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गुरुद्वारा पर क्यों निहंग सिखों ने किया है कब्जा?

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गुरुद्वारे की छत से तलवार लहराते निहंग सिंह गुरुद्वारे की घेराबंदी कर खड़ी उत्तराखंड पुलिस और आईटीबीपी के जवान सड़क पर विरोधकर्ता सिख समाज और दो दिन से जारी हाई वोल्टेज ड्रामा चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के बीच कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में सिख संगठन भड़क गए हैं। इतना कि एक और कुछ निहंग सिखों ने गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया है तो दूसरी तरफ सिख समुदाय सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहा है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि उत्तराखंड पुलिस को धारा 163 लागू करनी पड़ी है। गुरुद्वारे को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और 27 जून तक इंटरनेट पर बैन लगा दिया गया है। लेकिन सवाल है कि आखिर उत्तराखंड में ऐसा क्यों हो रहा है? नमस्कार, मैं हूं भूपेंद्र सोनी और आप देख रहे हैं खबरगा। उत्तराखंड में पिछले दो दिन से चल रहे निहंग सिख विवाद को लेकर इस वीडियो में हम तफसील से बात करेंगे। बताएंगे आपको कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित नगरासू गुरुद्वारा जिसे दमदमा साहिब गुरुद्वारा भी कहा जाता है। उस पर निहंग सिखों के कब्जे की पूरी कहानी आखिर है क्या? क्या यह कब्जा कर्णप्रयाग मामले में हिरासत में लिए गए चार निहंग सिखों की रिहाई के लिए किया गया है या इसके पीछे की वजह कुछ और है। साथ ही बताएंगे कि पिछले दो दिनों में निहंग सिखों ने इस गुरुद्वारे में क्या-क्या तांडव मचाया और इसे लेकर उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन का क्या कहना है।

तो चलिए जानते हैं पूरा मामला। पूरा मामला समझने के लिए विवाद की शुरुआत में जाना होगा। 16 जून को उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में एक वीडियो वायरल होना शुरू हुआ जिसमें कुछ निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच लड़ाई हो रही थी। इस वीडियो में एक निहंग सिख तलवार लहराते हुए दिखाई दे रहा था। इसके बाद इस झगड़े में घायल हुए स्थानीय शख्स का वीडियो भी वायरल हुआ जिसका इलाज चल रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे कुछ निहंग सिखों का लोकल दुकानदारों और होटल मालिकों के साथ पार्किंग को लेकर विवाद हो गया और धीरे-धीरे यह मामला मारपीट तक उतर आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक निहंग सिखों ने लड़ाई के दौरान तलवार से हमला किया जिसमें चार लोकल लोग और एक निहंग सिख भी घायल हो गए। इस घटना के खिलाफ स्थानीय लोगों ने कुछ टाइम के लिए बद्रीनाथ हाईवे तक जाम कर दिया। उनकी मांग थी निहंग सिखों के खिलाफ कार्यवाही करने की जिसके बाद पुलिस ने मोहाली के रहने वाले चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इस गिरफ्तारी के बाद मामला शांत होने की बजाय और भड़क गया क्योंकि सिख संगठनों ने इन गिरफ्तारियों का विरोध किया। सिख संगठनों ने इन गिरफ्तारियों के खिलाफ कर्णप्रयाग में 21 जून को विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया था। जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने इलाके में धारा 163 लगा दी।

लेकिन 21 जून से महज एक दिन पहले यानी शनिवार को ही एक ऐसी घटना घटी जिसने कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग का पूरा माहौल गमा दिया। कर्णप्रयाग से 15 कि.मी. दूर नगरासू गुरुद्वारे में 20 जून को 7 से आठ निहंग सिखों ने अचानक कब्जा कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह निहंग सिख गुरुद्वारे में दाखिल हुए। वहां तोड़फोड़ और गाली गलौज किया और सेवादारों से भी मारपीट की। जिसके बाद इन निहंग सिखों ने दो लोगों को बंधक बना लिया और गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया। खैर कब्जे के बाद 20 जून को ही देर शाम रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने करीब 1 घंटे तक निहंगों से फोन पर बात की और बंदी बनाए लोगों को छोड़ने की अपील भी की और निहंगों को नीचे आने के लिए कहा गया। लेकिन यह बातचीत सफल रही। सोशल मीडिया से लेकर खबरों तक में इस घटना को कर्णप्रयाग में 16 जून को हुई निहंग सिखों वाली घटना से जोड़कर देखा जाने लगा और हर तरफ यह खबर चलने लगी कि इन सिखों ने कर्णप्रयाग वाली घटना में गिरफ्तार किए गए चार निहंग सिखों की रिहाई के लिए ही गुरुद्वारे पर कब्जा किया है। दूसरी तरफ बात ना बनती देख उत्तराखंड पुलिस और आईटीबीपी के जवानों ने नगरासू गुरुद्वारे को चारों तरफ से घेर लिया। इलाके में धारा 163 लागू कर दी गई। लेकिन इसके बावजूद पूरी रात हंगामा चलता रहा। ना ही निहंग नीचे आए, ना पुलिस ऊपर जा सकी। इस दौरान निहंग तलवारें लहराते रहे

और गुरुद्वारे की छत से पत्थर तक नीचे फेंके गए। 21 जून को एक तरफ पुलिस के जवान नगरासू गुरुद्वारे की स्थिति को संभाल रहे थे। वहीं दूसरी तरफ सिख संगठन कर्णप्रयाग में गिरफ्तार हुए चार निहंग सिखों की रिहाई के लिए सड़क पर उतर आए। जिसके बाद प्रशासन ने कर्णप्रयाग, गौचर और सिमली में भी धारा 163 लागू कर इंटरनेट को बैन कर दिया। इलाके में जुलूस, झांकी, जनसभा या रैली करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई। इस बीच नगरासू गुरुद्वारे की छत से कुछ निहंग सिखों को पुलिस समझा-बुझाकर नीचे उतारने में कामयाब रही। गुरुद्वारे से बाहर आए एक निहंग सिख ने कब्जे की जो वजह बताई, वह पहले से चले आ रहे कयासों से बिल्कुल उलट थी। निहंग ने बताया कि गुरुद्वारे पर कब्जा कर्णप्रयाग में गिरफ्तार किए गए चार निहंग सिखों को छुड़ाने के लिए नहीं किया गया था। बल्कि वह नगरासू गुरुद्वारे में खाना खाने रुके थे। लेकिन सेवादारों ने उनसे बदतमीजी की जिससे आपस में उनकी कहासनी हो गई। इसके बाद जब निहंग सिंह गुरुद्वारे से बाहर निकलने लगे तो वहां उन्हें पुलिस दिखाई दी जिसे देखकर उन्हें लगा कि गुरुद्वारा प्रबंधन ने उनके लिए पुलिस बुलाई है। इसी डर की वजह से वो गुरुद्वारे की छत पर चले गए और गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया। सुनिए बाहर आए निहंग सिख ने क्या कहा। वाह गुरु जी का खालसा वाहे गुरु जी की फते। सारे वीरा विनती है जी अ सही सलामत अ कल कर खातिर ऋषिकेश तो आए प्रयाग प्रयाग नगरास होदारे गुरुद्वारे कारण मतभेद हो गया झगड़ा करके पुलिस आ गई ठीक है जी सु कारण आई है जी इस कारण करके ऊपर मोर्चा जी ला लिया अपना ठीक है जी सही सलामत उतरे आए सही सलामत गुरु अ अपने घर जा रहे पुलिस प्रशासन ने ब सुरक्षा सहयोग जी वाह गुरु जी का खालसा वाह जी की फते रिपोर्ट्स के मुताबिक 21 जून की देर

शाम तक प्रशासन दो निहंग सिखों को गुरुद्वारे की छत से नीचे उतारने में कामयाब रहा लेकिन बाकी निहंग अब भी गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर बने हुए हैं। अगर पूरी घटना की टाइमलाइन आपको समझाएं तो 20 जून की सुबह निहंग गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर चले गए। देर शाम तक बातचीत होती रही। 21 जून की सुबह एक निहंग नीचे आया और शाम तक एक और निहंग नीचे आ गया। दोनों ने माफी मांगी और वापस अपने घर के लिए रवाना हो गए। पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने बताया है कि नगरासू वाली घटना में निहंगों का विवाद गुरुद्वारे के सेवादारों से हुआ था। कर्णप्रयाग के मामले का निहंगों ने जिक्र ही नहीं किया। गुरुद्वारे में अरदास और लंगर की व्यवस्था पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रही है। सुनिए निहारिका तोमर ने क्या कहा। गुरुद्वारे के सेवादारों और वहां आए निहांग सिख यात्रियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। पुलिस द्वारा वहां पर जब वार्ता की गई उसके उपरांत निहंग सिंह छत पर चले गए गुरुद्वारे और उन्होंने छत पर जाने के रास्ते को बंद कर दिया। प्रशासन, पुलिस और गुरुद्वारा प्रबंधक समिति लगातार उनसे वार्ता कर रही है और उनकी समस्याएं जानने की कोशिश कर रही है। हमारे द्वारा उनको समझाया बुझाया गया और इसके उपरांत एक निहंग सिख यात्री वापस नीचे आया और उनके द्वारा हमसे बात की गई और हमने उनकी सभी समस्याओं को सुना। रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने भी लोगों से अपील की है कि लोग किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास ना करें। केवल प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। श्री हेमकुंड साहिब और चारधाम की यात्रा पूरी तरह से सुचारू और सुरक्षित तरीके से संचालित हो रही है। नगरासू में जो घटनाक्रम हुआ है उसके संदर्भ में मैं बताना चाहूंगा कि यहां पर स्थित गुरुद्वारे में गुरुद्वारे के अंदर ही आपसी विवाद हुआ था और इसमें इस विवाद को मॉनिटर करने के लिए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन वहां पर मुस्तैदी से उपस्थित है। किसी प्रकार का कोई व्यवधान नहीं है। सभी कुछ शांतिपूर्वक चल रहा है और किसी को किसी प्रकार की अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है और शांतिपूर्वक यात्रा भी चल रही है। गुरुद्वारे के अंदर भी शांतिपूर्वक सभी जो अरदास है, लंगर है, आवाजाही है, वह सब कुछ चल रही है।

उधर गुरुद्वारा कमेटी ने भी बयान जारी कर सफाई दी है। कमेटी ने भी उसी बात को दोहराया है जो बात निहंग और निहारिका तोमर बता रहे हैं। अब लगे हाथ आज की स्थिति भी जान लीजिए। फिलहाल 22 जून को जब यह खबर लिखी जा रही थी तब तक गुरुद्वारे पर निहंग सिखों का कब्जा खत्म नहीं हुआ है और अभी गुरुद्वारे के लंगर की छत पर पांच निहंग सिख कब्जा किए बैठे हुए हैं। सुबह जब एक निहंग सिख लंगर से खाना लेने नीचे आया तो उसके साथियों ने छत से पुलिस पर पथराव किया ताकि वह निहंग सिख के पास ना आ सके।

पुलिस प्रशासन अब भी नगरासू गुरुद्वारे को चारों तरफ से घेर कर बैठा है और निहंग सिखों को समझाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन निहंग सिखों द्वारा बंदी बनाए गए दो श्रद्धालुओं को भी छोड़ दिया गया है। लेकिन यह लोग सरेंडर करने के मूड में नहीं लग रहे। तो यह था उत्तराखंड में चल रहे इस पूरे विवाद का लेखाजोखा। इस वीडियो में फिलहाल इतना ही। इस पूरी घटना पर हमारी नजर लगातार बनी हुई है। आगे भी अगर इस घटना को लेकर कोई बड़ा अपडेट आता है तो खबरगांव की टीम आप तक जरूर पहुंचाएगी। इस खबर को लिखा था मेरे साथी हिमांशु ने और इसे कैमरा के पीछे रिकॉर्ड किया है मेरे साथी इरशाद ने। अगर आपको वीडियो अच्छा लगा हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें और यह जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जरूर पहुंचाएं। मुझे इजाजत दीजिए। मैं हूं भूपेंद्र सोनी और देखते रहिए खबरगा। शुक्रिया।

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