भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत में कई ऐसे कलाकार हुए जिन्होंने मुख्य नायक ना होते हुए भी अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उन्हीं कलाकारों में एक नाम था इंद्रवदन पुरोहित। उन्होंने फिल्मों, धारावाहिकों और रंगमंच में अपने शानदार अभिनय से पहचान बनाई। खासतौर पर उन्हें पौराणिक और चरित्र भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है। उनकी गंभीर आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और दमदार संवाद अदायगी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। भले ही वह कद के छोटे हो लेकिन अभिनय के मामले में बड़े-बड़े लोगों को पीछे छोड़ देते थे। तो आज बात छोटे उस्ताद की लेकिन हर बार की तरह आपको याद दिला दें अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें। इंद्रवदन पुरोहित का जन्म गुजरात के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय और नाटक में गहरी रुचि थी। स्कूल और कॉलेज के दिनों में वे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे।
परिवार चाहता था कि वे पढ़ाई करके कोई स्थिर नौकरी करें लेकिन उनका मन अभिनय की दुनिया में बसता था। गुजराती रंगमंच उस समय काफी लोकप्रिय था और इंद्रवदन पुरोहित ने वहीं से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। थिएटर में काम करते हुए उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखी। मंच पर लंबे समय तक काम करने से उनकी संवाद शैली और भाव भंगिमाएं बेहद मजबूत हो गई। यही अनुभव बाद में फिल्मों और टीवी में उनके बहुत काम आया। इंद्रवदन पुरोहित ने अपने करियर की शुरुआत छोटे-मोटे रोल से की। शुरुआती दिनों में उन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ा। कई बार उन्हें सिर्फ एक-दो दृश्य के लिए काम मिलता था। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा पर फिल्म निर्माताओं की नजर पड़ी और उन्हें हिंदी फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं मिलने लगी। उनका चेहरा दर्शकों के लिए जाना पहचाना बन गया। वे अक्सर धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक फिल्मों में दिखाई देते थे। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे छोटे रोल में भी जान डाल देते थे।
चाहे राजा का किरदार हो, पुजारी का, मंत्री का या परिवार के बुजुर्ग सदस्य का। वे हर भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाते थे। इंद्रवदन पुरोहित उर्फ़ छोटे उस्ताद से जिन्होंने छह भाषाओं में लगभग 250 फिल्मों में काम किया था। यह वही हैं जिन्होंने फिल्मों में मशहूर टीवी शो बालवीर में डूबा डूबा की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा इन्होंने तारक मेहता का उल्टा चश्मा टीवी शो में दयाबेन के दूर के रिश्तेदार की भी भूमिका निभाई थी। इंद्रवदन 1976 से फिल्मों में काम कर रहे थे। पुरोहित ने साल 2001 में आई हॉलीवुड फिल्म लॉर्ड ऑफ द रिंग्स द फेलोशिप ऑफ द रिंग में भी काम किया था। वह टीवी सीरीज जबान संभाल के में भी नजर आए थे। उनके कुछ अन्य उल्लेखनीय कामों में नगीना 1986, वीराना 1988, बोल राधा बोल 1992 और दरार 1996 जैसी फिल्में शामिल है। खैर आप भारत के एलियन यानी जादूगर को तो नहीं ही भूले होंगे। कैसे भूल सकते हैं? आखिर बचपन की यादें जुड़ी हुई है। कोई मिल गया फिल्म से। जादू का जिक्र पॉप कल्चर में भी खूब होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रोल किसने निभाया था? जादू के नीले कॉस्ट्यूम के पीछे कौन था? गौरतलब है कि जादू का कॉस्ट्यूम ऑस्ट्रेलिया से बनकर तैयार हुआ था। बताया जाता है कि इस कॉस्ट्यूम को तैयार होने में 1 साल का वक्त लगा था। लगभग 1 करोड़ की कीमत वाले इस 15 किलो वजनी कॉस्ट्यूम को पहनकर एक्टिंग करना पुरोहित के लिए काफी मुश्किल था। यह रोल निभाने के लिए उन्होंने अपना वजन कम किया, जिम जॉइ किया और डाइट भी फॉलो किया।
कहा जाता है जादू का मास्क इतना भारी था कि दम घुटने से बचने के लिए शूटिंग के बीच ही बीच में उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती थी। 1980 और 1990 के दशक में भारतीय टेलीविजन तेजी से लोकप्रिय हो रहा था। इसी दौर में इंद्रवदन पुरोहित ने टीवी धारावाहिकों में काम करना शुरू किया। दर्शक उन्हें टीवी स्क्रीन पर देखकर तुरंत पहचान लेते थे। उस दौर के कई लोकप्रिय धारावाहिकों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। उनकी अभिनय शैली में एक अलग गरिमा दिखाई देती थी जो दर्शकों को प्रभावित करती थी। उन्होंने कई प्रसिद्ध कलाकारों के साथ काम किया और अपने अभिनय से फिल्मों को मजबूती दी। उस समय फिल्मों में सहायक कलाकारों की बहुत अहम भूमिका होती थी और इंद्रवदन पुरोहित उन कलाकारों में गिने जाते थे जो कहानी को वास्तविकता का एहसास दिलाते थे। उनके अभिनय में कभी बनावट नहीं दिखाई देती थी। वे अपने किरदार को बहुत सहज तरीके से निभाते थे। यही कारण था कि दर्शक उनके अभिनय से काफी जुड़ाव महसूस करते थे। इंद्रवदन पुरोहित को पौराणिक भूमिकाओं में विशेष सफलता मिली। उनके चेहरे की गंभीरता और प्रभावशाली हावभाव धार्मिक पात्रों के लिए बिल्कुल उपयुक्त मानी जाती थी। उनके संवाद बोलने की शैली बहुत स्पष्ट और प्रभावी थी। उस दौर में पौराणिक धारावाहिकों की लोकप्रियता काफी अधिक थी और इंद्रवदन पुरोहित उन कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने इस शैली को सफल बनाने में योगदान दिया। इंद्रवदन पुरोहित अपने निजी जीवन में बेहद सरल और शांत स्वभाव के व्यक्ति माने जाते थे। वे ग्लैमर से दूर रहना पसंद करते थे।
फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के बावजूद उनमें किसी प्रकार का घमंड नहीं था। वे अपने परिवार से बहुत जुड़े हुए थे और खाली समय परिवार के साथ बिताना पसंद करते थे। उनके सहयोगी कलाकार बताते थे कि वे सेट पर हमेशा अनुशासन में रहते थे और नए कलाकारों की मदद भी करते थे। उनका मानना था कि अभिनय केवल प्रसिद्धि पाने का माध्यम नहीं बल्कि एक कला है जिसे पूरी निष्ठा और मेहनत से करना चाहिए। इंद्रवदन पुरोहित का करियर यह साबित करता है कि सफलता केवल मुख्य अभिनेता बनने में नहीं होती। उन्होंने बिना किसी बड़े फिल्मी बैकग्राउंड के अपने दम पर पहचान बनाई। उन्होंने वर्षों तक छोटे-छोटे रोल किए लेकिन कभी अपने काम को छोटा नहीं समझा। यही समर्पण उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। उनके समय में फिल्म इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक थी। फिर भी उन्होंने अपनी जगह बनाई। वे उन कलाकारों में थे जो मेहनत और प्रतिभा के बल पर आगे बढ़े। भले ही लोग उनका नाम तुरंत याद ना कर पाए लेकिन चेहरा देखते ही पहचान जाते थे।
यही एक सफल चरित्र अभिनेता की सबसे बड़ी पहचान होती है। टीवी और फिल्मों में उनके निभाए गए धार्मिक और गंभीर किरदार आज भी पुराने दर्शकों को याद है। उन्होंने अपने अभिनय से साबित किया कि सहायक कलाकार भी किसी फिल्म या धारावाहिक की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इंद्रवदन पुरोहित भारतीय मनोरंजन जगत के उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने बिना ज्यादा चर्चा में आए लगातार काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई। अफसोस की बात यह है कि दर्शकों का मनोरंजन करने वाले इंद्रवदन पुरोहित का 2014 में मल्टीपल ऑर्गन फेलियर्स के कारण निधन हो गया। इंद्रवदन पुरोहित एक प्रतिभाशाली और मेहनती अभिनेता थे। जिन्होंने फिल्मों, टीवी और रंगमंच में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे भले ही बड़े सुपरस्टार नहीं बने लेकिन एक मजबूत चरित्र अभिनेता के रूप में उन्होंने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। उनकी सादगी, मेहनत और शानदार अभिनय उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत के यादगार कलाकारों में शामिल करता है। आज भी उनके निभाए गए किरदार पुराने दर्शकों की यादों में जीवित हैं। तो दोस्तों, अभी के लिए बस इतना ही। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक आप अपना ध्यान रखिए। बाय बाय।