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तेल संकट को लेकर ट्रंप ने क्या किया, ईरान ने कसा तंज..

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अमेरिका लगातार अपनी इंटरनेशनल फजीहत करा रहा है क्योंकि ईरान लगातार एक-एक करके उसकी सारी पोल खोल रहा है, मार रहा है, सबूत भी दे रहा है और डोनाल्ड ट्रंप उसे हादसा बताकर अपनी इज्जत बचाने की कोशिश में लगे हैं। लेकिन ईरान मानने वाला नहीं है। जो जख्म अमेरिका ने दिया है उसे भुगतना तो पड़ेगा। इस बार फिर से ईरान ने अमेरिका की खिल्ली उड़ाई है। जिसे सुनने के बाद आप भी हैरान रह जाएंगे। अमेरिका को भिखारी बता दिया है। क्योंकि जो अमेरिका अब तक रूस पर दुनिया भर की पाबंदी लगा रहा था।

तेल व्यापार करने की वजह से यहां तक कि उससे तेल आयात करने वाले देशों जिसमें भारत भी शामिल है उस पर भी टेरिफ लगाकर रूस से तेल ना खरीदने का दबाव बना रहा था। अब वही रूस के तेल के लिए भारत से अमेरिका भीख मांग रहा है। यह दावा ईरान का है। जी हां, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्षी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बड़ा दावा किया है। अमेरिका की खिल्ली उड़ाई है। फजीहत की है।

सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अब्बास अराक्षी का यह पोस्ट देखिए। जिसमें एक पेपर की कटिंग है फाइनेंशियल टाइम्स की। उसमें अंग्रेजी में लिखा है ऑयल विंड फॉल गिव्स रशिया 150 एमए अ डे। यानी रूस के पास कितना तेल है। नीचे यह भी लिखा है कि किसको-किसको तेल पहुंच पा रहा है। क्या कुछ कमियां हैं? यह पूरे आंकड़े इसमें दिए हुए हैं।

और इसी के हवाले से उन्होंने यह बात लिखी है। क्या लिखी है? चलिए वो जानते हैं। उन्होंने लिखा अमेरिका ने महीनों तक भारत पर दबाव डालकर उसे रूस से तेल आयात बंद करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। लेकिन ईरान के साथ सिर्फ दो हफ्तों के युद्ध के बाद अब वाइट हाउस दुनिया से जिसमें भारत भी शामिल है। रूसी कच्चा तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है। यूरोप को लगा था कि ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिका का साथ मिल जाएगा। कितना दयनीय है।

यानी कि खिल्ली भी उड़ाई और फिर अमेरिका को भिखारी भी बता दिया। यहां तक कि यूरोप को भी लपेट दिया। उनको लगा था कि अमेरिका का साथ मिलेगा और अब तेल के लिए तिलतिल तड़प रहे हैं। ईरान ने कह दिया था कि स्टेट ऑफ फार्मूस बंद है। यहां से एक बूंद तेल निकलने नहीं देंगे। निकला तो आग लगा देंगे और लगातार हमले कर रहा है ईरान। और इस हमले को अमेरिका बस हादसा बता रहा है।

आखिर अचानक से स्टेट ऑफ हार्मोस में अमेरिकी के जहाज पर हादसा कैसे हो सकता है? क्या अपनी फजीहत होने से बचा रहे हैं खुद को डोनाल्ड ट्रंप? लेकिन क्या करें? झूठ की उम्र ही कुछ कम होती है और सच सामने आ ही जाता है। तो लगातार फजीहत हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप इस पूरी जंग में फंसते हुए नजर आ रहे हैं। ना निकल पा रहे हैं ना युद्ध ढंग से लड़ पा रहे हैं क्योंकि आर्थिक नुकसान हो रहा है।

इस पूरे युद्ध में अमेरिका को कोई खासा फायदा नहीं मिला। ना वर्चस्व बढ़ा क्योंकि उसे लगा था कि खामन के बाद अब कोई अगला खामन नहीं बनेगा लेकिन ईरान ने अपना सर्वोच्च नेता भी चुन लिया है और उसी सर्वोच्च नेता ने कहा है कि जंग नहीं रुकेगी और लगातार मारेंगे तब तक मारेंगे जब तक पूरा बदला पूरा नहीं हो जाता है। यहां तक कि तीन बड़ी शर्तें भी ईरान ने रख दी है। कहा है कि अगर आपको लगता है कि युद्ध रोकना है तो पहले यह हमारी तीन शर्तें मानो जिसमें कहा गया है कि ईरान की जितनी भी कानूनी प्रक्रिया है

उसे पूरी करनी होगी और इसमें कोई भी हस्तक्षेप अमेरिका नहीं करेगा। इसके साथ ही जितना भी ईरान का युद्ध में खर्च हुआ है उसे अमेरिका को लौटाना पड़ेगा। इसके साथ ही अमेरिका भविष्य में ईरान पर हमला नहीं करेगा। तो यह तीन बड़ी शर्तें भी रख दी हैं। हालांकि अमेरिका यह मानेगा ही कैसे? अगर मानता है तो दुनिया में उसकी साख पर दाग लग जाएगा और अगर नहीं मानता है तो अमेरिका को लंबे समय तक युद्ध में लड़ना पड़ेगा, फंसना पड़ेगा जो अमेरिका के आला अधिकारी नहीं चाहते। वहां के लोग नहीं चाहते क्योंकि आर्थिक नुकसान हो रहा है।

ईरान के जो क्लस्टर ड्रोंस हैं उसकी लागत बहुत कम है। लेकिन जो डिफेंस सिस्टम है अमेरिका का उसकी लागत बहुत ज्यादा है। यानी कि ईरान 10 मार रहा है और अमेरिका एक बार रोक रहा है तो उसको ज्यादा नुकसान हो रहा है। इसी वजह से अमेरिका लगातार अब आर्थिक संकट में फंसता हुआ नजर आ रहा है। अब हमारी अगली रिपोर्ट में देखिए कि किस तरीके से अमेरिका की लगभग हार तय है।

दुश्मन को कभी भी कमजोर या छोटा नहीं समझना चाहिए क्योंकि यह भूल विनाश का कारण बन सकती है। अमेरिका ने यही भूल कर दी है और अब विनाश की दिशा में बढ़ते जा रहा है। एक झूठ छिपाने के लिए 100 झूठ बोले जा रहा है। लेकिन झूठ की भी एक उम्र होती है। सच सामने आ ही जाता है। इस युद्ध में अमेरिका बुरी तरह फंस गया है। ना निकल सकता है ना रह सकता है। निकला तो इंटरनेशनल लेवल की बेइज्जती होगी। युद्ध में लंबा रहा तो आर्थिक संकट की वजह से अमेरिकी देशवासी ट्रंप की थूथू करेंगे। जिसकी सुबुगाहट अभी से तेज हो गई है।

इस जंग को 14 दिन हो गए। अमेरिका कितने दबाव में है, हारे हुए हैं, इसका सबूत सामने आया है। जी हां, डोनाल्ड ट्रंप की आंखों में रूस खटकता था। अमेरिका रूस पर सेंक्शन तो लगाता था, साथ ही उनके साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी दबाव बनाने के लिए टेरिफ बढ़ाता था। जिसकी जद में भारत भी था। लेकिन आज वक्त कुछ ऐसा है कि डोनाल्ड ट्रंप की अकड़ ईरान ने तोड़ दी है। और मजबूरन डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर लगे सभी पाबंदियों को हटाना पड़ा।

क्योंकि 4 सालों में पहली बार कच्चे तेल की कीमतें $ प्रति बैरल को पार कर चुकी है और यह सब ईरान की देन है। अमेरिका को झुकना पड़ा है। झुकाने वाला है ईरान। ट्रंप ने मंजूरी नहीं दी बल्कि यह मजबूरी है क्योंकि उनके पास अब कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है। अमेरिका ने कहा कि यह खरीदी सिर्फ समुद्र में फंसे जहाजों से तेल खरीदने के लिए होगी। इससे रूस को फायदा होगा नहीं होगा वह अलग बात है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का घमंड चूरचूर हुआ है।

यह साफ है। क्योंकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोंस को बंद करने के बाद ईरान ने साफ कहा था कि तेल की एक बूंद भी इस रास्ते से नहीं निकल पाएगी। और निकलने की कोशिश की तो आग लगा देंगे। और ऐसा हुआ भी। कई जहाजों को फूंक दिया गया। अब फिलहाल इस खबर पर जो भी राय है कमेंट करके जरूर बताएं। बने रहिए लाइव हिंदुस्तान के साथ।

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