भारतीय राजनीति में बिना शादी किए राजनीति और जनसेवा [संगीत] को अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले नेताओं की एक लंबी फहरिस्त रही है। नरेंद्र मोदी, [संगीत] अटल बिहारी वाजपेई, योगी आदित्यनाथ, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक और मायावती जैसे नेताओं ने अपने राजनीतिक [संगीत] सफर में बड़ी सफलता हासिल की है। लेकिन कभी शादी नहीं की। अब इसी सूची में एक और बड़ा नाम तेजी से चर्चा [संगीत] में आ गया है।
वो हैं शुेंदु अधिकारी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके शुभेंदु अधिकारी अब बंगाल के नए सीएम होंगे। आज वह किसी [संगीत] परिचय के मोहताज नहीं रह गए हैं। कभी नंदीग्राम आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा में [संगीत] से एक रहेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं [संगीत] में गिने जाते हैं। उनकी आक्रामक राजनीति, संगठन पर मजबूत पकड़ और जनता के बीच लोकप्रियता ने उन्हें राजनीति के शीर्ष नेताओं की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है। लेकिन इन सबके बीच एक सवाल ऐसा है जो अक्सर लोगों के मन में आता है।
आखिर शुभेंदु अधिकारी ने [संगीत] शादी क्यों नहीं की? यह सवाल नया नहीं है। करीब 6 साल पहले हदिया में एक चुनावी जनसभा [संगीत] के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने इसका जवाब खुद दिया था। उस समय वह मन से जोशीले अंदाज में भाषण दे रहे थे। तभी अचानक उन्होंने जनता की ओर देखते हुए कहा, कई लोग मुझसे पूछते हैं सुविंदु तुम अविवाहित क्यों हो? तुम्हारे भाई तो विवाहित है। उनके मुंह से यह बात सुनते ही सभा में मौजूद लोग हैरान रह गए।
कुछ पल के लिए पूरा माहौल भी शांत हो गया क्योंकि लोगों को लगा कि शायद अब सुेंदु [संगीत] अपनी निजी जिंदगी का सबसे बड़ा राज बताने वाले हैं। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने बेहद भावुक अंदाज में अपनी जिंदगी के उस फैसले के बारे में बताया जिसने उन्हें बाकी नेताओं [संगीत] से अलग बना दिया। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति से ही उनका पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित हो गया था। साल 1987 से राजनीति उनके [संगीत] जीवन का केंद्र बनती चली गई और फिर उन्होंने तय कर लिया कि वह अपना पूरा जीवन समाज और जनता की [संगीत] सेवा में लगा देंगे। शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि वह तीन बड़े स्वतंत्रता सेनानी से बेहद प्रभावित रहे। सतीश सामंतो, सुशील धार, अजय मुखर्जी इन तीनों नेताओं ने शादी नहीं की थी और अपना पूरा जीवन देश और समाज की सेवा के में लगा दिया था। शिवेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्हीं से प्रेरणा [संगीत] लेकर उन्होंने भी अविवाहित रहने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा मैं खुद को अकेला [संगीत] नहीं मानता। पूरा बंगाली समाज ही मेरा परिवार है। सुवेंदु के मुताबिक राजनीति उनके लिए सिर्फ सत्ता पाने का जरिया नहीं है बल्कि एक मिशन है। उनका मानना है कि जनता की सेवा करने के लिए [संगीत] कई बार इंसान को अपनी निजी इच्छाएं और सुखों का त्याग करना पड़ता है। शुभेंदु [संगीत] अधिकारी का यह बयान उस समय काफी चर्चा में भी रहा था। लोगों ने पहली बार उनके जीवन में उनके उस पहलू को जाना जो राजनीतिक मंचों से बेहद दूर रहता है। यही वजह है कि आज जब वह बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली [संगीत] चेहरों में से एक बन चुके हैं तो उनकी निजी जिंदगी भी उतनी ही चर्चा में रहती है। नंदीग्राम [संगीत] से अपनी पहचान बनाने वाले शुभेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे।
लेकिन समय बदला और उन्होंने टीएमसी छोड़ के बीजेपी का दामन [संगीत] थाम लिया। इसके बाद उन्होंने बंगाल में बीजेपी को मजबूत करने में [संगीत] बड़ी भूमिका निभाई। अपने शांत लेकिन आक्रामक अंदाज से उन्होंने खुद को एक जमीनी नेता के रूप में भी स्थापित किया। चाहे किसान आंदोलन हो, नंदीग्राम का संघर्ष हो या फिर बंगाल में बीजेपी का विस्तार। हर दौर में शुभेंदु अधिकारी ने अपनी अलग छाप छोड़ी। आज उनकी पहचान सिर्फ एक राजनेता के रूप में नहीं रह गई है बल्कि एक ऐसे नेता के तौर पर बन चुकी है जिसने राजनीति [संगीत] और जनसेवा को ही अपना पूरा जीवन बना लिया। फिलहाल के लिए बस इतना ही। ऐसी ही खबरों के लिए देखते रहिए [संगीत] india.com