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अनुराग कश्यप ने बॉबी देओल से वो करवा लिया, जो उन्होंने करियर में कभी नहीं किया था!

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एनिमल में बॉबी देओल का खून से सना चेहरा और लरजते होठों पर कांपती उंगली रखकर खामोश रहने को कहने वाला सीन तो याद ही होगा। सिरहंसी दौड़ गई बॉबी का वह अंदाज देखकर। बगैर एक भी लफ्ज़ कहे पर्दे पर कुर्ता और कसाईपन कुछ ऐसे उतारा कि वो मिसाल बन गया। निश्चित रूप से एनिमल में बॉबी ने हमें चौंकाया मगर बतौर एक्टर बॉबी की ताकत का और बेहतर अंदाजा बंदर का ट्रेलर देखकर लगता है।

यह अनुराग कश्यप की फिल्म है और अनुराग के पास वो नजर है जिससे वो एक्टर के भीतर कितना मांस मज्जा है उसे ताड़ लेते हैं। वरना यह वही बॉबी है जिनके पास एक वक्त पर काम तक नहीं था। सालों तक वो खाली रहे और वो अनुराग ही थे जिन्होंने बॉबी देओल को उनके करियर की सबसे बेशकीमती सलाह दी। यू शुड लर्न एक्टिंग। खैर, अब बात करते हैं बंदर के ट्रेलर की। पहले ही सीन में अनुराग अपने सेंट्रल कैरेक्टर समर मेहरा यानी बॉबी देओल को सामने ले आए। समर जो कभी फेमस रॉकस्टार था मगर अब एक फेडिंग ब्रांड है। थाने का सीन है और पुलिस उसकी साख को एक तरफ रख उसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं। इल्जाम लगा है रेप का और यह दोषरोपण करने वाली को ढूंढता भी खुद समर ही है।

रंगीन मिजाजी शख्स है और डेटिंग साइट्स के जरिए कई महिलाओं से मिलता है। लगभग हर समय इसी तरह के ख्याल उसके सिर पर सवार होते हैं और अपनी इस फितरत का अंदाजा उसे खुद भी है। उसे डर है कि लोग उसे भूल जाएंगे। वो हर जुबान हर ज़हन में रहना चाहता है और उसकी यही भूख उसे जीते जी नर्क दिखाती है। डेटिंग साइट्स पर मिली एक महिला उसके खिलाफ रेप और ब्लैकमेल का केस ठोक देती है। समर गिरफ्तार हो जाता है। बेल नहीं मिलती है इसलिए जेल भी चला जाता है। यहां से कहानी एक नया मोड़ लेती है और अनुराग अपने कंफर्ट ज़ोन में आ जाते हैं। गालियां, हिंसा, नग्नता सब कुछ दिखाते हैं। मगर यह सब कुछ बेमकसद नहीं लगता

बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा महसूस होता है। सहूलियत की जिंदगी बिताने वाला एक आराम पसंद रॉकस्टार जेल में किस नर्क से गुजरता है उसकी झलक ट्रेलर में है और अपनी स्क्रीन इमेज के विपरीत बॉबी का किरदार यह सब सहता है। इस बार भी बॉबी आंखों से अभिनय करते हैं मगर इस बार यह आंखें किसी दहशत गर्द की नहीं बल्कि एक डरे सहमे हुए शख्स की है और बॉबी बाकमाल अपनी आंखों में वह खौफ दिखा पा रहे हैं। बंदर में उनकी बॉडी लैंग्वेज अलग ही नजर आ रही है जैसे पिछला सब भूल चुके हो और नई स्लेट पर पहली बार कुछ लिख रहे हैं। इसमें अनुराग बराबर के हिस्सेदार हैं। बॉबी देओल को अब तक जितना भी निचोड़ा गया था उसके बावजूद अभी उनमें कितना कुछ बाकी है यह देखने के लिए वह बधाई के पात्र हैं। अनुराग अपनी फिल्मों में अपने ही मिजाज की एक दुनिया बनते हैं। उनके सेंट्रल कैरेक्टर कोई मसीहा नहीं होता। कहीं वह बुद्धिमान है तो कहीं वह निपटमूर्ख भला भी है और नीच भी। और यही बात उनके किरदारों को पब्लिक से जोड़ देती है। इस फिल्म में म्यूजिक को भी अनुराग

ने एक कैरेक्टर की तरह इस्तेमाल किया है। कहीं हल्केपन से भरे गाने हैं तो कहीं कोई तेड़ लगवाई है। कुल मिलाकर यह ट्रेलर फिल्म देखने की भूख बढ़ाता है। बॉबी देओल और अनुराग ने मिलकर बंदर में क्या जादू रचा होगा यह जिज्ञासा जगाता है। यह फिल्म बीते साल ही बन गई थी। सितंबर में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 यानी टीआईएफएफ में भी इसकी स्क्रीनिंग हुई थी। यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल्स में से एक है और इस बार यहां 30 देशों की बेहतरीन फिल्में दिखाई गई थी।

पाताल लोक वाले सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर इसकी कहानी लिखी है और फिल्म में छोटे-छोटे सही मगर असरदार किरदारों में मंझे हुए एक्टर्स को लिया है। मलयालम सिनेमा से इंद्रजीत सुकुमारण है। कन्नडा इंडस्ट्री से राज बी शेट्टी को लाए हैं। मराठी सिनेमा से जितेंद्र जोशी को जोड़ा गया है। इनके अलावा सानिया मल्होत्रा, सपना पब्बी, सबा आजाद, नागेश भोसले, जैमिनी पाठक और घनश्याम गर्ग भी हैं। यह फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। आपकी इस पे क्या है राय कमेंट्स में बताइए और लिखी है मेरे साथी शुभांजल ने। मैं हूं आकांक्षा गोगोई। आप देखते रहिए ललन टॉप सिनेमा। शुक्रिया।

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