समझे क्या? इसका मतलब है कि सुशांत ऑर्गेनाइज तरीके से कुछ ड्रामा भी करके कि हम तो में हैं। हम बीमार हैं, ये हैं जो ये रिया चक्रवर्ती जो गुल खिला रही थी। ये सुशांत क्या इंटरनल इंक्वायरी कर रहे थे और उनकी अपनी टीम थी जो इन लोगों में एक प्रकार से की तरह वो काम कर रहे थे और वो रिकॉर्ड्स ले आए और इसीलिए सुशांत ने कहा कि अब वो लोग मुझे नहीं छोड़ेंगे।
इस सब का जिक्र क्या आपने अपने एफिडेविफिट में किया है कि सुशांत कुछ कुछ सर्विस कर रहे थे। देश को बचाने के लिए काम कर रहे थे? देखिए रिया का इसमें क्या रोल है? आदित्य का क्या रोल है? इसके जितने प्राइमर वैसी मटेरियल चाहिए।
आमिर खान और सलमान खान का भी रोल है। फिलहाल आमिर खान का है। सलमान खान के बारे में अलग से बोलेंगे। थोड़ा रुकिए जरा उसके लिए। सलमान खान उनके पनवेल फार्म हाउस के बारे में बहुत बड़ी चर्चा है। कि वहां भी कुछ एस्टीमन टाइप का होता था। वो अलग बात है कि उस तरह से नहीं होता था। नहीं
आमिर खान का नाम डायरेक्ट इन्वेस्टिगेशन में आया है। में के इन्वेस्टिगेशन में आया। जांच के रिपोर्ट में आया है। लेकिन उन्होंने आधा बोल दिया। आधा पॉइंट दिया ही नहीं। रिया को स्पेसिफिक सवाल पूछे तेरा क्या खून था? तूने उसकी गाड़ी क्यों मंगवाई? तेरी गाड़ी क्यों थी? उसी दिन आमिर खान ने क्यों बुलाया? क्यों जाना था? क्या जाना था? अब ये तो झूठ में एक्सपर्ट थी ना ये रिया चक्रवर्ती तो ठीक है वो बात है लेकिन पूछताछ हुई आमिर खान से क्यों नहीं पूछताछ हुई आमिर खान से क्यों नहीं पूछताछ की अभी लाजर पिक्चर देखिए ना आप हम आमिर खान जाने दीजिए सर छोड़िए नहीं बोलना चाहता छोड़ दीजिए दूसरा भी लीजिए तो एक बात तो तय हो गई ना कि सुशांत और दिशा दिशा किसी बड़े मिशन पर थी और वही मिशन है जो मार्च 2025 से लेकर के मार्च 2026 होने जा रहा है।
अदालत भी घबरा रही है। क्या इसको पॉइंट आउट करेंगे सुनवाई के दौरान? क्योंकि यह सिर्फ मामला दिशा और सुशांत के केस का नहीं है। बहुत बड़ा खुलना है इस केस के खुलने के साथ ही। क्योंकि का बाजार खुलना है। पॉलिटिशियंस के इन्वॉल्वमेंट खुलने हैं। पूरा पुलिस मशीनरी जिस तरह से इन्वॉल्व है वह खुलना है। सुनिए पूरा खुलना कब होगा? इन्वेस्टिगेशन जब भले ही सीबीआई करे लेकिन अंडर कंट्रोल ऑफ द कोर्ट रह रहेगा। उसका लाइव टेलीकास्ट कॉमन मैन के लिए रह रहेगा। तभी ये खुलेगा।
उसके बगैर मुश्किल है ये फिर ज्यादा से ज्यादा क्या है आदित्य ठाकरे तो तुम्हारा नगरकर जैसे जो भी है चार पांच लोग रिया चक्रवर्ती है इतने लोगों तक सीमित रह के इनको सजा हो सकती है लेकिन पूरा अगर डिटेल जड़ पे जाना है वो इतना आसान नहीं है वो पूरा देश देखेगा लाइव टेलीकास्ट चलेगा कोर्ट के सुपरविजन में स्पेशल कमेट बनाई जाएंगी यह पॉइंट पे क्या हुआ वो पॉइंट जब सवाल पूछना शुरू होगा कोर्ट तब खुलेगा तो आपने यह भी अर्जी दी है कि लाइव टेलीकास्ट हो नया बेंच बने अभी वर्तमान में जो हाई कोर्ट है वो हाई कोर्ट इसको सुन सुनवाई के लिए अविलंब क्यों नहीं बुला रही है क्यों नहीं ले रही है अरे अभी इतना सा बैकग्राउंड समझने के बाद आप समझ लीजिए जजेस भी तो इंसान ही है ना तो थोड़ा रुकिए जरा वो तो क्या अभी नया क्या ठाकरे परिवार का कोई डर है जज के ऊपर कोई दबाव है नहीं इस पे छोड़ दीजिए।
अभी वो मुझे कमेंट करना ठीक नहीं है उस पे देखते हैं अभी पहली चीज एज ऑन टुडे नया बेंच कंस्ट्रक्ट हो जाने दीजिए मंडे ट्यूसडे को मालूम पड़ जाएगा तो नया बेंच होने के बाद में फिर अभी देखते हैं कि इसको हाई कोर्ट चलाना चाह रहा है या अगर डिले हो रहा होगा तो फिर सुप्रीम कोर्ट से टाइम बाउंड का आर्डर लाने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट मूव करेंगे।
नहीं तो सुप्रीम कोर्ट में आपकी दलील क्या होगी? अगर सुप्रीम कोर्ट आपको पूछेगी कि नहीं नहीं आप इसके लिए जाइए हाई कोर्ट आप यहां क्यों आए हैं? दलील क्या हुआ? अभी तक आप हमने ये 40 मिनट तक डिस्कशन क्या किया? ये क्या है?
दलील नहीं तो क्या है? कुछ भी आपको नाम देना पड़ेगा ना कि भाई वो अभी तक जो जितना बताया सब वही है। सब वही है। हां। अच्छा अभी एक फैसला आया है ये फरवरी में ही नहीं 2019 का एक फैसला था कि भाई ये जो छह लोगों की जो सजा हुई थी आपको याद है आप आपने ये बताया था। उसमें तीन लोगों को मौत की सजा हुई थी। तीन को आजीवन कारावास हुई थी। ना ना आपने गलत बोला। हाई कोर्ट ने तीन को आजीवन कारावास बोला था। तीन को मौत बोला था। तो सुप्रीम कोर्ट ने बोला नहीं नहीं छह के छह को होना चाहिए।
बहुत अच्छी बात है। तो माननीय अरजीत पसायद की जो बेंच थी उन्होंने कहा कि नहीं नहीं ये नहीं होगा छ के छह को होगी। तो छह के छह को की बाद फिर लार्जर बेंच ने उसको नल एंड वॉइड किया और सबको बरी कर दिया। तो अब जो है वो है कहां? हां तो अभी अभी गौर कीजिए। तो आप उस सुप्रीम कोर्ट के पास जा रहे हैं। मैं कह रहा हूं कि वो सुप्रीम कोर्ट छ साल से बैठा हुआ है। नहीं सर कहां-कहां सवाल उठाऊं? नहीं ठीक है।
ठीक है। सुनिए। पहली चीज सूर्यकांत जी है ना काम अच्छे कर रहे हैं ना तो आप खुद जजों की गलती की वजह से पूरा सुप्रीम कोर्ट को दोष नहीं दे सकते ना अन्याय तो मेरे मेरे खिलाफ भी हुआ है मेरे पर अन्याय मालूम है क्या आपको सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में ओवर जजमेंट पे रिलाई करके हमको सजा सुना दी कंटेम में तो हमने क्या आशा छोड़ दी हमने उसी सुप्रीम कोर्ट से स्टे लिया उस आर्डर पे हिस्टोरिक आर्डर लिया हमने उसमें तो कैसा है कि कुछ जज अगर गलत है तो इसका मतलब सिस्टम गलत नहीं है ना ये सिस्टम को सुधारना है हमको सुधारना कहां से है संविधान में इसके सशन है।
सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट है इंटरनेशनल लॉ है जो इंडिया में लागू है तो इसके तो सुधारना है जितना हमारा पावर बढ़ेगा उतना यह लॉ एंड जस्टिस का रिफॉर्म कॉमन मैन के लिए उसका इक्वल जस्टिस का ये आगे बढ़ेगा। तो अब सुप्रीम कोर्ट के पास जाएंगे तो सुप्रीम कोर्ट में हमने अर देने के बाद अगर सुप्रीम कोर्ट अगर रिजेक्ट करता है तब उसके ऊपर हम बात कर सकते हैं।
पर आज हम ये नहीं सोच सकते ना कि सुप्रीम कोर्ट रिजेक्ट ही करने वाला है। वैसा नहीं है। नहीं प्रेसिडेंट मैं आपको सिर्फ एक प्रेसिडेंट बता रहा हूं कि नौ छ वर्ष हो गए हैं 2019 को गए हुए सातवां साल हो गया। तो 7 साल में महाराष्ट्र पुलिस उस मर्डर को नहीं ढूंढ पाई है। किसी पर कोई कारवाई नहीं हुई है। और जो जिसको सजाए मौत दी गई थी वो भी बरी हो गया है। तो मर्डरर कहां है? पुलिस कहां है? नहीं बरी नहीं हुआ है वो। कोर्ट ने बोला इसको झूठा फसाया है। उसको दिया। अभी क्या है मालूम है क्या?
एक प्रॉब्लम है सुप्रीम कोर्ट में जिसको बहुत जल्दी ठीक करने की जरूरत है। हमारे माननीय सीज सूर्यकांत जी इसमें जरूर पहल करेंगे। आपको मैं प्रॉब्लम बताता हूं कहां पर है। आपके आर पयत मतलब क्या होता है जब सुप्रीम कोर्ट के ब्रदर जज की गलती होती है तो उसको कवर अप के चक्कर में गुनाह हो जाता है सुप्रीम कोर्ट से। मैं आपको एक एग्जांपल बताता हूं।
अरिजित पसायद जो है आपके सुप्रीम कोर्ट के जज थे हम तो आरंजीत पसायत का एक लैला डेविड करके एक लेडी था उनका कुछ क्रिश्चियन एजुकेशन ट्रस्ट का वगैरह कुछ इशू था तो उसमें अरिजीत पसायद के बेंच में वो गांगुली साहब थे तो इन्होंने अरिजीत पसायद ने कुछ उल्टा सीधा कुछ बोल दिया तो वो लेडी को इतना गुस्सा आया कि उसने पूरे कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के हिस्ट्री में पहली बार होगा। पूरे कोर्ट में उठा के चप्पल फेंक के मारा जस्टिस फसायद को। गलत किया उसने। वो उसको अगर अभी पसायद ने कितना भी बड़ा गुनाह किया तो चप्पल मारना ही गलत था।
आप लीगल वे से उनकी कंप्लेंट करते वो करते। ठीक है। तो लेकिन उसने चप्पल मारा। अब उसने गलती किया। दैट इज डिफरेंट थिंग। आर पड ने क्या किया? बोले मुझे चप्पल मारा। मैं ही विटनेस हूं। मैं ही जज बनके तुमको सजा देता हूं। छ महीना जेल जो भी है उसको सजा सुना दिया। अब उसको जो सजा सुनाया छ महीना या तीन महीना जो भी है।
तो उसके बाजू में बैठे थे जस्टिस गांगुली। बहुत ही जुडिशियस उन्होंने डिसीजन लिया हिस्टोरिक है। उन्होंने कहा कि मैं मेरे ब्रदर जज अरजीत पस से सहमत नहीं हूं। उन्होंने कहा इसने वायलेंस किया इसको यहां पर डिटेन करना या कोर्ट से बाहर निकालने का बोलना ये लॉ में प्रोविजन है। लेकिन इसको डायरेक्ट सजा दे देना बिना ट्रायल चलाए। यह देश का लॉ नहीं है। सेक्शन 14 ऑफ कंटेंट ऑफ कोर्ट एक्ट। उसने प्रोसीजर दी है।
आपको उसको चार्ज फ्रेम भरना पड़ेगा। उसका कहना सुन के लेना पड़ेगा। फिर उसको दोषी या तो माफी मांगता है तो कितनी सजा कम कर सकते हैं सजा माफ करके वार्निंग देके या फिर उसको आगे से कोर्ट में आने पर पाबंदी। इस तरह के आदेश आप कर सकते हो। ऐसा गांगुली साहब ने किया और गांगुली साहब ने अपने समर्थन में लार्जर फुल बेंच डॉक्टर एलपी मिश्रा का जजमेंट लिखा कि इसके पहले एक घटना ऐसी हुई थी इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज को 16 वकीलों ने ओपन कोर्ट में बोला बोरा बिस्तरा बांध ले साले ये मारेंगे देखो ऐसा इस तरह से जो अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया उसमें उनको सजा दे दिए थे तो सुप्रीम कोर्ट के फर्ज बेंच ने बोला नहीं 14 का है 14 ऑफ़ कंटेम ऑफ कोर्ट आपको पूरी ट्रायल चला के ही सजा देनी पड़ेगी। अब दूसरा बाइंडिंग जजमेंट था डॉक्टर विनय चंद्र मिश्रा एडवोकेट विनय चंद्र मिश्रा का उसमें भी यही हुआ कि बोले समरी है इसका मतलब ये नहीं कि चार्जिंग फ्रेम नहीं होगा ट्रायल नहीं होंगी।
ये भारतीय संविधान का बेसिक है कि इसको ट्रायल के बगैर सजा दे ही नहीं सकते ना आप। इस प्रज़्म टू बी इनोसेंट टिल प्रूव गिल्टी आफ्टर ट्रायल एस पर द स्ट्यूट। अब क्या हुआ गांगुली ने गेम बिगाड़ दिया जस्टिस गांगुली ने जस्टिस पसायत का तो दोनों का डिफरेंस ऑफ ओपिनियन हुआ तो ये मैटर रिफर हो गया लार्जर