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कौन है मैथ्यू वैंडीक जिसको NIA ने पकड़ा? Northeast में क्या करने आया था ‘CIA का जासूस’?..

Hindi Post

कमजोर दवा ज्यादा शक्तिशाली बैक्टीरिया पैदा करती है। वैसे ही कमजोर मिलिट्री एक्शन ज्यादा शक्तिशाली शासन खड़ा करता है। जब किसी शासन पर हमला करो तो उसको पूरी तरह मिटा दो। यह शब्द है मैथ्यू वेंडाइक के। वही अमेरिकी जिसको एनआईए ने गिरफ्त में ले लिया है। एनआईए का कहना है कि वेंडाइक भारत के खिलाफ म्यांमार में लड़ाके तैयार करने आया था। मगर कोलकाता एयरपोर्ट पर उसको पकड़ लिया गया।

उसके अलावा छह और विदेशी नागरिकों को भी एनआईए ने पकड़ा है। मगर उनमें से मैथ्य वेंडाइक एक ऐसा नाम है जिस पर सबकी निगाहें आटिकी हैं। कौन है मैथ्यू वेंडाइक? क्या वेंडाइक सीआईए का जासूस है और वो भारत में क्या कर रहा था? ईरान में जब अयातुल्ला अली खमनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुस्तबा खमनेई ने देश की कमान संभाली तो वेंडाइक ने शासन को पूरी तरह निस्तनाबूत करने की यह बातें कही थी।

उसका ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देखेंगे तो पता चलेगा कि उसके यह शब्द उसके इतिहास की बानगी भर हैं। एनआईए ने बताया है कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग पहले टूरिस्ट वीजा पर भारत आए, गुवाहाटी पहुंचे, फिर मिजोरम गए और वहां प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट या रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट ज़ोंस में बिना इजाजत दाखिल हो गए। लेकिन यह महज एक गलती नहीं थी। एनआईए का दावा है कि यह लोग मिजोरम से सटे म्यांमार में विद्रोही गुटों को उत्तर पूर्व भारत में हमलों के लिए तैयार करने आए थे।

अब सवाल यह उठता है कि एक अमेरिकी नागरिक का उत्तर पूर्व भारत और म्यांमार से क्या सरोकार? जवाब छिपा है वेंडाइक के इतिहास में। ऐसा पहली बार नहीं है जब वो किसी तीसरे की लड़ाई में कूद पड़ा है। उसके ऑपरेशंस देखकर लगता है कि वह खुद को फ्रीडम फाइटर जैसा कुछ तो मानता है। हालांकि उसके कारनामे किसी मर्सनरी से कम नहीं है। यानी ऐसा लड़ाका जो आजादी के लिए नहीं बल्कि पैसों के लिए जान लेने से गुरेज नहीं करता।

ऐसा नहीं है कि वह पहले कभी पकड़ा नहीं गया। इराक में साल 2008 से 2010 के बीच वो करीब 20 बार सेना के चंगुल में फंसा। एक बार तो उसको अलकायदा का आतंकवादी समझकर खूब धोया गया। उन्हें शक था कि वेंडाइक जासूसी ऑपरेशन चला रहा है। सच क्या था यह कभी साबित नहीं हुआ। मगर इराक में बाल-बाल बचने के बावजूद उसको फर्क नहीं पड़ा। बोलीबिया में सिविल वॉर के दौरान मुंहार गद्दाफी के खिलाफ विद्रोह में लड़ाका बनकर पहुंच गया था।

इसके लिए गद्दाफी सरकार ने उसको त्रिपोली की अबू सलीम जेल में भी डाल दिया। मगर वेंडाइक पर इसका भी कोई असर नहीं हुआ। उसके इरादे और मजबूत ही हुए। साल 2011 में जब कैदियों ने जेल के ताले तोड़ दिए तो वह भी भाग निकला। इसके बाद जब वो सीरिया पहुंचा तो हथियार की जगह कैमरा उठाया और एक डॉक्यूमेंट्री बनाने लगा। कम से कम दिखाया तो ऐसा ही कि वह एलेप्पो में शूटिंग कर रहा है।

मगर इसकी आड़ में वहां भी विद्रोही गुटों को सलाह देता रहा। यहां भी असद शासन ने उसको आतंकी करार दे दिया। साल 2014 में जब इराक में उसके पत्रकार दोस्तों के सिर कलम कर दिए गए तो वेंडाइक ने एक संगठन बनाया सनंस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल। यह संगठन तानाशाही और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वालों को मिलिट्री ट्रेनिंग देने लगा और यह डंके की चोट पर किया गया। वो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता है।

यहां तक कि अपने मिशनंस के लिए क्राउड फंडिंग तक करता है। यूक्रेन में भी वो सेना को रूस के खिलाफ तैयार करता रहा। यहां तक कि वह खुद भी सेना में शामिल हो गया। सनंस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल कहता है कि वो ऐसे लोगों की मदद करता है जो परेशान हैं। उन्हें मुफ्त में सुरक्षा सलाह देता है, ट्रेनिंग देता है। मगर यह शक हमेशा रहा है कि किसकी मदद करनी है और किसके खिलाफ यह ट्रेनिंग देनी है।

ऐसा तय अमेरिकी एजेंसियां करती हैं। इसलिए आरोप लगते रहे हैं कि असल में मैथ्य वेडाइक सीआईए का एसेट है। जाहिर है इसका कोई सबूत नहीं है। हालांकि कहा जाता है कि एक मर्सिनरी होते हुए भी उसे हीरो की तरह इसीलिए पेश किया जाता रहा है क्योंकि उसके कनेक्शंस तगड़े हैं। यहां तक कि उसके ऊपर बनी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म पॉइंट एंड शूट को 2014 में ट्राइबेका फिल्म फेस्टिवल बेस्ट डॉक्यूमेंट्री अवार्ड भी मिल चुका है।

बड़े-बड़े अंग्रेजी अखबार उसके ऊपर आर्टिकल लिख चुके हैं। इसीलिए उसे खतरनाक भी माना जाता है। एक ऐसा शख्स जो जरूरत पड़ने पर अमेरिकी पॉलिसी के हिसाब से जमीन पर एक्शन लेता है और अगर पकड़ा जाए तो फ्रीलांसर बन जाता है। अब भारत को लेकर उसके इरादे क्या थे?

उसके निशाने पर कौन था? भारत में पहले से ही वो कितने पैर जमा चुका था? ये सब सवाल अभी कायम है। सभी आरोपी 11 दिन के लिए हिरासत में है और एनआईए की जांच जारी है। इस जांच में कई जवाब मिलने की उम्मीद बनी हुई है। इस खबर से जुड़े अपडेट्स हम आप तक लाते रहेंगे.

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