अहमदाबाद प्लेन हादसे की दुर्घटना के बाद पूरा देश शोक में डूब गया है। इस आघातजनक घटना में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत लगभग 250 से ज्यादा लोग के शिकार हुए हैं। यह समाचार जब दिवंगत विजय रूपाणी की पत्नी अंजलीबेन को मिला तो वे तुरंत लंदन से अहमदाबाद पहुंच गईं और आज सुबह पुत्र ऋषभ भी अमेरिका से भारत आ गया। फिलहाल गांधीनगर स्थित उनके निवास पर रूपाणी परिवार को सांत्वना देने के लिए लोग उमड़ रहे हैं। पीएम मोदी ने भी अंजलीबेन से मिलकर सांत्वना दी।
लेकिन इन सबके बीच एक बात सभी को भावुक कर रही है, जो दिवंगत विजय रूपाणी ने अपनी पत्नी अंजली रूपाणी से कही थी। अंजलीबेन और विजय रूपाणी की अंतिम बात के शब्द थे – “अंजू, फ्लाइट में बैठ गया हूं। फ्लाइट अभी उड़ने ही वाली है, कल आता हूं।” ये अंतिम शब्द और अंतिम कॉल था।
अंजलीबेन को भी नहीं पता था कि दिवंगत विजय रूपाणी के मुख से अब इसके बाद कभी सुनने को नहीं मिलेगा। प्लेन में बैठने के बाद विजय रूपाणी ने पत्नी अंजलीबेन को अंतिम कॉल किया और उसमें विजय रूपाणी के अंतिम शब्द थे – “अंजू, फ्लाइट में बैठ गया हूं, फ्लाइट अभी ही उड़ती है, कल आता हूं।”
लेकिन अंजलीबेन ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनका ‘कल’ इस तरह होगा। इस दुर्घटना के समाचार लंदन गईं अंजलीबेन को मिलते ही वे तुरंत शुक्रवार तड़के अहमदाबाद आ गईं और अहमदाबाद आते ही एयरपोर्ट पर भारी करुणा छा गई। अंजलीबेन ने रोते-रोते कहा – “मुझे एक बार विजय का चेहरा दिखाओ”, तब सभी की आंखें नम हो गईं। विजयभाई की सुरक्षा के लिए तैनात कमांडो को देखकर अंजलीबेन ने कहा – “आप तो साहब का हमेशा बहुत ध्यान रखते थे, कल साहब का ध्यान क्यों नहीं रखा?” इतना सुनते ही कमांडो भी भावुक होकर रोने लगे।
लगातार 20 मिनट तक अंजलीबेन के रुदन से वहां मौजूद सभी की आंखों में आंसू आ गए। बेटी के घर एक छोटा सा धार्मिक कार्यक्रम था और विजयभाई ने उस कार्यक्रम को रोशन करने और मित्रों के साथ घूमने जाने का प्लान बनाया था। उनके खास मित्र नितिन भारद्वाज और धनसुख भंडेरी के साथ विजय रूपाणी लंदन जाने वाले थे। सभी ने 5 जून की टिकट करवाई थी, लेकिन विजय रूपाणी ने पंजाब के लुधियाना उपचुनाव होने के कारण प्लान में बदलाव किया।
5 जून को केवल धनसुख भंडेरी लंदन गए। उसके बाद विजय रूपाणी और नितिन भारद्वाज ने 10 जून की टिकट करवाई। फिर भी काम के कारण रूपाणी जा नहीं सके इसलिए उन्होंने 10 जून को नितिन भारद्वाज को पहले लंदन भेज दिया और अपनी 12 जून की टिकट करवाई। इस तरह उन्होंने दो-दो बार टिकट कैंसिल करवाई और फिर 12 जून को प्लेन हादसे में उनका निधन हो गया।