तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद विजय ने औपचारिक रूप से त्रिची ईस्ट से इस्तीफा दे दिया और पेरम्बूर को अपना मुख्य निर्वाचन क्षेत्र बनाए रखा।तमिलनाडु में एकनए राजनीतिक युग की शुरुआत हुई है। विजय ने रविवार को मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभाला। पांच दशकों से अधिक समय के बाद राज्य में पहली बार कोई गैर-द्रविड़ सरकार बनी है। अभिनेता से राजनेता बने विजय ने हाल ही में हुए चुनाव में टीवीके की शानदार शुरुआत के दौरान पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली (ईस्ट) दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद विजय ने औपचारिक रूप से त्रिची ईस्ट से इस्तीफा दे दिया और पेरम्बूर को अपना मुख्य निर्वाचन क्षेत्र बनाए रखा। दोहरी उम्मीदवारी की यह रणनीति विजय की सीट जीतने की संभावनाओं को अधिकतम करने और चेन्नई से परे अपने राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने के लिए बनाई गई थी।
विजय के लिए पेरम्बूर क्यों अहम है?पेरम्बूर चेन्नई का एक महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र है और सत्ता के केंद्र के निकट स्थित है। 2011 के परिसीमन के बाद यह चेन्नई के सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। पेरम्बूर सीट जीतना विजय के लिए एक बड़ी जीत है, क्यों यह शहर मुख्य रूप से डीएमके का गढ़ रहा है। पेरम्बूर में प्रतिष्ठित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री भी मौजूद है। इसके कर्मचारियों ने पारंपरिक रूप से सीपीआई (एम) और डीएमके का समर्थन किया है। इससे इस क्षेत्र का वामपंथी झुकाव और द्रविड़ प्रभाव का एक मजबूत इतिहास रहा है।
विजय ने 2026 के तमिलनाडु चुनावों में पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट दोनों सीटें जीतीं, लेकिन उन्हें कानूनी रूप से एक सीट खाली करनी होगी और विधानसभा में प्रतिनिधित्व के लिए केवल एक सीट रखनी होगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनिय 1951 की धारा 70 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक ही समय में राज्य विधानमंडल की दो सीटों का सदस्य नहीं हो सकता।
अभिनेता विजय की तरफ से खाली की गई सीट के कारण छह महीने के अंदर चुनाव होगा। नेता अक्सर उस सीट को खाली करते हैं जहां उनर्व पार्टी का कोई मजबूत दूसरा उम्मीदवार होता या जहां उन्हें लगता है कि वे दूसरी बार आसानी से जीत हासिल कर अपनी पार्टी की सीटों की संख्या बनाए रख सकते हैं।