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दो शादी.. पांच बच्चे.. संघर्ष भरा रहा आशा भोसले का जीवन

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सन 1942 एक 9 साल की बच्ची अपने बाप की अर्थी देख रही है और उसके पास कुछ नहीं और पांच बच्चे एक मां एक शहर जो इन्हें जानता भी नहीं [संगीत] मुंबई जो रहम नहीं करता उसी शहर में 10 साल की आशा मुंह खोलती है गाना गाती है कला के लिए नहीं

रोटी के लिए वो गाती रही 1948 में हिंदी फिल्म सावन आया और दुनिया ने सुना नहीं उन सालों में वही गाना गाने मिले जो लता ने ठुकराए जो गीता दत्त ने छोड़े बचे खुचे छोटे गुमनाम पर आशा ने गाए और फिर 16 साल एक फैसला घर के खिलाफ दुनिया के खिलाफ वो भाग गई और वह उसी दरवाजे पर वापस आई दो बच्चे पेट में तीसरा अकेली यही थी सबसे अंधेरी रात पर उसने मुंह खोला फिर से और इस बार ओपी नयर ने सुना

और रुक गए उन्होंने उसे वह दिया जो किसी ने नहीं दिया था। एक पहचान आशा की सिर्फ आशा की लता की छाया से बाहर 60 के दशक में राहुल देव बर्मन पंचम और दोनों के बीच कुछ बिजली जैसा हुआ। उसी बिजली से निकला ओ हसीना जुल्फों वाली। 1966 दुनिया ने

गर्दन मोड़ी और देखा वह अब हेलेन की आवाज बनी। बोल्ड खतरनाक आजाद जहां बाकी गायिकाएं रुकती थी आशा वहां से शुरू करती थी और 71 में दम मारो दम एक पीढ़ी ने उसे अपना कहा पूरी तरह बिना शर्त पर दुनिया ने एक खाना बना दिया कैबरेगा पॉप क्वीन आशा ने सुना मुस्कुराई और रुकी फिर 1981 में उमरा ओ जान दिल चीज क्या है एक गजल जो सीने में

उतर और उस गाने ने नेशनल अवार्ड जीता। इंडस्ट्री चुप रही। वह हमेशा से यही थी। दुनिया बस देर से जागी। और फिर इजाजत मेरा कुछ सामान। दूसरा नेशनल अवार्ड दोबारा। वही आशा बस और गहरी। उन्हीं सालों में उन्होंने पंचम से शादी की। 1980 देर से मिला प्यार और 14 साल बाद वो भी चला गया। पर 95 में रंगीला। एक नई पीढ़ी वही आशा मानो वह कभी गई ही नहीं थी और 2011 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इतिहास की सबसे ज्यादा रिकॉर्ड की गई आवाज 12,000 गाने 20 जबानें उन्हीं हाथों में दादा साहेब फाल्के पद्म विभूषण दो ग्रेमी नॉमिनेशन एक पूरी जिंदगी सच में पूरी और 12 अप्रैल 2026 92 साल वो गई खामोशी से नहीं पूरी पूरी तरह जी कर।

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