भारतीय फिल्म इतिहास के अब तक के सबसे बड़े सोमन का जान वाले राज कपूर साहब की राज कपूर साहब को सिर्फ एक वीडियो में ही बता पन बेहद मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है की आपको राज कपूर साहब के बड़े में कुछ ऐसी आश्चर्यजनक बातें जरूर बताएंगे जो आपने अभी तक किसी एक सिंगल वीडियो में नहीं अच्छी है सनी होगी जैसे की राज कपूर साहब के करने का रहस्य आखिर क्या है आखिर क्यों राज कपूर साहब अपनी हर एक फिल्म में अपनी हीरोइन को व्हाइट साड़ी जरूर पहना थे आया फूल फूल को ले गया राजकुमार बॉलीवुड का सुमन कहा गया आखिर उसे समय ने खुद को ही क्यों कीनन से जुड़े क्या रास्ते जिससे राज कपूर को राज कपूर से कपूर बना दिया।
दो सुपरस्टार राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की फिल्म आनंद से जुड़ा कौन सा ऐसा किस्सा है जो राज कपूर साहब के बेहद करीब है यहां आता तो शायद आप मुझे बदतमीज चाइल्ड कवर ना करें लंदन में जाकर क्यों जुर्माना देना पड़ा साहब से क्या कहा महिमा जो हमारा होता है वो जान से प्यार होता कपूर साहब का जन्म 14 दिसंबर साल 1924 में वर्तमान पाकिस्तान के पेशावर में एक हिंदू पंजाबी परिवार में हुआ इनके पिता एक महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर हैं जिन्हें भारतीय सिनेमा का पितामह कहा जाता है और मां राम शालिनी देवी कपूर पृथ्वीराज कपूर के छह संताने थे ।
जिम दो की दो बचपन में ही हो जाति है और जीवित बसे हैं राज कपूर शम्मी कपूर शशि कपूर और बेटी उर्मिला रही बात पढ़ाई लिखी तो राज कपूर साहब का पढ़ाई में तो मां कभी नहीं लगा कक्षा 6 में ही फेल हो गए एक्टिंग में बचपन से ही मां लगता मंत्र 10 वर्ष की उम्र में ही मृत्यु का टीका नाटक में बेमिसाल कम किया और ऐसे ही छोटे-छोटे नैटको में कम करते-करते वह धीरे-धीरे पिता के पृथ्वी थिएटर का हिस्सा बन गए।
पर यह मत समझिए की राज कपूर साहब मुंह में सोनी का चम्मच लेकर पैदा हुए उन्हें थिएटर में नौकरी मिली वो भी ₹1 महीना की कम था रोज पृथ्वी थिएटर में झाड़ू लगाना तू स्पेशल स्कूल से आने के बाद ज्यादातर समय थिएटर में ही बिताता पिता भी इसे कोई भी छोटे से छोटा कम करवाने में गुर्ज नहीं करते चाहे वो स्पॉट बाय का हो या ट्रॉली पुल्लर का पिता हमेशा इसे क्रो मेंबर की तरह ही कम लेते और फिर वक्त वो भी आया जब राज कपूर साहब को अपनी पहले फिल्म इंकलाब मिली जो 1935 में रिलीज हुई इसमें मुख्य अभिनेता इनके पिता थे इसी तरह राज कपूर साहब को उसे जमाने के मशहूर निर्देशन केदार शर्मा के साथ कम करने का मौका मिला राज कपूर जी का कम था क्लैपर बाय का केदार शर्मा जी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे .
फिल्म का दृश्य फिल्म को बार-बार पहुंचने में डेरी हो जाति दरअसल रात कपूर साहब की आदत थी की पहले खुद को शीशे में देखते हैं इस वजह से बार-बार उन्हें डेरी हो जाति आर शर्मा ने ये सब देखा और उन्हें बहुत गुस्सा आया।
उन्होंने रात कपूर साहब को जोरदार तमाचा जल दिया राज कपूर जी भी कुछ नहीं समझ पे सब कुछ शिखा हमने ना सखी होशियारी और तो और उन्हें कुछ बोला भी नहीं बस उदास होकर खड़े रहेकेदार शर्मा को अपने इस कम पर बहुत बड़ा लगा और उन्हें एहसास हुआ की राज तो दरअसल खुद हीरो बन्ना चाहता है और तब डायरेक्टर केदार शर्मा ने इन्हें 1947 में अपनी फिल्म नील कमल में हीरो बने का मौका दिया इनके अपोजिट हीरोइन थी मधुबाला कब होंगे हम खोल नहीं समाएंगे
अब अगला साल आया 1948 राज कपूर साहब अपना सब कुछ लगाकर स्टूडियो बना चुके थे नाम था आर के स्टूडियो 24 साल का लड़का कुछ बड़ा करना छह रहा था आभार के स्टूडियो में फिल्म तो बनी थी अब इन्होंने इधर उधर से पैसे उधर लिए पत्नी के जेवरों तक को भेज दिया और अपनी पहले फिल्म बनाई जिसका नाम था आज इस फिल्म के प्रोड्यूसर भी यही थे इस फिल्म के डायरेक्टर भी यही थे और इस फिल्म में एक्टिंग भी इन्होंने की थी
उतना ही ऑफिस स्क्रीन देखना पसंद करते राज कपूर साहब और नरगिस जी की प्रेम कहानियां के किस पूरे बॉलीवुड में मशहूर हो गए थे कहते हैं नरगिस उनसे इतना प्यार करती थी की राज कपूर की दूसरी पत्नी बनकर भी रहने को तैयार थे रबा इकरार हुआ है प्यार फिर क्यों डरता है तू किस्सा कुछ यूं है जब राज कपूर साहब अपनी आज फिल्म की शूटिंग की लोकेशन को पता करने के लिए उसे जमाने की मशहूर एक्ट्रेस जद्दन भाई के घर पहुंचे और गेट खोल उनकी बेटी ने बेटी जल्दबाजी में रसोई से निकली और अपने माथे पे लगे बेसन को हटाना ही भूल गए।
वैसे वो थी मशहूर एक्ट्रेस नरगिस साहब को नरगिस खूब पसंद आए और यही से शुरू हुई नरगिस और राज कपूर की प्रेम कहानी [संगीत] राज कपूर ने अपनी आज फिल्म के लिए नरगिस को साइन कर लिया धीरे धीरे अरे अब मेरा दिल पुकार और तो और जब राज कपूर साहब की एक साथ कई फिल्म फ्लॉप हुई और आर के स्टूडियो को बेचे तक की नौबत ए गई तब नरगिस ने अपने द्वारा कमाई सारे पैसे राज कपूर के स्टूडियो में लगा दिए कहते हैं एक समय वो भी आया जब नरगिस ने आर के स्टूडियो को बचाने के लिए अपने सोनी के कंगनों तक को भेज दिया पर जब नरगिस जी ने रात कपूर के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा तो राज कपूर ने कहा मैं अपनी पत्नी को हीरोइन नहीं बना सकता हूं और ना ही हीरोइन को अपनी पत्नी बना सकता हूं।
रात साहब ने अपने वैवाहिक जीवन में अन्य अभिनेताओं की तरह दरार नहीं आने दी वैसे राज कपूर साहब कितने गलत थे या कितने सही आप कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा [संगीत] कर साल 1956 में राज कपूर जी ने सामाजिक सरोकार पर आधारित फिल्म जागते रहो बनाई जिसमें नरगिस ने एक कैमियो रोल किया और इसके बाद दोनों ने एक साथ कभी कम नहीं किया आदियोगी अजब दास्तान सुनील डेट जी से शादी कर ली इस तरह से डॉन युवाओं को प्रेम करना सीखने वाली रोमांटिक जोड़ी का अंत हुआ कहते हैं जब सुनील डेट जी के साथ नरगिस जी की शादी की खबर राज कपूर जी को पता लगी तो उन्होंने अपने आप को सिगरेट के पत्तों से चला लिया।
की शादी की खबर के बाद राज कपूर साहब ताबड़तोड़ लगे राज कपूर साहब दिन भर और के में दुबे रहते उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी एक दिन रात को जब रात कपूर साहब शराब के में दूध दे तो गेट पर उनके पिताजी ने दस्तक दी राज कपूर साहब कुछ संभालते तभी पृथ्वीराज कपूर ने उनकी तरफ देखा और कहा बेटे मैं इस उम्र में यह सब नहीं देख पाऊंगा बड़ा बोझ क्या होता है भर गई थी और खुला भी गई थी।
राज कपूर ने यह ते किया की अब वो एक ऐसी फिल्म बनाएंगे जो उनके जीवन पर आधारित होगी और फिल्म बनाई मेरा नाम जोकर यह पहले ऐसी फिल्म बनी जिसमें दो इंटरवल थे ये फिल्म साढे कर घंटे की थी इसमें बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार बड़े-बड़े एक्टर ने कम किया पर ये फिल्म उम्मीद पर खरीदी एक बहुत बड़ा झटका था ऐसा लगा की रोमांटिक जज्बार गिरने पर भी यह सुमन संभल सकता था।
एक गैप के बाद इन्होंने एक फिल्म और बनाई जिसका नाम था बॉबी क्योंकि मेरा नाम जोकर के पहले भाग पर आधारित थी राज कपूर साहब के पास बजट नहीं था बड़े-बड़े हीरो के पास जान पर भी उन्होंने पैसे की दिक्कत की वजह से कम करने से माना कर दिया फिर हीरो बने हमारे चिंटू जी मैन के ऋषि कपूर जी और हीरोइन बनी डिंपल कपाड़िया बॉबी फिल्म जब पर्दे पर आई तो उसने कमल कर दिया संगम और संगम के दौरान दोनों एक दूसरे के काफी करीब ए गए हां पाल संगम होगा के नहीं ये बात जब राज कपूर की पत्नी कृष्णा जी को पता लगी तो वे घर छोड़कर चली गई लगभग 4 मीना से भी ज्यादा मुंबई के नटराज होटल में रहती रही।
राज कपूर साहब ये समझ गए थे की अगर यह गलती हुई तो उनके जीवन की सबसे बड़ी दुर्घटना होगी [संगीत] कृष्णा कपूर को खूब बनाया बड़ी मुश्किल में जाकर कृष्णा जी मनी जाऊंगी कृष्णा कपूर को बहुत प्यार करते हैं कहा जाता है की राज कपूर जी अपनी फिल्मों में हीरोइन को सफेद साड़ी जरूर पहने दें बताते हैं की एक बार राज्य अपनी पत्नी को सफेद साड़ी तोहफे में देते हैं और उसे ड्रेस में कृष्णा जी ने इतनी खूबसूरत लगती हैं।
इतनी पसंद आई हैं की वह अपनी हर फिल्म हीरोइन को सफेद साड़ी जरूर पहना हैं [संगीत] मैं महबूबा वो सब कुछ है मैं इधर ऋषिकेश मुखर्जी साहब राज साहब की जिंदगी से प्रभावित होकर उन पर एक फिल्म लिख रहे थे फिल्म का नाम था आनंद और जब ऋषि डा राज कपूर साहब के पास गए और उन्हें अपनी पुरी फिल्म की कहानी सुने और कहा की आप इस फिल्म के हीरो भी होंगे वैसे राज कपूर साहब ऋषि डा को बाबू मसे कहते थे तब राज कपूर साहब ने ऋषि दास है अपने अंदाज में कहा बाबू मुशी तुम्हारी कहानी तो इतिहास लिख देगी पर इस कहानी का हीरो जवान है और मैं इस कहानी में फिट नहीं बैठूंगा ऋषिकेश मुखर्जी को भी यह बात कुछ समझ में आई और कई सालों बाद रिश्ता ने यह फिल्म बनाई।
राजेश खन्ना जी को लेकर और राज जी के द्वारा कहानी बात बिल्कुल सचने की फिल्म ने इतिहास रैक दिया [संगीत] राज साहब अपनी ब्लैक लेवल व्हिस्की के लिए बहुत मशहूर थे लंदन से लाई वो व्हिस्की किसी के भी साथ शेर नहीं करते थे जो ब्लैक लेवल दुबई से मंगवाते उसे वह अपने दोस्तों के साथ शेर करते और जो मुंबई से खरीदने उसे ब्लैक लेवल को सिर्फ बच्चों को पीने की अनुमति होती सिर्फ तनुजा ही उनकी सबसे प्यारी दोस्त थी जिसके साथ वह अपनी लंदन वाली शेर किया करते थे इसलिएगेंट की बनाई आखिरी फिल्म बनी राम तेरी गंगा मौली महान समन राज कपूर ने अपनी फिल्मों के जारी भारतीय सिनेमा को मोड पर लाकर खड़ा कर दिया।
जहां पर और सुंदरता का अंतर ते कर पन भारी मुश्किल था तेरी गंगा मौली हो गई राज कपूर साहब एक के बाद एक सुपरहिट फिल्म बना रहे थे पर दर्शन शायरी बात समझ पाएं की हर एक फिल्म सेहत का एक पड़ा हिस्सा कम कर रही थी राम तेरी गंगा मौली फिल्म के बाद वे अपनी अगली फिल्म हिना की तैयारी कर रहे थे।
इधर कम बढ़ाना शुरू हुआ और सेहत खराब होने लगी आंखों में चमक जा रही थी पास बैठने वालों को मोहब्बत से हाथ पढ़ते और कहते की दिमाग चल रहा है नए-नए इतिहास ए रहे हैं लेकिन इस शरीर जो है वो साथ नहीं दे रहा कशिश दिमाग को एक नया जिसमें मिल जाए मुझे अभी बहुत कम करना है।
कहते हैं एक समय वह था की कपूर परिवार की होली खेलने का मौका जी भी बड़े सितारे को मिल जाए वह अपने आप पर गर्व महसूस करता था इस पार्टी में बड़ी-बड़ी हस्तियां के साथ-साथ किन्नर भी आया करते थे बताते हैं जब अमिताभ बच्चन जी की कई फिल्में लगातार फ्लॉप हो रही थी।
इस दौरान उन्हें राज साहब की होली की पार्टी में जान का मौका मिला रात साहब ने उनसे कुछ अपनी खुद की आवाज में गाने को कहा तब पहले बार अमिताभ बच्चन जी ने एक गाना गया और सब झूठ उठे बाद में यह चोपड़ा ने इसे अपनी फिल्म सिलसिला में लिया और अमिताभ जी से ही गवाया बरसे भीगी चुनरवाली रंग बरसे बताते तो यह भी हैं की इनकी हर होली पार्टी में किन्नर जरूर आते थे और राज साहब अपनी हर आने वाली मूवी का गाना किनारो को सबसे पहले सुनते थे
बताते हैं की ऐसा ही हुआ उनकी अगली फिल्म राम तेरी गंगा मौली के दौरान उन्होंने अपने उसे फिल्म के सारे गाने जब किनोरो को सुनाएं और किनारो को उनका कोई भी गाना इस फिल्म का समझ में ही नहीं आया फिर रात कपूर जी ने रविंद्र जैन जी से इन सारे गानों को दोबारा लिखने को कहा रविंद्र जैन ने फिर नए गाने लिखे और जब गाना सुन साहिब सुन्या तूने वो बहुत पसंद आया की उन्होंने कहा की यह गाना सदियों तक याद रखा जाएगा सुन सुन प्यार की धुन ये मानते थे की कीनन के पास सिक्स सेंस होता है और उनकी कहानी कोई भी बात गलत हो ही नहीं ।
शक्ति राज कपूर साहब की तबीयत बहुत ज्यादा खराब होने लगी इधर दादा साहब फालके अवार्ड अनाउंस हो गया था आज वो तारीख भी ए गई थी तालिया की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गंज उठा साड़ी नजर राज साहब पति की थी तालियां बैंड होने का नाम ही नहीं ले रही थी अचानक साड़ी तालियां रुक गई लोग देख रहे थे रात साहब उठने की कोशिश कर रहे थे लेकिन जिस साथ ही नहीं दे रहा था रात कपूर जी अपनी मजबूर आंखों से राष्ट्रपति साहब की तरफ देख रहे थे राष्ट्रपति साहब ने मानव ने पढ़ लिया और भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहब फालके से उन्हें नवाज गया इसका इलाज हिम्मत और मेहनत राज कपूर साहब को सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी।
उन्हें तुरंत ऑक्सीजन सिलेंडर लगाएं गए और एम्स ले जय कर्म की वजह से रात कपूर जी को राष्ट्रपति भवन में ऑक्सीजन सिलेंडर साथ ले जान की अनुमति नहीं मिली थी शायद ये हो जाता तो राज कपूर जी हमें इतनी जल्दी छोड़ कर ना जाते इसके बाद की कहानी बेहद भावुक रही क्योंकि रात कपूर साहब से उनके अंतिम समय के वो सबसे प्रिया दोस्त मिलने आए जींस उनकी दोस्ती कभी दुश्मनी में बादल गई थी तो मैं राज कपूर साहब और ड्रेस दी किंग दिलीप कुमार साहब कभी बेहद जिगरी दोस्त हुआ करते थे संगम फिल्म के दौरान इन दोनों के बीच में कुछ ऐसा मनमुटाव हुआ की उसके बाद से दोनों ने एक दूसरे से बात करना ही बैंड कर दिया और 50 सालों की एक गहरी दोस्ती कतर दुश्मनी में बादल गई कहते हैं।
राज कपूर साहब दिलीप साहब को अपना सबसे गहरा दोस्त मानते थे दिलीप साहब की शादी राज कपूर जी की शादी से काफी बाद में हुई और राज कपूर जी ने यह दिलीप साहब की बहन से वादा किया की जब कभी भी दिलीप की शादी होगी तो मैं उनकी बारात में घुटनों के बाल ना चुंग और दिलीप कुमार साहब की जब शादी हुई तो रात कपूर साहब ने पुरी बारात में घुटनों के पाल ना जा झूम-झूम के ना जा दिलीप साहब घोड़ी पर चढ़े सिर्फ मुस्कुरा रहे थे [संगीत] पर आज के दूर में दोस्ती खत्म हो गई थी राज कपूर को एम्स ले जय गया था वहां उनका एक महीने तक इलाज चला फिर वो कॉम में चले गए दिलीप साहब एक कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान गए हुए थे उन्हें पता लगा तो सीधे अस्पताल पहुंचे उन्होंने देखा की राज कपूर साहब बेड पर बेहोश पड़े हैं फिर उन्होंने राज साहब का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा ओ लाले दी जान देख तेरा यार आया है मुझे माफ नहीं करेगा।
दिलीप साहब बचपन से राज कपूर जी को लॉरी जान कहते थे उन्होंने बचपन की साड़ी यादें राज कपूर को सुने पेशावर के बाजार से लेकर कबाब की खुशबू तक याद दिलाई लेकिन राज साहब नहीं उठे रूठ गया तेरी कसम दिल टूट बॉलीवुड का असली सुमन पॉजिटिविटी नोट डाइंड बोल चुका था मानो बस अपने दोस्त युसूफ का इंतजार कर रहा था ।
वैसे राज कपूर साहब का नाम आते ही आपकी आंखों के सामने सबसे पहले कौन सी फिल्म धुंधली धुंधली सी ए जाति है वो कौन सा गाना है जो आपके कानों में राज साहब का नाम सुनते ही गुनगुनाना लगता है पुलिस सड़क पर अपना सीन था और बताइएगा की वह कौन सी फिल्म है जिसमें राज कपूर साहब की तीन पीडिया ने एक साथ कम किया है पृथ्वीराज कपूर राज कपूर और राज कपूर के बेटे बॉलीवुड के किस सिंगर की आवाज को राज कपूर की आवाज माना जाता था वैसे पूछने और बात करने के लिए आपसे तो बहुत कुछ है पर सब कुछ शायद कमेंट बॉक्स में सम्मान हो सके थैंक यू बस थैंक यू आज मैंने तुमसे बहुत कुछ शिखा है