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उस परिवार की कहानी जिसके 8 लोग ज़िंदा जल गए

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विवेक अग्रवाल के परिवार में अब महज दो सदस्य बचे हैं। एक 80 साल के उनके पिता राधेश्याम अग्रवाल जिनका इलाज मैक्स में चल रहा है और दूसरी यह गाड़ी जो अपने मालिक के आने का इंतजार कर रही है। राधेश्याम अग्रवाल बीते कई दिनों से बीमार थे। विवेक गुड़गांव में रहते हैं। प्रोफेशन से सीए हैं और वो अपने पिता के साथ वक्त बिताना चाहते थे। उनकी देखभाल करना चाहते थे। जिसके चलते वो मैक्स हॉस्पिटल के पास ही फ्लोरेंस स्टे में रहने आए और अपने परिवार के साथ आए। परिवार के चार सदस्य थे और तीन अन्य रिश्तेदार भी विवेक के साथ इस होटल में रह रहे थे। विवेक अग्रवाल खुद थे।

उनकी माता प्रेमलता थी। उनकी पत्नी तर्जनी थी। उनकी दोनों बेटियां एंजेल और पर्ल थी। उनके मामा अशोक गोयल और उनके मौसाम मौसी कमल और झिमरी भी उनके साथ इसी होटल में थे। 3 जून की सुबह तकरीबन सवा5 8:30 बजे इस होटल में आग लगती है। आग इतनी भीषण होती है कि आग क्योंकि यहां पर कोई फायर एग्जिट नहीं होता है। जो एंट्री होती है उसी से वापस एग्जिट होता है और एंट्री की ओर से आग लगना शुरू होती है। आग ऊपर की ओर बढ़ती है और विवेक और उनका पूरा परिवार जलकर इसी में राख हो जाता है। कई लोगों का कहना है कई लोग जल गए। कई लोग धुआ इतना ज्यादा हुआ जिसकी वजह से उनकी मौत हुई। पूरा हंसता खेलता परिवार गुड़गांव में अभी उनका शव पहुंचा है। उनके परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई।

छह लोगों का पोस्टमार्टम हुआ है दिल्ली के एम्स में। अभी कुछ देर पहले जब हम यह बातचीत रिकॉर्ड कर रहे हैं तो मुमकिन है उनके परिवार का अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल रही है। पूरा का पूरा परिवार खत्म हो। यह गाड़ी ऐसे ही खड़ी है। ताज टूट गया है। गाड़ी भी डैमेज है। यहां से इसे ले जाने वाला कोई नहीं है। क्योंकि इनके परिवार में जो लोग भी थे वो सब की मौत हो गई। और जो इकलौते सदस्य बचे हैं विवेक के पिता राधेश्याम अग्रवाल उनका मैक्स में इलाज चल रहा है। 3 जून को जो घटना हुई है उसमें बताया जा रहा है अभी तक 21 लोगों की जान चली गई। जिसमें 12 फॉरेन के लोग हैं जो यहां पर आए थे जिनका मैक्स में इलाज चल रहा था उनके या तो रिश्तेदार यहां पर टिके हुए थे क्योंकि मैक्स पास में है वहां पर जाना उनके लिए आसान था लेकिन जब आग लगी तो कई कोई भी जितने लोग अंदर थे कोई भी नहीं बचा जितना स्टाफ था वो भाग गया जो होटल के मालिक थे उनका बताया जा रहा है वो आए उन्होंने दूर से देखा जब आग लगती देखी तो वो भी वापस लौट गए होटल के मालिक को जरूर गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ जानकारियां और छन के आ रही हैं। बताया जा रहा है पहले यहां पर टी स्टॉल लगाने का परमिशन था जो लोकेश बजाज इस होटल के मालिक हैं

उसके बाद बेड एंड ब्रेकफास्ट का इनको परमिशन मिलता है और उसके ही चलते इन्होंने पूरी बिल्डिंग खड़ी कर ली। इनके पास फायर एंड ओसी नहीं था। इनके पास कोई अप्रूवल नहीं था इतनी बड़ी बिल्डिंग बनाने का। फिर भी इन्होंने इतनी बड़ी बिल्डिंग बनाई और यह भी सूत्रों से जानकारियां मिल रही है कि इनके एक दो और होटल हैं जो यहां पर संचालित हो रहे हैं। तमाम जो विदेश से लोग आते हैं जिन्हें मैक्स में इलाज कराना होता है वो आसपास के होटल्स में रुकते हैं और यह महज एक होटल की तस्वीर नहीं है। ऐसे तमाम होटल्स हैं जिनमें हम गए तमाम होटल्स हैं जिन पर अब ताला लटक रहा है। ये जो एक आध होटल खुले हुए हैं वहां पर जो लोग रुके हुए थे अब उन्हें फोर्स किया जा रहा है।

उन्हें जबरदस्ती होटल खाली करने के लिए कहा जा रहा है। और वहां पर अब कोई स्टाफ नहीं है। लोग रुके हुए थे वो उन्हें मजबूरन वो होटल खाली कर कर और कहीं रुकने के लिए मजबूर है। 3 जून की तस्वीरें हम सब ने देखी। इतनी दर्दनाक, इतनी भयावह तस्वीर थी। तमाम लोगों ने दो-दो तीन-तीन मंजिल से छलांग लगाई। एक तस्वीर जो सामने आई है। एक मां जो अपने बच्चे को लेकर तीन मंजिल से कूदती है। उन्हें जरूर चोट लगी है। लेकिन उनकी अभी सांसे चल रही हैं। वेंटिलेटर पर हैं। सबदर जंग में उनका इलाज चल रहा है। तमाम लोग हैं जिनका एम्स में इलाज चल रहा है। जिन लोगों की मौत हो गई है। कुछ का पोस्टमार्टम हो चुका है। कुछ का एम्स में पोस्टमार्टम चल रहा है। तमाम सवाल हैं।

एमसीडी को लेकर सवाल हैं। फायर सेफ्टी को लेकर सवाल हैं। फायर एग्जिट्स को लेकर सवाल है कि आखिर यह ऑडिट हाई कोर्ट ने कई बार दिल्ली सरकार को निर्देश दिए हैं ऑडिट के लिए। लेकिन मुकम्मल कोई ऑडिट नहीं हुआ जिसकी तस्वीर हम सबके सामने है और यह कोई पहली घटना नहीं है। विवेक विहार में भी घटना हुई। पालम में भी घटना हुई। पालम में नौ लोगों की मौत हुई। उसके बाद भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया। फिर से यह हादसा हमारे सामने है। 21 लोगों की मौत हो चुकी है। देखते हैं क्या कारवाई होती है। दिल्ली की इस घटना को देखकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जरूर जाग गए हैं। उन्होंने अब फायर ऑडिट का आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश की जितनी बिल्डिंग्स हैं उनका अब निरीक्षण होगा। उनमें चेक किया जाएगा कि फायर के प्रोटोकॉल्स कितने फॉलो हो रहे हैं। इस मामले में क्या कारही होती है वो देखना होगा। जो भी अपडेट होगा वो हम आपको देते रहेंगे और हमें लगा कि ये कहानी आप तक लेकर आनी चाहिए। बाकी इस रिपोर्ट पर आप जो भी सोचते हैं हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। कैमरे के पीछे दानिश है। मेरा नाम रजत है। शुक्रिया।

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