जो यह तस्वीर अगर सामने आ रही है तो आप समझिए कि किस तरीके से इनकी प्लानिंग थी। हालांकि उस प्लानिंग को निरस्त किया गया है और जी सेवन समिट में बड़ी साजिश जो थी वह नाकाम की गई है। यह जानकारी आ रही है सामने और इस पूरे मामले में आपको बता दें कि कुछ गिरफ्तारियां भी हुई है। और अब इस पूरे घटनाक्रम में निश्चित तौर पर पूछताछ भी होगी। जांच का विषय भी होगा कि आखिरकार यह कैसे पहुंचे किस मंशा के साथ थे।
पीएम मोदी के काफिले में बाधा डालने का प्लान था। जी सेवन समिट में बड़ी साजिश नाकाम। कई खालिस्तानी समर्थक गिरफ्तार हुए हैं। तो आपको बता दें कि खालिस्तानी समर्थकों को अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा हिरासत में ले लिया गया है। फ्रांस [संगीत] के एवियन में आयोजित 52वें जी सेवन समिट के दौरान खालिस्तानी समर्थकों के एक समूह ने पीएम के काफिले पर इनकी योजना थी।
पहुंचने की और इस काफिले को डिस्टर्ब करना चाहते थे पीएम के। लेकिन उससे पहले ही आपको बता दें एसएफजे से जुड़े कई खालिस्तानी समर्थक गिरफ्तार किए गए हैं। और बड़ी साजिश जो है वह नाकाम होती हुई नजर आ रही है। अब पूछताछ भी होगी इस पूरे मामले में और जांच का विषय भी यह होगा। हालांकि यह पहला मौका नहीं है आपको बताएं यह जो खालिस्तानी समर्थक हैं।
इनकी तरफ से इस तरह की हरकतें पहले भी की गई है और खास करके एसएफजे की अगर आप बात करें तरफ से इस तरह की हरकत पहले भी की गई है। अब फिलहाल आपको बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर है और कई खालिस्तानी समर्थकों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। यह बड़ी खबर आपको लगातार बता रहे हैं जहां एसएफजे से जुड़े कई खालिस्तानी समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया है, पकड़ लिया गया है। पूछताछ निश्चित तौर पर होगी कि प्लानिंग थी और किस मंशा के साथ यहां पर यह पहुंचे थे। कई समर्थक यहां पर गिरफ्तार हुए हैं।
पीएम मोदी के काफिले में बाधा डालने का प्लान था और आपको बता दें कि इससे पहले भी दिल्ली में खालिस्तानी समर्थक जो हैं वह भी पकड़े गए थे और अब इनसे पूछताछ की जा रही है। क्या जानकारी मिल पा रही है इस पूरे घटनाक्रम में?
, क्या जानकारी मिल पा रही है इस पूरे घटनाक्रम में? कितने खालिस्तानी थे? क्या प्लानिंग थी इनकी? देखिए एग्जैक्ट संख्या तो है जो अभी साफ नहीं हुआ है लेकिन कम से कम जो है तीन-चार की संख्या में जो है एक खालिस्तानी गुट के जो लोग हैं वह वहां पर उनको गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि जो लोग हैं जो खालिस्तानी है यह सभी के सभी जो है सिक्स फॉर जस्टिस जो है जो फ्रांस और कनाडा जैसे देशों में जो एक्टिव है यह और यह गुट के लोग हैं और इनकी जो मंशा जाहिर सी बात बताई जाए तो यह जो बताई जा रही है कि ये जो जो पीएम मोदी की जो जो जो अभी जी सेवन में जो भागीदारी चल रही है उसको जो है डिस्टर्ब करने की कोशिश है।
कहीं ना कहीं जो है जो जो हेडलाइंस है जो दुनिया भर की नजरें जाहिर सी बात है जी सेवन पर है। उसमें कहीं ना कहीं इनको जो जो जो खालिस्तानी है उनको ये मौका लगा कि यहां पर अगर कुछ प्रोटेस्ट वगैरह किया जाए तो कहीं ना कहीं जो हेडलाइंस है दुनिया भर की नजरें हैं वो उनका जो कॉज है जिसको लेकर वो जिसको कॉज कॉज है जिसको लेकर वो लोग लगातार जो है एक्टिव रहते हैं और प्रोटेस्ट भी करते रहते हैं।
है जो हमने देखा है कि उनकी तरफ से जो है कई दफा जो आर्म्स एक्टिविटीज है वो भी जो है किए जाते हैं तो कहीं ना कहीं एक बार फिर से वो वो मौके बनाने की कोशिश की गई कि जिस तरह से हाई प्रोफाइल ये पूरा जो जो जो अभी जी सेवन चल रहा है उसको उड़ाने की कोशिश की गई थी। फिलहाल जो और जानकारी जाहिर सी बात है ये जो है इसमें आनी बाकी है लेकिन फिलहाल जो है।
लेकिन मौका रहते जो है फ्रांस की पुलिस ने उन सभी को जो है अगर गिरफ्तार कर लिया है और उनसे अभी पूछताछ की जा रही है कि आखिर उनकी एग्जैक्टली उनकी मंशा क्या थी? आखिर वो वहां पर क्या कर रहे थे? दोबारा वही हम देख रहे थे जो 2024 में भी देखने को मिला था जब प्रधानमंत्री मोदी कनाडा दौरे पर गए थे।
वहां पर भी जो है कुछ खालिस्तानियों ने इसी तरह से जो है डिस्टर्ब करने की कोशिश की थी। तो ये कोई पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी का जो दौरा है या फिर काफिला है उसको जो है उसमें किसी प्रकार का खलल डालने की कोशिश किसी प्रकार की बाधा डालने की कोशिश जो है वो सिख फॉर जस्टिस यानी खालिस्तानी जो है उन लोगों ने की है।
लेकिन देखना ये होगा कि आखिरकार इनका मकसद क्या था और एग्जैक्टली इनकी संख्या कितनी थी जिनको फ्रांस की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बिल्कुल अच्छा अतुल देखिए जैसा कि आप भी कह रहे हैं ये पहला मौका नहीं है और अब भारत को इस दिशा में और कई बड़े कदम लेने की जरूरत है। क्या वो वक्त आ चुका है? जी देखिए भारत जो है लगातार उस दिशा में कदम उठाते भी रहा है। इनफैक्ट अगर आप देखें तो चाहे वो आप याद कीजिए एक दौर हमने देखा था जब कनाडा के जो पूर्व प्रधानमंत्री थे जस्टिन ट्रूडो उनके साथ जो है भारत के रिश्ते किस तरह से जो है खट्टे हो गए थे। इसी मसले पर सिख फॉर जस्टिस जो सिख फॉर जस्टिस के जो खालिस्तानी लोग हैं उन पर कार्रवाई को लेकर जो है आरोप लग रहे थे कि भारत ने जो है गुरपंत सिंह नाम का जो है, उसको मारने की कोशिश की थी और उस पर जो है पूरे दोनों देशों के बीच जो है रिश्ते भी जो है कई दफा जो है तनावपूर्ण स्थिति में चले गए थे। तो कहीं ना कहीं भारत जो है लगातार अपनी तरफ से हर तरह की कोशिश कर रहा है कि उनको जो है एक तरह से चेक किया जाए।
उनकी जो है अपनी लिमिट्स में रखा जाए। लेकिन जाहिर सी बात है जो फ्रांस या कनाडा जैसे देश है, कनाडा विशेषकर वहां पे वजह से आप देखते हैं कि अक्सर वो एक कई दफा प्रधानमंत्री मोदी के काफिले में जो है वो डिसरप्ट करने की कोशिश करते हैं। कभी दौरे का जो पूरा फोकस है उसको जैसे इस केस में हम देख रहे हैं डिसरप्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। तो कभी हमने देखा है कि जो भारतीय दूतावास का जो हाई कमीशन है, वहां भी जो है प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं। तो कहीं ना कहीं जो है हालांकि मार्क कार्नी के आने के बाद से जो है दोनों देशों के बीच जो है रिश्ते हैं, उनमें सुधार हुआ है। तो कोशिश तो उम्मीद की जा सकती है कि जो एलिमेंट्स हैं ऐसे देशों में उनको जो है बेहतर जो है कंट्रोल किया जाए आगे चल के।
ये होगा कि किस तरीके से इनको कंट्रोल किया जाता है, किस तरह से सहयोग बाकी देशों के भी लिए जाते हैं।