वी प्रोवाइड [संगीत] यू द प्लेटफार्म टू टर्न योर ड्रीम्स इनटू रियलिटी। गिव विंग्स [संगीत] टू योर एस्पिरेशंस विद केआर मंगलम यूनिवर्सिटी। नेपाल सरकार ने भारत से खरीदारी करने वालों के लिए नियम सख्त किए हैं। तो बड़ी खबर आपको बता रहे हैं। नेपाल का नया आदेश सामने आया है। भारत से खरीद पर देना होगा शुल्क। तो यह बड़ी खबर आपको बता रहे हैं। जहां नेपाल से हमारे रिश्ते काफी अच्छे थे। वहीं नेपाल में अब नई सरकार बनी है। नेपाल सरकार ने भारत से खरीददारी करने वालों के लिए नियम सख्त करते हुए ₹100 से अधिक के सामान पर भंसार यानी कि कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दिया। अब आप सोच रहे होंगे कि नेपाल से तो भारत का बहुत अच्छा रिश्ता है। जी हां, भारत से नेपाल का रिश्ता अच्छा है। लेकिन वहां अभी सरकार बदली है और नई सरकार ने यह नियम लागू किया है। क्या कुछ कहा है?
तमाम जानकारियां आपको देंगे। तो आपको बता दें कि नेपाल में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए इसे लागू किया गया है। इस पर 5 से 80% तक शुल्क लग सकता है। नेपाल और भारत के बीच सीमा पार व्यापार हमेशा से ही आम जिंदगी से जुड़ा रहा है। नए नियम का सीमावर्ती इलाकों में खरीददारी और छोटे व्यापार पर सीधा-सीधा असर पड़ सकता है। इससे भारत के स्थानीय व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है। नेपाल में बालेंद्र शाह मंत्रिमंडल के नए फरमान के बाद भारत नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में हड़कंप पहुंच गया है। इस आदेश में किसी एनजीओ या सरकारी संस्था को भी कोई छूट नहीं दी गई है। स्थानीय प्रशासन द्वारा इस नियम की जानकारी लाउडस्कर के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाई जा रही है। मतलब सोचिए कितना बदलाव आ रहा है। नई सरकार बनी और यह सारे नियम लागू होने लगे। यह भी आकलन लगातार करते रहिएगा कि आखिर इसके पीछे कौन हो सकता है? सीमा क्षेत्र के अधिसंख्य लोग जो है यानी कि ज्यादातर लोग जो है रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत और नेपाल के बाजार पर पूरी तरीके से निर्भर रहते हैं। यहां से वे सस्ता सामान खरीदते हैं। सीमावर्ती दुकानदारों के व्यवसाय पर भी इस निर्णय का नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
अब जो लोग जो नेपाल के लोग हैं जो बॉर्डर के पास हैं सीमावर्ती इलाकों में हैं लगातार उनकी खरीद खरीददारी जो है भारत से है तो उन पर तो सीधा-सीधा असर देखने को मिलेगा। फिलहाल आपको बता दूं कि सोनामनी गोदाम से लेकर आमबारी तक लगभग 28 कि.मी. की नेपाल सीमा के बीच एक छोटी भंसार सेवा मेधा बीओपी के समीप है। यानी कि उसके पास है। वहां अभी कोई गहमागहमी नहीं देखी जा रही। नेपाल की गीता, कारकी, राहुल, बसेत, मयंक थापा और इन सब ने बताया कि सीमा से सटे क्षेत्र के लोगों के लिए भारतीय बाजार में सस्ते और सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध है। यहां से लोग दाल, तेल, नमक, चीनी, सब्जी, औषधि यानी कि दवाइयां और अन्य खाने की चीजें जो है खरीद कर अपने घर की जरूरतें पूरी करते हैं। लेकिन अब सोचिए कितना बड़ा फैसला लिया गया है। यह नया नियम लागू होने से छोटी
खरीददारियों पर भी इसका असर पड़ेगा। लोगों का कहना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर गरीब, मजदूर और दिहाड़ी पर निर्भर परिवारों को प्रभावित करता है। जो लोग रोजाना ₹200 या ₹300 कमाते हैं। अब आप सोचिए ₹200 या ₹300 का सामान खरीदकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं, उनके बारे में सरकार को सोचना चाहिए। वहीं इस पर विशेषज्ञों का क्या मानना है, यह भी बताऊंगी आपको। इन फैसलों पर जो बड़े विशेषज्ञ हैं उनका मानना है कि सरकार का उद्देश्य भले ही राजस्व बढ़ाना और अवैध व्यापार पर रोक लगाना हो लेकिन इसका प्रभाव आम निवेशकों पर ज्यादा पड़ेगा। बड़ी कंपनियों के बजाय छोटी खरीददारी इस नीति की मार झेलेगी। छोटी भंसार सेवा मायागंज मेधा बीओपी पर तैनात अधिकारियों ने बताया है कि फिलहाल वय अधिकारियों का निर्देश प्राप्त नहीं हुआ। यानी कि बड़े अधिकारी जो हैं उनका निर्देश जो है वह नहीं मिला है। निर्देश मिलते ही नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। आपको बता दूं कि मायागंज छोटी भंसार सेवा में अधिकतम ₹5000 की भंसार सेवा उपलब्ध है।
नेपाल में भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के संचालन को लेकर सख्त कानूनी प्रावधान भी लागू कर दिए गए हैं। अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और वाहन ज्त होने तक की कार्यवाही की जा सकती है। जी हां, नेपाल सरकार द्वारा लागू भंसार यानी कि कस्टम जी हां, कस्टम महाशुल्क एम71 के तहत भारतीय सवारी साधनों को नेपाल में प्रवेश के लिए कस्टम अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ ही अन्य कठोर कार्यवाही भी की जा सकती है। और साथ ही आपको यह भी जानकारी दे दूं कि उपयोग के आधार पर शुल्क भी निर्धारित किया गया है। इसके तहत बाइक या स्कूटर के स्कूटर के लिए रोजाना ₹100 तीन पहिए वाहनों के लिए ₹400 और कार जीप वैन के लिए ₹600 दैनिक शुल्क देना होता है।
मंसार शुल्क चुकाने के बाद भी कोई विदेशी वाहन एक आर्थिक साल में अधिकतम 30 दिनों तक ही नेपाल में चलाया जा सकता है। चाहे वह अवधि लगातार हो या अलग-अलग हिस्सों में। अगर कोई वाहन तय समय सीमा से ज्यादा नेपाल में रखा जाता है तो बाइक या स्कूटर पर हर दिन प्रतिदिन ₹2000 और जो अलग वाहन है अन्य वाहनों पर ₹2500 प्रतिदिन अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है। तो ये बड़ी जानकारी आपको दे रहे थे जहां नेपाल में सरकार बदलते ही सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। भारत के खिलाफ यह फैसला लिया है।
हालांकि फिलहाल इस पर भारत ने कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया है। कोई अभी अनाउंसमेंट नहीं किया गया है भारत की तरफ से। लेकिन आपको यह भी जानकारी दे दूं कि भारत और नेपाल बॉर्डर शेयर करते हैं और नेपाल भारत पर बहुत हद तक निर्भर है। तो क्या नेपाल में जो नई सरकार बनी है, जिस तरीके से नेपाल में नई सरकार बनी है, वह भी हमने दृश्य देखा हुआ है। यह जो फैसला लिया गया है, क्या इससे नेपाल के लोग जो हैं, वह सहमत होंगे। क्या नेपाली लोग जो है वह सपोर्ट करेंगे नई सरकार को या फिर हमें एक बार फिर से बांग्लादेश वाला रूप देखने को मिलेगा।