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दिल्ली जिमखाना क्लब, अब इतिहास बन जाएगा !

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दिल्ली में एक जिमखाना क्लब है। उस जिमखाना क्लब को खाली करने का नोटिस दे दिया गया है। अब ये कोई जिमखाना क्लब ऐसा क्लब नहीं है जैसे आपका कोई रोटरी क्लब होता है या क्रॉसर क्लब होता है। ये एक ऐसा इलीट क्लब है जिसका जिसके मेंबर वही लोग बन सकते हैं जिनके या तो जिनकी पुश्तनी मेंबरशिप चली आ रही होगी। बाप ने ली हुई थी बेटे को दे देगा। उसका बेटा उसको दे देगा। इसके लिए 25 25 लाख रुपए खर्चने पड़ते हैं। लेकिन तब भी आपको वेट करना पड़ेगा। 25-25 साल मेंबर बनने के लिए इस क्लब के यह क्लब है कहां पर? तो दिल्ली में जहां प्रधानमंत्री का आवास है

उसकी बाउंड्री वाल से जुड़ा हुआ शायद 23 या 25 एकड़ में फैला हुआ 23 इतने एकड़ में फैला हुआ एक जबरदस्त रिसोर्ट जैसा एक क्लब जिसके अंदर ग्फ कोर्स भी होगा। इसके अंदर टेरेस कोर्ट्स भी हैं। तमाम तरीके की और चीजें हैं। इसके अंदर बार्स हैं, रेस्टोरेंट्स हैं। और इसके मेंबर कौन बनते हैं? आपके और हमारे नौकरशाह। जिनको सिर्फ कहने के लिए नौकर शाह कहते हैं कि वो जनता के नौकर हैं। लेकिन वो इस इलीट क्लब के मेंबर बनते हैं। और वो किसी और को इसका मेंबर बनने भी नहीं देते। उस क्लब पर यह चोट पहली बार इतिहास में इस क्लब का इतिहास शायद 100 साल से पुराना है। उस क्लब में उस क्लब को खाली करने का नोटिस ये बहुत असामान्य घटना है। बहुत कड़ा फैसला है। और नरेंद्र मोदी जो उस जिसको कहते हैं सो कॉल्ड खान मार्केट गैंग कहते हैं ना ये उसके ऊपर सीधी डायरेक्ट चोट है। तो ये क्यों की गई और अब क्यों की गई?

1927 में सौरभ ये जमीन लीज पर दी गई थी या तब इंपीरियल जिमखाना क्लब हुआ करता था अंग्रेजों के समय और बाद में दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड करके ये हो गया। इतनी बड़ी जमीन लगभग जैसा कि आपने बताया उस जमीन के रेंट के हिसाब से अगर देखें सौरभ तो शुरू में 450 के आसपास कुछ था जब पीएम मोदी रुपए रुपए और जब दिल्ली में 2014 में पीएम आए तो लुटियंस दिल्ली में ऐसी कौन-कौन सी प्रॉपर्टी कहां किसका मिसयूज़ हो रहा है? क्या ये इस सस्ते पे भारत सरकार का शहरी विकास मंत्रालय का एलएनडीओ मतलब लीज एंड डेवलपमेंट ऑफिस जो है वो ये जमीन आवंटन का काम देखता है। तो सरकार की प्रॉपर्टी टैक्स पेयर की प्रॉपर्टी लुटियंस दिल्ली में उस क्लब की बाउंड्री पीएम के बाउंड्री के साथ मिलती है। आप सोचिए एक देश के प्रधानमंत्री जहां पर रह रहे हैं उस जगह पर इतनी बड़ी प्रॉपर्टी और कौड़ियों के दाम पे लेकर और आपकी अय्याशियां चल रही है एक तरह से वहां पे ड्रिंक ये वो सब यही सब चलता है लाइफ बड़े बड़े लेवल के नौकर शायद ब्यूरोक्रेट्स होते हैं बड़े लेवल के ब्यूरोक्रेट हो मतलब उस तरह के बड़े बिजनेसमैन हो फौज कोई रिटायरमेंट हो तो वैसा भी है लेकिन ज्यादातर लाइजनिंग का काम वहां पर होता ज्यादा नजर आता है और वो सारी चीजें हो रही है

जो जो बड़े-बड़े डील करना हो किसी को तो लुटियंस में अगर किसी को मिलना हो और होटल अगर फाइव स्टार होटल नहीं जाना चाह रहा हो तो यहां पर आके उस तरह की सारी चीजें होती हैं। प्रधानमंत्री बाय नेचर ऐसी चीजों पर सख्त चोट करने वाले वो उनको बर्दाश्त ही नहीं होता कि ऐसा कैसे कि देश में इस तरह से टैक्स पेयर के पैसे पे ये खेल चल रहा है और चलने दिया जा रहा है। सालों सालों से चल रहा है। वहां पर फिक्सिंग हो रहा है। तमाम सारी चीजें हो रही हैं। तो उनको बाय नेचर वो बर्दाश्त नहीं होता। उसमें अगर आपने देखा होगा कि 14 के बाद लगातार इसमें कुछ ना कुछ कुछ ना कुछ इसको किया गया। जैसे जो भी अच्छा उसमें बहुत सारी अनियमितताएं होती है। प्रशासनिक अनियमितता की बात कर लें वो बहुत सारी होती है। किस हिसाब से फैसले वहां पर लिए जा रहे हैं। ये सारी चीजें हो रही थी। फिर सरकार ने उसमें दखल देना शुरू किया। जो किराया पहले था वो बताया गया हमें कि फिर उसके बाद उसमें काफी बढ़ोतरी की गई कि नहीं आपको इस इस कीमत पे ये नहीं मिल सकती है जमीन। इतनी बड़ी जमीन क्लब के ऊपर ये सारी चीजें की गई। उसके बाद जैसे प्रधानमंत्री के निवास के पास अगर इतनी बड़ी जमीन इस रूप में है सौरभ तो उसको आप एक लाइन में समझिए कि सिक्योरिटी के लिहाज से वो कितना बड़ा थ्रेट हो सकता है। कहा तो यही गया कि सिक्योरिटी रीज़ंस की वजह से चाहिए। सिक्योरिटी एंड डिफेंस ये कहा गया कि सिक्योरिटी एंड डिफेंस के हिसाब से हालांकि प्राइम मिनिस्टर का अब जो घर है वो तो कहीं और बट डेफिनेटली इसके पीछे सिक्योरिटी और डिफेंस तो वजह नहीं है। उसकी हां मतलब जो सबसे बड़ी वजह है कि इस तरह के इकोसिस्टम पर चोट करना था। उसमें कोई भ्रम ना हां सिक्योरिटी भी उसका इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट और इस लिहाज से था कि जैसे अगर आपको ध्यान हो कि एक दिल्ली पुलिस में एफआईआर तक हुआ है।

वहां पर एक प्रोटेस्ट के दरमियान एक यात्रा जैसी की गई थी और उसमें ड्रोन उड़ाया गया था। प्रधानमंत्री के निवास के पास में अगर ड्रोन उड़ा रहा हो तो समझिए ना कि वो ड्रोन कहां कितना खतरनाक हो सकता है। लेकिन मैं आपसे पूछता हूं ये क्लब जो है यह बंद करा रही है। भारत सरकार की जमीन पर बना है। भारत सरकार को ये अटन्नी चवन्नी जैसा किराया देते हैं। अटन्नी चवन्नी ही देते हैं। शायद आपने 450 का कोई दिन में कह रहा था ₹1000 देते हैं। पहले वो था फिर बढ़ा उसके बाद तो फिर नरेंद्र मोदी सरकार ने थोड़ा ज्यादा बढ़ा है। तो मैं आपसे पूछता हूं क्या यह क्लब खाली कराना नहीं चाहिए था? क्या इस ये प्रिविलेज क्यों? और उनको प्रिविलेज जो नौकर हैं जनता के किस लिए दी जाए यह प्रिविलेज उनको अगर प्रिविलेज मिलनी है तो फिर यह आम लोगों बाकी लोगों को क्यों ना मिले ये सिलेक्ट क्लब क्यों हो कि मेरे मेरा मेरे बाद मेरा बेटा मेंबर बनेगा मैं मैं तय करूंगा कि इस क्लब में कोई आम आदमी कोई दूसरा आदमी बन पाएगा मेंबर कि नहीं बन पाएगा और मैं वहां पर जाकर के बिल्कुल कौड़ियों के भाव में दुनिया की जो भी बड़ी से बड़ी लग्जरी हो सकती है मैं उसको अेल करूं क्या इसको बंद नहीं किया जाना चाहिए था आप इसको सपोर्ट करते हैं कि नहीं करते। मैं इसको सपोर्ट करता हूं। मुझे यकीन है आप भी सपोर्ट करते हैं। इसका विरोध किसने किया? इसका विरोध कांग्रेस पार्टी ने किया। क्या कह के कि यह ऐतिहासिक धरोहर है। ये ऐतिहासिक धरोहर है जिसको मिटाना चाहते हैं नरेंद्र मोदी। इतना ही नहीं। कांग्रेस पार्टी के सांसद अभिषेक मनु सिंह वो इसको दिल्ली हाई कोर्ट ले गए हैं इस मामले को। इसमें कल सुनवाई होने वाली है कि यह फैसला रद्द किया जाना चाहिए नरेंद्र मोदी का। और आप जानते हैं इस क्लब का मेंबर कौन है? राहुल गांधी। यह है आपकी जनता की नब्ज़ पकड़ने की कला।

इतनी मतलब इतनी सेंस है कांग्रेस पार्टी को कि एक ऐसा फैसला जिसको देश का हर आदमी सपोर्ट करेगा। आप उसके खिलाफ खड़े हो गए जाकर के। आप इलिटिज्म के सपोर्ट में खड़े हो गए। बिल्कुल सर। वो इस लिहाज से है कि ये इकोसिस्टम ज्यादातर कांग्रेस के पक्ष में काम करता नजर आता है। जैसे जिम जिमखाना क्लब में अगर आप बंगाली इलेक्शन से पहले जाते किसी के साथ आप तो ऐसे तो जा नहीं सकते थे। एंट्री भी नहीं होती। किसी ने मैंने तो गेट भी नहीं देखा इसका। तो मतलब सब पे मैं कह रहा हूं तो उसमें मान लीजिए कोई आपको लेके जा रहा है। कोई मेंबर लेकर जा रहा है। तो जैसे मान लीजिए मैं किसी मेंबर के साथ अंदर जाके देखूं यहां क्या हो रहा है। तो बंगाली इलेक्शन से पहले अगर आप जाते तो आपको ये समझ में आता कानों में आपके पढ़ते हैं कि बीजेपी तो हार रही है। बीजेपी इस लूजिंग द इलेक्शन। हाथ में कोई महंगी सिगरेट होगी। क्लास में कुछ होगा और उसके बाद यह फरमान जारी होता है। नरेंद्र मोदी इस डूइंग दिस डूइंग दैट यह वो अपना इस तरह का माहौल और उसी में आपके फिक्सिंग आपके काम आपकी सारी चीजें चल रही होती है। मतलब टोटल वेस्टेज ऑफ़ पब्लिक मनी और भारत सरकार का जो कॉर्पोरेट अफेयर्स है क्योंकि ये अब एक कंपनी के तौर पर है अजिमकाना क्लब।

ओके। तो इस कंपनी के क्लब में जो भी वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक अनियमितता इन सारी ये सारी चीजें आई तो जमीन का काम तो शहरी विकास मंत्रालय का एलएनडीओ डिपार्टमेंट देख रहा है। लेकिन क्योंकि कॉर्पोरेट अफेयर्स ये कंपनी है तो कॉर्पोरेट अफेयर्स को देखना था। कॉर्पोरेट अफेयर्स में ऑलरेडी इसकी शिकायत उसमें बहुत सारे सवाल जवाब ये सारी चीजें ऑलरेडी चल रही है। मतलब ऐसा नहीं है कि रातोंरात फैसला हुआ। अभी फैसला सिर्फ ये हुआ है कि शहरी विकास मंत्रालय के उसी डीएनए एलओ डिपार्टमेंट ने क्लब को अल्टीमेटम दिया है कि 5 जून तक इस प्रमाइस को आपको खाली कर देना है और उसके पीछे ये वजह बताई गई क्योंकि सिक्योरिटी एंड डिफेंस के लिहाज से

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