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तीसरे बच्चे पर ₹30000, चौथे पर…”आंध्रप्रदेश सरकार ने लोगो दी नहीं स्कीम, ये है वजह।

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अगर आप तीसरा बच्चा पैदा करते हैं तो आपको ₹00 का इनाम मिलेगा और अगर चौथा बच्चा पैदा करते हैं तो ₹400 का और यह इनाम मैं नहीं दे रहा हूं सरकार देगी। सरकार चाहती है कि चार बच्चे पैदा किए जाए और इसकी घोषणा आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने कर दी है।

यानी जाहिर सी बात है कि इस योजना का फायदा आंध्रा कपल्स को ही मिलेगा। जो वैसे चार बच्चे पैदा करने के पक्ष में ना रहे हो वो शायद इनाम से प्रभावित होकर चौथा बच्चा भी प्लान कर ले।

राज्य सरकार को शायद ऐसा ही लग रहा हो। अब आपने भारत में यह तो देखा होगा कि जनसंख्या पर काबू पाने के लिए योजनाएं चलाई जाती रही हैं। जैसे नारा हो गया हम दो हमारे दो। एक आपने शायद गैर सरकारी वो वाला भी सुना होगा। दो बच्चे हैं मीठी खीर उससे ज्यादा डॉक्टर। बहुत से नारे हैं, बहुत सी योजनाएं हैं, बहुत सी पंचायतें हैं।

एक दौर इस देश ने पपुलेशन कंट्रोल का वैसे भी देखा है जब लोगों को पकड़-पकड़ कर जबरदस्ती नसबंदी की जा रही थी। क्यों? ताकि जनसंख्या नियंत्रण में रहे। वैसे इस कवायद में यानी जनसंख्या नियंत्रण की कवायद में दक्षिणी भारत ने बहुत अच्छा काम किया था। वहां की जनसंख्या के आंकड़े अगर आप देखेंगे तो आप पाएंगे कि सदर्न इंडिया में उसे बहुत अच्छे से कंट्रोल किया गया पॉपुलेशन को। लेकिन अब वहीं के एक राज्य से ऐसी खबर आ रही है। दौर ऐसा है कि एक प्रदेश की सरकार चार बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इनामी राशि रखी जा रही है।

जिन सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ये ऐलान किया है वो खुद भी कभी पॉपुलेशन कंट्रोल के बड़े समर्थक रहे हैं। जनसंख्या कंट्रोल की जानी चाहिए। वो ये कहते थे। मगर अब वही कह रहे हैं वक्त आ चुका है कि समाज मिलकर बर्थ रेट बढ़ाने के लिए काम करें। आम शब्दों में कहें तो समाज मिलकर ज्यादा बच्चे पैदा करें। हो सकता है ये बात आपको कुछ सुनीसुनी सी लग रही हो क्योंकि ये कुछ वैसी ही बात है जो दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलॉन मस्क भी कहते रहे हैं।

मस्क आए दिन दुनिया भर को ये चेतावनी देते रहते हैं कि गिरती जन्म दर यानी बर्थ रेट गिरता जन्म दर एक बड़े खतरे का निशान है क्योंकि जनसंख्या कम होने से इकॉनमी को नुकसान होगा। लेबर का शॉर्टेज हो जाएगा और नतीजतन इंसानों की ओवरऑल इनोवेशन करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ेगा। ऐसी ही कुछ सोच शायद अब आंध्र प्रदेश की सरकार में भी देखी जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में घटती आबादी को पलटने के लिए यह कदम उठाया है। इसके लिए उन्होंने तीसरे बच्चे के जन्म पर ₹00 और चौथे बच्चे के जन्म पर ₹400 की प्रोत्साहन राशि यानी इंसेंटिव देने का ऐलान किया है।

यह ऐलान उन्होंने स्वर्ण आंध्रा स्वच्छ आंध्रा के बैनर तले हो रहे एक सफाई कार्यक्रम के दौरान किया। अपने भाषण में सीएम नायडू ने कहा कि सरकार अगले एक महीने के अंदर इस योजना की और डिटेल्स जारी करेगी। वह कहते हैं मैंने एक नया फैसला लिया है। हम तीसरे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ₹00 देंगे और चौथे बच्चे के लिए ₹400 देंगे। क्या यह सही फैसला नहीं है? वो पूछते हैं। इससे पहले आंध्र की टीडीपी सरकार ने दूसरे बच्चे के जन्म पर ₹25,000 देने का प्रस्ताव रखा था। 5 मार्च को सीएम ने विधानसभा में बताया था कि राज्य सरकार दूसरे बच्चे वाले दंपतियों को ₹25,000 देने पर विचार कर रही है।

आंध्र प्रदेश में इस वक्त तेलुगु देशम पार्टी यानी टीडीपी वाले एनडीए अलायंस की सरकार है। जिसमें बीजेपी और पवन कल्याण की जनसेना पार्टी भी शामिल है। इसी सरकार के सीएम चंद्रबाबू के मुताबिक कुछ दंपति अपनी इनकम बढ़ने के साथ सिर्फ एक बच्चा पैदा करने का ऑप्शन चुन रहे हैं। वहीं कुछ लोग दूसरा बच्चा तभी चाहते हैं जब पहला बच्चा लड़का ना हो। उन्होंने चेतावनी दी कि इसकी वजह से राज्य का पॉपुलेशन ग्रोथ रेट लगातार गिर रहा है। मस्की की ही तरह मुख्यमंत्री नायडू ने यह दावा किया कि कई देशों में घटती और बुजुर्ग होती आबादी का उस देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

हालांकि क्या इसका नाता सिर्फ इकोनॉमिक ग्रोथ से है या फिर लोकसभा सीट्स के डीलिमिटेशन से भी है परिसीमन से। क्योंकि इससे पहले सीएम चंद्रबाबू नायडू ने चिंता जताई थी कि साउथ इंडिया में लो बर्थ रेट भविष्य में संसद में हमारे रिप्रेजेंटेशन यानी दक्षिणी भारत के रिप्रेजेंटेशन की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। परिसीमन से जुड़े नियम कहते हैं कि जितनी ज्यादा आबादी उतनी ज्यादा पार्लियामेंट सीट्स और जितनी कम आबादी उतनी कम सीट। ऐसे में जब अप्रैल 2026 में इसी डीलिमिटेशन से जुड़ा बिल लोकसभा में केंद्र सरकार लेकर आई तो एक बड़ा विरोध इस बात को लेकर भी था कि इससे दक्षिणी भारत का केंद्र में प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। बिल तो लोकसभा में गिर गया लेकिन चिंताएं कायम रही जो अब योजनाओं की शक्ल में सामने आ रही हैं। लेकिन एक डेवलपिंग नेशन जहां वैसे भी असमानता आसमान छू रही है वहां दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी होने के बावजूद क्या जनसंख्या बढ़ाने को प्रोत्साहन देना फिजिबल होगा?

क्योंकि एक सवाल बच्चों को अच्छी लाइफ देने की अफोर्डेबिलिटी से भी जुड़ा है। सोचने वाली बात यह है कि ₹40,000 के इनाम से प्रभावित होकर कौन लोग चौथा बच्चा पैदा करना चाहेंगे? दो ही तरह के लोग हो सकते हैं। एक तो वो जिनके पास इतना पैसा हो कि चार बच्चों को पालने बड़ा करने में उन्हें कोई फाइनेंसियल चैलेंज ना महसूस हो। यानी उन्हें बस एक तरह से सरकार से हरी झंडी मिल गई। लेकिन फिर दूसरे ऐसे लोग होंगे जिनकी आर्थिक स्थिति कुछ इस तरह की होगी कि उन्हें ₹400 का इनाम भी इतना बड़ा लगे कि वो उसी की चाह में चौथे बच्चे को इस दुनिया में ला लें। ये दूसरी वाली पॉसिबिलिटी ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में गरीब परिवारों में ही ज्यादा बच्चे होते हैं। मिडिल क्लास या रिच क्लास के बनिस्बत। मिडिल क्लास में वैसे भी आजकल इस तरह का ट्रेंड देखा जा रहा है कि लोग इनकम सीमित होने के चलते दूसरा बच्चा भी अफोर्ड ना कर पाने की वजह से एक ही बच्चा प्लान कर रहे हैं।

ऐसे परिवारों के लिए सिर्फ ₹400 या ₹00 शायद बच्चे को पालने में होने वाले खर्च के लिए काफी ना हो। ऐसे में देखना यह होगा कि आंध्र प्रदेश सरकार की योजना जब जमीन पर उतरेगी तो इसका असर क्या होगा। साथ ही देखने वाली बात यह भी होगी और शायद चिंताजनक भी कि डीलिमिटेशन से सावधान होकर आंध्र की ही तर्ज पर अगर बाकी दक्षिणी राज्य भी इसी तरह जनसंख्या बढ़ाने पर जोर देने लगे तो भारत की पॉपुलेशन का आंकड़ा कहां तक पहुंच जाएगा?

जो वैसे भी दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है। क्या इससे इकॉनमी को सच में फायदा होगा या फिर इकॉनमी पर इसका भार बढ़ेगा?

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