तो इस वीडियो में मैं बात करूंगा शत्रुघ्न सिन्हा की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म की और सुभाष घई ने शत्रुघ्न सिन्हा को क्यों कहा कमीना किस्सा शुरू होता है साल 197475 के आसपास से जब सुभाष गई और शत्रुघ्न सिन्हा काफी गहरे दोस्त हुआ करते थे और आज भी दोनों में काफी गहरी दोस्ती है। दोनों एफटीआईआई में भी थे और तो उन्हीं दिनों में सुभाष घई एक फिल्म पर काम कर रहे थे।
उन्होंने फिल्म की कहानी भी लिख ली थी। नाम दिया था कालीचरण। उन्होंने इस फिल्म की कहानी शत्रुघ्न सिन्हा को ही अपने दिमाग में रखकर लिखी थी। लेकिन जब यह कहानी उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा को सुनाई तब शत्रु जी ने कहा कि उनको यह कहानी पसंद नहीं है। और उन्होंने काम करने से मना कर दिया। अब सुभाष घई पहुंचे उन दिनों के बहुत ही फेमस फिल्म प्रोड्यूसर एनए सिप्पी के पास। उनको अपनी स्क्रिप्ट सुनाई। एनएन सिप्पी को यह कहानी बहुत ज्यादा पसंद आ गई और उन्होंने कहा कि इस फिल्म में वो पैसा लगाएंगे इसको प्रोड्यूस करेंगे। सुभाष घई ने कहा कि वो इस फिल्म की कहानी शत्रुघ्न सिन्हा को सुना चुके हैं मगर शत्रु ने तो मना कर दिया है और उन्हीं को ध्यान में रखकर यह कहानी लिखी भी थी तो अब उनको कोई और हीरो तलाश करना पड़ेगा। एनए सिप्पी बोले कि ठीक है।
फिर तीन दिन के बाद एनएन सिप्पी का फोन आया सुभाष घई के पास और वह बोले कि मैं शत्रुघ्न सिन्हा के घर से आ रहा हूं। उनको कहानी सुना कर आ रहा हूं। इतना सुनकर सुभाष घई ने कहा कि अरे वो तो इस फिल्म में काम ही नहीं करेगा। मैं तो पहले ही उसको सारी कहानी सुना चुका हूं। उसके बाद एन सि ने कहा कि अरे सुनो तो सही। [संगीत] शत्रुघ्न सिन्हा ने इस फिल्म को करने के लिए हां बोल दी है। इस बात पर सुभाष घई बड़े हैरान हुए कि मैंने कहा तो उसने मना कर दिया। तब सुभाष घई ने शत्रुघन सिन्हा को फोन किया और कहा कि कमीने जब मैंने तुझको यह फिल्म की स्टोरी सुनाई तो तुमने मना क्यों किया? और अब इतना बड़ा प्रोड्यूसर तुम्हारे पास गया तो तुमने हां बोल दी।
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि नहीं मैं इस फिल्म में काम करूंगा। इसकी कहानी अच्छी है, स्क्रिप्ट अच्छी है। और इससे पहले शत्रुघ्न सिन्हा एनएन सिप्पी को यह बोल चुके थे कि स्क्रिप्ट बहुत अच्छी है और तुम देखना सुभाष घई इस फिल्म के बाद बहुत बड़ा डायरेक्टर बनने वाला है। तो शत्रुघ्न सिन्हा एक तरीके से सुभाष घई की हेल्प ही करना चाहते थे क्योंकि उन दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा एक बड़ा नाम थे। उसके बाद यह फिल्म बनी और इतिहास रच दिया। एक ब्लॉकबस्टर फिल्म बनकर साबित हुई।
फिल्म में एक्टर अजीत जिन्होंने एक विलेन का किरदार निभाया था। उनका यह डायलॉग तो उस वक्त क्या आज भी लोगों की जुबान पर रहता है। सारा शहर मुझे लायन के नाम से जानता है। मत भूलिए डीएसपी साहब कि सारा शहर मुझे लायन के नाम से जानता है। इस फिल्म की कामयाबी से सभी लोग बहुत खुश थे। खास करके सुभाष घई। क्योंकि इससे पहले करीब 10 साल तक सुभाष घई फिल्मों में एक्टिंग के लिए अपनी किस्मत आजमाते रहे थे लेकिन बात नहीं बनी। तब उन्होंने फिल्म डायरेक्ट करने का सोचा। उसके बाद साल 1977 में शत्रुघ्न सिन्हा के साथ सुभाष घई ने बनाई विश्वनाथ और इस फिल्म को भी काफी पसंद किया गया। फिर साल 1979 में बनाई सुभाष घई ने शत्रुघ्न सिन्हा और शशि कपूर को लेकर गौतम गोविंदा। लेकिन सुभाष घई साहब का यह कहना है कि शत्रुघ्न सिन्हा में एक बुरी आदत थी। वो सेट पर हमेशा लेट आते थे। 10:00 बजे बुलाओ तो 1:00 बजे आते थे। 1:00 बजे बुलाओ तो 4:00 बजे आते थे। तब एक दिन सुभाष घई ने शत्रुघ्न सिन्हा से कहा कि देखो यार हम दोनों गहरे दोस्त हैं। लेकिन तुम्हारा जो यह लेट आने का स्वभाव है इसको बदलना पड़ेगा।
मैं इस तरह से काम नहीं कर पाऊंगा। और फिर उसके बाद कोई ऐसा संजोग बना ही नहीं कि यह दोनों एक बार फिर से किसी और फिल्म में काम करें। जहां फिल्म कालीचरण के दो गीतों की बात मैं करना चाहूंगा जो कि बहुत ज्यादा पॉपुलर हुए थे। 1/2 2/4 छोटी-छोटी बातों में बट गया संसार। 1/2 [संगीत] 2/4 छोटीछोटी बातों में बट गया संसार। जिसे गाया था कंचन और अनुराधा ने। दूसरा गीत था जो कि लता मंगेशकर जी ने गाया था। जा रे जा ओ हरजाई देखी तेरी दिलदारी। जा रे जा ओ हर जाई देखी तेरी दिलदारी दिल देकर मैं [संगीत] तो बस यही था आज के वीडियो में। इस किस्से को सुभाष घई साहब ने भी अपने एक इंटरव्यू में बयान किया है। तो मुझे लगा यह बात आप सबके सामने रखनी चाहिए। वीडियो पसंद आया हो तो वीडियो को लाइक शेयर कर देना। चैनल पे नए हो तो सब्सक्राइब कर लेना। आप सब लोग अपना बहुत-बहुत ख्याल रखें और देख रहे हैं रेट्रो शाज़। यादों के रूहानी किस्से जय हिंद जय