सिर्फ जनता ही बचत क्यों करें? नेताओं की भी सैलरी कटनी चाहिए। चार्टन प्लेन का इस्तेमाल जो हो रहा है उस पर रोक लगनी चाहिए। यह वो तीखे तीर हैं जो किसी विपक्षी दल के नेता ने नहीं चलाए हैं। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर हैं पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। इन्होंने कहा है कि देश के राजनेताओं पर यह सारे बैन लगा देने चाहिए। चार्टर्ड बैन हो जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डीजल पेट्रोल बचाने की अपील का समर्थन करते हुए बाबा बागेश्वर ने यह पूरी राजनीतिक बिरादरी को लपेटे में ले लिया।
बाबा ने ऐसा तंज कसा कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष हर नेता अपनी बगले झांकने लगा है। रिपोर्ट उस पर आपको दिखाते हैं। अपने बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले बागेश्वर धाम की सरकार। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस बार सीधे देश के माननीयों पर बड़ा सियासी पर्चा फाड़ दिया है।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन यानी डीजल और पेट्रोल का कम इस्तेमाल करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री के इस मुहिम का बाबा बागेश्वर ने समर्थन तो किया लेकिन समर्थन के बहाने नेताओं की दुगती रक्त पर हाथ रख दिया। बाबा बागेश्वर ने दो टूक कहा है कि हर बार त्याग की उम्मीद सिर्फ देश की आम जनता से ही क्यों की जाती है?
अगर देश हित में बचत करनी है तो इसकी शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए। बाबा ने यह साफ कहा कि नेताओं की भारीभरकम सैलरी में कटौती हो। उनके चार्टर्ड प्लेन उड़ाने पर तुरंत रोक लगे। आम जनता से तो प्रार्थना की गई कि डीजल पेट्रोल बहुत कम जलाएं। काश नेताओं के चार्टर्डों पर भी रोक लगाया जाता।
बड़ा मजा आता क्योंकि सबसे ज्यादा तो उसमें ही फूंकता है चिलगाड़ी में और काश ये बहुत अच्छी अपील थी कि डीजल पेट्रोल बचाना चाहिए पर एक काम और होना चाहिए था 3 महीने के लिए नेताओं की सैलरी कट करनी चाहिए। अक्सर मंचों से राष्ट्रवाद और सादगी का पाठ पढ़ाने वाले नेताओं को बाबा ने आईना दिखा दिया है। यह बाबा की नसीहत इसलिए है क्योंकि दुनिया में आर्थिक संकट और पीएम मोदी की पेट्रोल डीजल बचाने की अपील का असर कई नेताओं में नहीं नजर आ रहा।
वो खुलेआम इस अपील की धज्जियां उड़ा रहे हैं और कैमरे में कैद होने पर खुद को पाक साफ साबित करने की कोशिश करने में लग जाते हैं।
कहते हैं मैं तो पूरी तरह पीएम का बनाया नियम कानून मान रहा हूं और राष्ट्र हित में सिर्फ दो गाड़ियां लेकर चल रहा हूं। मैंने दो गाड़ी से घूम रहा हूं। एक गाड़ी में मेरा सिक्योरिटी है। एक गाड़ी में मैं हूं। सारा गाड़ी को मैंने छोड़ दिया। अब कौन मंत्री घूम रहा है ये नहीं जानते। मैं दो गाड़ी से घूम रहा हूं। ये आप पता कर ले। लेकिन नेताजी शायद भूल जाते हैं कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती और कैमरे में कैद यह तस्वीर उनके झूठ का खुलेआम पर्दाफाश कर रही है। अब आपको दिखाते हैं कि आखिर बाबा बागेश्वर को यह क्यों बोलना पड़ा।
आखिर प्रधानमंत्री ने क्या कहा था जिस पर बाबा बागेश्वर ने नेताओं को नसीहत दे डाली। जरा यह भी देख लीजिए। पीएम ने कहा था पेट्रोल डीजल का कम इस्तेमाल करें। वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें। सार्वजनिक वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल करें।
बस, मेट्रो जैसे विकल्प को ज्यादा चुने। ईंधन की कम खपत करने की कोशिश करें। एक साल तक विदेश यात्रा स्थगित करें। राष्ट्रीय कर्तव्य को सर्वोपरि रखना चाहिए। हमें संकट को देखना समझना होगा। हम संकट से अनजान नहीं रह सकते। हमें समझदारी से काम लेना होगा। मेरी देश के हर नागरिक से अपील है जहां संभव हो। पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें। मेट्रो का उपयोग करें। इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें। तेल की खपत कम करें तो इससे देश और हमारी शहर दोनों को लाभ होगा।
अब जरा यह भी देख लीजिए कि बाबा बागेश्वर खुद प्रधानमंत्री की अपील को कैसे मान रहे हैं। तभी उन्होंने दूसरे नेताओं को भी पेट्रोल डीजल बचाने की नसीहत दे डाली। पिछले एक महीने में बाबा बागेश्वर ने सिर्फ एक दौरा किया और अभी वह दूसरे दौरे पर हैं। बाबा बागेश्वर मई के पहले और दूसरे हफ्ते में अपने गृह क्षेत्र एमपी के छतरपुर में ही रहे। जहां करीब 15 दिनों तक उन्होंने नियमित दिव्य दरबार लगाया। उसके बाद बाबा मई के तीसरे हफ्ते में महाराष्ट्र के नासिक गए।
जहां उन्होंने समागम और दिव्य दरबार लगाया। अब 27 और 31 मई तक अपने दूसरे दौरे उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम पर हैं। जहां वह हनुमंत कथा अपने भक्तों को सुना रहे हैं। और इसी कार्यक्रम में बाबा ने उन नेताओं को नसीहत दी है जो पीएम की अपील के बावजूद उड़न खटोलों का आनंद ले रहे हैं।
बाबा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा पसरा है। क्योंकि सवाल सीधे वीआईपी कल्चर पर खड़ा किया गया है। अब सवाल यह है कि क्या बाबा बागेश्वर की इस नसीहत को देश के नेता गंभीरता से लेंगे? क्या सिर्फ जनता ही नियमों और अपीलों के बोझ तले दबी रहेगी या फिर हमारे माननीय भी अपनी सुख सुविधाओं की कुर्बानी देंगे?