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ब्रिटेन के PM का इस्तीफा! भारत पर होगा ये असर?

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ब्रिटेन में सोमवार को उस वक्त सियासी संकट पैदा हुआ जब प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कहा कि मैंने जो भी निर्णय लिए हैं वह मेरे प्रिय देश को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के बारे में है। इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हूं। भारतवंशी ऋषि सुनक के बाद कीर स्टारमर प्रधानमंत्री बने तो ब्रिटेन की जनता को लगा कि हमें एक कुशल प्रशासक मिला है। लेकिन उनके लिए देश के मौजूदा हालात ऐसे हो गए कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

ब्रिटेन की लेबर पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव में 1496 सीटें हार गई। इसलिए स्टारमर पर इस्तीफा देने का दबाव था। त्यागपत्र देने के बावजूद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर उत्तराधिकारी चुने जाने तक पद पर बने रहेंगे। उन्होंने सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नेता पद से हटने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में नए लेबर नेता के चुने जाने तक वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। सरकार की गिरती स्थिति को सुधारने के लिए नए नेता को सत्ता सौंपने के बढ़ते दबाव के बाद स्टारमर ने यह घोषणा की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अहम बात यह है

कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की रिस्टार्मर से इस्तीफे की मांग ज्यादातर उनकी अपनी पार्टी के सांसदों और कैबिनेट सदस्यों की ओर से आ रही थी। ब्रिटेन की परिवहन सचिव हेडी एलेक्जेंडर विदेश सचिव यवेट कूपर, गृह सचिव शबाना महमूद और ऊर्जा सचिव एड मिलीबेंड ने स्टारमर से अपने पद छोड़ने की समय सीमा तय करने या तत्काल इस्तीफा देने का आग्रह किया था। कई अन्य सांसदों ने भी इसी तरह की मांग की थी। स्टारमर को अपनी ही पार्टी और मंत्रिमंडल से बढ़ती नाराजगी का सामना करना पड़ा। साथ ही उनके पार्टी सहयोगी और प्रतिद्वंदी एनडी बर्नहम से भी कड़ी चुनौती मिल रही थी। जिन्होंने हाल ही में भारी बहुमत से ब्रिटेन की संसद में अपनी जगह बनाई है। स्टारमर ने पद छोड़ने का फैसला किया है और अब ब्रिटेन को एक दशक में यह सातवां प्रधानमंत्री मिलेगा। यूके मीडिया का दावा था कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सोमवार को पद छोड़ सकते हैं।

मीडिया की यह बात सही साबित हुई। स्टारमर के नेतृत्व में यह पूर्ण बदलाव तब आया जब 2 साल पहले ही उन्होंने लेबर पार्टी को 14 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद ब्रिटेन में भारी जीत दिलाई थी। ब्रिटेन का सियासी संकट ऐसे समय पर हुआ है जब भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू होने वाला है। ट्रेड डील को स्टारमर सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा था। इस समझौते से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में 4.8 अरब पाउंड जुड़ने और दोनों देशों के बीच व्यापार में 25.5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अब की स्टारमर के इस्तीफे के बाद समझौते की टाइमलाइन के लिए चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक उथल-पुथल से समझौते को लेकर कुछ समय तक अनिश्चितताएं बनी रह सकती है।

स्टारमर के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे अधिक संभावित उम्मीदवार लेबर पार्टी के एनडी बर्नहम है जिन्होंने शुक्रवार को मेकर फील्ड में हुए विशेष चुनाव में शानदार जीत हासिल कर प्रधानमंत्री को चुनौती देने का रास्ता साफ कर दिया था। खबरों के अनुसार इस जीत के बाद स्टारमर और उनके सहयोगियों के बीच इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई कि क्या वे बर्नहम को चुनौती देकर जीत हासिल कर सकते हैं या नहीं। स्टारमर पर और अधिक दबाव डालने वाली बात उपचुनाव में बर्नहम की भारी जीत थी। जहां उन्होंने उम्मीदवार निगेल फराज की रिफॉर्म यूके पार्टी और रिस्टोर ब्रिटेन को आराम से हराया। इन दोनों पार्टियों के संयुक्त वोटों से लगभग 10,000 अधिक वोट प्राप्त किए। लेबर पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि 2029 के आम चुनाव में फराज का मुकाबला करने के लिए बर्नहम सही उम्मीदवार है। ब्यूरो रिपोर्ट पत्रिका। देश दुनिया की ताजा खबरें और वीडियोस के लिए अभी डाउनलोड करें पत्रिका ऐप।

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