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क्यों इन मुस्लिम स्टार्स को बॉलीवुड में रखने पड़े थे हिंदू नाम? असली सच जानकर चौंक जाएंगे आप!

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बॉलीवुड एक ऐसी दुनिया है जहां नाम बदलते हैं, चेहरे बदलते हैं। लेकिन कहानियां कहानियां हमेशा जिंदा रहती हैं। आज हम बॉलीवुड की उन एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें दुनिया एक नाम से जानती है। लेकिन उनकी असली पहचान कुछ और ही है। और सबसे आखिर में जो नाम आएगा वो सुनकर आप सच में चौंक जाएंगे। तो चलिए शुरू करते हैं। नंबर एक पर है वह हस्ती जिन्हें बॉलीवुड का वीनस कहा जाता है। जिनकी मुस्कान पर पूरा हिंदुस्तान फिदा था। जी हां वो नाम है मधुबाला। लेकिन दोस्तों मधुबाला तो सिर्फ एक स्क्रीन नाम था। उनका असली नाम मुमताज जहां बेगम दहलवी था। 14 फरवरी 1933 [संगीत] को दिल्ली के एक गरीब मुस्लिम परिवार में जन्मी मधुबाला के पिता का नाम अताउल्लाह खान था।

परिवार में 11 बच्चे थे और घर की आर्थिक हालत बेहद कमजोर थी। पिता ने बेटी की खूबसूरती देखी और उसे फिल्मों में उतारने का फैसला किया। मात्र 9 साल की उम्र में मधुबाला ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। नाम रखा मधुबाला यानी शहद जैसी मीठी [संगीत] लड़की। और सच में उनकी अदाएं इतनी मीठी थी कि पूरा हिंदुस्तान उनका दीवाना हो गया। लेकिन उनकी जिंदगी इतनी मीठी नहीं थी। मधुबाला [संगीत] को दिलीप कुमार से बेइंतहा मोहब्बत हो गई। दोनों की जोड़ी पर्दे पर भी पर्दे के पीछे भी जबरदस्त थी। मुगल आजम में अनारकली बनी मधुबाला और सलीम बने दिलीप कुमार। यह प्रेम सिर्फ पर्दे पर नहीं हकीकत में भी था। [संगीत] लेकिन उनके पिता ने इस रिश्ते को मंजूरी नहीं दी। दोनों के बीच एक अदालती विवाद भी हुआ था और यही विवाद उन दोनों की जुदाई की वजह बना। दोनों अलग हो गए और उसके बाद मधुबाला ने किशोर कुमार से शादी कर ली। लेकिन उस [संगीत] वक्त तक उनके दिल में एक दर्द था जो बाहर नहीं आ सका। दोस्तों मधुबाला एक दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट यानी दिल में छेद।

उस जमाने में इसका इलाज भारत में नहीं था। लंदन में ऑपरेशन हो सकता था। लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि वह इतनी लंबी यात्रा बर्दाश्त नहीं कर सकती। फिर 36 साल की छोटी सी उम्र में 23 फरवरी 1969 को बॉलीवुड का यह वीनस हमेशा के लिए ढल गया। मधुबाला एक मुस्लिम परिवार से थी। एक अच्छी इंसान थी और सबसे बढ़कर एक बेमिसाल अदाकारा थी। नंबर दो पर हैं वो एक्ट्रेस जो आज भी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन अदाकारा में से एक है। जिन्होंने हैदर से दृश्यम तक, मकबूल से भूल भुलैया तक हर किरदार में जान फूंक दी। उनका नाम है तब्बू। तब्बू का असली नाम तबस्सुम फातिमा हाशमी है। 4 नवंबर 1971 [संगीत] को हैदराबाद के एक मुस्लिम परिवार में उनका जन्म हुआ था। उनके नाना एक मशहूर फिल्म मेकर थे। उनकी मौसी बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री फरीदा जलाल हैं। यानी एक्टिंग का हुनर उन्हें विरासत में मिला था। बचपन में परिवार ने उनका नाम छोटा करके तब्बू रख दिया और यही नाम उनकी पहचान बन गई। तब्बू ने कभी अपना धर्म नहीं छुपाया। वह खुलकर कहती हैं कि वह मुस्लिम हैं। उन्होंने कभी अपना नाम इसलिए नहीं बदला कि धर्म छुपे।

बल्कि तब्बू तो बचपन का ही प्यारा नाम था। उनकी अदाकारी की बात करें तो दो बार नेशनल फिल्म अवार्ड जीत चुकी हैं। माचिस के लिए विरासत [संगीत] के लिए मकबूल हैदर दृश्यम भूल भुलैया दो हर फिल्म में वह एक नई तब्बू नजर आती हैं। तब्बू ने शादी नहीं की। अपने करियर को ही अपनी जिंदगी बनाया और 50 पार करने के बाद भी वह उतनी ही दमदार हैं जितनी पहले थी। बॉलीवुड में बहुत एक्ट्रेस आई और गई। लेकिन तब्बू वो नाम है जो हमेशा याद रहेंगी। अब नंबर तीन पर वो नाम है जिसे सुनते ही दिल भारी हो जाता है। हिंदुस्तान की ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नाम उन्हें फिल्म इंडस्ट्री ने दिया था? मीना कुमारी का असली नाम महजन बानो था। 1 अगस्त 1932 को मुंबई [संगीत] में जन्मी महजबीन के पिता अली बख्श एक थिएटर आर्टिस्ट थे। उनके घर की हालात इतनी खराब थी कि जन्म के बाद पिता उन्हें अनाथालय ले जाने निकले थे। एक ईसाई संस्था के आगे छोड़ने की सोच रहे थे। लेकिन आखिरी वक्त पर मन बदला और बेटी को घर ले आए।

6 साल की उम्र से काम शुरू किया था। पहले नाम मिला बेबी मीना और फिर धीरे-धीरे बन गई मीना कुमारी। उनकी अदाकारी की बात करें तो पाकीजा साहिब बीबी और गुलाम बहजू बावरा दिल अपना और प्रीत पराई हर किरदार में मीना कुमारी का दर्द बिल्कुल असली महसूस होता था। शायद इसलिए क्योंकि वह दर्द [संगीत] उनकी अपनी जिंदगी का था। उन्होंने मशहूर डायरेक्टर कमाल अमरोही से शादी की। लेकिन यह रिश्ता उन्हें सुकून नहीं दे पाया। धीरे-धीरे उन्होंने शराब का सहारा लिया। दर्द इतना गहरा था कि उन्होंने शायरी में उतारा। उनकी लिखी नज्में आज भी लोगों के दिल छूती हैं। आखिरकार 39 साल की उम्र में 31 मार्च 1972 को लिवर फेलियर की वजह से मीना [संगीत] कुमारी इस दुनिया से हमेशा के लिए चली गई। कहते हैं पाकीजा की शूटिंग के वक्त वो इतनी बीमार थी कि उन्हें स्ट्रेचर पर लाया जाता था। फिर भी उन्होंने वह परफॉर्मेंस दी जो अमर हो गई। महजबीन बानो से मीना कुमारी बनने का यह सफर एक ट्रेजडी ही था।

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