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ईरान के बाद किम जोंग उन टारगेट पर? इससे पूरी दिनिया को इस बात का खतरा..

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दुनिया इस वक्त एक बहुत बड़े ग्लोबल क्राइसिस से गुजर रही है। एक तरफ अमेरिकी मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ फुल स्केल जंग लड़ रहा है। मिसाइलें दागी जा रही है और तनाव चरम पर है। लेकिन इसी बीच अमेरिका ने दुनिया के दूसरे कोने में एक और बड़ा पंगा ले लिया है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका एक साथ दो महा युद्ध लड़ने की तैयारी कर रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अमेरिकी सेना की एक बहुत बड़ी और पावरफुल टुकड़ी अचानक साउथ कोरिया पहुंच चुकी है

और वहां उन्होंने एक बड़े मिलिट्री ड्रिल की शुरुआत कर दी है। इस मिलिट्री एक्शन ने नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन का पारा हाई कर दिया है। किम जोंग उन की बेहद पावरफुल बहन किम यो जोंग ने अमेरिका को सीधी और खुली चेतावनी दे डाली है। उन्होंने कहा कि इस हफ्ते शुरू हुए अमेरिका और साउथ कोरिया के ये जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज [संगीत] पूरी तरह से उकसाने वाले और आक्रामक युद्ध अभ्यास है।

नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने साफ कर दिया है कि अमेरिका की इस हरकत से पूरे रीजन की स्टेबिलिटी को बड़ा और खतरनाक नुकसान पहुंचेगा। अब जरा अमेरिका के इस मिलिट्री ड्रिल का स्केल और इसकी टाइमिंग समझिए। इसे फ्रीडम शील्ड का नाम दिया गया है। किम जो योंग ने अपने कड़े बयान में साफ कहा है कि हर [संगीत] साल होने वाली यह एक्सरसाइज दिखाती है कि अमेरिका और साउथ कोरिया की नीतियां हमेशा से नॉर्थ कोरिया के प्रति दुश्मनी वाली रही है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस बड़ी मिलिट्री ड्रिल में अमेरिका और साउथ कोरिया के 18,000 से ज्यादा सैनिक पूरी ताकत के साथ शामिल है और यह कोई आम मिलिट्री एक्सरसाइज नहीं है। यह ड्रिल दिन और रात लगातार 24ों घंटे चल रही है। नॉर्थ कोरिया की बॉर्डर के पास जमीन, समंदर, हवा, स्पेस और यहां तक कि साइबर स्पेस के आसपास यह कॉम्बैट ड्रिल की जा रही है।

नॉर्थ कोरिया इसे अपने खिलाफ एक सीधा मिलिट्री थ्रेट और युद्ध की तैयारी मान रहा है। लेकिन इस पूरे विवाद पर अमेरिका और साउथ कोरिया का स्टैंड बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि 9 मार्च से 19 मार्च तक चलने वाली यह मेगा ट्रेन पूरी तरह से डिफेंसिव यानी रक्षात्मक है। इसका असली मकसद नॉर्थ कोरिया के बढ़ते परमाणु हथियारों के खतरे से निपटना होगा। इसके पीछे साउथ कोरिया का एक बहुत बड़ा मास्टर प्लान भी छिपा है। दरअसल दोनों देशों के मिलिट्री अधिकारी ये ड्रिल इसलिए भी कर रहे हैं

ताकि युद्ध के समय अमेरिकी सैनिक कंट्रोल को आसानी से साउथ कोरिया को सौंपा जा सके। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जेजे मयंग का इस मामले में एकदम साफ विज़न है। वो चाहते हैं कि 2030 में उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले ही अमेरिका से इस पावरफुल मिलिट्री कमांड का ट्रांसफर हर हाल में पूरा हो जाए। गौर करने वाली बात यह है कि यह पूरी जिओपॉलिटिकल टेंशन ऐसे वक्त में हो रही है

जब कोरियाई प्रायद्वीप में हालात पहले से ही बारूद के एक बड़े ढेर पर बैठे हुए हैं। आपको याद होगा कि करीब 1 महीने पहले ही किम जोंग यून ने अपनी रूलिंग पार्टी की एक अहम मीटिंग में दुनिया को खुलेआम एक बड़ा अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने ऐलान किया था कि नॉर्थ कोरिया अपने न्यूक्लियर हथियारों के जखीरे को और भी ज्यादा तेजी से बढ़ाएगा और अपने देश के मिलिट्री पावर को नेक्स्ट लेवल पर ले जाएगा।

अब एक तरफ किम जॉन यूनन का परमाणु हथियारों का खौफनाक जखीरा है और दूसरी तरफ 18,000 सैनिकों के साथ अमेरिका का शो ऑफ स्टेट। अगर मिडिल ईस्ट के बाद इस कोरियाई रीजन में भी कोई चिंगारी भड़कती है तो दुनिया को एक साथ दो-दो ग्लोबल वॉर का सामना करना पड़ेगा जो ग्लोबल सिस्टम और इकोनमी को पूरी तरह से तबाह कर सकता है

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