भाई को कुछ लोगों के डॉक्यूमेंट्स बनवा कर देना था। वह समय से काम पूरा नहीं कर पाया। इसलिए पापा ने उसे डांटा। यह कहना है कानपुर में अपनी जान देने वाले वकील प्रियांंशु की बहन का। 23 अप्रैल को कानपुर कचहरी परिसर में प्रियांंशु ने अपनी जान दे दी। पुलिस को उसके पास से दो पन्नों का एक नोट मिला था। नोट में उसने पिता को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया।
उसने लिखा कि मेरे पिता के जैसे पिता किसी को ना मिले। मेरी लाश को पिता हाथ भी ना लगाएं। पापा छुए भी नहीं। इस हादसे पर प्रियांंशु की बहन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उसको जल्दी से जल्दी सक्सेस पाना था। वह सोचता था कि हमें पापा से कुछ नहीं लेना है। पापा के पैसे से काम नहीं करना है। इसलिए वह कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ-साथ दूसरे काम भी किया करता था।
उस काम में उसका एक डेढ़ लाख फंसा हुआ था। प्रियांंशु की बहन ने बताया कि पापा ने उसे एक ही काम पर ध्यान देने के लिए कहा। लेकिन इस चीज को उसने गलत समझ लिया। उसे लगा कि घर में कोई उसे प्यार नहीं करता। बहन ने बताया कि घटना वाले दिन पापा ने उसे इसलिए डांटा था क्योंकि उसके पास कुछ लोगों के डॉक्यूमेंट से जुड़ा काम था। उन लोगों की नौकरी लगनी थी लेकिन प्रियांंशु की लापरवाही की वजह से काम नहीं हुआ इसलिए पापा ने उसे डांटा। पापा ने कहा कि अपनी वजह से दूसरे की लाइफ खराब मत करो। बहन का कहना है कि जब भी पापा उसे डांटते थे वह हर बार ऐसा ही करता था।
उस दिन भी वह रोते हुए बोला कि आज बहुत ज्यादा हो गया। मेरी बहुत बेइज्जती हुई है। अब हम नहीं जिएंगे। वहीं प्रियांंशु के पिता राजेंद्र कुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हमने उसे लॉ करा दिया था। पढ़ाई पूरी होने के बाद हमने कहा प्रैक्टिस शुरू करो। प्रियांंशु के ऊपर काम का बहुत प्रेशर था क्योंकि वह वकालत के साथ-साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे डॉक्यूमेंट्स बनवाने का काम भी किया करता था। पिता के मुताबिक प्रियांशु दोनों काम साथ में मैनेज नहीं कर पा रहा था। उसने लोगों का काम करवाने के लिए अपनी जेब से पैसे भी लगा दिए लेकिन उसे पैसे वापस नहीं मिले। उसे 1 डेढ़ लाख का नुकसान हो गया था। उसके पिता ने कहा कि इसी लापरवाही की वजह से हमने कड़े शब्दों में उससे बात कर ली जिस पर वह रोने लगा।
उसकी मां ने उसे उस दिन कोर्ट जाने से मना भी किया लेकिन वो नहीं माना और चला गया। उसके निकलने के बाद हमने उसे वापस बुलाने के लिए फोन किया। पहले तो उसने फोन नहीं उठाया। फिर जब बात हुई तो हमने उसे घर आने के लिए कहा। उसने जवाब दिया कि वह 1 घंटे में घर आ जाएगा। बस फिर सूचना आई कि उसने WhatsApp पर एक स्टेटस लगाया है। लोगों के फोन आने लगे तो हम कोर्ट की तरफ भागे। हमें उसका स्टेटस नजर नहीं आ रहा। इसलिए हम आज तक उसे नहीं पढ़ पाए। कोर्ट जाकर प्रियांंशु को ढूंढना शुरू किया। देखा तो एक जगह भीड़ लगी हुई थी। वहां जाकर देखा तो प्रियांंशु की हालत बहुत गंभीर थी। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन वहां उसकी मौत हो गई। प्रियांशु ने लेटर में अपनी मौत का जिम्मेदार अपने पिता को बताया था। उसने लेटर में लिखा था कि 6 साल की उम्र में मैंने चोरी से फ्रिज में रखा आम का जूस पी लिया था।
इसके लिए मुझे निर्वस्त्र करके घर से बाहर निकाल दिया गया। प्रियांंशु के मुताबिक उसके पिता हर समय उसके ऊपर नजर रखते जिससे उसे मोहल्ले में बेइज्जती महसूस होती थी। अब पिता के बयान के बाद प्रियांंशु की मौत पर तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ प्रियांंशु ने पारिवारिक विवाद को अपनी मौत का कारण बताया है। दूसरी तरफ उसके पिता और बहन के मुताबिक उसे लाखों रुपए का नुकसान हुआ था। असल वजह क्या है? पुलिस इसकी जांच कर रही है। फिलहाल इस खबर में इतना ही। खबर लिखी है हमारी साथी रक्षा ने। मैं हूं शेख नावेद। देखते रहिए लल्लन टॉक। [संगीत]