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पाकिस्तान में मीटिंग तय, ट्रंप की कौन सी शर्त मान गया ईरान?..

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एक्सपर्ट सशन कैंडिडेट डस्टिंग पाउडर हटा खुजली लगा कैंडिडेट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान उनकी शर्त मान गया है। द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ट्रंप एक सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे जब उन्होंने ईरान को लेकर यह बयान दे दिया। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि ईरान इस बात के लिए राजी हो गया है कि वो कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

ईरान अब काम की बात कर रहा है। बात की शुरुआत ही यहां से थी कि वो परमाणु हथियार नहीं बना सकते। मैं पहले से ही यह नहीं कहना चाहता लेकिन वो बात मान गए हैं। वाकई मान गए हैं। ट्रंप के इस बयान पर फिलहाल ईरान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। आपको याद दिला दें कि इससे पहले भी जंग के बीच में ट्रंप कई दावे कर चुके हैं। लेकिन ईरान ने उनका खंडन किया था।

23 मार्च को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा था कि मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले दिनों अमेरिका और ईरान में काफी अच्छी और पॉजिटिव बात हुई। इसका मकसद मिडिल ईस्ट में मिलिट्री टेंशन को पूरी तरह खत्म करना है। बातचीत के माहौल को देखते हुए मैंने रक्षा विभाग को आदेश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट और एनर्जी स्ट्रक्चर्स पर होने वाले सारे हमलों को 5 दिनों के लिए टाल दिया जाए।

ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया था कि बातचीत के लिए ईरान का कॉल उनके पास आया था ना कि उन्होंने ईरान को कॉल किया था। हालांकि ईरान ट्रंप के दावों को झूठ बताता है। ईरान की समाचार एजेंसी फार्स न्यूज़ ने एक ईरानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा था अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है ट्रंप को जब एहसास हो गया कि ईरान पश्चिम एशिया में मौजूद पावर प्लांट को निशाना बनाएगा तो इससे डरकर उन्होंने अपनी धमकियों से कदम पीछे खींच लिए।

एक खबर यह भी है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में लगभग 1000 सैनिकों को भेजेगा। न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से बताया अमेरिकी सेना 82 एयरबोन डिवीजन से लगभग 1000 सैनिकों को मिडिल ईस्ट में तैनात करने की तैयारी कर रही है। इस यूनिट को सेना की आपातकालीन प्रतिक्रिया बल माना जाता है। इसे आमतौर पर कम समय के नोटिस पर तैनात किया जाता है।

यह अमेरिकी सैनिकों की नई तैनाती है। इस यूनिट को दुश्मनों के विवादित क्षेत्र में पैराशूट से उतरने की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि महत्वपूर्ण इलाकों और हवाई अड्डों को सुरक्षित किया जा सके। बीते दिन यानी कि 24 मार्च को चर्चा थी कि पाकिस्तान में यूएस और ईरान के बीच नेगोशिएशन हो सकती है। खबर थी कि इस्लामाबाद में ईरान और यूएस के बड़े अधिकारियों को बुलाया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति जे डी वैंस का नाम भी सामने आया था। हालांकि इस दावे पर मुहर नहीं लगाई गई थी। सवाल पूछने पर बात को टालते हुए वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लिविट ने कहा था कि जब तक औपचारिक तौर पर घोषणा ना कर दी जाए तब तक इसे फाइनल ना समझें।

हालांकि रात होते-होते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बात की पुष्टि कर दी थी। 24 मार्च की रात शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान मिडिल ईस्ट में युद्ध को खत्म करने के लिए चल रहे संवाद प्रयासों का स्वागत करता है। उनका पूर्ण समर्थन करता है।

अमेरिका और ईरान की सहमति से पाकिस्तान दोनों देशों के बीच बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार है। शहबाज के इस पोस्ट को ट्रंप ने शेयर किया जो इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान में यूएस और ईरान की मीटिंग लगभग तय है। इस्लामाबाद इसकी संभावित जगह हो सकती है।

तारीख का जिक्र नहीं किया गया है। जब से जंग शुरू हुई है, बातचीत और सहमति जैसे शब्द सिर्फ यूएस की तरफ से सुने गए हैं। इसका सबसे हालिया उदाहरण है ट्रंप का बयान जिसमें वह कह रहे हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार ना रखने पर सहमत हो गया है। हालांकि ईरान इस बात की पुष्टि नहीं करता ना ही कोई प्रतिक्रिया सामने आई है

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