अगर आपने हाल ही में सोना या चांदी खरीदी है तो यह खबर आपको थोड़ा परेशान कर सकती है और अगर खरीदारी का इंतजार कर रहे थे तो हो सकता है आपके लिए एक बड़ा मौका बन रहा हो क्योंकि गुरुवार को सोना और चांदी दोनों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। सोना अपने अहम स्तर ₹1.5 लाख के स्तर से नीचे फिसल गया और चांदी भी 2.35 लाख प्रति किलो के नीचे पहुंच गई। अब सवाल यह है कि जिस सोने को दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। आखिर वो लगातार दबाव में क्यों है? और क्या यह गिरावट अभी और बढ़ सकती है या फिर खरीदारी का सही समय आ गया है।
नमस्कार, मैं हूं चिराग ठाकुर और आप देख रहे हैं तक। सबसे पहले आपको बताते हैं कि बाजार में हुआ क्या? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमिक्स पर सोना करीब 1.25% टूटकर $4232 प्रति ऑंस के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी भी फिसलकर करीब $65 प्रति ऑंस के स्तर पर कारोबार करती दिखी। इसका असर भारतीय बाजार में और ज्यादा तरीके से देखने को मिला। एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना करीब ₹2,900 तक टूट गया। ₹146,444 प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर को छू गया। वहीं चांदी में भी ₹5,000 से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली और यह करीब ₹2,30,493 प्रति किलो के स्तर तक नीचे आ गई। हालांकि बाद में दोनों प्रिशियस मेटल्स में रिकवरी देखने को मिली।
खबर शूट करते समय सोना करीब ₹1,47,934 के आसपास ट्रेड कर रहा था। वहीं चांदी मामूली बढ़त के साथ ₹2,35,810 के आसपास ट्रेड कर रही थी। यानी पिछले कुछ दिनों से जिस तेजी की चर्चा हो रही थी, फिलहाल उस पर ब्रेक लग गया है। तो अब सवाल यह है कि आखिर सोना और चांदी इतनी तेजी से क्यों गिर रहे हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी डॉलर की मजबूती। जब डॉलर मजबूत होता है तो आमतौर पर सोने पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की तरफ रुख करने लगते हैं। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख भी बाजार को परेशान कर रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका में ब्याज दरें अभी लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है और जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने जैसे एसेट्स की चमक थोड़ी फीकी पड़ जाती है।
बाजार के एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस महीने अब तक सोने में करीब 3.5% और चांदी में 11सदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें ऊंची है और आमतौर पर ऐसे माहौल में सोना तेजी दिखाता है क्योंकि निवेशक इसे सेफ हेवन यानी सुरक्षित निवेश मानते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर उल्टी दिख रही है। क्यों? क्योंकि सोने की मांग कमजोर पड़ गई है। लेकिन इस बार तस्वीर उल्टी दिख रही है। क्यों? क्योंकि सोने की मांग कमजोर पड़ गई है। चीन लगातार सोना खरीद जरूर रहा है लेकिन पिछले महीने सिर्फ उसने 8 टन सोना खरीदा। वहीं भारत में फिजिकल गोल्ड की मांग करीब 70% तक गिर गई है। यानी खरीदार ही कम हो गए हैं। और जब मांग कम होगी तो कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने और चांदी की गिरावट की एक और बड़ी वजह है ईटीएफ यानी कि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स जिसमें लगातार निकासी हो रही है। ग्लोबल निवेशक गोल्ड ईटीएफ से पैसा निकाल रहे हैं। लगातार चौथे हफ्ते गोल्ड ईटीएफ में बिकवाली देखने को मिली है और करीब 2.7 अरब डॉलर की निकासी हुई है। यानी बड़े निवेशक फिलहाल सोने की बजाय दूसरी जगहों पर पैसा लगा रहे हैं। अब सबसे अहम सवाल क्या गिरावट यहीं रुक जाएगी या अभी और दर्द बाकी है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक तकनीकी संकेत अभी भी कमजोर है।
उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $100 से $4000 प्रति अंश तक जा सकता है। जिसका भारतीय बाजार में मतलब लगभग ₹1,22,000 प्रति 10 ग्राम तक का स्तर हो सकता है। वहीं चांदी के लिए भी अभी और कमजोरी की संभावना जताई गई है। अब बात उस सवाल की जिसका जवाब हर निवेशक जानना चाहता है। क्या इस गिरावट में खरीदारी करना चाहिए? एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर आपका नजरिया लंबी अवधि का है तो गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है। यानी एक बार में पूरा पैसा लगाने की बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
क्योंकि आने वाले महीनों में त्यौहारी सीजन की मांग केंद्रीय बैंकों की संभावित खरीदारी और भविष्य में ब्याज दरों में नरमी फिर से सोने और चांदी को सपोर्ट दे सकती है। तो फिलहाल तस्वीर साफ है। सोना और चांदी दबाव में है। डॉलर मजबूत है। फैट सख्त है और निवेशक ईटीएस से पैसा निकाल रहे हैं। लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यही गिरावट एक अवसर भी साबित हो सकती है। अब आप बताइए क्या आप इस गिरावट में सोना खरीदेंगे या अभी और गिरावट का इंतजार करेंगे? अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में जरूर दीजिए और बिज़नेस से जुड़ी बाकी तमाम खबरों के लिए आप देखते रहिए विस्तार। [संगीत] [संगीत]