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मोहम्मद अली जिन्ना का मुंबई वाला बंगला आज किसके पास है?

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पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने अपनी जिद्द पर देश का विभाजन कराया था बहुत कुछ उन्होंने अपनी मर्जी के मुताबिक ले लिया था और कुछ ऐसी चीजें भी थी जो उनकी चीजें होकर भी उनकी नहीं हो पाई इन्हीं में से एक नायाब चीज थी उनका बंगला जो उन्होंने मुंबई में बनवाया था दो साल की मेहनत से बना यह बंगला उनके लिए बेहद खास था लेकिन जब देश आजाद हुआ तो उन्हें इस बंगले को पीछे छोड़ना पड़ा आज हिस्ट्री कनेक्ट में जिन्ना के इसी घर की कहानी है जिसके लिए वो पाकिस्तान छोड़कर भारत वापस आने को तैयार हो गए थे क्या है इस घर का इतिहास आज के इस वीडियो में यह सब जानेंगे तो वीडियो को एंड तक जरूर देखिएगा क्योंकि अपना इतिहास नहीं जानोगे तो खुद को कैसे पहचानोगे साउथ मुंबई में एक महंगा इलाका है मालाबार हिल्स यहीं पर पड़ता है पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना का खूबसूरत घर इस घर को बनवाने की कहानी शुरू होती है साल 1934 से हुआ

यह कि जिन्ना इसी साल इंग्लैंड से वापस आए थे और मुस्लिम लीग को उन्होंने संभाल लिया था पहले वह कांग्रेस के सदस्य होते थे इस दौरान वह मुंबई के मालाबार हिल्स में ही एक बंगले में रहते थे साल 1918 से यही बंगला उनका घर होता था लेकिन 1929 में जब उनकी दूसरी पत्नी की मौत हुई तो इस बंगले से भी इनका मन उठ गया उन्होंने इस घर को पहले बेचने की सोची फिर 1936 में उन्होंने पूरे बंगले को गिराकर उसकी जगह एक नया घर बनवाना शुरू किया उस समय बंबई के जानेमाने आर्किटेक्ट क्लॉट बटली ने इस घर का डिजाइन बनाया था जिन्ना का यह घर पूरे दो सालों में बना इस जि घर में इन्होंने इटालियन संगमरमर अखरोट की लकड़ी लगवाई इजिप्ट से खास मिस्त्री बुलाए गए थे और बाहर से मंगाकर एक लिफ्ट भी लगवाई गई जिन्ना का यह घर पूरे ढाई एकड़ में बना था उन्होंने एक-एक चीज का बारीकी से ध्यान रखा था

1939 में घर बनकर तैयार हुआ और जिन्ना ने यहां रहना शुरू कर दिया था लेकिन घर बनने में जितना टाइम लगा उतने में वक्त बदल गया था 1940 में लाहौर डिक्लेरेशन के बाद पाकिस्तान बनाने की मांग तेज हो गई थी जिन्ना भी पाकिस्तान बनाने की जिद्द पूरी करने के लिए दिल्ली में रहने लगे थे इस बीच 1944 में उन्होंने सोचा कि जब मुंबई में व रह नहीं रहे हैं तो घर को बेच ही देते हैं उन्होंने हैदराबाद के निजाम से इसके लिए कांटेक्ट किया निजाम की तरफ से 85 लाख का ऑफर आया जिन्ना बोले कि खाली जमीन ही 15 लाख की है इस तरह से डील कैंसिल हो गई 1947 में जब लगभग सब तय हो गया कि अलग पाकिस्तान मुल्क बनेगा तो जिन्ना ने दिल्ली वाले बंगले को अपने दोस्त रामकृष्ण डालमिया को ₹ लाख में बेच दिया लेकिन दूसरी तरफ व बंबई वाले बंगले को बेच नहीं पाए 1947 में उन्हें ₹1 लाख का ऑफर फिर आया लेकिन जिन्ना 20 लाख से नीचे मानने वाले नहीं थे सो बंगला बंबई में रह गया और इसके मालिक जिन्ना पाकिस्तान चले गए लेकिन फिर भी जिन्ना का बंगले से मन नहीं हटा

जब जिन्ना पाकिस्तान गए तो उस टाइम पर श्री प्रकाश नाम के एक राजनेता को नेहरू ने पाकिस्तान का पहला हाई कमिश्नर या उच्चायुक्त बनाया श्री प्रकाश पाकिस्तान पहुंचे तो वहां कोई ऑफिस तो था नहीं इसलिए उन्हें एक होटल में रुकना पड़ रहा था डॉक्टर अजीत जावेद ने जिन्ना की जिंदगी पर सेकुलर एंड नेशनलिस्ट जिन्ना नाम से किताब लिखी इस किताब में वोह लिखती हैं कि जब जिन्ना तक यह खबर पहुंची कि भारत सरकार मुंबई वाले बंगले पर कब्जा करने जा रही है तो वह श्री प्रकाश के पास पहुंच गए और लगभग गिड़गिड़ा हुए उन्होंने कहा कि नेहरू से कहना इस तरह मेरा दिल ना तोड़े तुम जानते नहीं मैं मुंबई से कितना प्यार करता हूं मैं अपनी जिंदगी के आखिरी दिन वहीं बिताना चाहता हूं इस बात का मतलब यह निकलता है कि जिन्ना खुद पाकिस्तान छोड़कर बंबई वापस आना चाहते थे श्री प्रकाश को भी पहली बार में इस बात पर बहुत अचंभा हुआ उन्होंने जिन्ना से पूछा तो क्या मैं प्रधानमंत्री से यह कहूं कि आप वापस आना चाहते हैं जिन्ना ने जवाब दिया हां तुम यह कह सकते हो मैं दिल्ली जाकर नेहरू से कहना चाहता हूं कि पुराने गिले शिकवे भुलाकर दोबारा दोस्त बन जाएं बहरहाल जिन्ना ने जो कहा वह हो नहीं पाया वह पाकिस्तान में ही रह गए वह अपने बंगले को किसी यूरोपियन परिवार को देना चाहते थे नेहरू इसके लिए तैयार भी हो गए थे और ब बादा उन्होंने जिन्ना को 000 किराया देने की बात भी मान ली थी

लेकिन इस डील से पहले ही सितंबर 1948 में जिन्ना की मौत हो गई हालांकि उन्होंने इस घर को अपनी बहन फातिमा के नाम कर दिया था लेकिन फातिमा को यह घर मिल नहीं पाया साल 1950 में भारत सरकार ने कानून पास किया इवेक प्रॉपर्टी एक्ट इसके हिसाब से विभाजन के टाइम पर अपनी प्रॉपर्टी को भारत में छोड़ जाने वाले उन लोगों की प्रॉपर्टी की कस्टडी भारत सरकार के पास हो गई इस तरह से जिन्ना का बंगला भी भारत सरकार की कस्टडी में आ गया 1955 में इस घर को ब्रिटिश हाई कमीशन को किराए पर दे दिया गया साल 1981 तक जिन्ना हाउस में ब्रिटिश हाई कमिश्नर का दफ्तर हुआ करता था लेकिन इसके बाद कुछ वक्त के लिए इसको इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस यानी आईसीसीआर को भी सौंपा गया इसके बाद इसे एनिमी प्रॉपर्टी यानी शत्रु संपत्ति घोषित किया गया और सरकार ने इसे अपने कब्जे में ले लिया हालांकि इस बीच जिन्ना के रिश्तेदारों की तरफ से भी इस प्रॉपर्टी को लेकर कई बार हक जताया गया साल 19 6 में जिन्ना की बहन फातिमा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक अपील दायर करके इस प्रॉपर्टी पर अपना हक बताया लेकिन उन्हें यह घर मिल नहीं पाया

फिर साल 2007 में जिन्ना की एकमात्र बेटी डीडीना वाडिया ने इस संपत्ति पर अपना हक जताया लेकिन 2016 में शत्रु संपत्ति कानून में सरकार ने बदलाव किए इसके तहत दुश्मन की संपत्ति पर सरकार कब्जा कर सकती थी लेकिन 2018 में संसद के एक सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री ने यह जवाब दिया कि जिन्ना हाउस एनेमी प्रॉपर्टी एक्ट के तहत नहीं आता बल्कि यह 1950 एक्ट के तहत इवेक प्रॉपर्टी है हालांकि डीडीना वाडिया जिन्होंने प्रॉपर्टी पर दावा किया था उनकी भी साल 2017 में मौत हो गई और अब उनके बेटे नुस्ली वाडिया इस मामले के पक्षकार हैं और मामला अभी भी कोर्ट में है जिन्ना के इस घर पर पाकिस्तान भी लगातार हक जताता रहा है पाकिस्तान सरकार की तरफ से कई बार मांग हुई कि जिन्ना हाउस को उन्हें वाणिज्य दूतावास बनाने के लिए दे दिया जाए साल 2001 में परवेज मुशर्रफ भारत के दौरे पर आए थे उन्होंने उस दौरान भी यह मांग उठाई थी लेकिन कुछ बात बनी नहीं कुल जमा बात यह है कि जिन्ना ने पाकिस्तान बनाया वह आज किस हालत में है आप जानते हैं और जो घर उन्होंने बनाया आज उसकी भी हालत पाकिस्तान जैसी ही हो गई है तो कहानी थी यह जिन्ना के घर की आपको ये कहानी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताइएगा वीडियो को लाइक और शेयर करना ना भूले और ऐसी तमाम इंटरेस्टिंग कहानियों के लिए हिस्ट्री कनेक्ट को सब्सक्राइब जरूर करें धन्यवाद

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