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ईरान की गद्दारी, भारत आने वाले जहाज पर मारी गोली, फिर हुए बड़ा खेल !

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यू आर फाइंडिंग नाउ लेट मी टर्न बैक। ईरान के लिए चंदा जमा करने वाले आज यह खबर बहुत ध्यान से देख लें। क्योंकि एक तरफ ईरान ने पाकिस्तान के बंकर इन चीफ असीम मुनीर को गले लगाया तो दूसरी तरफ स्टेट ऑफ हॉर्मोस में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग कर दी। इस घटना के बाद ईरान अब बयानबाजी कर रहा है कि यह सब कुछ कंफ्यूजन में हो गया। लेकिन ईरान से हम पूछना चाहते हैं कि यह कंफ्यूजन चीनी जहाजों के साथ क्यों नहीं हुई? और चंदा जमा कीजिए ईरान के लिए।

लुटा दीजिए ईरान पर सोना, चांदी, बर्तन, जेवर और कैश, लेकिन बदले में ईरान ने क्या किया? आपको बता दें कि जिस वक्त ईरान ने भारत आने वाले जहाज पर फायरिंग की, तो उस जहाज के कैप्टन ने ईरान को एक ऑडियो मैसेज भेजा। इस ऑडियो मैसेज को सुनने के बाद आपको पता चलेगा कि मामला कितना गंभीर था। यह पूरा ऑडियो हम आपको सुनवाएंगे। इस ऑडियो को आप उन लोगों तक जरूर भेजिएगा जो ईरान के लिए चंदा जमा कर रहे हैं। लेकिन उससे पहले जल्दी से यह देख लीजिए कि मामला क्या था। दरअसल, यह फायरिंग तब हुई जब ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में स्ट्रेट ऑफ हार्मोस को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया। जिस वक्त ईरान ने यह ऐलान किया, उस वक्त दो जहाज भारत की तरफ आ रहे थे।

इन दोनों जहाजों को भारत आने की इजाजत भी थी, लेकिन इसके बावजूद ईरान के सैनिकों ने इन जहाजों पर गोली चला दी। इन दोनों जहाजों को अपना रास्ता बदलने और पश्चिम की ओर वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ गया। आपको बता दें कि इन जहाजों में 20 लाख बैरल इराकी तेल लदा था। हैरानी की बात देखिए कि भारत सरकार दो बार ईरान के लोगों को भारी मात्रा में राहत सामग्री भेज चुकी है। लेकिन इसके बावजूद ईरान ने

भारत की तरफ आने वाले जहाज पर गोली चलाई। ईरान की इस घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने रात में ही ईरान के राजदूत को तलब कर लिया। उनसे पूछा गया कि ऐसी घटना क्यों की गई है? बहरहाल आप पहले उस जहाज के कैप्टन का वो ऑडियो मैसेज सुनिए, जो उसने गोलीबारी के बाद ईरान को भेजा था। यू गव मी क्लीयरेंस टू गो। माय नेम सेकंड ऑन योर लिस्ट। यू गव मी क्लीयरेंस टू गो। यू आर फायरिंग नाउ। लेट मी टर्न बैक। जहाज के कैप्टन ने ईरान के सैनिकों से कहा कि आपने मुझे जाने की मंजूरी दी थी।

आपकी लिस्ट में मेरा नाम दूसरे नंबर पर है। लेकिन आप फिर भी मेरे जहाज पर गोलियां चला रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। मुझे वापस जाने दीजिए। अब आप ही बताइए कि क्या ईरान ने भारत से गद्दारी नहीं की है? यह बात सही है कि ईरान और भारत के बीच सदियों पुराना रिश्ता रहा है। भारत और ईरान की सभ्यताओं के बीच भी रिश्ता जरूर रहा होगा। लेकिन जब से ईरान पर इस्लाम हावी हुआ उसके बाद से भारत और ईरान के बीच रिश्ते सिर्फ व्यापारिक ही रहे हैं। इससे ज्यादा और कुछ नहीं है। ऐसे में जब भी कोई लिबरल और वामपंथी ईरान की गलतियों पर पर्दा डालते हुए आपसे यह कहे कि हमारे ईरान से रिश्ते काफी पुराने हैं तो इमोशनल होने की बजाय आप उन वामपंथियों को यह बता दीजिएगा कि ईरान से रिश्ते जरूर रहे होंगे, लेकिन ईरान की गद्दारी हम नहीं झेलेंगे। हर बार ईरान मनमानी करे, कश्मीर पर बेवजह बयानबाजी करे और हम यह सोचते रहे कि ईरान के साथ हमारे सदियों पुराने रिश्ते हैं। अगर हम ऐसा ही सोचते रहे तो हम बेवकूफी कर रहे हैं।

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