अयोध्या के राम मंदिर के दान पात्रों से चढ़ावे की चोरी ने सबको चौंका दिया है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक 200 करोड़ से ज्यादा की चोरी का अनुमान है। नोटों की गिनती करने वाले ट्रस्ट के 50 लोग संदेह के घेरे में हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही हैं। इस मामले को लेकर यूपी सरकार भी सख्त है। सरकार ने तीन सदस्य एसआईटी का गठन किया है। जिसे सरकार को 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। बाकी पीएमओ भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की बात 7 जून को पता चली थी।
एक कर्मचारी ने दान गिनते समय कैश का एक बंडल छिपाने की कोशिश की। सीसीटीवी फुटेज में यह कैद हो गया। पूछताछ में उसने पुराने कांड भी गिना दिए। फिर 9 जून को यह मामला सार्वजनिक हुआ। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया। जांच एजेंसियां फिलहाल दान राशि की गिनती से जुड़े कई कर्मचारियों और अन्य लोगों से पूछताछ कर रही हैं। इस मामले में सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा हो रही है वो है रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव। सूत्रों के मुताबिक टिन्नू यादव लंबे समय से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी और ड्राइवर के रूप में काम करता रहा है। लेकिन राम मंदिर परिसर के मैनेजमेंट में भी वह काम करता था।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कोई राम मंदिर में एक कलम लेकर अंदर नहीं जा सकता। लेकिन टिन्नू का रसूख ऐसा था कि उसकी गाड़ी के अंदर कुछ भी हो वो बिना चेक हुए अंदर तक जाती थी। टिन्नू की अयोध्या में ₹50 करोड़ की संपत्ति वाली जमीनें और घर की जानकारी सामने आई है। वैसे तो रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का इतिहास बेहद साधारण रहा है। पिता तुलसीराम यादव नया घाट पर एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे।
साल 199495 के दौर में टिन्नू अयोध्या की गलियों में पेट पालने के लिए ऑटो चलाया करता था। इसी दौरान उसकी किस्मत ने करवट ली और वह श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आ गया। इसके बाद इसकी किस्मत बदल गई। बताया जा रहा है एक समय ऑटो चलाकर जीवन यापन करने वाला यह व्यक्ति आज करोड़ों रुपए की संपत्तियों का मालिक है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच एजेंसियां संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल कर रही है। मामले में टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव का भी नाम सामने आया है। मनीष दान राशि की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा बताया जा रहा है। चर्चा है कि उसकी बताई जगह से ₹36 लाख कैश मिला है। इसी तरह राम मंदिर में दान में चढ़ने वाले सोने चांदी के जेवरों की देखरेख करने वाले केडी तिवारी भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। इन्होंने ₹1.5 करोड़ की जमीन खरीदी है। यह भी जांच के दायरे में है। आरोप यह भी है कि केडी तिवारी ने ₹5 करोड़ की संपत्ति जुटाई है। वहीं मामले की जांच में अब तक एसआईटी ने दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें लव कुश मिश्रा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उसके घर से करीब ₹1 लाख नगद मिलने की बात कही जा रही है। वहीं उसका साला अनुकल्प मिश्रा भी जांच के घेरे में है। अनुकल्प मिश्रा भी नोट गिनने वाली टीम का हिस्सा था।
अनुकल्प मिश्रा ने भी 60 लाख की जमीन खरीदी है। लवकुश मिश्रा एक समय कार मैकेनिक था लेकिन दान समिति में गया तो जिंदगी बदल गई। उसके घर से ₹1 लाख मिले हैं। जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। पिछले 9 दिनों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर अपने एक्स हैंडल पर लगातार आठ पोस्ट कर चुके हैं। अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे में चोरी के बाद कितना दुर्भाग्य है कि अब राम मंदिर और साधुओं की जांच अधिकारी करेंगे। सनातन धर्म के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है? यह सनातन धर्म का अपमान है। अगर कोई बात हुई है तो कैमरा बंद करके आपस में बातचीत कर लो और चढ़ावा वापस डाल दो। प्रभु श्री राम माफ कर देंगे। वहीं सपा नेताओं ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। अयोध्या से सपा सांसद अवधदेश प्रसाद ने इसे देश की सबसे बड़ी धार्मिक लूट बताते हुए ट्रस्ट के सदस्यों को जांच पूरी होने तक हटाने की मांग की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी को राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि सपा का कभी भी राम मंदिर निर्माण में कोई भी सहयोग नहीं रहा है। राम भक्तों पर गोली चलवाने का पाप भी समाजवादी पार्टी के ऊपर अभी भी कलंक के रूप में है। तो समाजवादी पार्टी को कोई अधिकार नहीं है। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे बजरंग दल के संस्थापक विनय कटिहार ने ट्रस्ट से जुड़े सभी को चोर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं बीजेपी से कई बार के सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह के बयान ने भी कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे सच बोलेंगे तो बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है क्योंकि वे लोग बहुत ताकतवर हैं इसलिए डर के मारे मैं सच नहीं बोल रहा हूं। वहीं बढ़ते विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्य एसआईटी का गठन किया है। इस टीम में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत, आईपीएस अधिकारी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। एसआईटी को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। दूसरी ओर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से साफ इंकार किया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने वीडियो जारी कर कहा है कि दान पेटियों की गिनती और उससे जुड़े सभी कार्यों का नियमित ऑडिट किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि अब तक किसी भी जांच या ऑडिट में कोई अनियमितता सामने नहीं आई है। आपको बता दें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और परिसर प्रशासक गोपाल राव की भूमिका पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। मंदिर न्यास के सूत्रों के मुताबिक मामले के तूल पकड़ने के बाद महासचिव चंपत राय बीमार पड़ गए हैं। उनका शुगर लेवल अचानक बढ़ गया है और सर्दी जुकाम की भी शिकायत है। वहीं ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा अपनी आंख की जांच कराने के लिए केरल चले गए हैं। फिलहाल अब देश की नजर एसआईटी जांच पर टिकी हुई है। सवाल यह है कि क्या यह मामला कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या फिर इसके तार कहीं और तक जुड़े हैं? क्या करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है या फिर यह केवल कुछ लोगों की व्यक्तिगत करतूत है? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट में सामने आ सकते हैं। फिलहाल अयोध्या का यह मामला देश में चर्चा में बना हुआ है।