दाऊद इब्राहिम जिंदा है या मर गया? देखिए दाऊद इब्राहिम जिंदा है मुझे लगता है। लेकिन मसूद असर मुझे नहीं लगता कि पूरी तरीके से जिंदा है। ये बड़ी खबर मैं आपको दे रहा हूं। तो दाऊद के घर मैंने पाकिस्तान में रिपोर्टर भेजा और उसने वीडियो बनाया पूरे उसका और हमने इमीडिएटली उस चैनल पे चला दिया और कि भाई दाऊद के घर सबसे पहले बाहर से हम पहुंचे। आईएसआई ने शाम को उसको उठा दिया। ये क्यों है कि इजराइल हमारा सच्चा दोस्त है। जबकि हम इजराइल के खिलाफ स्टैंड भी ले लेते हैं। इजराइल के खिलाफ बयान दे देते हैं। हम पैलेस्तीन से भी उतने अच्छे रिश्ते रहे। हिस्ट्री भी हमारी पेलेस्टाइन की तरफ इशारा करती है। ये इजराइल के लोग भी मुझे पूछते हैं। बहुत लोगों ने मुझे पूछा कि यार हमें समझ नहीं आता ये इंडिया के लोग इतना सोशल मीडिया पे हर जगह सपोर्ट क्यों करते हैं? तो मैंने लगता है इसमें दो चीजें हैं। इजराइल क्या बलूचिस्तान में कोई ऑपरेशन चला रहा है। देखिए इसका तो दो ही लोग आपको बता सकते हैं।
या तो मोसाद या अननोन गन मैन। अभी [हंसी] क्योंकि इजराइल और पाकिस्तान के डिप्लोमेटिक टाइल्स नहीं है। लेकिन बहुत बार ऐसा देखा गया है कि इजराइल के रास्ते एयरक्राफ्ट जा रहा है। जा रहा है जा रहा है और वो इस्लामाबाद और लाहौर में लैंड करता है। दाऊद इब्राहिम जिंदा है या मर गया है? देखिए दाऊद इब्राहिम जिंदा है मुझे लगता है। लेकिन मसूद अज़र मुझे नहीं लगता कि पूरी तरीके से जिंदा है। ये बड़ी खबर मैं आपको दे रहा हूं। 2020 के बाद से गायब है। देखिए मैं बहुत सालों से मसूद अज़र को बहुत केयरफुली ऑब्ज़र्व कर रहा हूं। क्योंकि मसूद अज़र अपने आप को जर्नलिस्ट कहता है पत्रकार और वो हर हफ्ते एक कॉलम लिखता था। अल कलाम वीकली करके उनका एक मैगज़ीन आता था और उनका एक स्पोक्सपर्स है सैफुल्लाह तो वो 6- सात मिनट का ऑडियो बनाता था जो मसूद अज़र आर्टिकल लिखता था वो बंद हो गया पिछले कई ये जो हमने हमला किया था 14 परिवार के लोग मारे गए थे 14 करोड़ शबाज शरीफ ने दिए थे उससे पहले ही मसूद अज़र का कोई ठिकाना नहीं है अभी मसूद अज़र का जो है भाई मारा गया मारा क्या गया मतलब उसकी डेथ हुई हार्ट अटैक हुआ जो भी हुआ बावलपुर में उसका जो है क्रिमेशन हुआ वहां पर भी मसूद अज़र नहीं था तो मसूद अज़र है कहां ये मैं सवाल पूछ रहा हूं मुझे नहीं पता मैं मतलब वहां पर पाकिस्तान में मौजूद नहीं हूं। होता तो आपको बताता लेकिन आपने दाऊद पे सवाल पूछा तो दाऊद पे मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि हमारी जो इन्वेस्टिगेशन रही या हमारा जो रिसर्च रहा उसमें पता चला कि दाऊद जो हैं ऑब्वियसली फिल्म इंडस्ट्री में टच में थे। फिल्म इंडस्ट्री के लोगों के कई वीडियो हैं जिसमें बताया गया है कि वो उनसे मिलते थे। आई थिंक डोंगरी में या कहीं पे मुंबई में उनका रहना सहना था। फिर वो दुबई में रहे। दुबई के रास्ते पाकिस्तान गए। तो पाकिस्तान में वाइट हाउस करके है सऊदी मॉस्क के आसपास क्लिफ्टन कराची में वहां पर इनका एक मकान है। हाउस नंबर 37 स्ट्रीट 30 फेज फाइव डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी कराची यहां पर इनका मकान है। नूराबाद में एक बंगला है कराची में। ये एक हिली एरिया है वहां पर और 617 सीपी बेरार सोसाइटी ब्लॉक 78 कराची। तो यह चार इनके मकान हैं जो कराची में हैं। इसके अलावा वाइट हाउस अलवसल रोड जुमेरा दुबई यहां पर भी इनका दुबई में ठिकाना रहा है। कई बार वहां पर गए हैं। शादियां अटेंड की हैं। शादी की है। बहुत चीजें की हैं दुबई में। तो मेरा यह मानना है या जितना मैंने सुना है मैं आपको बताऊं कि 2023 में कोई घटना घटती है
और उसके बाद उनको एक मेडिकलली बहुत ज्यादा प्रॉब्लम हो जाती है और वह ऑलमोस्ट बेड रिडन हो जाते हैं और तब से वह अंदर ही रहे हैं। और इससे पहले क्या हुआ जो मैं आपको बताऊं 2017-1 की घटना होगी। मैं एक टीवी चैनल में काम करता था। हमारा पाकिस्तान में रिपोर्टर था जिसको मैंने हायर किया था। तो दाऊद के घर मैंने पाकिस्तान में रिपोर्टर भेजा कराची में। आई थिंक वो क्लिफ्टन या डीएचए ही था और वहां पर उसने भी वो एक यंग रिपोर्टर था और उसने वीडियो बनाया पूरे उसका और हमने इमीडिएटली उस चैनल पे चला दिया और क्या जबरदस्त चला कि भाई दाऊद के घर सबसे पहले बाहर से हम पहुंचे। आईएसआई ने शाम को उसको उठा दिया और आईएसआई ने उठाया 24 घंटे तक उसकी जो है खातेदारी की और बोला कि मुझे पता है तू अकेला रहता है यहां कराची में और तेरी मां कहां रहती है यह भी पता है तो तुझे जिंदा रहना है तो खबरदार उसके बाद बेचारा वो नौकरी छोड़ दिया और गायब हो गया तो ये कहानी है दाऊद की और मुझे लगता है कि बहुत ऐसी अटकलें भी लगी कि उनका कुछ पता नहीं कुछ हुआ था फिर गैंगन हो गया टांग में फिर वो बेड रिडन हो गए और मेरे को एक यह भी वाकया याद है एक चैनल था। उसके एक रिपोर्टर ने कहीं से नंबर मिला होगा उनको तो फोन किया क्लिफ्टन में। कोई महिला ने आई थिंक उनकी वाइफ थी, बेटी थी। कौन था? उसने फोन उठाया और पूछा कि अरे दाऊद भाई हैं। तो उन्होंने बोला हां और उसके बाद कुछ पूछा तो फोन काट दिया। तो यह आपको बस एविडेंस रहा कि दाऊद भाई हैं और दाऊद भाई अभी भी जिंदा है लेकिन वो स्थिति नहीं है मुझे लगता है जो उस वक्त थी उस वक्त एक अलग ओरा था और जिस तरीके से कराची के गैंग्स की हम बात करते हैं रहमान डकैत से लेकर अरशद पप्पू एटसेट्रा वैसे ही बंबई में गैंग्स थे अलग-अलग जो उनका अलग ही रोल था फिर मुंबई की पुलिस ने हम दाऊद को मार क्यों नहीं पाए मुझे लगता है एजेंडा में नहीं रहा होगा जो पॉलिटिकल विल भी है और इंटेलिजेंस भी है उन्होंने कॉल लिया होगा क्योंकि हमेशा हम इजराइल तो है इजराइल जो है पब्लिकली आती है और कहती है 7 अक्टूबर के बाद कि अगले एक साल में मूसाद शबेत या जितनी भी एजेंसियां हैं वो प्रण ले रही हैं कि हिजबुल्ला हो हमस होती हो या ईरान हो जितने भी आका हैं जिन्होंने 7 अक्टूबर में भूमिका निभाई हम उनको मार डालेंगे पब्लिकली ये अनाउंस करती है मीडिया में आता है जेरूसलम पोस्ट में अलग-अलग जगह ये हमेशा से करते हैं वो और एक साल में पूरी तरीके से हिजबुल्ला को लेबनन में हमास को गाजा में हमास को ही तेहरान में और ईरान को भी पूरी तरीके से खत्म देव डन बिफोर आल्सो वो जो उनका ओलंपिक वाला ओलंपिक का हुआ इवन होलोकस्ट के जो लोग थे जो होलोकस्ट में इन्वॉल्व थे जिन्होंने यहूदियों को मारा उनको टॉर्चर किया उनको अर्जेंटीना से किडनैप करके आए और यहां पर उनको सजा हुई और आज पहली बार सजा-ए मौत को जो है लीगल सेंशन दिया गया है क्योंकि अब इजराइल का जो 7 अक्टूबर का हुआ हॉस्टेज क्राइसिस हुआ उनको हजारों आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा तो अब उन्होंने रियलाइज किया कि भ हम कैसे छोड़ सकते हैं क्योंकि क्योंकि जिसको हम छोड़ रहे हैं वो फिर से हमास पैदा करेगा। तो अब उन्होंने सबसे पहले एक कंसेंसस से लॉ लाया है मारने का, फांसी देने का। तो जितने भी हमास के लोग हैं अभी धीरे-धीरे उनको फांसी देंगे। इजराइल की कौम में आप तो इतनी बार गए हो। आदित्य इजराइल की कौम में ऐसा क्या है कि इतनी छोटी कौम होने के बावजूद दुनिया की नाक में दम कर रखा है उन्होंने। देखिए जब मजबूरी होती है ना मजबूरी में आपको चीजें करनी पड़ती हैं। अब मैं अपने आप को या अपने समुदाय को इजराइलियों के साथ कंपेयर नहीं कर रहा।
यहूदियों के साथ नहीं क्योंकि ट्रेजडीज कंपेयर नहीं होती और यहूदियों के साथ जो हुआ बहुत बड़ा लेवल पर हुआ। उसको हम बिल्कुल किसी चीज के साथ कंपेयर नहीं कर सकते। लेकिन जो कश्मीरी हिंदू समुदाय है जब हमको कैंपों में रहना पड़ा जम्मू में जब हम सब कुछ खो दिया। हमारे घर चले गए, मंदिर चले गए। हमारा जो इतिहास था पूरी तरीके से मिट गया। हमें यह एहसास हो गया कि कश्मीर हम वापस नहीं जा सकते। अब हम आगे क्या करेंगे? हमने पढ़ाई की। हमने एजुकेशन का सहारा लिया। हमने जब सरकार के पास गए उस वक्त हमारे जो शिवसेना के बाला साहब ठाकरे थे या एजुकेशन मिनिस्ट्री में एक एम के काऊ थे उनके पास गए। हमने बोला हमें पैसा नहीं चाहिए। हमें घर नहीं चाहिए। आप हमें सीटें दीजिए। ओवर एंड अबव रिजर्वेशन नहीं। ओवर एंड अबव अपने मेरिट पे। आप हमें सीटें दीजिए। हमें इंजीनियरिंग करनी है। हमें पढ़ाई करनी है विश्वविद्यालय में। अपने बलबूते पर कुछ बनना है और हम बने। तो यही चीज है इजराइल में। जब मैंने बातचीत की, लोगों से मिला एक अलग लेवल का जज्बा है। इजराइल में एक चीज है जब जंग होती है अपनी सोव सोवनिटी पे इंटेग्रिटी पे जब सवाल होता है तो सब एकजुट हो जाते हैं। लपेट जो अपोजिशन लीडर हैं वो नेतन याू को पूरी तरीके से जो है क्रिटिसाइज करेंगे। उनकी खाल उतार देंगे पूरी तरीके से। लेकिन जब जंग होती है तब जो है उनके साथ खड़े रहेंगे। जब मोदी जी गए थे ना मैं पार्लियामेंट में मौजूद था उसको कनेसिट कहते हैं इजराइल में जेरूसलम में है तो एक बहुत बड़ी पॉलिटिकल कंट्रोवर्सी हुई थी कि यार लपे जो लीडर अपोजिशन है उन्होंने बोला था मोदी पार्लियामेंट आएंगे हम बॉयकॉट करेंगे तो यहां पर भी कांग्रेस ने सवाल उठा लिया भाई देखो आपकी तो खिल्ली उड़ रही है बॉयकॉट कर रहा है अपोजिशन लेकिन फिर उन्होंने बोला कि नहीं मोदी को बॉयकॉट नहीं करेंगे हम नितिन याू को और पार्लियामेंट के जो स्पीकर हैं अमीर उनको बॉयकॉट करेंगे तो हुआ यह कि जैसे ही इवेंट शुरू हुआ तो वॉकआउट हुआ कोई वहां पर जितने भी अपोजिशन थे चले गए। फिर नेतन याू ने अपनी स्पीच दी, स्पीकर ने अपनी स्पीच दी और जैसे मोदी जी को बुलाया गया अपोजिशन वापस आया और उन्होंने उसका समर्थन दिया और अपोजिशन के लीडर यार लपिड ने खुद स्पीच दी मोदी की तारीफ की। तो यह चीज जज्बा अलग है। और एक और चीज इजराइल जो है ऑलमोस्ट डेजर्ट है। उनके पास पानी नहीं है। लेकिन पानी के लेकर उन्होंने ऐसा इनोवेशन किया है। एग्रीकल्चर को लेकर उनको ऐसा इनोवेशन किया है कि आज इंडिया उनसे कह रहा है कि ये जो ड्रिप इरीगेशन है ये आप हमें बताएं कि ये टेक्नोलॉजी कैसे चलती है? आप पेनड्राइव यूज़ करते हैं कई सालों से। उसका इजाद कहां से हुआ है? इजराइल से हुआ है। तो जब मजबूरी होती है ना तब मजबूरी में आपको करना पड़ता है। मेरे यहां राजेश पवार आए थे कुछ समय पहले। जी तो राजेश ने कहा यार शुभांकर मैं तीन देशों में डिटेन हुआ हूं। [हंसी] यूक्रेन में, ईरान में, इजराइल में। तो उन्होंने डिफरेंस बताया। उन्होंने कहा जब मैं यूक्रेन में था तो यूक्रेन के लोग पैसा देकर भाग रहे थे यूक्रेन से। जब मैं इजराइल गया तो मैंने देखा लोग दुनिया भर के फ्लाइट करके वापस आ रहे थे और वापस भी नहीं। जो यहूदी बाहर के देश में रह रहे हैं, बाहर के नेशनल हैं, वह एक चीज होती है उनका एक कस्टम है जिसको कहते हैं अलाया। अलाया लेके वह वापस आते हैं और खासकर जब जंग होती है तब कहते हैं हम वापिस आएंगे। आपकी इकॉनमी में हम साथ देंगे और आपकी आर्मी भी ज्वाइन करेंगे। तो ये इंडिया से भी जो बहुत सारे यहूदी खासकर महाराष्ट्र में खासकर आई थिंक मिजोरम में और केरल में बहुत यहूदी हैं। तो वो लोग वापस गए हैं वहां पर सेटल होने के लिए। वहां पर ऐसे परिवार हैं जो कई दशकों से यहां पर रह रहे थे लेकिन वापस गए हैं
और अब इजराइल में रह रहे हैं। तो यह जो जज्बा है वो वहां पर ही है और आप देखिए ना ज्योग्राफिकली भी इजराइल कैसे कटघरे में है। इस्लामी देश पूरी तरीके से वहां पर है और खासकर ईरान तो बार-बार कहता है कि फ्रॉम द रिवर टू द सी पैलेस्टाइन विल बी फ्री। फिर कहते हैं कि भाई यहूदियों को हम पूरी तरीके से मिटा देंगे। पूरा इजराइल जो है ऑक्यूपाइड पेस्टाइन है। यहां पर इनको लेने का कोई हक नहीं है। लेकिन इंडिया का हिस्टोरिकली जो पर्सपेक्टिव रहा है वो बार-बार ये रहा है कि हमारा स्ट्रेटेजिक टाइ इजराइल के साथ है। डिफेंस टाइ है। लेकिन हम टू स्टेट स्यूशन में बिलीव करते हैं। हम कहते हैं कि इजराइल और पैलेस्तीन साथ-साथ नेबर्स की तरह रहने चाहिए। और इससे किसी को तकलीफ नहीं है। मैंने इजराइल के कई राजदूतों का इंटरव्यू किया है। फिलिस्तीन के कई राजदूतों का किया है। फॉरेनस्टर्स का किया है। और मैं बार-बार उनको पूछता हूं क्या आपको तकलीफ नहीं होती? इंडिया ये बार-बार कहता है टू स्टेट सॉल्यूशन। आप तो कहते हैं नहीं फिलिस्तीन कुछ है ही नहीं। फिलिस्तीन कहता है इजराइल कुछ है नहीं। बोला नहीं नहीं हम इंडिया का समझते हैं पक्ष। लेकिन हम इंडिया के साथ अच्छे जो हैं जो है रिश्ते रखें। ये तो गोविंदा वाले फिल्म का हो गया कि हाथ इधर है। लेकिन दिल आपकी तरफ है। बिल्कुल। लेकिन, आप देखिए ना जब हमला भी हुआ 7 अक्टूबर का, उसके बाद इजराइल ने हमला जो है पूरी तरीके से गाज़ा में किया। पहला ऐसा देश कौन था जिसने 7 अक्टूबर कंडम किया? आतंकवादी हमला, इंडिया। पहला ऐसा कौन सा देश था जिसने फिलिस्तीन में लोगों के लिए मदद भेजी इजिप्ट के रास्ते? इंडिया। तो ये तो फिर इजराइली क्यों सपोर्ट करते हैं इंडिया को? क्योंकि एक बड़ा परसेप्शन है कि ग्लोबल पॉलिटिक्स में अगर इंडिया कोई ट्रू फ्रेंड है तो वो इजराइल है। हमने ये इंडिया पाकिस्तान वॉर में भी देखा कोई देश हमारे साथ स्टैंड लेने को तैयार नहीं था। पाकिस्तान की तरफ से चार दोस्त आए। हमारे साथ कोई नहीं आया। हमें टेक्नोलॉजी का सपोर्ट इजराइल देता है। इनफैक्ट राजेश पवार ने ही हमारे इंटरव्यू में बताया कि फ्रांस से हमने राफेल खरीदे। लेकिन अंदर टेक्नोलॉजी नहीं बताई इन्होंने अपग्रेड करने के लिए। इजराइल हमें आयरन डोम दे रहा है जिससे हम इस्तेमाल कर सकते हैं और भविष्य में अगर हमारे कोई हमला करेगा तो हम मजबूत रहेंगे। हमारी इॉनमी पे इतना असर नहीं आएगा क्योंकि उससे $4 में ही हम इंटरसेप्ट कर लेंगे। तो ये क्यों है कि इजराइल हमारा सच्चा दोस्त है। जबकि हम इजराइल के खिलाफ स्टैंड भी ले लेते हैं। इजराइल के खिलाफ बयान दे देते हैं। हम पैलेस्तीन से भी उतने अच्छे रिश्ते रहे। हिस्ट्री भी हमारी पेलेस्टाइन की तरफ इशारा करती है। देखिए शुभांकर आप यह देखिए इजराइल की सिचुएशन क्या है ज्योग्राफिकली और पॉलिटिकली और इंडिया की सिचुएशन क्या है ज्योग्राफिकली और पॉलिटिकली हमारे साथ बांग्लादेश है पाकिस्तान है अफगानिस्तान है उनके साथ आसपास इजिप्ट है पेलेस्टाइन है जॉर्डन है और बाकी देश आसपास सीरिया है ये है तो वो पूरी तरीके से चपेट में है। इस्लामी कट्टरपंथी आतंकवाद उनके खिलाफ प्रहार कर रहा है पूरी तरीके से। इस्लामी कट्टरपंथी आतंकवाद इंडिया के खिलाफ कर रहा है। सो जो सबसे बड़ा ये इजराइल के लोग भी मुझे पूछते हैं। बहुत लोगों ने मुझे पूछा वहां के बुद्धिजीवी कि यार हमें समझ नहीं आता ये इंडिया के लोग इतना सोशल मीडिया पे हर जगह सपोर्ट क्यों करते हैं? तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैंने लगता है इसमें दो चीजें हैं।
एक है सर्वाइवल इंस्टिंक्ट। इजराइलियों का जो सर्वाइवल इंस्टिंक्ट है जबरदस्त है। मुझे लगता है इंडियंस का भी जो सर्वाइवल इंस्टिंक्ट है जबरदस्त है। आतंकवादी हमला होगा। मुंबई में 2611 हुआ। अगले दिन काम कर रहे थे। डब्बे वाले हर जगह काम कर रहे थे। ट्रेनें चल रही थी। सब कुछ नॉर्मल चल रहा था। दूसरा यह जो आतंकवादी हमला होता है जिस पर बीतती है वही समझ पाता है कि क्या हो रहा है। 2611 में भी इजराइयली यहूदियों को मारा गया। खबाड हाउस में। साजिद मीर, मेजर इकबाल, लखवी वहां से फोन पर कह रहे थे यह काफिर है इनको मारो। तो जो विक्टिम है टेररिज्म के वही समझ सकते हैं। तो मुझे लगता है इंडिया और इजराइल का सबसे बड़ा कनेक्शन यह है कि इस्लामिस्ट टेररिज्म दोनों निभक्ता है और दोनों इसके खिलाफ जो है एकजुट काम करना चाहते हैं। लेकिन खासियत तो यह है कि जितनी भी मेजर चीजें इनके बीच में होती हैं ये पब्लिकली अनाउंस नहीं करते। मैं आपको कह रहा हूं बार-बार बहुत चीजें ऐसी चल रही हैं। कोई बड़ी बात नहीं है कि आयरन डोम ऑलरेडी हो यहां पर। इजराइल क्या बलूचिस्तान में कोई ऑपरेशन चला रहा है? मेरे पास एक थ्योरी आई थी कि ईरान और पाकिस्तान दोनों को परेशान करने के लिए इजराइल ने बलूचिस्तान में खूब पैसा दिया है। और आफ्टर ईरान उनका अगला टारगेट पाकिस्तान है। क्योंकि वो जानते हैं मुस्लिम वर्ल्ड में न्यूक्लियर पावर पाकिस्तान के पास है जो देर सवेेर परेशान करेगा उनको। तो उस लॉन्ग प्रोसीजर का जो हिस्सा है वो बलूचिस्तान के जरिए टैकल करना चाहते हैं। देखिए इसका तो दो ही लोग आपको बता सकते हैं। या तो मोसाद या अननोन गन मैन। अभी [हंसी] वही लोग हैं बता सकते हैं। क्या ये थ्योरी हो सकती है? देखिए मैं एक चीज आपको बता सकता हूं। क्योंकि आप आपकी फिल्म में तो पूरा बलूच ही बलूच है। आपने बलूचों पे अच्छी खासी रिसर्च की होगी। आपके बलूच तो काफी हथियार पा रहे थे। यहूदी भी है। हां। एक [हंसी] यहूदी भी है। हां। हां और फिर लेकिन मैं आपको बताऊं कि इजराइल और पाकिस्तान के डिप्लोमेटिक टाइस नहीं है। है ना? लेकिन बहुत बार ऐसा देखा गया है कि इजराइल के रस्ते एयरक्राफ्ट जा रहा है जा रहा है जा रहा है और वो इस्लामाबाद और लाहौर में लैंड करता है। कई बार ऐसा देखा गया कि पाकिस्तान से कुछ लोग हैं वो दुबई के रस्ते, यूएई के रास्ते इजराइल गए। कई ऐसे लोग हैं। तो जर्नलिस्ट पिक्चर में भी देखा लोग हैं। ऐसा हो रहा है। वो पिक्चर में वो जो आपने ये लगाया था शबाज शरीफ का। अब [हंसी] ओवर्टली और कोवर्टली क्या चीजें हो रही है ये मैं आपको नहीं कह सकता। लेकिन एक चीज तो तय है कि इजराइल की पाकिस्तान को लेकर जो नीति है वो बहुत बदली है।
और ये मैं खुद मैंने देखा है। आज से करीबन 10-12 साल पहले एक इजराइल के राजदूत दिल्ली में थे। मैं उनका इंटरव्यू कर रहा था। और मैंने पाकिस्तान पे एक सवाल पूछा टेररिज्म को लेकर। वो नाराज हो गए। वो खड़े हो गए और ऑलमोस्ट वॉक आउट कर दिया। तो मैंने बोला क्या हुआ? बोला नहीं मुझे पाकिस्तान पे बात नहीं करनी है। आप पाकिस्तान पे क्यों पूछ रहे हैं? इंडिया इजराइल पे पूछिए। एकदम नाराज हो गए और आज रू नजार है जो इजराइल के राजदूत यहां हैं। तो अचानक मैं इंटरव्यू कर रहा था। मैं गाज़ा पे कर रहा था, ईरान पे कर रहा था। मेरा पाकिस्तान पे कोई इंटेंशन नहीं था। तो मैंने अचानक पूछा एक पाकिस्तान पे आखिरी सवाल और देखो ये याद नहीं था कि वो ऐसा जवाब देंगे। तो मैंने बोला देखिए इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स बन रही है गाज़ा के लिए। ट्रंप ने एक बोर्ड ऑफ पीस भी बनाया है और उसमें पाकिस्तान को न्योता दिया है कि पाकिस्तान के आसिम मुनीर गाज़ा में अपनी फौज भेजें। आपका क्या मानना है? तो इजराइल के राजदूत ने बोला हम बिल्कुल यह अलाउ नहीं करेंगे कि पाकिस्तान की आर्मी गाज़ा आए। बिल्कुल ऐसा नहीं होगा। तो मैं दो मिनट के लिए हक्का बक्का रह गया कि इजराइल हमारी चलो मानसिकता है कि वो आतंकवाद के खिलाफ रहेगा, पाकिस्तान के खिलाफ रहेगा। लेकिन पब्लिकली वो पाकिस्तान पे कभी कमेंट नहीं करता। आप देख लीजिए पिछले 15 साल, 20 साल, 30 साल। तो पहली बार रूबी नज़ार ने मेरे इंटरव्यू में बोला कि हम बिल्कुल ये एक्सेप्ट नहीं करेंगे। और फिर बातचीत भी हुई है। इंटरनली बहुत चीजें शेयर होती हैं। मुझे लगता है कि मोसाद जो है या वहां की जो इंटेलिजेंस है इंडिया के साथ शेयर करती होगी चीजें पाकिस्तान के बारे में। आप देखिए ना जब से 7 अक्टूबर का हमला हुआ 2023 में एक चीज आपने नोटिस की होगी कि हमास के लोग बार-बार पाकिस्तान जा रहे हैं। बार-बार वहां पर हमले हो रहे हैं इंडिया में लेकिन हमास के लोग जो है वहां पर जा रहे हैं।
सिर्फ कराची, लाहौर, इस्लामाबाद और खैबर बख्तूना नहीं वो पीओके भी जा रहे हैं। इनफैक्ट मैं आपको बताऊं पहलगाम की घटना जब घटी उसके करीबन एक या दो महीने पहले हमास के लोग पीओके में थे। लश्कर और जैश के साथ पब्लिक इवेंट किया। इसके पोस्टर हैं। इसके वीडियो हैं और साथ में बोला कि हम जिहाद लड़ेंगे। यह क्या कहलाता है कि कुछ तो कोलैबोरेशन है आसपास वो कोई रेलेवेंस जो है इंटरनेशनल टेरर ग्रुप्स आपस में कर रहे हैं और एक इजराइल के एक बहुत बड़े सिक्योरिटी के अधिकारी हैं वो दिल्ली दौरे पे आए थे डोवाल साहब से मिलने के लिए वो मुझे डिनर पे मिले हम और मेरी बातचीत हुई और ये मुझे लगता है फरवरी या मार्च की घटना है 2025 की और उन्होंने मुझे बोला कि आदित्य बी वेरी केयरफुल तो मैंने बोला क्या हुआ बोला नो इंडिया नीड्स टू बी वेरी केयरफुल इंडिया को बहुत सावधान रहना पड़ेगा तो मैंने बोला बोला आने वाले हफ्तों में कुछ बड़ा होने वाला है। बोला क्या होने वाला है? बोला मुझे नहीं पता बट कुछ तो होने वाला है। एक महीना हुआ और पहलगाम की घटना हुई और ऑपरेशन सिंदूर हुआ और उसके बाद अगस्त के महीने में मैं जेरूसलम गया। मुझे नितिन याू ने बुलाया एक मीटिंग के लिए। मेरे साथ 10 और भारतीय पत्रकार थे। मैंने नितिन याू से पूछा कि क्या इजरली हथियार ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए थे? तो नितिन याू ने मुझे बोला देखिए इसके बारे में तो मैं कुछ नहीं कह सकता लेकिन मैं एक चीज जरूर कहूंगा कि इंडिया को जितने भी हथियार हमने आज तक दिए हैं वह ऑपरेशन सिंदूर में बहुत कामयाब हुए हैं। तो यह है इंडिया और इजराइल की कहानी।