द से जल्द दफन किया जाना चाहिए। अमूमन 24 घंटे के अंदर सुपुर्दे खाक करने की मान्यता है।
लेकिन ईरान में युद्ध की स्थिति की वजह से ऐसा नहीं हो पाया। खामिने की मौत के बाद से ही उनके शव यात्रा की तारीखें बदलती आई हैं। पहले कहा जा रहा था कि उन्हें जून के आखिर में दफनाया जा सकता है। लेकिन बाद में ईरान की सरकारी मीडिया ने यह साफ कर दिया कि खामिनेई को जुलाई में दफनाया जाएगा। 86 साल के अली खामिनई की मौत 28 फरवरी 2026 को हुई थी। जब तेहरान पर इजराइल और अमेरिका के हवाई हमले शुरू हुए थे। करीब 36 साल तक वह ईरान के सुप्रीम लीडर रहे। उन्हीं की शव यात्रा के लिए पीएम मोदी को न्योता दिया गया। रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान एंबेसी ने 23 जून को विदेश मंत्रालय को ऑफिशियल इनवाइट भेजा था। पीएम मोदी के अलावा दुनिया के कई लीडर्स को इनवाइट गया है।
इनमें चीन, रूस, कतर, फ्रांस और पाकिस्तान के नेता शामिल हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तान का एक डेलीगेशन खामीन की शव यात्रा में शामिल होगा। लेकिन अभी तक भारत ने यह तय नहीं किया है कि इस बार शव यात्रा में कौन शामिल होगा। 204 में जब ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हुई थी तब भारत की ओर से उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ तहरान गए थे। उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने भी शोक व्यक्त किया था। भारत में एक दिन का राजकीय शोक घोषित भी हुआ था। लेकिन अली खामिने की मौत पर भारत ने 5 मार्च को आधिकारिक रूप से शोक जताया था। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने भी दिल्ली में मौजूद ईरानी दूतावास जो है वहां पर जाकर शोक जताया था।
प्रधानमंत्री मोदी आखिरी बार ईरान 2016 में गए थे जब उन्होंने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामिनई और राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात की थी। चाबहार कोर्ट समझौते पर साइन किए थे। इसके बाद 2018 में ईरान के राष्ट्रपति रूहानी भारत आए थे। पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान की आखिरी मुलाकात अक्टूबर 204 में रूस में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में यह उम्मीद जताई जा रही है कि खामे की अंतिम यात्रा में तेहरान, मशहद और कुम में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। अगर इतनी बड़ी संख्या में लोग आते हैं तो यह 1989 में ईरान के संस्थापक आयतुल्लाह खुमेनी के अंतिम संस्कार में आए लगभग 1 करोड़ लोगों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है। इसके अलावा अली खामिनई के बेटे मुस्तबा हुसैनी खामिनई जो युद्ध के बाद अब तक सामने नहीं आए हैं उनके सामने आने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
उनकी सेहत और वह इस समय कहां है? इसे लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेक्सेथ और खुद ट्रंप ने यह दावा किया है कि वह कोमा में हैं। ऐसे में यह भी देखा जा रहा है कि इस शव यात्रा में वह आएंगे या फिर नहीं। शव यात्रा तब भी हो रही है जब ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हुआ है। ईरान के राष्ट्रपति पेशकियान और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग डिजिटल समझौतों पर साइन कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच फिलहाल स्विट्जरलैंड में पीस टॉक्स भी चल रही हैं। इस वीडियो में बस इतना ही इसे रिकॉर्ड किया है हमारे साथी सर्वेश ने। मेरा नाम है रिया। आप देखते रहिए खबरगांव। धन्यवाद।