मध्य प्रदेश से मोहब्बत की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसे जानकर आप भी कहेंगे कि वाकई प्यार ना तो कोई रंग देखता है ना ही जाति और ना ही धर्म देखता है। सत्ता के सेंट्रल जेल मोहब्बत की एक ऐसी दास्ता वहां लिखी गई जिसने समाज के हर दीवार को तोड़ दिया। क्योंकि यहां पर सेंट्रल जेल के डेपुटी जेलर ने के मामले में उम्र कैद की सजा काट चुके एक कैदी से ही शादी कर ली। इसी पर दिखाते हैं
कहते हैं जब प्यार ना तो रंग देखता है ना जाति और धर्म। मध्य प्रदेश की एक ऐसी हीप्रेम कहानी की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है। जहां सतना के सेंट्रल जेल में मोहब्बत की एक ऐसी दास्तान लिखी गई जिसने समाज की हर दीवार को तोड़ दिया। इस प्यार और फिर शादी की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि यहां सेंट्रल जेल की डेपुटी जेलर ने के मामले में उम्र कैद की सजा काट चुके कैदी से शादी कर ली।
यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन यह कहानी सच्चे प्रेम की है। 5 मई को छतरपुर के लवकुश नगर में यह विवाह संपन्न हुआ। जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। मोहब्बत का कोई मजहब नहीं होता। इस कहावतको मध्य प्रदेश के सतना में पदस्थ सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून ने हकीकत में बदल दिया है।
फिरोजा ने सर्वधर्म संभाव की अनूठी मिसाल पेश करते हुए हत्या के मामले में 14 साल की सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह के साथ हिंदू रीति रिवाज से विवाह कर लिया। खास बात यह रही कि मुस्लिम अधिकारी के परिजन शादी में शामिल नहीं हुए तो बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कन्यादान किया। सतना सेंट्रल जेल की सहायक अधीक्षक फिरोजा खातून और धर्मेंद्र की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। रीवा जिले की रहने वाली फिरोजा खातून औरधर्मेंद्र सिंह की पहली मुलाकात सतना सेंट्रल जेल में हुई थी।
तब धर्मेंद्र सिंह एक के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहा था। यहीं से दोनों को एक दूसरे से प्यार हुआ। जानकारी के मुताबिक धर्मेंद्र सिंह को साल 2007 में एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। लेकिन करीब 14 साल जेल में रहने के बाद अच्छे आचरण के चलते धर्मेंद्र को रिहा कर दिया गया और वह पिछले 4 साल से जेल से बाहर था।
धर्मेंद्र के जेल से रिहा होने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। वह भी बिना धर्म और समाज की परवाह किए। हालांकि फिरोजा की इसशादी से उनके परिजन नाराज थे। यहां तक कि वह शादी में भी शामिल नहीं हुए। ऐसे में बजरंग दल के कार्यकर्ता आगे आए और उन्होंने कन्यादान की रस्म पूरी की।