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मां हैं हिंदु, तो पिता ईसाई,’विजय’ नहीं है थलपति का असली नाम।

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विजय नहीं थालापति का असली नाम। जी हां, मां हिंदू है, पिता ईसाई। लेकिन थालापति किस तरफ जाती है? भाई राजनीति एक चीज तो है वो आपको सारे धर्म मनवा देती है। थलापति विजय चुनाव से पहले साईं बाबा के मंदिर शणी गए थे। है ना? रमजान में इफ्तारी भी कराई थी। लेकिन क्या आपको पता है कि उनकी मां हिंदू और पिता ईसाई है और थलापति का पूरा नाम विजय नहीं है बल्कि विजय जोसेफ है।

जी हां थलापति विजय विधानसभा चुनावों में ना सिर्फ जीते बल्कि रिकॉर्ड बनाया। हर जगह उनकी जीत के चर्चे हैं क्योंकि वह सीएम बनने वाले हैं। लेकिन इसी बीच नाम और परिवार की बैकग्राउंड के बारे में तमाम चीजें लोग सर्च कर रहे हैं।

दरअसल थलपति विजय का असली नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। वो जोसफ विजय चंद्रशेखर यानी कि मां हिंदू और पिता ईसाई दोनों विजय के नाम में आते हैं। अपनी फिल्मों के लिए विजय का नाम इस्तेमाल करते हैं। जबकि उनके फैंस उन्हें थलापति के नाम से जानते हैं। जिसका मतलब होता है कमांडर और अब वो कमांडर पूरी स्टेट को लीड करेगा। है ना? महेश बाबू से लेकर विजय देवरकोंडा साहब ने मुबारकबाद भी दी इसके लिए। विजय के परिवार की बात की जाए तो एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां पर उनकी मां हिंदू धर्म से ताल्लुक रखती हैं और पिता एक मशहूर फिल्म डायरेक्टर ईसाई धर्म से संबंध रखते हैं। उनकी मां शोभा चंद्रशेखर एक पाश्च गायिका और शास्त्रीय संगीतकार हैं जो हिंदू धर्म में काफी भरोसा रखती हैं।

विजय भी हिंदू धर्म में काफी मानते हैं और धार्मिक चीजों में काफी इनवॉल्व रहती हैं। विजय ने एक बार इंटरव्यू में बताया था कि वह भगवान के काफी नजदीक हैं। काफी विश्वास करते हैं। उनका बचपन मिक्स धार्मिक वातावरण में हुआ है। जहां पर उनका बैप्टिज्म तक हो चुका है। लेकिन वो मंदिर और दरगाहों के लिए पूरी श्रद्धा रखते हैं। वो मंदिर भी जाते हैं और दरगाह पर भी जाते हैं। विजय ने 1999 में संगीता से शादी की थी जो एक हिंदू परिवार से आती है और उनके दो बच्चे हैं जो इसी धर्म माहौल में पले बड़े हैं।

हालांकि विजय को अक्सर मंदिरों में जाते हुए खूब देखा गया। साथ में जब अभी राजनीति में आते हैं तो फिर आपको सब कुछ देखना पड़ता है। विजय ने एक एक्टर और अब एक राजनेता यानी कि टीवी के पार्टी के प्रमुख के तौर पर हमेशा खुद को धार्मिक रूप से अलग रखा कि मैं सब तरफ हूं और किसी एक तरफ नहीं। रमजान के दौरान इफ्तार पार्टी भी दी थी। हालांकि इसे लेकर काफी कुछ विवाद भी होता लेकिन वो फिर भी नहीं माने। वो अपनी एक जो आइडेंटिटी है उसी को मानकर चलते हैं और अब एक नई उम्मीद के साथ एक यंग जनरेशन के साथ एक नया सीएम लोगों को मिलने वाला है तो लोग खुश भी काफी हैं।

एंड ऑनेस्टली कहूं तो कई सारी चीजें राजनीति में चली जहां पर एक तरफ बीजेपी के बंगाल में जीतने पर लोग हैरान हैं। तो वहीं दूसरी तरफ विजय के जीतने पर लोग खुश इसलिए क्योंकि एक यंग लीडर उनको मिलने वाला है। एक ऐसा लीडर जिसके बारे में खुद प्रशांत किशोर ने पहले कह दिया था कि अगर विजय अकेला लड़ेगा तो वो जीतेगा।

वरना राजनीति में तो कमल हसन भी आए, प्रकाश राज भी आए, इवन चिरंजीवी भी आए। लेकिन इतनी भारी बहुमत सिंगल लार्जेस्ट पार्टी वो भी सिर्फ 2 साल के अंदर कोई नहीं बना पाया। इतिहास रच के विजय ने काम किया। अब बारी है कि एज अ सीएम वो किस तरीके का काम करते हैं।

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