क्या मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े टकराव की तरफ बढ़ रहा है? क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है और क्यों ईरान में ऐसा प्रस्ताव चर्चे में है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है? न। दरअसल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्टेट ऑफ हॉर्मच को दोबारा खोलने को लेकर के चेतावनी दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने संकेत दिया है कि ऐसा नहीं होने की स्थिति में सैन्य कारवाई की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसी बीच अब तेहरान से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आ गई है। ईरान में एक प्रस्ताव को लेकर के आपको बता दें कि चर्चा शुरू हो गई है जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनई के शहादत का बदला लेने की बात कही गई है।
इसी प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन याू और अमेरिकी सैन्य कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर को मारने वाले व्यक्ति के लिए भारी इनाम देने की बात कही गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की संसद में एक ऐसा बिल लाने की तैयारी की जा रही है जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनया और अमेरिकी सैन्य कमांडर एडमिरल ब्रेड कूपर को मारने वाले व्यक्ति को लगभग 5.8 करोड़ का इनाम देने का प्रस्ताव रखा जाएगा बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को इस्लामिक गणराज्य के सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कारवाई का नाम दिया गया है। अब बात करते हैं ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की। समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजी ने सरकारी टीवी चैनल पर कहा कि अमेरिका और इजराइल के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने नेताओं और सैन्य अधिकारियों पर हमलों या उनके खिलाफ खतरों को लेकर के चुप नहीं बैठ सकता। अजी ने अपने बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति, इजरायली प्रधानमंत्री और अमेरिकी सेंट कॉम कमांडर का जिक्र किया और कहा कि यह ईरान का अधिकार है।
उन्होंने इस प्रस्ताव को फरवरी में ईरान पर हुए हमलों और ईरानी नेतृत्व को मिले कथित खतरों से जोड़ा है। इसी बीच आपको बता दें कि ईरान के सांसद और धर्मुगुरु महमूद नवाबियन ने भी कहा है कि संसद में इस बात पर चर्चा हो सकती है कि ट्रंप और नेतन्या को जहन्नुम भेजने वाले को कितना इनाम दिया जाना चाहिए।
अब इन बयानों के बाद आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस और चिंता शुरू हो गई है। बता दें कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले कई महीने से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान के खिलाफ सैन्य कारवाई की जा सकती है।
वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा रहा है और उसका परमाणु कार्यक्रम चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं ईरान का कहना है कि अगर उसके देश सैन्य ठिकानों या शीर्ष नेतृत्व पर हमला हुआ तो उसका जवाब बेहद कड़ा होगा। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि वे किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। यानी पहले से ही इजराइल, ईरान, तनाव, मिडिल ईस्ट की अस्थिर स्थिति और हॉर्मोज को लेकर के बढ़ती चिंताओं के बीच अब यह नए बयान हालात को और संवेदनशील बना सकते हैं। फिलहाल ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है या फिर मिडिल ईस्ट में किसी बड़े भू राजनीतिक संकट की आहट है? क्योंकि अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जैसा कि पड़ रहा है और आगे भी पड़ेगा।