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मोदी के सामने जो हुआ उसे 100 सालों तक भूलेगी नहीं दुनिया !

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राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने जो हुआ उसे ना तो भारत भूलेगा ना करोड़ों हिंदू भूलेंगे और ना ही भारत विरोधी कोई देश भूलेगा। पीएम मोदी से हाथ मिला रहे इस शख्स की सच्चाई जब आपको पता चलेगी तो आपके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाएगी।

इस बहादुर और ईमानदार व्यक्ति को पद्मश्री सम्मान मिल रहा है। लेकिन क्यों मिल रहा है उसके बारे में देश के एक-एक बच्चे को पता होना चाहिए।

अगर यह ना होते तो सभी हिंदुओं पर आतंकी का ठप्पा लग गया होता। इन्होंने ही भगवा आतंकवाद के फर्जी नैरेटिव को चखनाचूर कर दिया था। इन पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह को फर्जी आरोपों में जेल भेजने के लिए दबाव बनाया गया था।

इन्हें से जलाया गया था। लेकिन यह हिम्मत और ईमानदारी से सच के साथ खड़े रहे। यह हैं केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मनी। आरवीएस मनी ने अपनी पुस्तक द मिथ ऑफ हिंदू टेरर इनाइडर अकाउंट ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स में यह दावा किया था कि 2006 और 10 के बीच में गृह मंत्रालय में काम करते हुए उन्होंने देखा कि कैसे हिंदू संगठनों को फंसाने के लिए एक सुनियोजित नैरेटिव तैयार किया जा रहा था।

आरवीएस मनी ने दावा किया था कि 2611 मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन सरकार ने इसे हिंदू संगठनों से जोड़ने और भगवा आतंकवाद का ठप्पा लगाने की कोशिश की थी। आपको कलावा पहने कसाब की तस्वीरें और उस समय कांग्रेस की वह प्रेस कॉन्फ्रेंस याद होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरवीएस मणि को भगवा आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ने के लिए एक हलफनामे पर हस्ताक्षर के लिए मजबूर किया गया था।

लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अगर वह ऐसा कर देते तो हिंदू संगठनों को घोषित कर दिया जाता। हर हिंदू के माथे पर आतंकी का ठप्पा लगा दिया जाता। आरवीएस मणि ने यह भी दावा किया था कि इशरत जहां एनकाउंटर केस में यूपीए सरकार ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को जेल भेजने की साजिश रची थी।

उन्होंने उस समय के सीबीआई चीफ के बयान का जिक्र किया। जिसमें काली दाढ़ी और सफेद दाढ़ी को जेल भिजवाने की बात कही गई थी। सफेद दाढ़ी कोड नेम उस समय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल किया गया था। जबकि काली दाढ़ी कोड नेम गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह के लिए इस्तेमाल किया गया था।

आरवीएस मणि ने दावा किया था कि सीबीआई के तत्कालीन विशेष जांच दल यानी एसआईटी के अधिकारी ने उन पर दबाव डाला और उन्हें सिगरेट से दाग कर यातनाएं दी ताकि वह इर्रत जहां को लश्कर तैबा का आतंकी बताने वाले हलफनामे को बदल सके। आरवीएस मनी ने आरोप लगाया था कि 2009 में तत्कालीन गृह मंत्री के इशारे पर इशरत जहां मामले में एक दूसरा हलफनामा तैयार किया गया जिसमें इशरत जहां की पृष्ठभूमि और उसके लिंक से जुड़े तथ्यों को छुपा दिया गया था।

सोचिए उस समय कितनी बड़ी साजिश चल रही थी। अगर आरवीएस मणि हिम्मत और ईमानदारी के साथ ना काम करते तो हिंदुओं को साबित करने की साजिश सफल हो जाती। लश्कर इशरत जहां केस में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को फंसा दिया जाता। आज पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने आरवीएस मणि को पद्मश्री सम्मान मिल रहा है। श्री रासु मणि सिविल सेवा

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