पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का 2025 में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह सिख गुरुओं की तस्वीर के सामने कथित तौर पर की छींटे मार रहे थे। वीडियो पर बवाल हुआ तो सीएम ने सफाई दी। कहा कि वीडियो एआई जनरेटेड है।
लेकिन अब श्री अकाल तख्त साहिब ने सीएम भगवंत मान के इस दावे को खारिज कर दिया है। दावा किया है कि वीडियो रियल है। 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित सिख संगठनों की बैठक में अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज ने दावा किया कि कथित वीडियो ना तो एआई से बनाया गया है और ना ही उसमें कोई छेड़छाड़ की गई है। वीडियो पूरी तरह से ओरिजिनल है।
वायरल वीडियो को जांच के लिए दो अलग-अलग लैब्स में भेजा गया था। जिसमें एक लैब केंद्र सरकार की थी और एक लैब खुद पंजाब सरकार की थी। इन लैब्स की रिपोर्ट की विश्वसनीयता को लेकर जब सवाल पूछा गया तो जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज ने कहा कि यह वही लैब है जिनकी रिपोर्टों के कारण मणिपुर के एक मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ा था।
लैब ने हमें भरोसा दिया है कि अगर किसी को उनकी रिपोर्ट पर शक है तो वे अदालत में पेश होकर उनका बचाव करेंगे। साथ ही जदार ने कहा कि अगर पंथ की ओर से निर्देश मिलता है तो इस मामले पर फैसला सुनाने के लिए पांच उच्च पुजारियों की बैठक भी बुलाई जाएगी। जदार ने पंजाब सरकार को खुली चुनौती भी दी और कहा कि अगर उन्हें अभी भी लैब की रिपोर्ट पर कोई शक है तो वे अपनी पसंद की किसी भी एजेंसी या लैब से वीडियो की जांच करवा सकते हैं।
माना जा रहा है कि यह चुनौती सीएम भगवंत मान की बढ़ने वाली मुसीबत का संकेत है। अब जिस वीडियो को लेकर इतना कुछ हो रहा है उस वीडियो में क्या था? इसे भी जान लेते हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला पहली बार अक्टूबर 2025 में सामने आया था। जब एनआरआई जगमान समरा ने इंटरनेट पर वीडियो जारी किया था।
वीडियो में कथित तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को हाथ में शराब का ग्लास पकड़े हुए दिखाया गया। वीडियो में वह सिख गुरुओं के ऊपर ग्लास से शराब के छींटे मारते दिखाई दे रहे थे। शिरोमणि अकाली दल और सिख धार्मिक संगठनों ने इसे सिख मर्यादा का उल्लंघन और गुरुओं का घोर अपमान बताया था। तब विवाद के बाद आप और सीएम ऑफिस के लोगों ने इस वीडियो को सिरे से खारिज कर दिया था।
दावा किया था कि यह वीडियो एआई जनरेटेड है। डीप फेक है जिसे सीएम की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर फैलाया गया है। हालांकि इस स्पष्टीकरण से श्री अकाल तख्त साहिब संतुष्ट नहीं हुआ था। अकाल तख्त के ज्ेदार कुलदीप सिंह गणगज ने 5 जनवरी 2026 को सीएम को तलब किया था। सीएम भगवंत मान 15 जनवरी को श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश भी हुए थे। वो पहले नंगे पैर नजरें झुकाकर गोल्डन टेंपल पहुंचे थे। फिर माथा टेकने के बाद सबूतों से भरे काले रंग के दो बैग लेकर सचिवालय चले गए थे। इस पेशे के बाद सीएम ने कहा था कि वे अकाल तख्त को चैलेंज करने की औकात मेरी नहीं है और यही सफाई मैंने अंदर भी दी है। तब जठेदार कुलदीप सिंह गढ़गज ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पंजाब सीएम भगवंत मान ने स्वीकार किया है कि उन्हें सिख सिद्धांत मर्यादा का ज्ञान नहीं है।
अब 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हमने वायरल क्लिप को लेकर पंजाब सरकार से जांच की मांग की थी। तब हमें कोई जवाब नहीं मिला था। जिसके बाद हमने खुद दो लैब्स के जरिए इस वायरल वीडियो की जांच कराई जिससे यह साबित हो रहा है कि सिख गुरुओं की बेअदबी करते सीएम का वायरल वीडियो डीप फेक या एआई जनरेटेड नहीं है बल्कि असली है। इस मामले में एक अपडेट यह भी है कि अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को गुरु दोखी और खालसा पंथ विरोधी भी घोषित कर दिया है। गुरु दोखी का मतलब वो जो गुरु के खिलाफ जाए और खालसा पंथ विरोधी वो जो कम्युनिटी यानी सिख कम्युनिटी के खिलाफ जाए।
अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में अकाल तख्त सीएम के खिलाफ क्या एक्शन लेता है और उस पूरे मामले में सीएम की ओर से क्या सफाई आती है।