नमस्कार मैं गौरव कुमार पांडे हाज़िर हूं यूपी तक पर मेरे साथ हरीश राणा के पिता जी अशोक राणा जी हैं अशोक जी बताइए सर्वप्रथम मैं सर्वशक्तिमान परमात्मा का धन्यवाद करता हूं उसी परमात्मा का जिनकी छतरछाया में ये हमारे लड़के का जो मान सर्वोच्च अदालत से माननीय हमारे न्यायमूर्ति प्रदीवाला जी और विश्वनाथन जी ने जो मानवीय निर्देश दिए सबसे पहले हम उनका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
दूसरे नंबर पे तीसरे नंबर पे हम गाजियाबाद सरकार के मतलब यूपी सरकार के मुख्यमंत्री माननीय आदित्यनाथ योगी जी का भी बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं दिल से। उन्होंने हम जिला अधिकारी और अह जीडीए के बीसी साहब को और आयुक्त अह कमिश्नर को एमसीडी वाले को हमारे घर पहुंचा और हमारी सहायता हेतु उन्होंने कुछ घोषणाएं की है और मदद भी की है। वो कह रहे हैं कि ₹1 लाख हम देंगे। उसके बाद हम एम्स के डायरेक्टर निदेशक श्री वास्तव जी और वहां की एचओडी सीमा मिश्रा जी और उनकी टीम का भी बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं और प्रोफेसर सुषमा जी उन सभी का हम बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। तो अभी आप सुन सकते हैं कि धन्यवाद जो है वो
और हम अपनी वकील जिन्होंने कदम कदम पे हमारा साथ दिया रश्मि नंदकार जी अधिवक्ता जो हमारी हैं जी और डॉक्टर ध्वनी मेहता जी डॉक्टर सविता वडोला जी और डॉक्टर रूप गुरसानी जी और डॉक्टर चंद्रमणि जी और डॉक्टर बहुत सारे हैं रजिंदर दमीजा जी ये भी हमारे मतलब हर एक कदम कदम पे हमारी हमें मार्गदर्शन करते रहे। हम सभी का मेडिकल विंग के लोगों का सभी अधिवक्ताओं का और सभी अपने पड़ोसियों का भी जिन्होंने जो मेहमान आए रात दिन उन्होंने उनकी भोजन बनाया क्योंकि हमारे घर में तो भोजन बनना नहीं था।
उसके लिए उनका भी धन्यवाद करता हूं। उनका भी नाम मेन अरविंद कुमार हमारे 610 सोसाइटी में रहते हैं। बहुत रात दिन उन्होंने तन से धन से भी मतलब उनको भोजन खिलाया। इन्हीं शब्दों के साथ अशोक जी मैं एक आखरी सवाल पूछना चाहता हूं कि हम अशोक जी एक आखरी सवाल मैं आपसे करना चाहता हूं। से माननीय पहली एक रात थी जब माननीय आदित्यनाथ योगी जी का हम बहुत-बहुत दिल से धन्यवाद करते हैं जिन्होंने अपने जिला प्रशासन को जो अधिकार दिए जो उन्होंने बोल ही दिया उन्होंने भेजा और हमारा हालचाल पूछा और 10 लाख की जो घोषणा की है उसके लिए अच्छा दुकान की भी बात बाकी मीडिया वालों का भी धन्यवाद करते हैं जिन्होंने सच्ची खबर दी है और जिन्होंने झूठी दी है उनका भी भला हो भाई हम तो मैं मीडिया वालों से प्रेस वालों से भी यही बोलूंगा कि वो वो गलत ना बोले जो भी किसी का भी समाचार चाहे मेरा नहीं सबका भला हो सभी सब खुश रहें बोलते हैं ना सर्वे भवंतु सुखना सर्वे संतु निराया सर्वे भद्रा तो सभी सुखी रहें सभी स्वस्थ रहें इन्हीं शब्दों के साथ मैं विराम देता हूं धन्यवाद आपका भी
सुबह-सुबह आए इसलिए मैंने आपको ये इंटरव्यू दे दिया शुक्रिया आपका हेल्दी रहो वेल्थी रहो और हैप्पी रहो हैं ओम शांति ठीक है ओम शांति तो साफ तौर पे जो हरीश राणा के पिता जी हैं अशोक राणा हमारे साथ बातचीत कर रहे थे और साफ तौर पे आप देख रहे हैं परिवार जो है यहां से अब निकल रहा है। माता जी जो हैं माता जी भी हैं यहां पर और माता जी पूरा परिवार अभी यहां से अस्थियां लेकर हरिद्वार के लिए निकल रहा है और साफ तौर पे आपको बता दें कि हरिद्वार के बाद परिवार जो है हिमाचल अपने गांव चला जाएगा। जहां पर जो है पूरे रीति रिवाज के साथ ये एक तरह से जो 13वीं संस्कार है वो जो है कंप्लीट किया जाएगा और यहां पर कुछ लोग जो है उनके गांव के लोग गांव के लोग जो है वो आए हुए हैं और अभी आप देख सकते हैं कि हाथ जोड़ते हुए सभी का शुक्रिया उन्होंने किया यहां पर और उनके दामाद यहां पर इस वक्त मौजूद है। उनके बेटे यहां मौजूद हैं और साथ ही साथ ही साथ सबकी इन्होंने
मतलब गांव में कोई गांव में क्या पूरे हिमाचल में कोई बीमार होता था तो एम्स में करते थे अभी रिटायर हुए सेक्शन ऑफिसर थे अफसर थे परंतु इनके वो मानवता के गुण भरे हुए हैं इतने दयालु और इतनी सहानुभूति देखो सुबह से आए हुए हैं ये 7:00 बजे के यहां खड़े हैं सर तो इनका भी हम दिल से इनके परिवार का तो एक तरह से सभी को शुक्रिया सबको धन्यवाद देते हुए जो है यहां पर आ रहे हैं और मेरे साथ जो है एक शख शख्स भी मौजूद है जो उनके गांव के हैं। सर आपका नाम? रविंद्र सिंह राणा। रविंद्र जी इधर आइए। तो बेसिकली सभी को शुक्रिया अदा करते हुए पिता अशोक राणा जो है यहां से जो है अब निकल रहे हैं सीधे हरिद्वार के लिए जहां अस्थियां प्रवाहित की जाएंगी और उसके बाद सीधे हिमाचल में गांव। तो क्या मतलब तेरे ही संस्कार का पूरा ये होता है मतलब आप लोगों के समाज में। हां पूरी देर में पूरी गांव में वाले दिन ही होते हैं। बिल्कुल तो आप भी हरीश को बचपन से देख रहे थे? हां बिल्कुल बचपन से देख रहे थे यहां पे जब से वो मतलब उसका चाइल्डहुड जो वहीं से प्लेटा से ही हुआ था। प्लेट के बाद फिर ये दिल्ली आए स्टडी के लिए। 12 10थ के बाद उन्होंने शायद 12th यहीं से की। उसके बाद फिर उन्होंने चंडीगढ़ से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की तो ये परिवार के लिए एक तरह से देखा जाए तो पहली ऐसी रात थी जब हरीश सामने नहीं थे। बिल्कुल तो ये कैसे आप उस लम्हे को बताएंगे? अब आप सभी जानते हैं मीडिया वाले खुद जाने क्या पेरेंट्स के ऊपर क्या गुजरती होगी। अभी जो होगा चलो भगवान ने जो किया वो अच्छा किया। भगवान अच्छाई के लिए ही करता है। वो भगवान ने जैसे लिखा है वैसे ही आपको लाइफ काटनी पड़ेगी। हम तो अभी खाना पीना वैसे कुछ स्नान खाना पीना तो हम लोग खाते पीते नहीं। जिस तरह कल इनकी परसों डेथ हुई थी ना तो जिस डेथ के बाद घर में खाना नहीं बनता है। हम ना खाते हैं कोई भी जब क्रिया हो जाती है
उसके बाद ही हमारे जो सिस्टम उसके बाद ही खानावाना लिया जाता है। अच्छा हम तो एक तरह से पूरी वो भी नहाने के बाद अच्छा अच्छा तो पूरी क्रिया हो जाने के बाद जो है वो भोजनवजन होता है और अभी फिलहाल परिवार जो है अस्थियां लेकर हरिद्वार के लिए निकल रहा है। बाकी तमाम जानकारी लेटेस्ट अपडेट्स के लिए जुड़े यूपी तक के साथ धन्यवाद। अतीक अहमद यहां से डरकर गुजरात भागा था। साबरमती तो ऐसे ही गया जैसे मुख्तार अंसारी पंजाब गए थे। लेकिन अतीक अहमद के दो या ढाई करोड़ तीन करोड़ उमेश पाल नहीं दे रहे थे। कौन उमेश पाल? राजूपाल का गवाह हत्याकांड का। राजूपाल को किसने मारा? आज की तारीख में नो वन किल्ड राजूपाल। अतीक बरी हो चुके हैं उससे। लेकिन दौड़ा के मारा था। कितनी गोलियां मारी? क्यों मारा था? क्योंकि अतीक की सीट जो सांसदी की वजह से खाली हुई उस पर विधायकी अशरफ को लड़नी है। लेकिन राजूपाल लड़ गए। राजूपाल कौन? अतीक का गुर्गा। राजूपाल भी अतीक का गुर्गा था। और राजूपाल ने ठीक वैसे ही चुनाव लड़ा अशरफ के खिलाफ जैसे अतीक चांद बाबा के खिलाफ लड़ गए थे। क्योंकि यहां मायावती ने राजूपाल को टिकट दे दिया था। यह बात अतीक को बर्दाश्त नहीं हुई। तो जैसे अतीक लड़े थे चुनाव वैसे ही राजूपाल लड़े। राजूपाल को मार दिया। लेकिन बाद में होस्टाइल हो गए उमेश पाल। जब उमेश पाल होस्टाइल होते हैं तो करते क्या है? उमेश पाल अतीक अहमद का काम देखने लगते हैं। जमीनों का काम देखने चले। पूरा पूरा गंगा कछार जितना है। वरना अतीक तो रेलवे स्क्रैप का काम करता था। वो तो बुरा मतलब वो तो बुरा वक्त आया जब लालू यादव ने कह दिया कि स्क्रैप मोटे स्क्रैप से हम पहिए बनाएंगे तो स्क्रैप का काम खत्म हो गया। अतीक अहमद की वजह से इलाहाबाद का जो रेलवे स्क्रैप का काम था जो गोदाम था वो झांसी शिफ्ट करना पड़ा था। पहले इलाहाबाद में था लेकिन अतीक की गुंडागर्दी अतीक के माफियाज्म से रेलवे को भी डरना पड़ा और उसको सारा काम जहां से शिफ्ट करना पड़ा। और जब अतीक का रेलवे स्कैप का काम खत्म हो गया। गैंग बड़ा हो चुका था। पैसे की जरूरत थी। पैसा कहां से आएगा? तो क्या कर सकते हैं? लैंड तो ये कहानी लस्ट ऑफ लैंड की है। गंगा कछार की जो जमीन थी उस पे कब्जे धीमे-धीमे उसको लगा गंगा क्या होता है? सिविल लाइंस में भी तो प्लॉट खाली पड़े हैं। अब किसी आदमी का प्लॉट खाली पड़ा है। नहीं दे रहा है। 20 करोड़ का प्लॉट है। 80 लाख में लिखवा लिया। लिखोगे नहीं तो मारे जाओगे।