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श्रीदेवी का वो काला सच जिसने बोनी कपूर को शादी के लिए मजबूर कर दिया, जानकर बौखला जाएंगे।

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एक ऐसी खूबसूरत अदाकारा जो सिर्फ फिल्मों में ही नहीं बल्कि हकीकत में भी एक फिल्मी कहानी थी बॉलीवुड की पहली लेडी सुपरस्टार जी हां हम श्रीदेवी की बात कर रहे हैं सिर्फ एक नाम ही नहीं एक एहसास थी उनकी मासूमियत भरी आंखें उनकी हंसी और उनकी मुस्कान मानो हर एक पल एक नए सपने की शुरुआत लेकिन जो दुनिया ने देखा बस वही सच नहीं था एक लड़की जो छोटी सी उम्र में कैमरे के सामने आई और सबको अपना दीवाना बना दिया हो गए पानी पानी पर उनकी अपनी जिंदगी एक ऐसी किताब थी जिसके हर एक पन्ने पर एक नए राज की इबारत लिखी थी तो दोस्तों कैसे एक अदाकारा जिसकी पहली ही फिल्म सुपर फ्लॉप हो गई फिर भी वह बॉलीवुड की हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस बन गई आखिर श्रीदेवी जी ने एक शादीशुदा महिला का जीवन क्यों बर्बाद कर दिया जाने पति-पत्नी के मामले में ही प्यार क्यों बढ़ जाता है जब मुझे तुम्हारी दूसरी शादी से कोई ऐतराज नहीं तो तुम्हें क्या परेशानी है इस बात में कितनी सच्चाई है कि श्रीदेवी शादी होने से पहले ही मां बन गई आखिर श्रीदेवी जी का दिल किसके लिए कितनी बार धड़का और कितनी बार टूटा को साजना सवार दे प्या श्रीदेवी ने बॉलीवुड के डांसिंग सुपरस्टार मिथुन चक्रवर्ती से शादी रचा ली [संगीत] थी प्यार में श्रीदेवी जी ने अपने भाई जिसे ये राखी बांधती थी उसी से क्यों शादी रचा ली तो नमस्कार दोस्तों स्वागत है मुझे मुझे और तक नहीं होगा तुम हम दोनों की जान ले सकते हो हमें खत्म कर सकते हो लेकिन हमारे प्यार को नहीं क्या है एक खुशनुमा शाम एक महफिल और फिर एक ऐसी मौत जो आज भी समझ में नहीं आती क्या हुआ था कमरा नंबर 2201 में कसूर पर वो मालिक मुझे रुलाए तो दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं उस लड़की की जिसने अपना बचपन ही नहीं जिया पर उसने करोड़ों दिलों के सपनों को जिया ।

13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिव काशी नाम के छोटे से कस्बे में जन्मी एक मासूम बच्ची श्री अम्मा यंगर अप्पन जिसे दुनिया ने बाद में श्रीदेवी का नाम दे दिया उनके पिता अयन यंगर एक वकील थे मां राजेश्वरी यंगर एक गणी थी श्रीदेवी अपने माता-पिता की पहली संतान थी उनके बाद उनकी एक छोटी बहन श्री और दो सौतेले भाई सतीश और आनंद पारिवारिक मनमुटाव के कारण श्रीदेवी ने हमेशा अपने दोनों भाइयों से दूरी बना रखी थी श्रीदेवी ने कभी स्कूल का मुंह तो नहीं देखा देखा तो सिर्फ कैमरा जहां दूसरे बच्चे किताबों में खोए रहते वहीं श्रीदेवी कैमरे के सामने अपनी नई दुनिया बना रही थी ।

सिर्फ 4 साल की उम्र में श्रीदेवी ने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय यह साल था 1967 जब श्रीदेवी ने तमिल फिल्म कंधन करुणी में एक बाल कलाकार का रोल किया इस फिल्म में उन्होंने शिवाजी गणेशन और जय ललिता जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम किया अपनी पहली ही फिल्म में श्रीदेवी ने भगवान मुर्गन का बाल रूप निभाया और इसी के 2 साल बाद 1969 में इनकी एक और मैथोलॉजिकल फिल्म आई जिसमें एक बार फिर श्रीदेवी ने भगवान मुर्गन का ही रोल किया फिल्म का नाम था थुनेवान इस फिल्म की कामयाबी के बाद इन्हें मलयालम फिल्म में भी काम मिल गया।

फिल्म थी कुमार संभव और इस फिल्म में इन्होंने शिवजी के बेटे कार्तिकेय का रोल किया श्रीदेवी की प्रसिद्धि बढ़ रही थी फिर इनकी एक और मलयालम फिल्म आई फिल्म का नाम था पूनम पाटा इनकी अदाकारी को लोग देखते ही रह गए बेस्ट चाइल्ड एक्ट्रेस का इन्हें अवार्ड मिला एक बाल कलाकार के रूप में श्रीदेवी आज सभी प्रोड्यूसर की पहली पसंद थी श्रीदेवी जी की ऐसी डिमांड थी कि 1967 से लेकर 72 तक चार-चार भाषाओं में काम कर रही थी एक ऐसी लड़की जिसने भले ही किताबें ना पढ़ी हो लेकिन दुनिया को न जाने कितनी कहानियां दे गई श्रीदेवी जी असल जीवन में बेहद संकोची थी पर कैमरे के सामने आते ही न जाने कैसा जादू हो जाता था उनमें मेरे बादशाह के लिए श्रीदेवी जी को अपनी पढ़ाई ना कर पाने का कभी अफसोस नहीं रहा उनसे जब पूछा जाता कि अगर अगला जन्म मिले तो आप क्या बनना चाहेंगी तो उन्होंने मुस्कुराकर हमेशा यही जवाब दिया मैं बस सिर्फ और सिर्फ श्रीदेवी बनना चाहूंगी क्योंकि उनके लिए सिनेमा ही उनका पहला और आखिरी प्यार था बनाया गया जिसका नाम रखा गया रानी मेरा नाम श्रीदेवी जी की हिंदी सिनेमा में बाल कलाकार के रूप में यह पहली डेब्यू फिल्म रही वाले नागों ने सबको मार दिया और इस मूवी के तीन वर्षों बाद श्रीदेवी हिंदी सिनेमा में जूली फिल्म में दिखी और इसके कुछ ही दिनों बाद श्रीदेवी जी की तमिल हिट फिल्म 16 व तिथिलने का रिमेक बनाया गया।

इस फिल्म का हिंदी में नाम रखा गया 16वां सावन पर श्रीदेवी जी इस फिल्म में काम करने के लिए तैयार नहीं थी वजह थी कि उन्हें हिंदी नहीं आती थी और ना ही वह अंग्रेजी जानती थी वह घबरा रही थी कि कैसे संवाद बोलेंगी कैसे भावनाएं व्यक्त करेंगी तब डायरेक्टर ने उन्हें खूब समझाया तुम सिर्फ अभिनय करो और बाकी सब मुझ पर छोड़ दो श्रीदेवी ने काम किया और यह फिल्म रिलीज हुई पर अफसोस यह फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप हो गई श्रीदेवी के लिए यह एक सपने के टूटने जैसा था हिंदी सिनेमा में पहला बड़ा कदम और इतनी बड़ी हार थांबली तेरा नाम श्रीदेवी को नाकामी ने हिला कर रख दिया उन्हें लगा कि वो हिंदी सिनेमा के लिए बनी ही नहीं वो फिर से साउथ इंडस्ट्री लौट गई वैसे इस फिल्म को बतौर नायिका उनकी पहली मूवी माना जाएगा।

श्रीदेवी को करियर की बड़ी सफलता 1981 में मिली जब उन्हें तमिल फिल्म बिंदु कोकिला के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड मिला पर असली धमाका तो तब हुआ जब श्रीदेवी ने मंदुरम पिरेई फिल्म में एक याददाश्त खो चुकी लड़की का किरदार निभाया उनके साथ साउथ के दिग्गज अभिनेता कमल हसन थे यह फिल्म इतनी बड़ी हिट रही कि इसका हिंदी रिमेक भी बनाया गया फिल्म का नाम था सदमा पर अफसोस सदमा फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हां श्रीदेवी की अभिनय की खूब तारीफ हुई क्या रे हरि प्रसाद इतना खूबसूरत विपन बांधा है और तो देखता भी नहीं आपको याद दिला दें कि 16वां सावन फिल्म की असफलता के तीन सालों बाद उन्होंने हिंदी की हिम्मत वाला फिल्म को चुना

1983 में जब यह फिल्म रिलीज हुई तो इतनी बड़ी हिट साबित हुई कि बॉलीवुड में तहलका मच गया दिलचस्प बात तो यह है कि हिम्मत वाला फिल्म में श्रीदेवी के साथ जितेंद्र थे और जितेंद्र के लिए भी यह फिल्म वरदान सिद्ध हुई जितेंद्र साहब की इससे पहले कई फिल्में फ्लॉप रहीं पर श्रीदेवी के साथ उनकी जोड़ी ने तो मानो कमाल कर दिया फिल्म निर्देशक ने एक गाने के लिए मटको का भव्य सेट लगवाया था उनका मानना था कि लोग गाने के साथ इतने भव्य सेट को देखने आएंगे पर जब उस सेट पर श्रीदेवी ने डांस किया तो दर्शक सेट की भव्यता को तो मानो भूल ही गए में सपना सपनों में सजना सजना पे दिल आ गया क्यों सजना पे देवी के आगे फिल्मों की साइन करने की कतार लग गई

हिम्मत वाला फिल्म के बाद उन्होंने जितेंद्र के साथ 1984 में तोहफा फिल्म में काम किया और यह फिल्म उस वर्ष की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी इस जोड़ी को देखने मात्र के लिए दर्शक पागल थे आपको बता दें कि उस वर्ष साउथ इंडस्ट्री के मनमोहन देसाई कहे जाने वाले राघवेंद्र राव ने तीन और फिल्में डायरेक्ट की जानी दोस्त मवाली जस्टिस चौधरी श्रीदेवी जी ने हिंदी सिनेमा में बड़ी जबरदस्त पहचान बना ली थी हां पर उन्होंने साउथ इंडस्ट्री को कभी नहीं छोड़ा श्रीदेवी जिस कलाकार के साथ काम करती उनकी जोड़ी उसके साथ हिट हो जाया करती रस्ते में वो था मेरे पीछे पड़ा था बॉलीवुड में ऐसा कमी देखने को मिलता है कि एक अदाकारा जिसने पिता के साथ भी काम किया और पुत्र के साथ भी काम किया हे बाप का नाम मत लेना नन ठीक है ठीक है श्रीदेवी धर्मेंद्र के साथ नाकाबंदी वतन के रखवाले फरिश्ते जैसी सुपरहिट फिल्में दे रही थी।

वहीं सनी देओल जी के साथ उन्होंने जोशीले सल्तनत और निगाहें जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दी श्रीदेवी की खूबसूरती और अदाकारी ऐसी थी कि वो हर पीढ़ी के हीरो के साथ बिल्कुल फिट बैठती थी मुझे तो असली प्यार हो गया है प्यारे ही प्यार ऊपर मत चढ़ मेरे हट जा पीछे श्रीदेवी की सफलता बढ़ती ही जा रही थी फिल्मफेयर मैगज़ीन ने उन्हें अपने कवर बेस पर जगह दी और लिखा लाजवाब अभिनेत्री श्रीदेवी की कड़ी मेहनत का नतीजा थी यह सफलता भागी सी क्या घर से भाग के आई है नागी जो नींद जा श्रीदेवी लगातार हिंदी और अंग्रेजी भाषा सीख रही थी धीरे-धीरे उस पर कमांड करती चली जा रही थी क्योंकि अभी तक उनकी आवाज डबिंग आर्टिस्ट नाज ही करती रही थी।

श्रीदेवी जब पर्दे पर आती तो मानो लगता यह रोल सिर्फ उन्हीं के लिए बना है पर निजी लाइफ में जब भी वह दिखती तो बेहद संकोची उन्होंने हमेशा अपनी पब्लिक लाइफ और प्राइवेट लाइफ को अलग-अलग रखा आप लोग अपने साथ-साथ मेरा भी वक्त बर्बाद कर रहे हैं मुझे आपके किसी सवाल का जवाब नहीं देना पर एक बार उन्होंने इस पर खुलकर बात की उन्होंने बताया कि जब 1984 में जाग उठा इंसान फिल्म की शूटिंग चल रही थी उसी दौरान वो मिथुन के प्रति आकर्षित हो गई पर मिथुन योगिता बाली से पहले से ही शादीशुदा थे।

बता दें मिथुन की धर्मपत्नी को इस प्रेम संबंध का पता ही नहीं था कहते तो यह भी हैं कि यह प्रेम प्रसंग इतना बढ़ा कि दोनों ने बगैर किसी को बताए छुप कर शादी भी कर ली थी इधर नियति ने तो शायद श्रीदेवी के लिए अलग ही पाठ कथा तैयार कर रखी थी अगर तुम पर मेरी जिम्मेदारी आ गई तो तुम तो मुझे जमीन पर पांव भी नहीं रखने दोगी हम्म नहीं रखने दूंगा इतना बड़ा दिलजो है 1980 के दशक में श्रीदेवी के सितारे बुलंदियों पर थे हर निर्माता निर्देशक काम करना चाहता था तो श्रीदेवी के साथ उन्हीं में से एक निर्माता ऐसे थे जिन्होंने सोच रखा था अगर फिल्म बनाऊंगा तो सिर्फ श्रीदेवी के साथ नहीं तो मैं फिल्म ही नहीं बनाऊंगा वो थे अनिल कपूर के भाई बोनी कपूर बोनी कपूर साहब उन दिनों भारतीय सिनेमा के बड़े निर्माता थे वो मिस्टर इंडिया फिल्म पर काम कर रहे थे उनके दिमाग में सिर्फ एक ही नाम था श्रीदेवी बोनी कपूर साहब ने श्रीदेवी की मां से संपर्क किया।

फिल्म साइन करने की बात कही श्रीदेवी की मां पैसों के मामले में बहुत सख्त थी उन दिनों श्रीदेवी की फीस ₹8 लाख हुआ करती थी श्रीदेवी के पास डेट्स नहीं थी सो उनकी मां ने ₹8 लाख से उनकी फीस ₹1 लाख बोल दी उन दिनों ये बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी बोली कपूर श्रीदेवी के ऐसे दीवाने थे कि उनकी मां को ₹1 लाख की जगह उन्होंने ₹11 लाख की पेमेंट चेक से कर दी मिस्टर इंडिया फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई बोनी कपूर श्रीदेवी की हर छोटी से छोटी मांग को पूरा करते श्रीदेवी को जो कपड़े चाहिए होते वो उनको मिलते जैसा मेकअप वो चाहती वैसा मेकअप उनके लिए उपलब्ध करा देते बोनी कपूर श्रीदेवी की हर छोटी से छोटी जरूरत को पूरा कर रहे थे तुमने उस वक्त ₹500 लिए थे ।

मुझे अपना सारा पैसा वापस चाहिए अभी इसी वक्त चाहिए मोगंबो खुश हुआ आपको पता है यह सब एक निर्माता के तौर पर नहीं हो रहा था बोनी कपूर श्रीदेवी को मन ही मन प्यार करने लगे थे बोनी कपूर के मन में जो था उसे छुपा पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था आखिरकार उन्होंने अपनी पत्नी मोना कपूर से सब सच बता दिया उन्होंने कह दिया कि वह श्रीदेवी से प्यार करने लगे हैं ऐसी बात क्या मुझे जान देता है।

लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था क्योंकि इस कहानी में एक नाम और था जो था मिथुन चक्रवर्ती जब मिथुन को पता लगा कि बोनी कपूर श्रीदेवी के करीब आ रहे हैं तो वो श्रीदेवी से नाराज हो गए श्रीदेवी को भी यह दिखाना था कि बोनी कपूर से उनका कोई रिश्ता नहीं सिर्फ एक दोस्ती है फिर जो हुआ उसे देखकर पूरी फिल्म इंडस्ट्री दंग रह गई श्रीदेवी ने बोनी कपूर को सबके सामने राखी बांध दी यानी कि यह साबित किया कि बोनी कपूर उनके भाई जैसे हैं पर अभी श्रीदेवी की लव स्टोरी में और कई किरदार थे इधर मिथुन और श्रीदेवी के रिश्ते की खबर मिथुन की पत्नी योगिता बाली को लगी उन्होंने मिथुन पर दबाव डाला तुम मेरे कहोगे सदा ये योगिता माली ने यहां तक की दी वो अगर श्रीदेवी से अपना रिश्ता खत्म नहीं करेंगे तो वह खुद को खत्म कर लेंगी पर इस मामले में मिथुन खुद असमंजस में थे वो ना ही अपने परिवार और पत्नी को छोड़ पा रहे थे और ना ही श्रीदेवी से रिश्ता खत्म कर पा रहे थे इधर श्रीदेवी भी कोई नासमझ बच्ची नहीं थी वह समझ गई थी कि इस रिश्ते का कोई भविष्य नहीं है उन्होंने खुद को इस रिश्ते से अलग कर लिया अब निशान लिया है तूने इधर मिस्टर इंडिया फिल्म रिलीज हुई इस फिल्म ने इतिहास रच दिया था ।

श्रीदेवी की अदाकारी और उनके गाने हर जगह छाए हुए हैंत्रिदेवी की नीली साड़ी में परफॉर्मेंस इतनी जबरदस्त थी कि फिल्मफेयर मैगजीन ने उन्हें अ ट्रू गॉडेस इन ब्लू साड़ी कहकर सम्मानित किया हां यह गाना इरोटिक था लेकिन श्रीदेवी ने इसे इतने ग्रेस और एलगेंट से किया कि यह क्लासिक बन गया कांटे नहीं घटते दिन यह रात गहनी थी तुमसे श्रीदेवी की कामयाबी को अब मुकाम मिल गया था हिम्मत वाला तोहफा और मिस्टर इंडिया के बाद उनकी एक और फिल्म आई जो कि बॉलीवुड के लिए मील का पत्थर साबित हुई फिल्म थी।

नगीना आपको बता दें कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं थी श्रीदेवी के कैरियर का एक ऐसा मोड़ थी जिसने उन्हें नागिन के रूप में अमर कर दिया आज भी जब नाग और नागिन की कहीं बात होती है तो सबसे पहले जहन में श्रीदेवी का नाम आता है और हो भी क्यों ना नगीना सिर्फ एक फैंटसी फिल्म ही नहीं थी यह श्रीदेवी की अदाकारी का एक ऐसा शोकेस था जिसमें हर भाव हर इमोशन हर डांस स्टेप एक जादू की तरह काम कर रहा था आपको नगीना फिल्म का वो क्लाइमेक्स वाला सीन तो याद ही होगा शायद भारतीय सिनेमा के यादगार दृश्यों में से एक है ।

वो सीन लेकिन इस सीन के पीछे एक ऐसी कहानी छुपी है जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे हां जब शूटिंग का सेट टूट रहा था पर श्रीदेवी नागिन की तरह नाच रही थी दरअसल वाकया कुछ यूं है कि नगीना फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी बस एक सीन बचा था क्लाइमेक्स डांस डायरेक्टर हरमेश मल्होत्रा के पास ज्यादा वक्त नहीं था उन्होंने श्रीदेवी से कहा कि हमारे पास एक ही दिन एक्स्ट्रा बचा है और इसी दिन वह क्लाइमेक्स सीन भी शूट होना है और साथ ही सेट भी टूटना है हमें जगह खाली करके देनी है श्रीदेवी का आत्मविश्वास तो देखिए उन्होंने हां ही भर दी वह सुबह 6:30 बजे सेट पर पहुंच गई की तैयारी पूरी हो गई थी श्रीदेवी ने अपने फुल एक्सप्रेशन के साथ डांस करना शुरू कर दिया मजेदार बात तो यह है कि एक तरफ श्रीदेवी डांस कर रही थी और दूसरी तरफ सेट तोड़ा जा रहा था जैसे-जैसे डांस आगे बढ़ रहा था।

पीछे-पीछे सेट तोड़ा जा रहा था श्रीदेवी जी अपने आप को उस टूटे सेट के सामने से हटाकर बचे सेट की तरफ ही डांस कर रही थी शाम 4:00 बज गए थे पूरा सेट लगभग टूट गया था सिर्फ एक दीवार बची थी और श्रीदेवी ने सिर्फ उस दीवार के सामने अपने आखिरी डांस स्टेप को भी पूरा कर दिया कैमरा कट हुआ पूरा सेट तबाह हो चुका था लेकिन किसे पता था कि इतने शोरगुल और हड़बड़ के बीच सिनेमा का सबसे यादगार सीन शूट हो चुका है जो कि आने वाले दिनों में अमर हो जाएगा तेरी कहानी मेरा डसा हुआ मांगे ना पानी बाद में जब श्रीदेवी से सीन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़े मजाकिया अंदाज में कहा देखिए आपको फिल्मों में कैसे चीट किया जाता है एक तरफ सेट टूट रहा था और दूसरी तरफ नागिन बनकर मैं नाच रही थी पर असली बात तो यह है कि श्रीदेवी इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने एक्सप्रेशन और फॉरकॉर्नमेंस में कोई कमी नहीं होने देती थी नैना तू सवेरा मैं नागन तू हां साथ ही

आपको यह भी बता दें कि श्रीदेवी हमेशा बहुत फिट रहना पसंद करती थी वो बहुत ही डाइट कॉन्शियस थी पर उस दिन जब श्रीदेवी शूटिंग सेट पर पहुंची तो उनके पास बड़ी सी वनिला आइसक्रीम थी वो उसे बड़े मन से खा रही थी आपको पता है उस दिन श्रीदेवी ने जितन से क्या कहा जीतू जी यह मेरी फेवरेट आइसक्रीम है और आज मैं इसे ढाई साल बाद खा रही हूं जितेंद्र साहब ने उनसे बोला आखिर ऐसा क्यों तब उन्होंने कहा अगर हम लोग अपने मनपसंद का खाएंगे तो हमारे परिवार वाले नहीं खा पाएंगे हमें बहुत फिट रहना पड़ता है उस दिन जितन साहब ने सबके लिए आइसक्रीम मंगाई पूरे फिल्म सेट ने खूब एंजॉय किया और आइसक्रीम खाई मेरी मेरी सारी तेरा नाम भूल गई इसी साल फिरोज खान की फिल्म जांबाद रिलीज हुई श्रीदेवी की इस फिल्म में एक मेहमान भूमिका थी फिल्म की असली हीरोइन तो डिंपल कपाड़िया थी।

लेकिन जब श्रीदेवी ने लाल साड़ी पहनकर पर्दे पर एंट्री ली तो दर्शकों की नजरें सिर्फ श्रीदेवी पर थी नहीं प्यार लोगों से जांबाज फिल्म का नाम लिया जाए तो शायद वह यह भी भूल गए होंगे कि फिल्म की हीरोइन डिंपल कपड़िया थी श्रीदेवी ने अपने 57 मिनट के रोल में पूरी फिल्म में अपनी छाप छोड़ दी भले ही श्रीदेवी का बेहद छोटा सा रोल था लेकिन उनका लाल शिफॉन साड़ी में गाना ऐसा चला कि लोग बार-बार थिएटर में सिर्फ उसी गाने को देखने के लिए जाते कामुकता का एक नया पैमाना सेट कर दिया था श्रीदेवी ने और तो और शिफॉन साड़ी का इंडस्ट्री में नया ट्रेंड आ गया था श्रीदेवी हमेशा फैशन से आगे चलती जब उन्होंने हीर राजा फिल्म में काम किया तो उन्होंने अपनी ड्रेस खुद डिजाइन की उन्होंने इस ड्रेस का इंस्पिरेशन विगोन एरा की पेंटिंग से लिया था और डांसिंग की बात करें तो श्रीदेवी माइकल जैक्सन और शम्मी कपूर की बड़ी प्रशंसक थी चलिए एक बार फिर श्रीदेवी की लव स्टोरी में लौटते हैं।

इधर 1989 में यश चोपड़ा की फिल्म चांदनी की शूटिंग चल रही थी हां आपको बता दें कि चांदनी उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म रही और इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक और कहानी लिखी जा रही थी स्विट्जरलैंड में जब श्रीदेवी चांदनी फिल्म की शूटिंग कर रही थी तभी बोनी कपूर चुपके से वहां पहुंच गए ये बैया जरा थाम ले तू मुंह से किसी बोली कपूर सिर्फ यह बताना चाह रहे थे कि उनका प्यार सिर्फ कुछ पलों के लिए ही नहीं बल्कि जिंदगी भर के लिए है पर श्रीदेवी जी ने तो कभी बोनी कपूर को उस नजर से देखा ही नहीं था बोनी कपूर का प्यार एक तरफ़ा प्यार था बोनी कपूर सिर्फ श्रीदेवी को अपनी नजरों के सामने देखना चाह रहे थे और बोनी कपूर को रहा नहीं गया उन्होंने श्रीदेवी से खुलकर कह दिया कि मैं आपसे प्यार करता हूं यह सुनकर श्रीदेवी नाराज हो गई कोई फूल कोई तोफा तुम कुछ भी साथ नहीं लाते अपनी महबूबा से मिलने खाली हाथ नहीं आते उन्होंने कई महीनों तक बोनी कपूर से बात तक नहीं की बोनी कपूर को भी यह पता नहीं लग रहा था कि आखिर उनसे गलती क्या हुई है।

आखिर उन्होंने श्रीदेवी के साथ ऐसा कौन सा काम कर दिया कि श्रीदेवी इतना नाराज हो गई मेरे पीछे पड़ेगी लेकिन हालात तो बदलने ही थे इधर 1991 में श्रीदेवी की लम्हे फिल्म आई इस फिल्म ने पांच फिल्म फेयर अवार्ड जीते सारे क्यों सारे 1992 में उनकी फिल्म आई खुदा गवाह जिसने काबुल में सबसे ज्यादा दिनों तक सिनेमाघर घर में लगे रहने का रिकॉर्ड बनाया मेरे बादशाह कुल मिलाकर 1983 से लेकर 1995 तक बॉलीवुड की सबसे महंगी अभिनेत्री रही रीत देवी लेकिन फिर उसी बीच 1993 में रूप की रानी चोरों का राजा रिलीज हुई।

हां आपको बता दें ये फिल्म हिट तो दूर बॉलीवुड की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्म साबित हुई इस फिल्म को डायरेक्ट किया था बोनी कपूर साहब ने उन्होंने अपने जीवन की सारी कमाई इसमें लगा दी थी ड्रामा पेश करती हूं दुखियारी मद्रास परिणाम यह हुआ कि बोनी कपूर दिवालिया हो गए बोनी कपूर की पूरी दुनिया उजड़ गई थी उसी दौरान श्रीदेवी की मां को कैंसर हुआ यह बड़ी मुसीबत का समय था श्रीदेवी ने देखा कि जहां एक शख्स की पूरी दुनिया उजड़ गई है उसके पास अब पैसे के नाम पर कुछ भी नहीं बचा वह इंसान बिना स्वार्थ के उनके साथ खड़ा है बोनी ना सिर्फ श्रीदेवी की मदद की बल्कि उनकी मां को इलाज कराने के लिए जी जान लगा दी अब श्रीदेवी का नजरिया बदलने लगा था शायद यह वो इंसान था जिसे वह पहले नजरअंदाज कर रही थी बुनी कपूर श्रीदेवी के अब अच्छे दोस्त बन गए थे और फिर यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं लगा हाथों में दोनों चूड़ियां बिना चल मजबूरियां फिर साल 1996 में बोनी कपूर ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दे दिया और बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से श्रीदेवी से शादी कर ली कितने कहिए अपनी सारी दौलत वापस ले ले और मेरा पति मुझे लौट कहते हैं जब श्रीदेवी मिस्टर इंडिया फिल्म की शूटिंग करने मुंबई आई तो बोनी कपूर की पहली पत्नी मोना कपूर ने अपने घर में जगह दी थी पर किसे पता था कि मोना कपूर को जगह देने की इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी मैंने अपने बीमार पति की जान बचाने के लिए बंगला बेचा है और तुमने अपने पति को बेच के बंगला खरीदा है पर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे लोग कह रहे थे श्रीदेवी एक घर तोड़ने वाली महिला है कई लोग बातें करते दिख जाते कि जिस घर में मोना ने श्रीदेवी को जगह दी उसी घर से मोना कपूर को श्रीदेवी ने निकाल दिया अब सच्चाई कुछ भी हो पर श्रीदेवी हर तरफ से आलोचनाओं से घिर चुकी थी।

हां मुश्किलें अभी यहां खत्म नहीं हुई कुछ लोग कह रहे थे कि शादी से पहले श्रीदेवी प्रेग्नेंट हो चुकी थी इसीलिए तो जल्दबाजी में उन्होंने शादी कर ली लोग कहते श्रीदेवी शादी के समय 7 महीने की गर्भवती थी अब क्या सच था यह तो कोई नहीं जानता पर अफवाहें आग की तरह फैल रही थी शादी के बाद श्रीदेवी के जीवन में दो और नाम जुड़े जानवी और खुशी बेटियों के नाम उन्होंने बोनी कपूर की फिल्मों से ही लिए जैसे कि जुदाई फिल्म से उन्होंने अपनी बड़ी बेटी का नाम जानवी रखा और दूसरी फिल्म हमारा दिल आपके पास से उन्होंने अपनी छोटी बेटी का नाम खुशी रखा श्रीदेवी ने दो बेटियों को जन्म दिया और अब श्रीदेवी ने यह भी फैसला कर लिया कि अब उनका समय सिर्फ उनके बच्चों का है ।

हालांकि 2003 में मालिनी अय्यर नाम के एक टीवी शो में वापसी की पर 2012 में एक बार फिर 15 सालों बाद बड़े पर्दे पर लौटी लाखों नजारे सारे रंगीले रंगीले फिल्म थी इंग्लिश विगिस इस फिल्म ने साबित कर दिया कि भले ही श्रीदेवी की उम्र बढ़ रही हो पर उनकी काबिलियत में अभी भी कोई कमी नहीं आई थी इंग्लिश विंग्लिश बहुत बड़ी हिट साबित हुई हर उम्र के तबके के दर्शकों ने इस फिल्म को देखा इंग्लिश फिंग्लिश को 2012 में भारत की तरफ से ऑस्कर में एंट्री मिली थी बताते हैं श्रीदेवी का काम के प्रति जोश तो देखने ही काबिल था साल बाद फिल्म की शूटिंग चल रही थी और उस फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें 103° बुखार था उस फिल्म का मशहूर गाना ना जाने कहां से आई है गाने की शूटिंग होनी थी गाना बारिश में शूट होना था और इस गाने के सेट को बनाने में बहुत पैसा लग गया था श्रीदेवी बुखार से करा रही थी पर उन्होंने जब देखा कि सेट को बनाने में इतना पैसा लगा है और समय भी नहीं है तो

श्रीदेवी ने उस 103 डिग्री बुखार में उस गाने को शूट किया और कहीं आपको ऐसा लगा कि श्रीदेवी 103 डिग्री बुखार में थी है नागी है जो नींद से जा के आई है जो नींद जा के और 2017 में उनकी एक और फिल्म आई जिसका नाम था मॉम इस फिल्म में उनकी अदाकारी तो देखने ही काबिल थी लोग उनकी खूब सराहना कर रहे थे उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला उन्हें उनके जीवन में न जाने कितने सम्मान मिले पर शायद ही किसी को अंदाजा था कि यह सम्मान उनकी जीवन का आखिरी सम्मान होगा यह खबर है बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन से जुड़ी हुई आपको बता दें कि 54 साल की उम्र में श्रीदेवी का दिल का दौरा पड़ने की वजह से निधन हो गया है वाक्या कुछ यूं है कि श्रीदेवी अपनी बेटी खुशी के साथ अपने भांजे मोहित मारवाह की शादी के लिए दुबई गई थी शादी का फंक्शन निपटाने के बाद श्रीदेवी ने अपनी बेटी जानवी की बर्थडे के लिए शॉपिंग करनी शुरू कर दी इधर बोनी कपूर भारत में ही थे उन्होंने अपनी पत्नी श्रीदेवी को सरप्राइज देने की सोची वह दुबई पहुंच गए दुबई पहुंचकर उन्होंने फोन किया कि आज मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है मैं तुम्हें आज बहुत मिस कर रहा हूं श्रीदेवी का जवाब था।

मैं भी तुम्हें बहुत मिस कर रही हूं और कुछ ही समय बाद बोनी कपूर उनके पास थे श्रीदेवी को यह सब देखकर बहुत खुशी हुई बोनी कपूर और श्रीदेवी एक ही कमरे में थे श्रीदेवी डिनर के लिए तैयार होने चली गई आधे घंटे तक श्रीदेवी वापस नहीं आई बोनी कपूर को भी कुछ चिंता हुई बोनी कपूर बाथरूम की तरफ गए बाथरूम का दरवाजा खोला तो उनके होश उड़ गए श्रीदेवी बाथ टब में डूबी हुई थी और मृत थी कुछ ही देर बाद पुलिस आ गई वहां पर जो जांच हुई उसकी रिपोर्ट में बताया गया श्रीदेवी ने शराब पी रखी थी और नशे में वह बात तब में डूब गई इसके बाद दुबई पुलिस ने केस बंद कर दिया भले यह केस बंद हो गया हो पर सवाल कभी बंद नहीं हुए क्या यह महज हादसा था देवी की मौत को लेकर सस्पिशन शक जो है वो गहरा या इसके पीछे कोई गहरा राज था कयामत का मंसर कैसे बना होगा मुझसे छुटकारे की उम्मीद तो होगी ।

27 फरवरी 2018 को श्रीदेवी का पार्थिव शरीर भारत लाया गया और फिर मुंबई की सड़कों में वैसा नजारा कभी नहीं दिखा हां इससे पहले कवि राजेश खन्ना किशोर कुमार और मोहम्मद रफी साहब की अंतिम यात्रा में ऐसी भीड़ दिखी थी लोगों की ऐसी भीड़ कि मानो पूरा हिंदुस्तान मुंबई की सड़कों में उतर आया है आज श्रीदेवी अमर हो गई थी [संगीत] आज उनके साथ उनके गाने और उनकी फिल्में भी अमर हो गई थी।

बताते हैं कि मिस्टर इंडिया फिल्म के स्वीटकल बनाने की बात चल रही थी अगर यह फिल्म बनती तो अनिल कपूर और श्रीदेवी की जोड़ी एक बार फिर दिखती पर यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया श्रीदेवी ने बॉलीवुड को सिर्फ फिल्में ही नहीं दी बल्कि एक युग दिया ऐसी अदाकारी कि जब वो कुछ भी ना बोले तब भी अदाकारी कर मुझे माफ कर दीजिए जी अगर चाहिए तो मार लीजिए मगर मुझे माफ कर दीजिए एक ऐसी हीरोइन जिसकी आंखें सब कुछ बोल दिया करती थी आपको पता है कि श्रीदेवी ने किन फिल्मों को ठुकरा दिया था वो फिल्में थी बाजीगर डर बेटा मोहरा दिल तो पागल है वैसे आप बताइएगा कि इनमें से कौन सी फिल्म जिसमें श्रीदेवी होती तो शायद कहानी कुछ और ही होती लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही पाठ कथा लिख रखी थी श्रीदेवी एक अनमोल हीरा जो आई और उसने राज किया और हमेशा हमेशा के लिए रहस्य बनकर चली गई श्रीदेवी मानो एक एहसास थी जब वह पर्दे पर आई तो सिनेमा जी उठा और जब पर्दे से गई तो मानो एक युग खत्म हो गया सोचिए 24 फरवरी साल 2018 को लाखों लोग क्यों आए क्योंकि वह एक अभिनेत्री का जादू था और जादू कभी मरता नहीं आज भी जब कांटे नहीं कट्टे वाला गाना बजता है तो आंखों के सामने नीली साड़ी में श्रीदेवी आ जाती हैं।

आज जब चांदनी फिल्म चलती है तो एहसास होता है कि पर्दे से निकल कर दिलों में आकर बैठ गई है श्रीदेवी भले ही आज वह हमेशा के लिए चली गई हो पर वो हमेशा हमेशा के लिए हमारे दिलों में अमर हो गई सैया ये मैया जरा थाम ले तू मुंह से

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