आज हम बॉलीवुड में थोड़ा पीछे जाके इन पांच एक्स्ट्रामेरिटल अफेयर्स के बारे में बात करेंगे जो बॉलीवुड को शायद पता है ऑफ कोर्स पता है लेकिन बहुत कम ऑडियंस तक ये मैगजीन गॉसिप पहुंच पाई। आज की पहली कहानी शुरू होती है 1950 के एक विज़नरी जीनियस से सिनेमा के पोएटिक और ट्रैजिक फिल्म मेकर गुरुदत्त एक ऐसे फिल्म मेकर जिन्होंने दर्द, अकेलेपन और अधूरे प्यार को टाइमलेस आर्ट में बदल दिया। लेकिन क्या इन सब की इंस्पिरेशन उन्होंने अपनी रियल लाइफ से ली थी? खुशियों की मंजिल ढूंढी तो गम की गर्द मिली। गुरुदत्त सिर्फ शादीशुदा ही नहीं बल्कि तीन बच्चों के पिता भी थे जब उन्होंने पहली बार 17 साल के यंग डांसर वाहदा रहमान को देखा था। वाहिदा रहमान को उन दिनों तमिल मूवी रोजुलू मराई में अपने डांस के लिए काफी फेम मिलना शुरू हुआ था। जब गुरुदत्त ने उन्हें पहली बार देखा तो वो उनसे इतने मेसम्मराइज हुए कि उन्हें मुंबई बुला लिया ताकि वो अपनी मूवी में एक फ्रेश फेस लॉन्च कर पाए। वैदा कोई ऐसी छुईमुई लड़की नहीं थी। 17 साल की उम्र में उन्होंने गुरुदत्त फिल्म्स के सामने कंडीशन रखी कि वह अपना नाम नहीं बदलेंगी और कपड़े अपनी मर्जी के पहनेंगी। उसके बाद गुरुदत्त ने उन्हें अपनी फिल्म सीआईडी से लॉन्च किया। यह कहानी है एक मेंटोर और उसके म्यूज की। प्यासा और कागज के फूल जैसी कल्ट क्लासिक बनाते बनाते यह आर्टिस्टिक ऑब्सेशन एक गहरे दबे हुए अफेयर में बदल गया। गुरुदत्त की वाइफ लेजेंड्री सिंगर गीता दत्त अपने बच्चों के लिए सब सहती रही। लेकिन उनका घर अंदर से टूट चुका था और फिर आया एक ऐसा वायलेंट इमोशनल ट्विस्ट जिसने सब तबाह कर दिया। 1962 में फिल्म साहिब बीवी और गुलाम के दौरान गुरुदत्त को शक हुआ कि उनकी वाइफ गीता का भी किसी के साथ अफेयर चल रहा है। गुरुदत्त का बहुत टफ फेस चल रहा था। फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स, अल्कोहलिज्म, ए्जायटी अटैक्स, डिप्रेशन और उसके चलते वाहिदा ने भी खुद को उनसे डिस्टेंड कर लिया था। लेकिन उनकी वाइफ की लाइफ में भी अब और कोई है। इस थॉट से हर्ट हुए अपने मेल ईगो को ठंडा करने के लिए और गीता को वापस पाने के लिए उन्होंने वाहिदा रहमान को लाइक अ हॉट ब्रेक छोड़ दिया। ओवरनाइट वाहिदा खान नेट्रा स्टूडियोज के मेकअप रूम से एक्सेस छीन लिया गया।
दिस पब्लिक इमुशन ब्रोक हर हार्ट। उन्होंने गुस्से में कहा कि आई विल नॉट स्टेप इनसाइड दैट स्टूडियो अगेन। जब उन्हें आखिरी सीन शूट करने के लिए मनाया गया तो उनकी शर्त यह थी कि मैं गुरुदत्त को टच नहीं करने दूंगी और ना ही कोई डायलॉग बोलूंगी। 10 अक्टूबर 1964 को स्ट्रेस और एक्सट्रीम डिप्रेशन के चलते गुरुदत्त ने अल्कोहल और स्लीपिंग पिल्स का हैवी ओवरडोज लेकर अपनी जान दे दी। कुछ लोग कहते हैं कि वो फाइनेंशियल बर्डन में थे और कुछ कहते हैं कि गीता के छोड़ने के बाद वो इतना स्ट्रेस फील करने लग गए। लेकिन उनके जाने के कुछ ही साल बाद गीता दत्त ने भी हैवी ड्रिंकिंग के चलते लिवर डैमेज से दम तोड़ दिया था। हमने तो जब कलियां मांगी कांटों का हार मिला। अब चलते हैं 1980 के उस दौर में जब स्क्रीन पर डिस्को का राज चल रहा था। मिथुन चक्रवर्ती द अल्टीमेट सुपरस्टार जो उस टाइम मैरिड थे एक्ट्रेस योगिता बाली से और दूसरी तरफ थी श्रीदेवी। एक ऐसी एक्ट्रेस जिन्हें देखकर पूरी इंडस्ट्री पागल थी। दोनों की मुलाकात 1984 में हुई फिल्म जाग उठा इंसान के सेट पर। केमिस्ट्री इतनी अमेजिंग थी कि ऑन स्क्रीन रोमांस जल्दी ही एक गहरे अफेयर में बदल गया। इट इज वाइडली रिपोर्टेड कि 1985 में दोनों ने चुपके से शादी भी कर ली थी। लेकिन यह शादी कोई फेरी टेल तो थी नहीं। मिथुन अपनी पहली वाइफ योगिता को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। श्रीदेवी को अब द अदर वुमेन का टैग चुभने लगा था। लेकिन दिक्कतें तब बढ़ गई जब मिथुन को शक होने लगा कि श्रीदेवी और फिल्म मेकर बोनी कपूर के बीच में कुछ चल रहा है। आई थिंक वास् राइट। और श्रीदेवी ने उस टाइम क्या किया अपना इनोसेंस प्रूव करने के लिए? उन्होंने बोनी कपूर को राखी बांध दी। यस। मिथुन का गुस्सा और जेलेसी शांत करने के लिए श्रीदेवी ने बोनी कपूर को राखी ब्रदर बना लिया था। उन्हीं बोनी कपूर को जिनसे उन्होंने बाद में शादी की। लेकिन इस पूरे इमोशनलेस तमाशे के पीछे एक और औरत धीरे-धीरे मर रही थी। मिथुन की वाइफ योगिता बाली। जब योगिता को इस सीक्रेट मैरिज की खबर मिली तो उनका दिल इस तरह टूटा कि उन्होंने सुसाइड करने की कोशिश की। योगिता बाली ने मीडिया में रोते हुए यह तक कहा था कि मैं मिथुन को एक्सेप्ट कर लूंगी। चाहे वह दूसरी ही वाइफ ही क्यों ना ले आए। श्रीदेवी को जब समझ आया कि मिथुन अपनी फैमिली को कभी नहीं छोड़ेंगे तो उनका सब्र खत्म हो गया। 1988 में उन्होंने इस रिश्ते को खत्म कर दिया। कोस्टार सुजाता मेहता ने बताया कि श्रीदेवी इस ब्रेकअप से अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी। सेट पर वह अकेले कोने में बैठी रहती थी। लेकिन जैसे ही डायरेक्टर बोलते एक्शन तो वो फ्लोलेसली स्क्रीन पर अपनी प्रेजेंस देती
। बिहाइंड ऑल द ग्लिटर ऑफ द सुपरस्टार देयर वाज़ ओनली अ ब्लीडिंग हार्ट। अगर तुम पर मेरी जिम्मेदारी आ गई तो तुम तो मुझे जमीन पर पांव भी नहीं रखने दोगे। अगर हम बॉलीवुड के सबसे आइडल और डिवोटेड कपल्स की बात करें तो दिलीप कुमार और सायरा बानू का नाम सबसे ऊपर आता है। 1966 में जब दोनों की शादी हुई तो दिलीप साहब 44 के थे और सायरा बानू सिर्फ 22 की। उनका रिश्ता 16 साल तक बेमिसाल रहा। लेकिन 1981 82 में एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे देश को शॉक कर दिया। सायरा बानू ने एक सुबह न्यूज़ पेपर खोला और उनके आंखों के सामने जो हेडलाइन थी उसने उनका सब कुछ हिला दिया। दिलीप कुमार ने चुपके से एक पाकिस्तानी औरत आसमा रहमान से दूसरी शादी कर ली। सायरा बानू को इस न्यूज़ पर बिल्कुल भरोसा नहीं हुआ। पहले तो उन्हें लगा कि यह कोई गंदी अफवाह है। रूमर्स हैं। लेकिन जब सच सामने आया उनका अनशेकेबल ट्रस्ट हमेशा के लिए बिखर गया।
लेकिन इस चीटिंग इस धोखे के पीछे एक बहुत गहरा दुख था। बच्चा ना होने का दुख। सायरा बानू एक बार प्रेग्नेंट हुई थी पर उनका मिसकैरज हो गया। जिसके बाद वो कभी मां नहीं बन पाई। दिलीप साहब के परिवार और उनकी बहनों ने उन पर दबाव बनाया कि उन्हें एक वारिस चाहिए और उन्हें आसमा से शादी करने के लिए उकसाया। दिलीप साहब और आस्मा की मुलाकात हैदराबाद के एक क्रिकेट मैच में हुई थी। दिलीप साहब ने बाद में अपनी ऑटोबायोग्राफी द सब्सटेंस एंड द शैडो में लिखा कि उन्हें फंसाया गया था। आसमा और उनके घर वाले दिलीप साहब का हर जगह पीछा करते थे। उन्होंने लिखा, आई वाज़ कंप्लीटली अनअवेयर ऑफ़ अ कनाइवेंस दैट वाज़ बीइंग मिसविवियसली प्रेपेचुएटेड टू ड्रॉ अ कमिटमेंट फ्रॉम मी। लेकिन गलती तो गलती थी। सायरा के आंसुओं ने दिलीप साहब को उनकी गलती रियलाइज करवाई। उन्होंने सायरा से भीख मांगी कि उन्हें थोड़ा वक्त दिया जाए ताकि वह इस ग्रेव मिस्टेक को ठीक कर सकें। 2 साल के अंदर 1983 में दिलीप साहब ने आसमा को डिवोर्स दे दिया और सायरा का विश्वास वापस जीतने के लिए उन्होंने एक लीगली बाइंडिंग लेटर ऑफ कमिटमेंट साइन किया जिसमें उन्होंने कसम खाई थी कि वो लाइफ में कभी दूसरी शादी के बारे में सोचेंगे भी नहीं। रिश्ता तो बच गया बट ट्रस्ट छोटी सी उम्र में है लग गया रो कहते हैं लोग मैं मर जाऊंगी स्मिता पाटिल पैरेलल सिनेमा की देवी एक मशाल जो फेमिनिस्ट मूवमेंट का चेहरा थी जो पर्दे पर औरतों के हक के लिए लड़ती थी आदमी की तरह पानी पीने के लिए पहले झुक कर हाथ फैलाने पड़ते लेकिन पैराडॉक्स देखिए उनकी अपनी रियल लाइफ उनकी आईडियोलॉजी की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई क्या है औरतों का जो रूप बनाया गया है वो इतनी बरसों से बनाया गया है कि कमजोर उसको दिखा के उसको और कमजोर किया जाता है। 1982 में फिल्म भीगी पलके के सेट पर उन्हें प्यार हुआ एक्टर राज बब्बर से। लेकिन एक प्रॉब्लम थी। राज बब्बर वाज़ ऑलरेडी मैरिड टू थिएटर एक्ट्रेस नादिरा बब्बर और उनके बच्चे भी थे। बट फिर स्मिता ने वही किया जो उनके फेमिनिज्म के खिलाफ था। उन्होंने एक मैरिड आदमी से दिसंबर 10, 1981 को एक शांत सेरेमनी में शादी कर ली। जबकि राज ने अपनी पहली वाइफ को लीगली डिवोर्स नहीं दिया था। फेमिनिज्म तब तक अच्छा है जब तक वो आपको सर्व करें। लैक ऑफ ओपोरर्चुनिटीज एल्सवेयर टू मीट न्यू पीपल। और आपको जब टफ डिसीजंस लेने हो तो आप भूल जाओ कि आप कितने बड़े मूवमेंट के रिप्रेजेंटेटिव हैं। इसके बाद शुरू हुआ स्मिता का प्राइवेट हेल्थ। जिस मीडिया और जिन फेमिनिस्ट ऑर्गेनाइजेशंस के लिए उन्होंने काम किया था उन्होंने ही स्मिता को आइसोलेट कर दिया और उन्हें होम ब्रेकर का टैग दे दिया। अरुणा राजे ने बताया कि स्मिता आखिरी दिनों में भयंकर अकेलेपन से गुजर रही थी। अपने इस रिलेशनशिप को सोसाइटी की नजर में वैलिडेट करने के लिए 7 महीने की प्रेग्नेंट स्मिता ने डॉक्टर्स के मना करने के बावजूद करवा चौथ का व्रत रखा सिर्फ एक सुहागन का स्टेटस पाने के लिए। लेकिन ट्रेजडीज ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। 28 नवंबर 1986 को उन्होंने बेटे प्रतीक बब्बर को जन्म दिया। लेकिन पोस्टपार्टम कॉम्प्लिकेशंस के चलते सिर्फ 31 साल की उम्र में उनकी डेथ हो गई। उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने रोकर यह बताया था कि स्मिता की आखिरी ख्वाहिश थी मुझे सुहागन बना के ले जाना। इसी वजह से दीपक ने उनकी बॉडी का सुहागन की तरह से मेकअप किया। स्मिता के जाते ही राज बब्बर वापस अपनी पहली वाइफ नादिरा के पास चले गए। नदिरा ने उन्हें माफ़ कर दिया और स्मिता ने एक सुहागन होने की आइडेंटिटी क्राइसिस में अपना दम तोड़ दिया। जन्मजनम का साथ था तुम्हारा हमारा। आज की आखिरी कहानी उनके बारे में है जिसे दुनिया ट्रेजडी क्वीन कहती है।
द वन एंड ओनली मीना कुमारी। क्योंकि मीना कुमारी की रियल लाइफ उनकी किसी भी फिल्म से 100 गुना ज्यादा दर्दनाक थी। उनके हस्बैंड, फिल्म मेकर कमल अमरोही उन पर एक सफोकेटिंग कंट्रोल रखते थे। 6:00 बजते ही कर्फ्यू, मेकअप रूम में किसी मर्द का ना आना जाना और उनके हर कदम पर नजर रखने के लिए स्पाइस लगाना। इन सब से तंग आकर मीना ने घर तो छोड़ दिया पर उनकी जिंदगी में अल्कोहल ने जगह ले ली। तब उनकी जिंदगी में आए एक स्ट्रगलिंग न्यू कमर धर्मेंद्र। धर्मेंद्र जी के लिए वो एक महान स्टार थी और मीना के लिए धर्मेंद्र वो इनोसेंट आदमी थे जो उन्हें मील टिकट नहीं समझते थे। मीना हर फिल्म मेकर के सामने धर्मेंद्र जी को रेकमेंड करती थी ताकि वह उनके साथ ज्यादा काम कर सकें और धर्मेंद्र एक बड़े स्टार बन सके। कमल अमरोही के साथ-साथ जब सबको इस अफेयर के बारे में पता लग गया था तो कमल अमरोई ने धर्मेंद्र जी को डिमीन करने के लिए रजिया सुल्तान में एक स्लेव का कैरेक्टर दिया।
कमल मेयर्ड ह फेस विद मड एंड फोर्स हिम टू फिल्म अंडर द ब्लेजिंग सन। नरगिस ने अपने लेटर में लिखा था कि मीना ने अगर किसी से सबसे पैशनेटली और दीवानों की तरह प्यार किया है तो वह धर्मेंद्र जी थे। लेकिन एक मिसअंडरस्टैंडिंग ने उन्हें अलग कर दिया और धर्मेंद्र जी के जाने के बाद मीना ने खुद को पूरी तरह मौत के हवाले कर दिया। उनका लिवर सिरोसिस इस लेवल तक बढ़ गया था कि जब 31 मार्च 1972 को सिर्फ 38 साल की उम्र में उनकी डेथ हुई। उनके परिवार के पास हॉस्पिटल के ₹3500 का बिल भरने के पैसे नहीं थे। उनके डॉक्टर ने खुद वो बिल भरा ताकि उनकी बॉडी को घर ले जाया जा सके। उनके डेथ पर उनके सबसे करीबी दोस्त नरगिस ने एक ओपन लेटर लिखा था जो आज भी सबको गूसबम्स देता है। मौत मुबारक हो मीना। आज तुम्हारी बाजी तुम्हें तुम्हारी मौत पर बधाई देती है और कहती है कि इस दुनिया में दोबारा कदम मत रखना। यह जगह तुम जैसे लोगों के लिए नहीं है। आज के वीडियो के लिए इतना ही मिलते हैं अगले ऐसे किसी वीडियो में। तब तक के लिए, प्लीज।