दोस्तों अगर मैं आपसे कहूं कि बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत और सफल अभिनेत्रियों में से एक ने अपनी [संगीत] पूरी जिंदगी एक ऐसे इंतजार में गुजार दी जो कभी खत्म नहीं हुआ तो शायद आपको यकीन नहीं होगा। जिस महिला के एक इशारे पर लाखों दिल धड़कते थे [संगीत] जिसकी एक झलक पाने के लिए लोग बेताब रहते थे। वही महिला रातों को अकेलेपन के साथ जीने पर मजबूर रही। उसकी जिंदगी में शोहरत आई, पैसा आया, [संगीत] सम्मान आया। लेकिन वह खुशी कभी नहीं आई। जिसकी उसे सबसे ज्यादा तलाश थी। और सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसने उसकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी? [संगीत] कौन सा रिश्ता उसकी पहचान बन गया और क्यों आज भी उसका नाम एक रहस्य की तरह लिया जाता है? इस कहानी का हर मोड़ आपको हैरान करेगा। इसलिए वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए। हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कामयाब और सबसे ज्यादा बदनसीब हीरोइन की बात अगर की जाएगी तो रेखा का नाम सबसे पहले लिया जाएगा। रेखा ने हिंदी सिनेमा को कई कामयाब फिल्में दी। बॉलीवुड में ना जाने कितनी हीरोइन आई और चली गई। बदलते वक्त के साथ उनका नामोनिशान तक हिंदी सिनेमा से गायब हो गया। [संगीत] लेकिन रेखा ने कामयाबी की वो मिसाल लिखी जो हर किसी के बस की बात नहीं। अपनी खूबसूरती और अदाओं से सबको दीवाना बनाने वाली रेखा सबसे रहस्यमई औरत भी बताई जाती हैं। मगर इस खूबसूरत हीरोइन की किस्मत ने हमेशा ही उन्हें धोखा दिया। [संगीत] रेखा ने फिल्मों में तो कामयाबी पा ली लेकिन रियल लाइफ में रेखा ने हमेशा हार का ही सामना किया। रेखा तब भी अकेली थी और आज भी अकेली हैं। शायद भगवान ने रेखा को यह अकेलापन विरासत में दिया है। लेकिन इसके पीछे क्या वजह है कि रेखा को एक रहस्यमय लेडी माना जाता है। इतनी कामयाबी और शहरत पाने के बाद भी
रेखा को अपनी [संगीत] पूरी जिंदगी अकेले क्यों बितानी पड़ी? क्यों रेखा ने कदम कदम पर सिर्फ बदनामी और ठोकर का सामना किया। इस वीडियो को आखिर तक जरूर देखना। आज हम रेखा की जिंदगी के कुछ ऐसे फैक्ट्स आपके सामने रखेंगे जिन्हें सुनने के बाद आपको रेखा की उदासी और स्ट्रगल भरी जिंदगी के बारे में पता चलेगा। मुझे यकीन है इस कहानी को सुनने के बाद आपको रेखा की किस्मत पर अफसोस जरूर होगा और प्यार मेरी किस्मत बन चुका है। आप ही बाज हार जाएंगे। मैं कोई बाजी नहीं खेल रही हूं। इस कहानी की शुरुआत 10 अक्टूबर 1954 से शुरू होती है। जब मद्रास में एक साउथ इंडियन कपल के घर में एक लड़की का जन्म होता है। इस लड़की का नाम था भानु रेखा गणेशन जिसे बाद में रेखा कर दिया गया। जब रेखा का जन्म हुआ तब रेखा के माता-पिता मैरिड नहीं थे। वो दोनों ही साउथ इंडियन एक्टर थे। उन दोनों के बीच प्यार हुआ और बिना शादी के ही एक बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम था रेखा। रेखा के फादर ने रेखा की मां से कभी शादी नहीं की। बताया जाता है कि वह एक अयास किस्म का इंसान था जिसके और भी अफेयर्स थे और उनसे भी कई बच्चे थे। रेखा को कभी अपने पिता का प्यार नहीं मिला क्योंकि रेखा के पिता ने रेखा को अपनी बेटी कभी माना ही नहीं था और ना ही वह उनके साथ रहता था। रेखा की मां जो कि साउथ इंडियन फिल्मों में ही छोटे-मोटे रोल किया करती थी और
किसी तरह रेखा की परवरिश कर रही थी। जब रेखा थोड़ी बड़ी हुई तब रेखा को भी बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में काम करना पड़ा क्योंकि घर की माली हालत बेहद खराब थी। रेखा को एक्टिंग करना बिल्कुल पसंद नहीं था। मगर मां की मजबूरी के कारण रेखा को फिल्मों में एक्टिंग करनी पड़ती थी ताकि फाइनेंशियली मां की थोड़ी हेल्प हो जाए। एक्टिंग करने के कारण रेखा को अपनी पढ़ाई भी छोड़ देनी पड़ी। रेखा सिर्फ नाइंथ क्लास तक ही पढ़ाई कर सकी। रेखा आज जितनी खूबसूरत दिखाई देती हैं मगर बचपन में रेखा इतनी खूबसूरत नहीं थी। बचपन में रेखा बेहद मोटी और डार्क कलर की थी। शक्ल सूरत से रेखा बेहद साधारण सी लगती थी। मगर उस जमाने में एक्टरों की कमी हुआ करती थी। इसलिए रेखा को छोटे-मोटे रोल मिल जाया करते थे और थोड़े बहुत पैसे भी। रेखा भी जानती थी कि वो खूबसूरत नहीं दिखती। जिस वजह से स्कूल में भी रेखा का मजाक उड़ाया जाता था। जब रेखा 13 साल की हुई तब बंबई से भी रेखा को फिल्मों में काम करने के ऑफर आने लगे। मां के कहने पर रेखा को मद्रास से बंबई आना पड़ा। बंबई आने की वजह यह थी कि बंबई में रेखा को ज्यादा पैसे ऑफर हो रहे थे। जबकि मद्रास में बहुत कम थे। किसी तरह रेखा बंबई आ गई और फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करने लगी। मगर 13 साल की लड़की के लिए यह आसान काम नहीं था। [संगीत] रेखा को शूटिंग के लिए एक ही दिन में कई अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता था। जिसमें रेखा को बड़ी दिक्कतें आती थी। रेखा बंबई में बिल्कुल अकेली थी और कोई सहारा नहीं था। रेखा को बंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी बिल्कुल पसंद नहीं आई, और रेखा को एक्टिंग और बंबई से बेहद नफरत हो गई। [संगीत] मगर रेखा अपनी मां का इकलौता सहारा थी। क्योंकि रेखा के पिता तो होकर भी नहीं थे। इसलिए रेखा बंबई में ही रहकर स्ट्रगल करने लगी और पैसा कमाने लगी। वक्त आया साल 1972 का [संगीत] जब रेखा 18 साल की हो गई। रेखा ने जूहू के एक अपार्टमेंट में एक फ्लैट खरीदा। उसी अपार्टमेंट के एक फ्लैट में जया भादुड़ी भी रहा करती थी। जया भी फिल्मों में काम करती थी। इसलिए जया की रेखा से मुलाकात हो गई। जया गुड्डी फिल्म से रातोंरात स्टार बन चुकी थी। उस वक्त तक जया की शादी नहीं हुई थी। रेखा जया से 6 साल छोटी थी। इसलिए रेखा जया को दीदी कहकर बुलाया करती थी। एक ही अपार्टमेंट में रहने के कारण दोनों ही एक दूसरे के फ्लैट पर जाया करती थी और इनमें बड़ी बहन और छोटी बहन जैसा रिश्ता भी बन चुका था। अमिताभ बच्चन उस वक्त जया भादुरी के बॉयफ्रेंड थे और वह अक्सर जया से मिलने उनके फ्लैट पर आया करते थे। जया के फ्लैट पर ही पहली बार अमिताभ और रेखा की मुलाकात हुई। लेकिन उस वक्त अमिताभ फिल्मों में अपने कदम पूरी तरह जमा नहीं पाए थे। जया तो एक स्टार बन चुकी थी। मगर अमिताभ अभी भी स्ट्रगल ही कर रहे थे। अमिताभ कई फिल्मों में काम तो कर चुके थे। मगर उन फिल्मों में अमिताभ का सेकंड रोल हुआ करता था। यानी अमिताभ ने अपने दम पर अभी तक कोई हिट फिल्म नहीं दी थी। जया भी अमिताभ को काम दिलवाने की पूरी कोशिशें थी। फिर साल 1973 में अमिताभ की फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम था जंजीर। यह अमिताभ बच्चन की पहली हिट फिल्म थी जिसमें जया भी अमिताभ के साथ थी। [संगीत] इस फिल्म की कामयाबी के बाद अमिताभ ने जया भादुड़ी से शादी कर ली। जया अमिताभ की जिंदगी में बेहद लकी साबित हुई। जंजीर फिल्म और जया से शादी करने के बाद अमिताभ को लगातार कई फिल्में मिलनी शुरू हो गई। साल 1975 में अमिताभ ने दो सबसे बड़ी सुपरहिट फिल्में दी। [संगीत] जिसमें एक थी दीवार और दूसरी थी शोले। इन फिल्म की कामयाबी ने अमिताभ को रातोंरात एक बड़ा सुपरस्टार बना दिया। [संगीत] इसके बाद रेखा को अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म ऑफर हुई जिसका नाम था दो अनजाने। यह फिल्म रेखा की जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाली थी। दरअसल इससे पहले रेखा ने अपनी जिंदगी में कभी कोई ढंग का रोल नहीं किया था। इस फिल्म में रेखा के हीरो अमिताभ बच्चन होने वाले थे। रेखा इस फिल्म में काम करने को लेकर बेहद खुश थी। क्योंकि रेखा पहली बार अमिताभ बच्चन के साथ काम करने वाली थी। अमिताभ उस वक्त एक बहुत बड़े सुपरस्टार बन चुके थे। फिल्म की शूटिंग तो शुरू हो गई। मगर रेखा और अमिताभ बच्चन में जमीन आसमान का फर्क था। [संगीत] जहां एक तरफ अमिताभ बच्चन अपने डिसिप्लिन के लिए फिल्म इंडस्ट्री में काफी मशहूर थे। [संगीत] वहीं रेखा अपने इनडिसिप्लिन के लिए बहुत मशहूर थीं। अमिताभ हमेशा सही टाइम पर फिल्म के सेट पर पहुंच जाते थे। [संगीत] टाइम से तैयार होना, डायरेक्टर के साथ सीन को डिस्कस करना और समझना और बिना वक्त गवाए शूटिंग खत्म होने के बाद सीधे अपने घर जाना। यह सब अमिताभ का डिसिप्लिन था। मगर रेखा डिसिप्लिन से कोसों दूर थी। [संगीत] रेखा कभी भी शूटिंग छोड़कर बाहर घूमने चली जाया करती थी। कभी भी सही वक्त पर कहीं ना पहुंचना यह सब रेखा की आदतें थी। मगर जब दो अनजाने फिल्म की शूटिंग शुरू हुई और रेखा ने जब अमिताभ के काम करने का तरीका देखा उससे रेखा बहुत ही ज्यादा प्रभावित हो गई। रेखा ने कभी अपनी जिंदगी में अमिताभ जैसा इंसान नहीं देखा था। डायरेक्टर और अमिताभ बच्चन चाहते थे कि फिल्म की शूटिंग सही समय पर पूरी हो जाए। मगर रेखा के लापरवाह होने के कारण फिल्म की शूटिंग में कई बार दिक्कतें आती थी। फिर अमिताभ ने ही रेखा को काम के प्रति सीरियस होने के लिए समझाया। फिर उसके बाद अचानक ही रेखा में बड़े गजब के बदलाव आ गए। रेखा भी अमिताभ की तरह बहुत डिसिप्लिन बन गई। अमिताभ का ऐसा असर हुआ था रेखा पर कि सबको हैरान करते हुए रेखा ने सुबह 6:00 बजे सबसे पहले ही फिल्म के सेट पर पहुंचना शुरू कर दिया था। रेखा अमिताभ से बहुत कुछ सीखने लगी। वो अमिताभ को देखती और ऑब्जर्व करती। दो अनजाने फिल्म की शूटिंग कोलकाता में हुई थी। अमिताभ कोलकाता शहर से बहुत अच्छी तरह से वाकिफ थे। क्योंकि अमिताभ फिल्मों में आने से पहले कई साल कोलकाता में रह चुके थे। मगर रेखा कोलकाता के बारे में कुछ नहीं जानती थी। यह सभी एक ग्रैंड होटल में ठहरे थे। शूट के बाद रेखा काफी सारा समय अमिताभ के साथ ही बिताती थी। अमिताभ कोलकाता से जुड़ी अपनी यादों के बारे में रेखा को बताते थे। फ्री समय पर दोनों ही अक्सर कोलकाता शहर घूमने चले जाते थे। रेखा धीरे-धीरे अमिताभ के करीब आने लगी थी। [संगीत] दो अनजाने फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई और 1976 में रिलीज भी हो गई। फिल्म सुपरहिट तो नहीं हुई मगर कामयाब फिल्म रही। पहली बार रेखा के काम की बहुत तारीफ हुई। रेखा की रिस्पेक्ट होने लगी और रेखा की गिनती एक अच्छी एक्ट्रेस में भी होने लगी। रेखा ने सारा क्रेडिट अमिताभ बच्चन को दे दिया। रेखा अमिताभ की परफेक्टनेस से बहुत इंप्रेस थी। जाहिर था कि रेखा अमिताभ की तरफ खींची चली जा रही थी। सिममी ग्रेवाल के शो में रेखा ने कहा था कि अमिताभ शादीशुदा हैं इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था। मैं इस इंसान के साथ जुड़ना चाहती थी। [संगीत] मैं उसका घर नहीं तोड़ना चाहती पर मैं उस इंसान के एहसास के साथ जीना चाहती हूं।
अमिताभ का ऐसा असर हुआ था रेखा पर कि रेखा ने अपनी लैंग्वेज पर काम करना शुरू कर दिया था। खूबसूरत दिखने के लिए अपनी फिटनेस और खाने-पीने पर ध्यान देना शुरू कर दिया था। अमिताभ वेजिटेरियन थे इसलिए रेखा भी वेजिटेरियन बन गई और शरीर फिट रखने के लिए योगा भी शुरू कर दिया था। रेखा बहुत अच्छे से सजने सवरने लगी। [संगीत] रेखा ने हर बार यही कहा कि अमिताभ की वजह से ही मैंने खुद को बदला है। बेहतर किया है। अमिताभ ही मेरी इंस्पिरेशन रहे हैं। आलाप, खून पसीना और ईमान धर्म जैसी फिल्म 1977 में आई और इन सभी फिल्मों में अमिताभ और रेखा एक साथ थे। अमिताभ ने ही रेखा को सिखाया कि कैसे बात करनी है, कैसे [संगीत] वॉक करनी है और अपने आप को कैसे प्रेजेंट करना है। अमिताभ ने रेखा को बहुत कुछ सिखाया। रेखा को यह एहसास हुआ कि अगर उसे इस आदमी के साथ चलना है, दिखना है तो अपना स्टैंडर्ड ऊपर करना होगा। रेखा अमिताभ की वजह से एक एक्ट्रेस और एक लेडी के रूप में बेहतर होती चली गई। रेखा अमिताभ के प्यार में दीवानी होती चली गई। वो यह भूल गई थी कि अमिताभ पहले से शादीशुदा है और अमिताभ की पत्नी को वो दीदी कहकर बुलाती थी। इसके बाद अमिताभ की रेखा के साथ दो मूवी और आई। एक थी मुकद्दर का सिकंदर और दूसरी थी मिस्टर नटवरलाल। इन दोनों ही फिल्मों से अमिताभ और रेखा की नजदीकियां और ज्यादा बढ़ गई। पहले तो सिर्फ रेखा ही अमिताभ पर फिदा थीं। मगर रेखा ने खुद को इतना बदल लिया था कि अमिताभ भी रेखा पर फिदा होने लगे। मीडिया में भी इनकी बातें होने लगी। यह दोनों एक दूसरे के प्यार में हैं। इस बात का लोगों को सिर्फ शक था क्योंकि [संगीत] इन दोनों ने कभी भी अपने रिश्ते के बारे में किसी को नहीं बताया था। इन दोनों के बीच में सच में ही कोई रिश्ता है इस बात के कोई सबूत नहीं थे। रेखा और अमिताभ की मुलाकात बेहद गुप्त तरीके से हुआ करती थी। यह दोनों रेखा की एक दोस्त के बंगले में मिला करते थे। जिसकी खबर किसी को कानों कान नहीं होती थी। उस वक्त मीडिया में भी यह खबर उड़ी थी कि अमिताभ और रेखा ने छुपकर शादी भी कर ली है। मगर इस बात के भी सबूत किसी के पास नहीं थे। [संगीत] फिर साल 1980 में जब ऋषि कपूर और नीतू की शादी के फंक्शन में पूरी फिल्म इंडस्ट्री आई हुई थी। तब अमिताभ बच्चन भी अपने पूरे परिवार के साथ शादी के फंक्शन में आए थे। फिर अचानक रेखा ने भी पार्टी में एंट्री मारी। रेखा नीतू की फ्रेंड थी। जब रेखा पार्टी में आई तो सबका ध्यान अचानक रेखा के ऊपर चला गया। दरअसल बात यह थी कि रेखा माथे पर सिंदूर लगाकर मंगलसूत्र पहनकर और एक शादीशुदा औरत की तरह सजध कर आई थी। जबकि रेखा की शादी कब हुई, किससे [संगीत] हुई, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता था। रेखा को देखकर वहां मौजूद सभी लोग यही अंदाजा लगा रहे थे कि कहीं यह सिंदूर रेखा ने अमिताभ का तो नहीं लगाया है। कहीं अमिताभ और रेखा ने शादी तो नहीं कर ली है। लोग यह सोच ही रहे थे कि तभी रेखा अचानक अमिताभ के पास चली गई और अमिताभ से बातें करने लगी। सभी का ध्यान रेखा अमिताभ की तरफ था। सभी का शक यकीन में बदल गया कि हो ना हो रेखा ने यह सिंदूर अमिताभ के ही नाम का लगाया है। उसी पार्टी में अमिताभ के माता-पिता और जया भादुड़ी भी मौजूद थी। जया भी अमिताभ रेखा को ही देखे जा रही थी और अपने आंसू पोंछे जा रही थी। यकीनन जया को यह नजारा देखकर बहुत धक्का लगा था। रेखा जब तक पार्टी में रही,
अमिताभ के ही साथ रहीं। उस रात पूरा मीडिया भी पार्टी में मौजूद था और मीडिया को भी अच्छा खासा मसाला मिल गया था। इसके बाद अखबारों और मैगजीनंस में रेखा, अमिताभ के अफेयर की खबरें छपने लगी। पूरी फिल्म इंडस्ट्री और मीडिया अमिताभ रेखा के बारे में बात करने लगे। रेखा को तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा मगर अमिताभ बच्चन की जिंदगी में तूफान आ गया। [संगीत] अमिताभ और जया के बीच में बहुत ज्यादा क्लेश होने लगे। अमिताभ एक सुपरस्टार थे और इस अफेयर की वजह से अमिताभ की पर्सनल लाइफ और करियर पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ने लगा। अमिताभ और जया के बीच काफी दरार आ गई थी। अमिताभ जया से दूर होते चले गए और रेखा के करीब होते चले गए। जया इस बात से बेहद दुखी रहने लगी। एक दिन जया ने रेखा को अपने घर डिनर पर बुलाया। [संगीत] अमिताभ उस वक्त घर पर नहीं थे। जया और रेखा ने साथ में डिनर किया और खूब यहां वहां की बातें की। मगर अमिताभ के बारे में दोनों ने ही कोई जिक्र नहीं किया। [संगीत] जब जया रेखा को दरवाजे तक छोड़ने गई, तब जया ने रेखा से सिर्फ एक ही बात कही कि मैं अमिताभ को कभी नहीं छोडूंगी किसी कीमत पर नहीं। यह सुनकर रेखा वहां से बिना कुछ बोले ही चली गई। जया की इस बात से रेखा को यह तो समझ आ गया कि रेखा कभी भी मिसेज बच्चन तो नहीं बन पाएंगी मगर रेखा ने फिर भी हार नहीं मानी। वो अमिताभ को पाने की कोशिश में लगी रहीं। उन्हीं दिनों धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की भी शादी हुई थी। [संगीत] धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा थे। मगर फिर भी धर्मेंद्र ने धर्म बदलकर हेमा मालिनी से शादी कर ली थी। यह बात भी पूरी फिल्म इंडस्ट्री को पता थी। धर्मेंद्र के ऐसा करने से रेखा को बड़ा हौसला मिला। क्योंकि रेखा भी अमिताभ से शादी करना चाहती थी। लेकिन अमिताभ पहले से शादीशुदा थे। रेखा भी अमिताभ से धर्म बदलकर शादी करने के लिए मनाने लगी। मगर अमिताभ पूरी तरह दुविधा में थे। अमिताभ भी जया के साथ अपनी शादी नहीं तोड़ना चाहते थे। क्योंकि जब अमिताभ कुछ नहीं थे तब भी जया अमिताभ के साथ हमेशा खड़ी रहीं। अमिताभ की कामयाबी में जया भादुड़ी का बहुत बड़ा हाथ था। स्ट्रगल के दिनों में जब अमिताभ पूरी तरह हार चुके थे तब जया भादुड़ी ने ही अमिताभ को ना सिर्फ हिम्मत दी बल्कि हर बुरे वक्त में जया अमिताभ के साथ खड़ी रहीं। अमिताभ रेखा के प्यार में पड़ तो गए लेकिन अमिताभ जया से अपनी शादी नहीं तोड़ना चाहते थे। [संगीत] जया भादुड़ी ने भी अमिताभ से कहा कि अब तुम रेखा के साथ कभी भी कोई फिल्म नहीं करोगे और रेखा को भी अमिताभ से दूर रहने के लिए कहा। इसके बाद अमिताभ और रेखा साथ में तो कोई फिल्म नहीं कर रहे थे। मगर इनका अफेयर चलता रहा। जिसकी भनक जया भादुड़ी को भी थी। उस वक्त यश चोपड़ा एक बहुत बड़े डायरेक्टर हुआ करते थे
और यश चोपड़ा की दोस्ती अमिताभ के साथ थी। यश चोपड़ा को भी अमिताभ और रेखा के अफेयर की बात मालूम थी और इस अफेयर की वजह से अमिताभ की शादीशुदा जिंदगी में क्या-क्या दिक्कतें आ रही हैं, यह सब भी यश चोपड़ा को पता था। यश चोपड़ा ने इस पूरे मामले से इंस्पायर होकर एक फिल्म बनाने का प्लान बनाया। यश चोपड़ा को एक फिल्म बनाने का आईडिया मिल गया। जिसमें एक हीरो शादीशुदा होते हुए भी एक औरत के प्यार में पड़ जाता है। इस कहानी पर यश चोपड़ा ने काम करना शुरू कर दिया और सबसे बड़ी हैरानी की बात यह थी कि यश चोपड़ा ने उन्हीं एक्ट्रेसेस को इस फिल्म के लिए चुना जिनकी रियल लाइफ की यह कहानी थी। यानी अमिताभ, रेखा और जया भादुड़ी। इस फिल्म का नाम था सिलसिला। इस फिल्म की कहानी को लेकर सबसे पहले यश चोपड़ा अमिताभ बच्चन के पास गए। अमिताभ बच्चन तो इस फिल्म के लिए राजी हो गए। मगर अमिताभ ने यश चोपड़ा से कहा कि अगर आप जय और रेखा को इस फिल्म में काम करने के लिए मना लेते हैं तो मैं यह फिल्म जरूर करूंगा। [संगीत] इसके बाद यश चोपड़ा रेखा से मिले और यह कहानी सुनाई। रेखा भी इस फिल्म में काम करने को तैयार हो गई [संगीत] जिसकी दो वजह थी। पहली यह कि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन थे और दूसरी यह कि यह कहानी रेखा, अमिताभ और जया की रियल लाइफ स्टोरी थी। इसके बाद यश चोपड़ा जया भादुड़ी से मिले। मगर जया ने इस फिल्म को करने से साफ इंकार कर दिया। क्योंकि इस फिल्म में रेखा थी और वह रेखा के साथ कभी ना तो खुद काम करना चाहती थी और ना ही अमिताभ को करने देना चाहती थी। मगर यश चोपड़ा जया को कन्विंस करने लगे। जब यश चोपड़ा ने इस कहानी का क्लाइमेक्स यानी एंड का सीन समझाया तब जया को इस कहानी का दी एंड बहुत पसंद आया। इस कहानी के एंड में यह दिखाया जाता है कि लास्ट में हीरो अपनी गर्लफ्रेंड को छोड़कर अपनी बीवी के पास वापस आ जाता है।
[संगीत] हीरो को यह एहसास हो जाता है कि वह जो कुछ भी कर रहा है गलत कर रहा है। इस अफेयर की वजह से कई जिंदगी खराब होंगी। इसलिए हीरो यह अफेयर हमेशा के लिए खत्म करके अपनी बीवी के पास लौट आता है। इस कहानी का क्लाइमेक्स सुनकर जया इस फिल्म के लिए मान जाती हैं। क्योंकि जया भी तो असल में यही चाहती थी कि अमिताभ अपना अफेयर हमेशा के लिए खत्म करके जया भादुड़ी के पास लौट आएं। इस फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई और यश चोपड़ा फिल्म में एग्जैक्ट वही सब दिखाने लगे जो इन तीनों की रियल लाइफ में चल रहा था। फिल्म के क्लाइमेक्स में भी यही दिखाया गया कि अमिताभ रेखा को छोड़कर अपनी पत्नी जया के पास लौट आते हैं। यह फिल्म बनकर तैयार हुई और रिलीज हो गई। सबको पता था कि यह फिल्म यश चोपड़ा ने अमिताभ रेखा और जया की रियल लाइफ के ऊपर बनाई है। यह फिल्म तो ज्यादा नहीं चली लेकिन इसी फिल्म की वजह से इत्तेफाक से अमिताभ रेखा के अफेयर का दी एंड जरूर हो गया। रियल में भी इनका अफेयर इसी तरह खत्म हुआ जैसा कि फिल्म के क्लाइमेक्स में दिखाया गया था। अमिताभ ने रेखा को छोड़ देना ही बेहतर समझा। अमिताभ यह समझ गए कि रेखा से प्रेम संबंध रखने का कोई नतीजा कभी नहीं निकलेगा। इस रिश्ते को खत्म कर देना ही सबके लिए बेहतर होगा और अमिताभ ने यही किया।
अमिताभ ने रेखा को हमेशा के लिए छोड़कर अपनी पत्नी जया को पूरी तरह अपना लिया। अमिताभ ने तो अपनी तरफ से यह रिश्ता खत्म कर लिया। मगर रेखा की तरफ से यह रिश्ता कभी खत्म नहीं हुआ। रेखा आज तक मीडिया में अमिताभ का नाम लेने या अपने प्यार का इज़हार करने में कभी नहीं कतराती। साल 1990 में रेखा ने दिल्ली के एक बिजनेसमैन मुकेश अग्रवाल से शादी की थी। यह एक अरेंज मैरिज थी और बहुत ही जल्दबाजी में हुई थी। मगर रेखा की यह शादी महज 7 महीने बाद ही टूट गई। रेखा की किस्मत में ना तो अमिताभ थे और ना ही कोई और कभी आ सका। रेखा ने पूरी जिंदगी अमिताभ के नाम कर दी और दोबारा कभी शादी नहीं की।
रेखा आज भी अपनी मांग में सिंदूर लगाती है और सब जानते हैं कि रेखा यह सिंदूर अमिताभ के नाम का लगाती हैं और कोई माने या ना माने मगर रेखा खुद को मिसेज बच्चन ही मानती हैं। तो दोस्तों यह थी उस अभिनेत्री की कहानी जिसने दुनिया भर की शोहरत हासिल की लेकिन अपनी निजी जिंदगी में वह खुशी कभी पूरी तरह नहीं पा सकी जिसकी तलाश हर इंसान को होती है। सफलता, प्यार, [संगीत] विवाद और तनहाई से भरा यह सफर आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है। आप इस पूरी कहानी को किस नजरिए से देखते हैं? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताइए। अगर आपको यह वीडियो पसंद आई हो, तो इसे लाइक करें। अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसी ही बॉलीवुड की अनसुनी, रहस्यमई और दिल छू लेने वाली कहानियों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें। मिलते हैं अगली वीडियो में एक और बड़ी कहानी के