Cli

क्यों बॉलीवुड की इस एक्ट्रेस को कहा जाता था आ!त्मा?जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

Uncategorized

जासमीन की एक ऐसी रहस्यमई अदाकारा जो शुरुआत से अंत तक रहस्यों के पर्दे में ही रही। धीरे धीरे बोलो दिल की बातें। साल था 1979 फिल्म निर्देशक एनडी कोठारी ने अपनी फिल्मी हीरो के तौर पर उस दौर के मशहूर सुपरस्टार विनोद खन्ना को साइन किया था। फिल्म का नाम रखा था सरकारी मेहमान। ए सरकारी मेहमान पलट किधर है तेरा ध्यान? कोठारी इससे पहले बतौर प्रोड्यूसर तीन फिल्में बना चुके थे।

पहली फिल्म थी 1967 में आई बद्रीनाथ यात्रा। 1972 में नाग पंचमी और 1974 में आई खोटे सिक्के। इन तीनों फिल्मों में खोटे सिक्के उनकी इकलौती सोशल ड्रामा फिल्म थी और मारधारवा एक्शन से भरपूर थी। फिरोज खान, रिहाना सुल्तान, डेनी, अलका, रंजीत और अजीत जैसे सितारों से सजी ये फिल्म सुपरहिट थी। जीवन में तू डरना नहीं। करने का कभी करना नहीं।

इसी से उत्साहित होकर कोठारी साहब ने सरकारी मेहमान बनाने का फैसला किया और इस फिल्म को खुद डायरेक्ट करने की भी ठानी। हे बाबू हीरो लग रही हो हीरो। इतने में उनसे टकरा गई एक नई लड़की जिसका नाम था जैसमीन। मैं नहीं जाऊंगी। घर से निकली हूं हीरोइन बनने के लिए। हीरोइन बनकर ही घर जाऊंगी। हालांकि जासमीन एक ऐसे परिवार से थी जिसका फिल्मों से दूर-दूर तक कोई नाता ना था। लेकिन कोठारी साहब ने उन्हें हीरोइन बना दिया। फिल्मी दुनिया तुम्हें रास नहीं आएगी।

अरे वाह! अभी-अभी तो चैनल मिला है। एक बहुत बड़ी प्रोड्यूसर की अगली फिल्म में हीरोइन बन रही हूं धर्मिंदर के साथ। फिल्म रिलीज हुई 1979 में। बाली उमर और छररी काया वाली जैसमीन पर कई गाने फिल्माए गए। जिन्हें रविंद्र जैन ने संगीत दिया था। क्या मोहब्बत का देूंगी सारी उमारी नई अदाकारा होने के बावजूद जासमीन ने काफी उम्दा काम किया लेकिन फिल्म उम्मीद के मुताबिक नहीं चली।

लोगों ने फिल्म की विफलता का दोष नायिका जासमीन पर मड़ दिया और किसी दूसरे निर्देशक ने उन्हें काम नहीं दिया या शायद जासमीन ने किसी के साथ काम नहीं किया। लेकिन इसके करीब 4 साल बाद एनडी कोठारी ने अपने निर्देशन में दूसरी फिल्म प्रोड्यूस की तो उसमें भी जासमीन फिर एक बार दिखी। फिल्म का नाम था डिवोर्स। धीरे धीरे बोलो दिल की बातें मेरे सा 1985 में रिलीज हुई यह फिल्म एक रोमांटिक ड्रामा थी जिसके मुख्य अभिनेता थे गिरीश कर्नाड और लीड हीरोइन थी शर्मिला टैगोर की बात सुदा किस-किस को नाराज करे जैसमीन को सह कलाकार विजेंद्र घाटके के ऑपोजिट उतारा गया था और इस फिल्म में भी उन्होंने काफी बढ़िया अभिनय किया। क्या कहा तुमने?

मैं बच्चे नहीं हूं। तुम मेरे पति ना होते तो मैं तुम्हारा खून पी जाती। तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ती। उनका किरदार बहुत सीधा साधा था और इस वजह से किसी ने भी उन्हें नोटिस नहीं किया। वो मेरा महबूब मैं उसकी महबूबा वो मेरा महबूबा। फिल्म डिवोर्स में काम करते वक्त विजय से जासमीन की बढ़िया मित्रता हो गई थी। जिन्होंने बाद में रामसी ब्रदर से उन्हें मिलवाया।

विजेंद्र घाट के 1980 में आई रामसे ब्रदर्स की फिल्म गेस्ट हाउस में काम कर चुके थे। रामसे ब्रदर्स ने 1985 के आसपास आने वाली फिल्म वीराना के लिए विजयन से चर्चा की तो कहानी सुनते ही उन्होंने जैसमीन का नाम सुझाया।

यह कहानी रामसे ब्रदर्स में से एक श्याम रामसे के साथ हुई सच्ची घटना पर आधारित थी। इस घटना का जिक्र किया है फतेह चंद रामसे की नातिन आलिशा कृपलानी की लिखी किताब घोस्ट इनवर बैकयार्ड में। किताब के मुताबिक यह 1983 की घटना है। जब महाबलेश्वर में पुराना मंदिर की शूटिंग चल रही थी। शूटिंग खत्म होने के बाद जब श्याम राम सिंह मुंबई के लिए निकले तो अकेले थे और खुद ड्राइव कर रहे थे। जब वह एक सुनसान हाईवे पर पहुंचे तो उन्होंने एक औरत देखी।

वो लिफ्ट मांग रही थी। श्याम ने अपनी गाड़ी रोकी। लिफ्ट ऑफर की और औरत फ्रंट सीट पर आकर बैठ गई। श्याम रामसे ने उस औरत से बात करने की कोशिश की लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। वो बहुत सुंदर थी। बड़ी-बड़ी डरावनी आंखें थी, लेकिन वह बड़ी अजीब भी थी। श्याम के मुताबिक अचानक उनकी नजर औरत के पैरों पर पड़ी जिसे देखकर वे हक्के बक्के रह गए क्योंकि उसके पैर अंदर की तरफ मुड़े हुए थे। डर के मारे उन्होंने जोर से ब्रेक लगाया। गाड़ी रुकी और वह औरत अंधेरे में कहीं गायब हो गई।

श्याम ने किताब में बताया कि उन्होंने बिना कुछ सोचे अपनी गाड़ी भगाई और सीधा मुंबई आकर रुके। वीराना की पूरी कहानी उसी रहस्यमय लड़की के इर्द-गिर्द लिखी गई है। जिसके बाद उसे में बदलते दिखाया गया है। यासमीन कहां हो तुम? वीराने में। इस फिल्म के लिए उन्हें एक आकर्षक और बड़ी आंखों वाली लड़की की तलाश थी। जिसका चेहरा फिल्म इंडस्ट्री में बिल्कुल फ्रेश हो और जैसमीन इस कसौटी पर खरी उतरती थी।

इस दुनिया से इस दुनिया में तुझको ढूंढ इस फिल्म के लिए जैसमीन को वजन बढ़ाने की सलाह दी गई जिससे वो और और नजर आ सकी। अपनी पहचान बनाने के लिए जैसमीन ने हामी भर दी और वो सब कुछ किया जो उनसे कहा गया।

उन्होंने इस फिल्म के लिए कई बोल्ड सीन शूट कर डाले। जिसमें भी थे और l में नहाते अदाएं बिखेरते भी। डायरेक्टर ने जहां-जहां जैसे-जैसे डिमांड की जैसमीन ने वो सीन दिए। जैसमीन को इस फिल्म में एक आत्मा द्वारा पोसेस दिखाया गया था।

जिससे उन्होंने बखूबी निभाया। लेकिन फिल्म कंप्लीट होने के बाद जब बोर्ड के टेबल पर पहुंची तो सर्टिफिकेशन बोर्ड ने विराना को 8 महीनों तक लटका दिया। उन्हें फिल्म में जैसमीन द्वारा दिए गए कई सीनंस से आपत्ति थी। बोर्ड ने फिल्म में 46 कट्स सुझाए और यह कट्स होने के बाद ही फिल्म को सर्टिफिकेट दिया गया। यानी आप अंदाजा लगा सकते हैं कि फिल्म में और किस दर्जे के सीन रहे होंगे।

जब यह फिल्म रिलीज हुई तो हर तरफ हंगामा मच गया और बॉक्स ऑफिस पर पैसों की बरसात होने लगी। अपने खूबसूरत चेहरे और बॉडी की बदौलत जैसमीन हर तरफ छा चुकी थी और हर कोई जानना चाह रहा था कि फीमेल घोस्ट बनी यह नई लड़की कौन है। इतना ही नहीं फिल्म विराना के बाद जैसमीन को हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत भूतनी का टाइटल भी मिल गया। इसके बाद तो जैसमीन रातोंरात स्टार बन गई। फिर एक दिन जैसमीन की खूबसूरती के दीवाने ने उन्हें फोन किया जिससे वह इतना डर गई कि उसने घर से निकलना ही बंद कर दिया।

यह फोन था का जिसे उस दौर में सब जानते थे। वो डॉन जैसमीन का इतना दीवाना था कि उसे पाने के लिए किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार था। कहते हैं उस डॉन के डर से जैसमीन ने रातोंरात भारत छोड़ दिया और अमेरिका चली गई। वो वहां गुमनामी की जिंदगी गुजारने पर मजबूर हो गई। कुछ लोगों का यह भी कहना था कि जैसमीन जॉर्डन चली गई और वहां योग सिखाने लगी।

लेकिन यह कहानी भी इतनी सीधी सपाट नहीं थी। बल्कि जैसमीन की जिंदगी की तरह ही मिस्टीरियस थी। दरअसल इसके कुछ साल बाद जैसमीन को जानने वाले कुछ लोगों ने यह दावा किया कि अंडरवर्ड डॉन की कहानी बिल्कुल झूठी और मनगढ़ंत थी जिसे रामसी ब्रदर्स ने गड़ी थी और इसके पीछे की वजह थी जैसमीन से उनकी लड़ाई। दावा किया गया कि वीराना फिल्म की शूटिंग के दौरान जैसमीन पर दबाव डालकर कई बोल्ड सीन शूट करवाए गए थे। जिसका जैसमीन ने विरोध किया था क्योंकि स्क्रिप्ट में थे ही नहीं।

इसलिए रामसे ब्रदर्स से उनकी कई बार झड़प हो गई थी। यही कारण था कि वह जैसमीन से खार खाए हुए थे और वीराना रिलीज होने के बाद उन्होंने यह अफवाह फैला दी कि अंडरवर से जैसमीन को फोन आने लगे हैं। जिससे सभी फिल्म निर्माताओं ने डरकर जैसमीन से दूरी बना ली और फिर उन्हें कोई काम नहीं मिला। लेकिन यहां एक सवाल यह भी उठता है कि अगर ऐसा हुआ था तो जैसमीन ने मीडिया के जरिए इसका खुलासा क्यों नहीं किया और वो गायब क्यों हो गई? सन 2018 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्याम राम सिंह ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि जैसमीन इंडिया में ही है और उनकी फिल्म विराना पार्ट टू में नजर आएगी।

लेकिन अगले साल ही श्याम रामसे का निधन हो गया और जैसमीन के फैंस का इंतजार अधूरा ही रह गया। कहते हैं जैसमीन इस हीरोइन का असली नाम था ही नहीं। फिल्म वीराना में बोल्ड किरदार निभाने की वजह से उसने पर्दे पर भी अपना नाम जैसमीन रखा था। इसलिए उसका असली नाम कुछ और होने की बात कही जाती है। हालांकि अपनी पहली फिल्म में भी उसने क्रेडिट रोल में जैसमीन नाम ही रखा था। इसलिए रहस्य और भी गहरा हो जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि जासमीन मुस्लिम थी जबकि कई लोग उसे पंजाबी भाटिया परिवार की पैदाइश मानते हैं। अफसोस की बात है जासमीन के परिवार के सदस्य इस बारे में सटीक जानकारी देने के लिए मौजूद नहीं है और वह खुद किसी रहस्यमई परी की तरह उड़ चुकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *