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रूस-तुर्किए ने क्यों बेचा सोना, क्या होगा दुनिया पर असर?..

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मध्य पूर्व युद्ध का असर अब ग्लोबल इकोनमी पर साफ नजर आने लगा है। बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कई देश हथियार खरीदने के लिए अपने गोल्ड रिजर्व तक खाली कर रहे हैं। पहली खबर पोलैंड से आई है जहां वो 60 टन सोना बेच सकता है। वहीं रूस भी करीब 15 टन सोना बेचकर रक्षा बजट बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। और इस बीच तुर्किए ने बड़ा कदम उठाया है। सिर्फ दो हफ्तों में करीब 60 टन सोना बेच दिया है।

जिसकी कीमत 8 बिलियन डॉलर यानी भारतीय करेंसी में देखा जाए तो यह करीब 76000 करोड़ बताई जा रही है। अब एक्सपर्ट्स यह कह रहे हैं कि अगर ऐसी बिक्री जारी रही तो आने वाले समय में सोने की कीमतों पर भारी दबाव पड़ सकता है। और जिस तरह तुर्किए ने करीब 60 टन सोना बेचकर ग्लोबल गोल्डन मार्केट में हलचल मचाई है। इसका असर दुनिया भर की कीमतों और निवेशकों की रणनीति पर भी साफ दिखने लगा है।

खास बात यह है कि अब तक सेंट्रल बैंक गोल्ड के बड़े खरीदार माने जाते थे, लेकिन तुर्किए का यह कदम ट्रेड बदलने का संकेत दे रहा है। गोल्ड मार्केट पहले से ही बहुत ज्यादा दबाव में है। ईरान युद्ध के बाद सोना पारंपरिक सेफ हेवन की तरह नहीं चला बल्कि शेयर बाजार की तरह गिरा है।

इस दौरान कीमतों में करीब 15% तक की गिरावट दर्ज की गई। लेकिन तुर्की की बिक्री ने इस दबाव को और ज्यादा बढ़ाने का काम किया है। हालांकि इस झटके के बावजूद विधेय शुक्रवार को गोल्ड ने रिकवरी दिखाई और कीमतें $4500 प्रति अंश के ऊपर पहुंच गई। इंट्राडे में यह $550 तक गया जो बताता है कि गिरावट के बाद खरीदारी भी यहां मौजूद है। तुर्की ने सोना क्यों बेचा यह भी जानिए। दरअसल ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।

जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में डॉलर की जरूरत पूरी करने और इकॉनमी को संभालने के लिए सेंट्रल बैंक अपने गोल्ड रिजर्व बेच रहा है। एक्सपर्ट इसको लेकर यह कह रहे हैं कि तुर्की अकेला नहीं हो सकता। अगर दूसरे देश भी ऐसा ही कदम उठाते हैं जैसे कि हमने रूस के बारे में आपको बताया और पोलैंड के बारे में तो गोल्ड की ग्लोबल डिमांड भी कमजोर हो सकती है।

इससे कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और सेंट्रल बैंक की खरीदारी जो अब तक गोल्ड की तेजी का बड़ा कारण थी वो भी धीमी पड़ सकती है। अब कुल मिलाकर देखा जाए तो तुर्की ने जो 60 टन गोल्ड की बिक्री की है वो सिर्फ एक देश का फैसला भर नहीं है बल्कि पूरे बाजार के लिए एक सीधे तौर पर बड़ा संकेत है। क्या आने वाले समय में गोल्ड की दिशा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि क्या बाकी देश भी इसी रास्ते पर चलते हैं या फिर नहीं।

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